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Saturday, May 29, 2021

बिजेन्द्र अहीर की ग़ज़ल

कवि - बिजेन्द्र अहीर
जिला -कोरिया,छ.ग.
  विधा- ग़ज़ल
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 उसका  ही भाग्य उदय होता ।
 जिसके मन दृढ़ निश्चय होता ।

  संवेदना   पास   उसके   ही ।
  वक्ष  जिसके  सहृदय  होता ।।

 जो कुछ  बात न हो भारत में ।
 फिर क्यों मुकुट हिमालय होता

 विधान यह शाश्वत व सनातन ।
  प्रथम  सृष्टि  बाद प्रलय होता ।।

  पी ले जो लोक निमित्त गरल ।
  जग  में  वही  मृत्युंजय होता ।।

  ढूंढना  छोड़ो  हर   ऋतु  इसे ।
  मधुमास मध्य किसलय होता ।।

  हो  छोटा  बड़ा  या  जैसा भी ।
 दिव्य धाम सा निज निलय होता।।

  सब  ही  में  है  उसकी  कमान ।
  कुछ  भी  यहां न असमय होता ।।

             -- बिजेन्द्र अहीर
                ग्राम - करजी, कोरिया

Monday, May 24, 2021

बिजेन्द्र अहीर के दोहे- जीवन

रचनाकार- बिजेन्द्र अहीर
जिला- कोरिया, छ.ग.
विषय- जीवन
विधा- दोहा
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यदि  है  जीतना हमको, इस जीवन की जंग।
इसके हर पल क्षण निमिष, आओ भरे उमंग।।

 संचय  करो अकूत धन, लाख बढ़ाओ कोष।
जीवन उसका  ही सुखी, जिसके मन संतोष।।

 पार उतरना है मनुज, जीवन जलधि अथाह।
 सार यह है प्रथम बनो, आप कुशल मल्लाह।।

 करिए उसके बाद फिर, सब सपना साकार।
 हो जीवन प्रतिकूल जो, उसका हो प्रतिकार।।

 जीवन बगिया के पुष्प, विविध और बहुरंग।
 इनको  चले  सहेजने, हम  अपनों  के  संग।।

                   -- बिजेन्द्र अहीर

Friday, April 16, 2021

बिजेन्द्र अहीर की रचना- जहाज़

नाम- बिजेन्द्र अहीर
जिला- कोरिया,छ.ग.
विषय- जहाज
विधा- दोहा
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कर्म  तेरी  नाव पथिक, कर्म  तेरा  जहाज।
जो हो जाना पार यदि, कर ले अच्छे काज।।

कर्म के इस जहाज पर, जो भी होत सवार।
ज्ञान कौशल सत्य सदा, मिल बनते पतवार।।

जीवन जलधि अपार में, देता तन मन झोंक।
उसका  ही  सुधरे यहाँ, लोक और परलोक।।

भव  सागर  गहरा  बड़ा, उतना  ही  विस्तार।
मनुज करे जो छल कपट, वह अटका मझधार।।

जो  भी  खेवे  नाव  यह, लहरों  के  विपरीत।
होती थकन अवश्य पर, फिर भी उसकी जीत।।

उसका  ही  जहाज  बड़ा, वह  ही  खेवनहार।।
भगवन नाम सुमिरन कर, थाह ले सिंधु अपार।।
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Monday, February 15, 2021

बिजेन्द्र अहीर की रचना- बसंत

कवि- बिजेन्द्र अहीर
जिला- कोरिया, छत्तीसगढ़
विषय- बसन्त
विधा-  गीत
**********************
कलियांँ खिलने लगीं फूल महकने लगे
 जब से आया बसंत, सब बहकने लगे
 याद करके अपने प्रियतम को 
अंग-अंग प्रियतमा के फड़कने लगे


 जब से सर्दी गई, ऋतुराज आ गया
 कलियों को छेड़ने का भंवरे को अंदाज आ गया
 रात मस्ती भरी, दिन भी है खुशनुमा
 सबको ललचा रही, कुदरत की सुषमा
 दृश्य यह सारा नैनों से निहार कर
 चेहरे मुरझाए भी यूं दमकने लगे


 अमुवा के डाल पर, गा रही है कोयलिया
 सज गई है सुहागन के जैसी बगिया
 चल रही है पवन मंद-मंद हरसू
 दे रहे हैं सदा, लाल-लाल टेसू
 ऐसे आलम ऐसे मौसम में
 सब के सब दिल जवां यूं दहकने लगे
  
      -बिजेन्द्र अहीर

Tuesday, February 9, 2021

कोरिया से बिजेन्द्र अहीर की ग़ज़ल

नाम- बिजेन्द्र अहीर
जिला- कोरिया, छत्तीसगढ़
विधा-   ग़ज़ल
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 जिसके पास भी यह हुनर है, वह सब पर भारी है
  नजरें मिलाकर बात  करना भी, इक  दमदारी है           

 कोशिश मत करना यारों समझ न पाओगे मुझको
  दोस्तों  से  है  दुश्मनी  मेरी, दुश्मनों  से  यारी  है

 सुविधा और इंतजाम की बात यहांँ,न करिए हुजूर 
 यहांँ आता  आम आदमी, दफ्तर यह सरकारी है

 जमाने  में  बहुत  हैं तिजारत  और  कारोबार
 है जहांँ जज्बातों की कदर, वह दुकान हमारी है

 जतन कुछ भी कर लो, झांक नहीं पाओगे उस पार
 ऐसी- वैसी  नहीं यह, वक्त  की  चहारदीवारी है 

कामयाबी ने आगे बढ़कर, कदम चूमा तब-तब
 तिलक लगाकर माँ ने, जब भी आरती उतारी है

Friday, October 16, 2020

कोरिया से बिजेन्द्र अहीर की रचना- तुम ही तो हो माँ

नाम - बिजेन्द्र अहीर
जिला- कोरिया, छत्तीसगढ़
विधा-   छन्द मुक्त कविता
शीर्षक- "तुम ही तो हो माँ"
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हमारी कला, हमारे ज्ञान में,
हमारे गर्व, हमारे अभिमान में।
हमारे हर एक कार्य अनुभव में, प्रतिबिम्ब तुम्हारा,
तुम ही तो हो माँ,अपनी प्रत्येक संतान में।


तन-मन के सुन्दर विन्यास में,
युगल नयन ज्योति- प्रकाश में।
मुखरित हो स्वयं, कर देती हो हमें प्रभावशील,
तुम ही तो हो माँ, हमारे आत्मविश्वास में।


हमारे सलीके में, हमारे ढंग में,
जीवन के एक-एक रंग में।
कभी इस रूप, कभी उस रूप,
तुम ही तो हो माँ, सदा हमारे संग में।


हमारे चिंतन में, हमारे संस्कार में,
दिनचर्या में और लोकाचार में।
हमारा अलग से कोई अस्तित्व कहाँ,
तुम ही तो हो माँ, हमारे सद्व्यवहार में।


रहती हो तुम दूर कहीं,नील-व्योम मध्य में,
रखा है फिर भी हमें, सदा अपने सानिध्य में।
आह निकलती है जब भी, तुम्हें पुकारते हैं,
तुम ही तो हो माँ, हमारे इष्ट-आराध्य में।

तुम ही तो हो माँ,  तुम ही तो हो माँ।।

                -बिजेन्द्र अहीर


Monday, October 5, 2020

बिजेन्द्र अहीर की रचना- कहानी

नाम- बिजेन्द्र अहीर
जिला- कोरिया, छत्तीसगढ़
विधा-  छंद मुक्त कविता
*********************
बस यही किस्सा मेरी यही कहानी है। 
अपनी फितरत में नहीं बेईमानी है । 

जरूरतमंदों की जरूरत बन जाना, 
 यह आदत अपनी बरसों पुरानी है। 

 बाहर  नहीं आ पाता  यह हुनर है मेरा
 इन आंखों में  वरना आप से अधिक पानी है । 

 कोई बड़ी दुश्मनी और अदावत नहीं 
उसके साथ मेरी जंग सिर्फ जुबानी है। 

जरा इंतजार फिर पूरा हो जाएगा 
मेरा ख्वाब जो बेहद आसमानी है। 

 ऊपर से वेश मैं जैसा भी बना लूं । 
मेरी रगों में खून हिंदुस्तानी है । 

माफ कर देना मुझको अपना जानकर, 
 मेरी जानिब से अगर गलत बयानी है। 

                - बिजेन्द्र अहीर

Monday, September 21, 2020

बिजेन्द्र अहीर की रचना- नदी

नाम- बिजेन्द्र अहीर
   पता- कोरिया, छत्तीसगढ़
   विधा-छंद मुक्त कविता
   विषय- नदी
   शीर्षक- यात्रा नदी की
*************************

      मैं नदी, मैं सलिला
    पावन गाथा, सुन्दर लीला

       मैं नदी, मैं प्रवाहिनी
     सर्व जगत, जीवनदायिनी

       मैं नदी,  मैं नद
  चलती निरंतर, चौमास या शीत- शरद

       मैं नदी, मैं तनुजा
      करता जग, देवी तुल्य पूजा

       मैं नदी, मैं जलमाला
     मेरे तट, देवस्थल और शिवाला

       मैं नदी, मैं तटिनी
     हरी-भरी, मुझसे अवनी

       मैं नदी,मैं तट
    आश्रित मुझ पर, अनगिनत बसाहट

       मैं नदी, मैं निर्झरिणी
     आद्योपान्त, परोपकारिणी

       मैं नदी, मैं सरिता
     अमृतधारा सिखाती, जीवन संहिता

      मैं नदी, मैं तरंगिणी
     सागर विशाल की, मैं संगिनी

            - बिजेन्द्र अहीर

Saturday, September 19, 2020

बिजेन्द्र अहीर की रचना- सड़क

नाम- बिजेन्द्र अहीर
पता- कोरिया, छत्तीसगढ़
विधा- छन्द मुक्त कविता
विषय- सडक़
शीर्षक- गाथा सडक़ की
*************************
 हे पथिक!मैं सड़क हूं, कुरूप और कुरंग ।
 समझना जो हो मुझे ,चलो मेरे संग       ।। 

 कैसी मेरी संरचना? कैसी मेरी बनावट?
 मिट्टी पत्थर डामर की, है मुझमें मिलावट ।।

 स्वभाव नितांत मेरा ,निश्चल, निष्पक्ष,निस्वार्थ ।
 एक कर्तव्य एक धर्म, परमार्थ, परमार्थ, परमार्थ ।।

 कहीं छोटी सी, कहीं अति विस्तार में हूं ।
 निश्चित ही महत्वपूर्ण, इस बड़े संसार में हूं ।।

 जुड़ता मुझसे शहर-शहर, जुड़ता गांव- गांव ।
 चलता कोई लेकर सवारी, कोई अपने पांव ।।

 गंतव्य तक जाने का, मैं ही सुलभ माध्यम ।
 हो मानव मात्र या, वस्तु भारी भरकम     ।।

 सरल और संभव होता, मुझसे आवागमन ।
 चाहो तो इस कार्य निमित्त, कर लो मुझको नमन ।।

 अच्छे स्वास्थ्य में अपने, सबको आनंद दायक हूं ।
 अन्यथा जग विदित है, कितनी कष्ट कारक हूं   ।।

 नित्य प्रति रखना, मेरा रखरखाव ।
 दे सकती हूं वरना, तुमको गहरे घाव ।।

 मुझ पर चलने के हैं, कुछ एक नियम ।
मानता न जब कोई, आ जाते हैं यम  ।।

इतिहास के पन्नों पर, मान-सम्मान मेरा भी है ।
 जी हां! जगतोत्थान में, अल्प योगदान मेरा भी है ।।

                     -बिजेन्द्र अहीर

Tuesday, July 28, 2020

कोरिया से बिजेन्द्र अहीर की रचना- नदी

नाम- बिजेन्द्र अहीर
जिला- कोरिया,छत्तीसगढ़
विधा- सायली
शीर्षक- नदी
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                नदी,
         सरिता, निर्झरिणी
        तुम्हारे सुन्दर नाम
          कहलाती तुम
          जीवनदायिनी

             शीतल
         जल तुम्हारा
        कल-कल की
           मधुर धुन
            सुनाता



            धारा 
    तुम्हारी सिखाती
   निरंतर चलना हमें
          हो तुम
       प्रेरणास्रोत

           रौद्र 
        रूप भी
   यदा-कदा दिखता
      जग होता
       भयातुर

       मिलकर
      जलधि से
      पा लेती हो 
    अंततः अपना
         लक्ष्य

                 - बिजेन्द्र अहीर

Thursday, July 9, 2020

कोरिया से बिजेन्द्र अहीर की रचना

नाम- बिजेन्द्र अहीर
जिला- कोरिया, छत्तीसगढ़
विधा- गीत (भक्ति)
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 कल कल जब तू बहती है जीवन मिलता है प्राणियों को
 कर ले जो आचमन तेरा तो मुक्ति मिलती है पापियों को    
       तू पालनहार है तू ही है खेवईया
 जय जय जय सुर सरिता जय हो जय गंगा मैया

महिमा न जाए तेरी बखानी
 पावन है गंगे मां तू और तेरा पानी


 बनके गंगा मैया तू धरती पर बहती
 पाताल लोक में तू है प्रभावती 
और गगन में तू मंदाकिनी
 पावन है गंगे मां तू और तेरा पानी
 महिमा न जाए तेरी बखानी
पावन है गंगे मां तू और तेरा पानी

यश तेरा गावें मां शेष और सारद
 पाकर तुझको धन्य है यह भारत
तू फलदायनी तू पापनाशिनी
पावन है गंगे मां तू और तेरा पानी
 महिमा ना जाए तेरी बखानी
पावन है गंगे मां तू और तेरा पानी

                    बिजेन्द्र अहीर

Monday, July 6, 2020

कोरिया से बिजेन्द्र अहीर की रचना- सावन

नाम- बिजेन्द्र अहीर 
जिला-कोरिया, छत्तीसगढ़
विधा - गीत
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 तन मन भीगाएंगे इस बार सावन में
 बूंदों संग गाएंगे इस बार सावन में

घूमड़- घूमड़ जब छाएगी बदरा 
नाच उठेगा मनका मयूरा
 प्यास बुझेगी धरती मां की
 आस जगेगी सारे जहां की
 खुशियां उगाएंगे इस बार सावन में

 तन मन भीगाएंगे इस बार सावन में
 बूंदों संग गाएंगे इस बार सावन में

बरसेगी जब बरखा रानी
इतराएगी नदिया दीवानी
शोर मचाएगी पूरवइया
छलक उठेंगे ताल तलइया
उत्सव मनाएंगे इस बार सावन में

 तन मन भीगाएंगे इस बार सावन में
बूंदों संग गाएंगे इस बार सावन में
       
                    - बिजेन्द्र अहीर

Saturday, June 20, 2020

कोरिया से बिजेन्द्र अहीर की रचना- चीन

नाम- बिजेन्द्र अहीर
जिला- कोरिया, छ.ग.
विधा- वर्ण पिरामिड
शीर्षक- चीन की करतूत
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         रे 
       चीन
      जुर्म है
    ये संगीन
   तू न सुधरा
   समय रहते  
 अब पश्ताएग तू

               -बिजेन्द्र अहीर

Friday, June 12, 2020

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से बिजेन्द्र अहीर की रचना- मेरे जीवन साथी

नाम - बिजेन्द्र अहीर
     जिला- कोरिया 
     विधा- सायली
     शीर्षक - मेरे जीवन साथी
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                 मेरे 
          जीवन साथी, 
           तुम हो खूब, 
            रहना सदा
                साथ।

                दिल 
           तुम्हें पाकर, 
           बाग-बाग है, 
            जीवन भी
             सुगंधित।

              खुशहाल 
            जिन्दगी की, 
         है मुझको तलब,
             एक तुम्हारे
                 संग।

               आओ 
          मिलकर दोनों, 
         एक सपना देखें, 
           सतरंगी और 
               सुहाना।

                जरा 
          दिखाओ मुझे, 
       तुम्हारे नयन-दर्पण,
              इनमें है 
              जिन्दगी।

                   - बिजेन्द्र अहीर

Tuesday, June 2, 2020

छत्तीसगढ़ के कोरिया से बिजेन्द्र अहीर की रचना- तुम आओ तो सही

नाम- बिजेन्द्र अहीर
जिला- कोरिया,छत्तीसगढ़
विधा- कविता
शीर्षक- "तुम आओ तो सही"
********************************************

ले आएंगे अपनी खुशियाँ, धरती से अंबर से
देखेंगे एक दूसरे को, एक दूजे की नजर से
            तुम आओ तो सही ।।

एक दूसरे के दिल में, हम घर बनाएंगे
अपनी इस प्रेम गाथा को, अमर बनाएंगे
            तुम आओ तो सही ।।

वो प्यार, वो इकरार, वो रूठना, वो मनाना
तिनका-तिनका जोड़ के, बनाएंगे आशियाना
            तुम आओ तो सही ।।

हम होंगे जब, हमराही, हमदम, हमदर्द
तपिश कैसी भी हो,बना लेंगे उसे सर्द
            तुम आओ तो सही ।।

हम ही हम होंगे, हमारे बीच कहाँ कोई गैर
दो जिस्म एक जां बनकर, करेंगे बहारों की सैर 
           तुम आओ तो सही ।। 
    
अपने सपनों,अपने ख्वाबों से, जिन्दगी सुहानी करेंगे
  देखना तुम, सुबह-शाम हम, मनमानी करेंगे
            तुम आओ तो सही ।।

निभाएंगे ऐसे ताकि बन जाएं हम नजीर
मैं तुम्हारा भाग्य कहलाउं, तुम मेरी तकदीर
            तुम आओ तो सही ।।

बस नजदीकियां होंगी, न होगा जरा भी फासला
अकेले-अकेले नहीं, दोनों मिलकर करेंगे हर फैसला
            तुम आओ तो सही ।।

                                   बिजेन्द्र अहीर

Monday, May 18, 2020

छत्तीसगढ़ के कोरिया से बिजेन्द्र अहीर की रचना- मां की महिमा

नाम- बिजेन्द्र अहीर
जिला- कोरिया, छत्तीसगढ़
विधा- कविता
शीर्षक- "मां की महिमा"
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बलिहारी है अपनी सन्तान पर, मां के जैसी कोई बलिदानी नहीं ,
वात्सल्य जितना इसके ह्रदय में, समन्दर में उतना पानी नहीं ।

मां गुरु, मां गोविन्द, मां के जैसी कोई सयानी नहीं,
वात्सल्य जितना इसके ह्रदय में, समन्दर में उतना पानी नहीं।

अनुपम, अद्वितीय संसार में मां, इसकी कोई सानी नहीं,
वात्सल्य जितना इसके ह्रदय में, समन्दर में उतना पानी नहीं।

किसी देश, काल, परिस्थिति में, इतनी कोई सुहानी नहीं
वात्सल्य जितना इसके ह्रदय में, समन्दर में उतना पानी नहीं।

इतना संस्कारित, इतना पावन, इतना कोई ज्ञानी नहीं,
वात्सल्य जितना इसके ह्रदय में, समन्दर में उतना पानी नहीं।

बहुत सरल, बहुत उदार, लेशमात्र भी अभिमानी नहीं,
वात्सल्य जितना इसके ह्रदय में, समन्दर में उतना पानी नहीं।

कितनी निर्मल इसकी गौरव गाथा, कौन कहेगा मां एक अमर कहानी नहीं,
वात्सल्य जितना इसके ह्रदय में, समन्दर में उतना पानी नहीं।

                                     बिजेन्द्र अहीर

Saturday, May 16, 2020

छत्तीसगढ़ के कोरिया से बिजेन्द्र अहीर की ग़ज़ल

नाम-  बिजेन्द्र अहीर
जिला- कोरिया, छत्तीसगढ़
विधा-  ग़ज़ल
--------------------
  तेरी हंसी तेरी खुशी, मेरे लिए मायने रखती है,
 तेरा वजूद तेरी जिंदगी, मेरे लिए मायने रखती है।

 जब  होते हो आंखों से ओझल, तन्हा हो जाता हूं,
 नजर के सामने तेरी मौजूदगी, मेरे लिए मायने रखती है।

 जमाने का क्या है क्या नहीं ,मुझको नहीं खबर,
 भोली सूरत पर यह सादगी, मेरे लिए मायने रखती है।

 जारी रखना इस सिलसिले को, बदलते वक्त के साथ, 
 तेरी वफा की अदायगी, मेरे लिए मायने रखती है।

 सलामत रखना तुम इसे, कयामत की हद तक,
 हमनशीं तेरी पाकिजगी, मेरे लिए मायने रखती है ।।

                                   बिजेन्द्र अहीर

Wednesday, May 13, 2020

छत्तीसगढ़ से बिजेन्द्र अहीर की रचना- मजदूर

नाम-  बिजेन्द्र अहीर
राज्य- छत्तीसगढ़, जिला- कोरिया
शीर्षक- "मैं मजदूर"
मो.  7049391780
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हे ऊपर वाले! बता दे तू क्या है मेरा चारा,
मैं मजदूर, हर जगह मेरा नसीब हारा ।
नाम गिनाउं भला,  मैं किस-किस का,
रेल की पटरी तक ने, मुझको मारा ।।

 मेरी दुर्दशा की कहानी, सदियों पुरानी,
 मेरी आंखों में सपनों की जगह, हमेशा पानी ।
हो वक्त यदि किसी के पास, आय मेरे नजदीक,
 कुछ और नहीं मुझको,अपनी पीड़ा सुनानी ।।

चलायमान बनाया संसार मैंने, खून पसीना गार,
 युगों-युगों से मेरे हिस्से, फिर क्यों घृणा, दुत्कार ।
कितने आयोग, कितने संगठन, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय,
 मिल न सका फिर भी मुझको, मेरा मानव अधिकार।।

 इस जगत के विकास में,मैंने जुड़े नित नए अध्याय,
 मेरे साथ फिर भी सदा,  पक्षपात और अन्याय ।
 रहा हूं सदा हाशिए पर, घिरा हूं अंधेरों से,
देर से ही सही, कोई मुझे भी  रोशनी दिखाए ।।

रुक जाएगी गति संसार की, जिस दिन दूंगा कंधा डाल,
 हो जाएगी धरती बंजर, पड़ जाएगा अकाल ।
 रख सकते हो तो रखो,  मेरे प्रति संवेदनशीलता,
 जग वालों! देखो आने लगा है, मेरे भी रक्त में उबाल ।।

                                 बिजेन्द्र अहीर

छत्तीसगढ़ के कोरिया से बिजेन्द्र अहीर की ग़ज़ल


नाम- बिजेन्द्र अहीर
जिला- कोरिया, छत्तीसगढ़
विधा- ग़ज़ल
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मत पूछो क्या था, क्या मेरा जीवन हो गया, 
सच्चाई के रस्ते मैं, सबका दुश्मन हो गया ।

 घुटन न हो, तो क्या हो, इस दौरे जहां में,
 रिश्तों से बढ़कर यहां, धन हो गया ।

माफ करना,  दिल दुखाया है, जानबूझकर नहीं,
 यह वाकया कमबख्त, इत्तेफाकन हो गया ।

 फर्क क्या पढ़ना , जगजाहिर गर उसका गुनाह है,
 बाइज्जत बरी वह, कानूनन हो गया ।

 न दिल मिले, न उनके ख्यालात ही,
जाने किस शर्त पर,  गठबंधन हो गया ।

 टूट कर बिखर गया होता, गर कोई दूसरा होता,
 मेरा दिल मेरा जिगर है, ये दर्द जिसे सहन हो गया ।

 मैं बस चला, तुम भी जाओ अपने रस्ते,
 आज के लिए समाप्त, मेरा प्रवचन हो गया ।

बहुत खूबसूरत गुजरी, आज की ये महफिल,
 मैंने आप बीती सुनाई, आपका मनोरंजन हो गया ।।

                               बिजेन्द्र अहीर

Tuesday, May 5, 2020

छत्तीसगढ़ से बिजेन्द्र अहीर की रचना- आओ वतन की राह चलें

नाम- बिजेन्द्र अहीर
राज्य- छत्तीसगढ़, जिला- कोरिया
शीर्षक- "आओ वतन की राह चलें"
मो.-  7049391780
----------------------------------------
दिल में लेकर उमंगें , उत्साह चलें,
आओ वतन की राह चलें।

एहसान बहुत हैं, इस मिट्टी के हम पर,
करने को इसकी ,हम परवाह चलें,
आओ वतन की राह चलें।

 हालात बिगड़ रहे ,शरहदों में, चौराहों में,
भारत माता ने भरी, देखो आह चलें,
आओ वतन की राह चलें।

साजिशें हो रहीं, मुल्क  को तोड़ने की,
इससे पहले, हो यह तबाह चलें,
आओ वतन की राह चलें।

वतन परस्त, जिये मरे जो सरजमीं के वास्ते,
उनके बडे़ भाग्य, दिल से सराह चलें,
आओ वतन की राह चलें।
  
पैगाम भेजा है ये, प्यारे वतन ने,
रस्मे सरफरोशी को,अब निबाह चलें,
आओ वतन की राह चलें।

हित में नहीं भारत के,ये मजहबी सियासत,
मानकर हिमालय की,यह सलाह चलें,
आओ वतन की राह चलें।

सफल न हो पायी है ,अभी आजादी अपने मकसद में,
अय अहले वतन ,देश हो रहा गुमराह चलें,
आओ वतन की राह चलें

साहिल तक पहुंचना है,लेकर देश की कश्ती,
ले हाथों में पतवार ,बनकर हम मल्लाह चलें,
आओ वतन की राह चलें।

                 बिजेन्द्र अहीर

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...