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Thursday, March 11, 2021

मोक्ष पर लक्ष्मण प्रसाद साहू जी की रचना


नाम -लक्ष्मण प्रसाद साहू, 
जिला -दुर्ग 
शीर्षक - मोक्ष  
विधा- छंद मुक्त 

मोक्ष मार्ग ही जीवन का, 
होता है सबसे मनभावन  l
निहारे  राह सभी मानव जन  , 
सबका इसमें आना जाना  ll

मिटाकर सारे प्रपंचों को,     
रचे अस्तित्व कर भावन l
सुप्त मन को जगाये सदा, 
 ह्रदय चाहे हो जाये निर्मल   ll

जाते सब वहाँ ले आस  , 
अंतस तम , छोड़ जरा   l
आगे बढ़  तोड़ भव बंधन , 
महके हर पल तन मन  ll

निज प्राण प्रश्रय हो जाये हम , 
ध्यान करें उस असीम तत्व का l
 मिलकर करें वरण हम उनका  , 
मोक्ष साक्षी हो हम सब का ll

Monday, March 1, 2021

लक्ष्मण प्रसाद साहू की रचना- कानन

नाम -लक्ष्मण प्रसाद साहू, 
जिला -दुर्ग 
शीर्षक - कानन 
विधा- गीत (16, 16)

होता प्रतीक ये जीवन का, 
देख अति सुन्दर री कानन  l
निहारे  राह आगंतुक  का, 
कब हो जाये किसका आवन   ll

मिटाकर दुखो को भरे प्राण,    
सुवासित अस्तित्व कर भावन l
सुप्त मन को झकझोरे सदा, 
 ह्रदय पीड़ा ले करे पावन  ll

जाते सब यहाँ  मत अब उदास , 
अंतस तम को, मन बंध साधन  l
पीछे छिपी शुचि अवधारणा, 
महके जैसे जगती आँगन ll

निज मलीनता का  करो अंत, 
ध्यायें सुपथ  हम भगायें  रावन l
 मिलकर करें वरण हम  इसका , 
समाज, राष्ट्र हो मन भावन ll

Wednesday, February 10, 2021

लक्ष्मण प्रसाद साहू की रचना- हे गुलाब

नाम -लक्ष्मण प्रसाद साहू
जिला -दुर्ग (छ ग )
विषय - हे गुलाब !
विधा - छंदमुक्त 

गुलाब रंग बिरंगे  सुघर लख , 
हर तन मन को करे प्रफुल्लित l
छाया उपवन, हर घर सुलभ, 
  वातावरण में घुला, मिला हुआ, 
तेरी बातें , मस्त मस्त, मन मस्त  l

नही तनिक संदेह इसमें अब,
 हर जर्रा तेरी खुशबू से आपूरित l
सारे जहाँ में फल फूल रहें, 
कारीगरी दुनिया की अजब गजब, 
मोहब्बत का पैगाम देता प्रखर  l

संशय  की कोई बात नही ,
 धरा में एक सौगात है गुलाब l
 पास में इसके तनिक जाकर देखो , 
छवि सहज़ मन भाये  महज, 
हे गुलाब ! तेरा रूप सलोना मनहरण  l

Tuesday, February 9, 2021

लक्ष्मण प्रसाद साहू कृत आलेख- अखबार

नाम -लक्ष्मण प्रसाद साहू,
जिला -दुर्ग (छ ग )
विषय - अख़बार की कीमत
विधा -आलेख 
 हम सभी यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि पूरी दुनिया अपनी एक स्वतःगति से चलायमान है जिसके  क्रियाकलापों के बारे में अवगत कराने वाले या तो दूरदर्शन है या फिर अख़बार l निश्चित रूप से हम सभी के घर इसका आगमन होता है सुबह सुबह जिसमें पिछले 24 घंटों में हुई आसपास, देश दुनिया और हमारे समाज की खबर होती है l धीरे धीरे उसमें लिखी हुई समाचारों से हम रूबरू होते हैं और हम समस्त घटनाओं का आंकलन करने लग जाते हैं l अख़बार प्रतिदिन हमारे साथ होते  हैं और हमें बताते हैं कि विभिन्न घटनाएं हुई और उनका प्रभाव हम पर पड़ती हैं प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से l ऐसा कोई भी व्यक्ति नही जो इसकी कीमत का आंकलन करे क्योंकि मन की थोड़ी सी ख़ुशी के सामने किसी की भी वस्तु की कोई औकात नही होती l हम चाह कर भी इसके किसी भी योगदान को नही नाप तौल सकते या कीमत लगा सकते हैं l अख़बार निस्सन्देह एक ऐसा सेवक है जिसके योगदान के बदले हम कोई भी कीमत नही  चुका सकते l अख़बार एक उच्च कोटी का माध्यम है समाज मे चेतना फैलाने के लिये l

Wednesday, February 3, 2021

दुर्ग से लक्ष्मण प्रसाद साहू कृत आलेख- इम्तिहान

नाम -लक्ष्मण प्रसाद साहू,
 जिला -दुर्ग
विषय -इम्तिहान
विधा -आलेख  
      यह एक ऐसा मापक है जिसके बगैर किसी का भी जीवन  बेमतलब है l जाहिर है सामान्य चीजों को देखने का हम सब का एक नज़रिया होता है और किसी विशेष दृष्टिकोण की ख्वाहिश होना तभी हो पायेगा जब वस्तु या व्यक्ति विशेष स्थिति से गुजरे अथवा उसे उन परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा जिसके बिना आगे का मार्ग प्रशस्त हो ही नही सकता l
       इम्तिहान के भय से अच्छे अच्छे लोग कांपते हैं l मानव जीवन जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त सर्वत्र इसी प्रक्रिया के अधीन होती है और हर क्षण अपने आपमें कुछ न कुछ दे ही जाता है l जो जितना अधिक इसके सानिध्य में आता है वह उतना ही चमकता जाता है और जीवन के हर क्षेत्र में परचम लहराता है l चाहे या अनचाहे हम सभी को इसका शुक्रगुजार होना चाहिए क्योंकि यह हमें जीने की सीख देता है तो अनेक मोड़ों पर उसकी  सच्चाईयों से रूबरू कराने का काम करता है l तो आईये इसका हम सब स्वागत करें और जीवन कला प्रखर प्रशिक्षक के रूप मे इसको स्वीकार करें l

Tuesday, February 2, 2021

लक्ष्मण प्रसाद साहू कृत आलेख- पूर्वाग्रह

नाम -लक्ष्मण प्रसाद साहू 
जिला -दुर्ग 
विषय -पूर्वाग्रह, 
विधा -आलेख
            पूरी दुनिया में  अपनी एक पहचान बनाना और उसके एवज में केवल इतना ही उम्मीद करना कि  मानवता संरक्षित हो, उसकी धारा  अजस्त्र, अबाधित हो और यह संभव तभी होगा जब हर मन, मस्तिष्क पूर्वाग्रह से मुक्त होगा क्योंकि मानसिक विकलांग होने की निशानी सर्वत्र देखने की मिलता ही है l समाज की अपनी एक व्यवस्था है जिसके दायरे में ही सारे प्रयास किये जाते हैं और उसके इस बनाये प्रबंध तत्र में घुसपैठ करता है वह दोषी बन जाता है l 
               सब इस बात को स्वीकार कीजिये कि पूर्वाग्रह से अलग होकर कोई रह भी नही सकते l जिस प्रकार सभी लोग किसी व्यक्ति के होने का आंकलन उसके किये गये कार्यों या कर रहे कार्यों से करते हैं और इसी परिपाटी का निर्वहन करते हुए अनवरत एक प्रक्रिया शुरू हो जाती हैl पूर्वाग्रह का सबसे बड़ा फायदा यह  होता है कि कभी कभी बहुत बड़े बड़े काम आसानी से हो जाते हैं क्योंकि हम जिनका आंकलन आदर्श के रूप में करते हैं वो वैसे ही पाए जाते हैं परन्तु कभी कभी इसका दुष्परिणाम यह होता है कि हम अच्छे लोगों के बारे में बुरा और बुरे लोगों के बारे में अच्छा सोंच लेते हैं l कुल मिलाकर वर्तमान उपलब्ध क्रियाकलाप से किसी का भी आंकलन करेंगे तो सर्व मंगलकारी होगा l

Saturday, January 30, 2021

लक्ष्मण प्रसाद साहू की रचना- बसंत

नाम -लक्ष्मण प्रसाद साहू 
जिला -दुर्ग (छ.ग. )
विषय -बसंत
विधा -स्वतंत्र 

देखो बसंत एक संत सौम्य सा आया,
 सुख देता हर मन को नव गीत गाया l
 वन उपवन सब कुछ सुवासित  पाया,
 हरियाली चहुँ ओर आच्छादित  लाया, 
ऋतुराज बसंत हर मन में है छाया ll

ईश्वर देकर ऋतुराज बसंत साकार , 
मानव जीवन को दिया बड़ा उपहार l
मन में हिलोरें एक नवीनता प्रचार, 
साथी मिले उन्हे जो ढूढ़ते प्यार, 
ऋतुराज बसंत पहनाये सबको हर ll

 जिनके साथी आसपास हो आधार, 
 मधुर सम्बन्ध हो बसंत प्राण आधार  l 
नव लय, किसलय, नव पत्ते बहार, 
बौर आम का, परसा फुले भरमार, 
ऋतुराज बसंत करें बुराई संहार ll

Friday, January 29, 2021

लक्ष्मण प्रसाद साहू कृत आलेख- भूख

नाम -लक्ष्मण प्रसाद साहू 
जिला -दुर्ग (छ ग )
विधा  - आलेख 
विषय  -भूख

सृष्टि क्रम में मानव जीवन के उद्भव के पश्चात् उसके अस्तित्व को बनाये रखने के लिये उसके ही विभिन्न अंगों की सुरक्षा अन्तर्निहित उदर से सम्बंधित है l उदर पोषण जितना अच्छे से होगा मन मष्तिष्क सभी चलायमान होंगे l आज पूरे संसार को हम दृष्टिगत करें तो एक बात साफ है कि अच्छे बुरे समस्त कार्यों के पीछे कहीं न कहीं पेट का ही हाथ है l यदि किसी के पास बहुत ज्यादा है, अघाया हुआ है तो और भूखा है तो दोनों ही स्थितियों में सभी एक विचित्र स्थिति को जन्म देते हैं. अतिशय अवस्था दोनो ही घटनाओं की एक असमंजस की चेष्टा को जन्म देती है l भूख ने ही समस्त खा सकने वाली वस्तुओं का अविष्कार किया है क्योंकि वस्तु स्थिति के अनुसार, बदलते परिप्रेक्ष्य में हम सभी खाद्यान्न की व्यवस्था करते हैं l भूख को मिटाने के साथ अन्न का उपयोग दूसरों के भूख को मिटाने का  कार्य किया जाना चाहिए l भूख अनेक प्रकार की होती है l पेट के अलावा अनेक प्रकार के भूख हो सकते हैं जिनका प्रभाव हम समाजिक जीवन में देख सकते हैं l शारीरिक भूख के अलावा समाज में अनेक प्रकार के भूख हैं जिसके कारण विभिन्न उच्च कोटि और साथ ही साथ निम्न कोटि कि घटनाएं होती हैं l भूख किसी भी वस्तु चाहे वह सुख, भोग, पद, सम्मान, चाह की हो एक सीमा तक ठीक है l सामान्य से विकृत होने पर इसकी कोई अच्छी स्थिति नही होती l

Monday, January 25, 2021

दुर्ग से लक्ष्मण प्रसाद साहू की रचना- गणतंत्र दिवस

नाम - लक्ष्मण प्रसाद साहू 
जिला - दुर्ग (छ.ग.)
विषय -  गणतंत्र दिवस 
विधा  -  स्वतंत्र 

 गणतंत्र दिवस मे कहो 'असतो मा सदगमय', 
 सच ही बनाते हम सबको सदा निर्भय l
बाधा हटे , झटपट न कोई व्याधि  वलय, 
 काल के भाल पढ़ें, गढ़ें पुष्पित निलय, 
पल्लवित  पुष्पित हो क्षुद्र बंध हो विलय l

 गणतंत्र दिवस मे कहो 'तमसो मा ज्योतिर्गमय', 
चुनें सभी शाश्वत सत्य सभ्य शुचि  समय l
कृपा करें सदा श्रेष्ठ चिरंतन शंकर तनय,
प्राप्त करें सदा सौम्य सशक्त सक्षम प्रश्रय, 
करबद्ध प्रार्थना करें सारे यही शाश्वत विनय l

 गणतंत्र दिवस मे कहो 'मृत्योर्मा अमृतं गमय',
जीवन जगमग जले हर कदम हो सुलय  l
परम सत्य से यही मेरा शुचि सत विनय,
रोक देंगे निश्चित हम साथ मिलकर प्रलय, 
 विश्व बंधुत्व मार्ग प्रशस्ति सशक्त  विजय l

Saturday, January 23, 2021

दुर्ग से लक्ष्मण प्रसाद साहू की रचना- सुभाष चंद्र बोस

नाम -लक्ष्मण प्रसाद साहू 
जिला -दुर्ग (छ.ग. )
विषय - सुभाष चंद्र बोस 
विधा -स्वतंत्र 

मातृ भूमि के सच्चे तपी सपूत, 
प्राण पण से रत व्रती साधक l
राह से उखाड़ फेंकते जो बाधक ,
 हे वीर,अदम्य,पथ सृष्टा सुभाष ll

देश के रक्षक, संरक्षक आप,
 काल के भाल पे लिखते भाग्य l 
राष्ट्र जीवन गति बनाये आसान, 
हे वीर अदम्य पथ सृष्टा सुभाष ll 

देश की आन का मान बढ़ाने ,
बने आजाद हिन्द फ़ौज के सूत्रधार  l
हर मुश्किल को वरदान बना गये , 
हे वीर अदम्य पथ सृष्टा सुभाष  ll

Wednesday, January 13, 2021

लक्ष्मण प्रसाद साहू की रचना- किसान

नाम -लक्ष्मण प्रसाद साहू 
जिला -दुर्ग (छ.ग. )
विषय -किसान 
विधा -स्वतंत्र 

भारत भूमि के सच्चे सपूत, 
प्राण पण से लगे हुए सतत l
नाम से जिसका झलके ईमान,
 हे उद्योगी, परिश्रमी आपको नमन किसान ll

भूमि के रक्षक, संरक्षक आप,
 काल के भाल पे लिखते भाग्य l 
राष्ट्र जीवन गति बनाये आसान, 
हे परिश्रमी उद्योगी आपको नमन किसान ll

देश की आन को खेती बढ़ाते,
 उसको संवारते आप बने सूत्रधार  l
हर मुश्किल बन जाते वरदान, 
हे उद्योगी परिश्रमी आपको  नमन किसान ll

Thursday, January 7, 2021

दुर्ग से लक्ष्मण प्रसाद साहू की रचना- अश्क़

नाम -लक्ष्मण प्रसाद साहू 
जिला -दुर्ग 
विषय -अश्क़ 
विधा-स्वतंत्र 

'अश्क़' यूँ ही बहना नही चाहते, 
कुछ बात दिल को
 चुभ जाती है, 
 राहत मिल जाता है 
 पल में इससे,
 रास्ता इसको 
जो मिल जाता है l

 'अश्क़' निकल पड़े तो राह बने, 
 आसान नही बसर 
यहाँ किसी का, 
 ज़िन्दगी ही देती 
सब मान ज्ञान, 
 चल पड़े जो 
कोई भी आगे साध l

'अश्क़' साथी जो बनकर आये, 
मुश्किल कोई बात नही
 सजा समझ लो, 
जो कभी भी
पीड़ा अंतर में, 
फँसी  धँसी 
थकी मांदी सी l

 'अश्क़' बिखर कर बाँटते खुशियाँ ,
 मन उजियाला
 देख रहा तरल, 
मन में देख तरंगें 
उछलते मचलते, 
 अश्क़ साथ लेकर 
चला गया दुख l

Wednesday, January 6, 2021

दुर्ग से लक्ष्मण प्रसाद साहू कृत आलेख- समंदर का किनारा

नाम -लक्ष्मण प्रसाद साहू 
जिला - दुर्ग 
विषय -समंदर का किनारा
विधा -आलेख 

*अभिप्राय- समंदर का किनारा शब्द अपने आप में बहुत कुछ समेटा हुआ होता है क्योंकि इसका अभिप्राय हम अनेक प्रकार से निकाल सकते हैं जिसमें भौतिक एवं   दर्शन तत्व समाहित होते हैं l समंदर के चारो ओर वृत्ताकार रचना एवं किसी भी के लिए दृष्टव्य अर्ध परिधि युक्त संरचना तो बाह्य रूप से हैl
 *भौतिक स्वरुप -इतना तय है कि यही वो जगह है जहाँ जाने को सभी उत्साहित, लालायित एवं गौरवान्वित महसूस करते है. इसका एक पक्ष यह है कि मानवीय दिनचर्या से थकित मानव सुस्ताने को, अपने अंदर नई ऊर्जा के सृजन, संवर्धन एवं विस्तारण के लिए नये ताने बाने बुनता है l यह साक्षी होता है उन समस्त कार्यों के जिन्हे सम्पादित कर लोग इतिहास मे अपना नाम अमर कर गए होते हैं l मन के अशांत कोने यहाँ आने से ऊर्ज्वसित होते हैं एवं किसी भी तरह की व्याधि को मानव दूर कर सकता है. भौतिक जीवन की पूर्णता भी तभी संभव है जब हम सभी कभी न इस ओर उन्मुख हों l 
*दर्शन - समंदर के किनारे लहरों के चट्टानों से टकराने से उसके संघर्ष की गाथा का बयान होता है और लहरें जिस तरह से किनारे को छूती रहती है उससे उसके किनारे से लगाव और प्रेम परलक्षित होता है l

Thursday, December 24, 2020

दुर्ग से लक्ष्मण प्रसाद साहू की रचना- क्रिसमस

नाम -लक्ष्मण प्रसाद साहू 
जिला -दुर्ग 
विषय -क्रिसमस 
विधा-छंदमुक्त                                                                             त्याग प्रभु यीशु का दर्पण है क्रिसमस,
 आओ भगाएं हम सब मन तमस l
 साथ सभी का चाहिए हर कदम पर,
 विश्व पटल की आशा है सार्थक ll

 आवाहन करेंगे प्रभु जी का दें आशीष, 
मन की छुपी अभिलाषा होंगे पूर्ण l
 संतोष मन में छा जायेगा पाने  अभीष्ट , 
आदर्श सोंच होगा सबका संयम चिरंतन ll

मानव कैसे होने चाहिए सीखेंगे आज हम, 
केवल काया गरिमा बखान एक माया जी l 
कहूँ एक बात अब सोचें हम दयासागर, 
निर्भीक मन हो, चेतना समन्वित हो जीवन, 

अराधना करें हम महामानव का अति शुभ,
 विश्व शांति राह संबल साख शाश्वत जतन  l
अमर नाम मानवता के उद्धारक पथ प्रदर्शक, 
समूचे विश्व की चाहत तो शान्ति शांति शांति ll

Saturday, December 19, 2020

दुर्ग से लक्ष्मण प्रसाद साहू की रचना- भूमि

नाम -लक्ष्मण प्रसाद साहू, 
जिला -दुर्ग (छ.ग.), 
विषय -भूमि, 
विधा-स्वतंत्र                                                                               
भूमि हे ! मातृ तत्व सरल , 
दे जीवन हर जीव को l
कर रही है नित अर्थयुक्त ,
 हर तन मन जन को ll

युग चाहे कोई भी आया, 
शांत भाव ही दिखाया तूने l
बनकर साक्षी सुख दुख का,
 अमिट चरित्र चित्रण कर्तृ ll

अब जो है या थे कभी कर्मरत , 
सब की बातें, कैसी भी रातें l
 घटित हुए सीमाओं में तेरे, 
महा धात्री प्रबल प्रत्यक्षा ll

 नही खड़ा हो सके काल भी,
 उसको कभी कोई देखा नही l
 तू  हर पल सब के साथ है, 
 प्रलय रोके अद्भुत ओजस्विता ll

Saturday, November 14, 2020

दुर्ग से लक्ष्मण प्रसाद साहू की रचना- दीपावली

नाम -लक्ष्मण प्रसाद साहू, 
जिला -दुर्ग 
शीर्षक -दीपावली 
विधा-स्वतंत्र

दीपावली प्रतीक है जीवन का, 
प्रकाश, प्रदीप्त, ज्योति प्रखर l
प्रफुल्लित, प्रमुदित,अविरल,  
ऊर्ज्वसित, प्राणयुक्त, अमर  ll

मिटाकर अंध  प्रकाश दे चिरंतन  
सुवासित अस्तित्व करे निरंतर  l
सुप्त मन को झकझोरे, ये मंतर, 
 प्रभाव देखो स्पष्ट दिग्-दिगंतर ll

मनाते त्यौहार दिये  हम जलाते, 
अंतस तम को, बाह्य बंध भगाते l
इसके पीछे छिपी शुचि अवधारणा, 
जगती आँगन को महकाने प्रेरणा ll

हर मलीन क्षण, वीभत्स कृत्य का, 
अंत सुनिश्चित हम करेंगे प्रियवर l
 मिलकर करें आवाहन विराट का, 
स्वस्थ समाज, राष्ट्र,विश्व साकार कर  ll

Friday, October 9, 2020

लक्ष्मण प्रसाद साहू की रचना- गीत खुशी का गा सकें हम

नाम -लक्ष्मण प्रसाद साहू 
     भिलाई (छ. ग. )
शीर्षक -गीत खुशी का गा सकें हम 
विधा -छंद मुक्त 

गीत खुशी के गान करें हम, 
आओ नया  निर्माण करे हम l
स्व की अब पहचान करें हम, 
अंतस तम संधान करें हम ll
 
                    सुख से शोभित जगती सारा, 
                    ये सब ईश की छाया, माया  है l
                   दुःख से क्षुब्ध बंधु जो भी हैं, 
                   पीड़ा उनकी कम करें हम ll

अपने लिए तो जीना ही है, 
पर उपकार की महिमा अप्रतिम l
है भगवान ही बसते इनमे, रमते, 
मोक्ष तो फिर पा ही गए हम ll
  
                    शांति मानव जीवन की सांस है, 
                    संगीत से जीवन मे सरसता l
                    है साहित्य की गरिमा अनूठी, 
                    अध्यात्म विश्व मे प्राण फूंकेगा ll

Tuesday, August 18, 2020

बिलासपुर से लक्ष्मण प्रसाद साहू की रचना- अधूरी ख्वाहिशें

नाम -लक्ष्मण प्रसाद साहू 
जिला -बिलासपुर (छ.ग. )
शीर्षक -अधूरी ख्वाहिशें 
विधा -छंदमुक्त 

मानव की रचना अद्भुत समन्वय, 
ख़ुद ही मीलों  बिना रुके चलना है l
मन की अपनी नित कथा व्यथा  है, 
अधूरी ख्वाहिश को पूरा करना है ll

वैसे तो सब कुछ होता ही जाता है, 
हर मन दिल अपना कुछ रखता है l
संस्कारों के तारों में सुलझे सक्षम, 
अधूरी ख्वाहिश को पूरा करना है ll

सब के निज रास्ते बुलाते अनवरत, 
पाने चलते राही आगे नत मस्तक l
तनिक सी आहट विस्मित करता, 
अधूरी ख्वाहिश को पूरा करना है ll

बस एक सपना सबका सुन्दर मान, 
मानवता पल्लवित पुष्पित हो सदा l
सब सुख दुख के सहभागी बनेंगे, 
अधूरी ख्वाहिश को पूरा करना है ll

Saturday, August 1, 2020

बिलासपुर से लक्ष्मण साहू 'निर्लिप्त ' की रचना- लक्ष्य

नाम -लक्ष्मण साहू 'निर्लिप्त '
जिला -बिलासपुर (छ.ग. )
विधा -छंद मुक्त 
विषय -लक्ष्य (विभावना अलंकार पुट )

सुन बंधु एक बात कहूँ, मैं तुम वो संतान सभी l
माया लक्ष्य या रचना, उसने की संधान अभी ll

              काया बन छाया हैं सुन्दर, 
              मूढ़ मति ये नही बुझते l
              लक्ष्य उनका हम बने खेल, 
              एक दूजे से हम जूझते ll

खोल दिया पट आवरण, भूल भुलैया में सब भटके l
रूप सदा अलग अलग, लक्ष्य   पाने जी अटके  ll

                बच्चे सबके गृह के लक्ष्य,                        
                उनकी घन असीम छाया l  
               टकटकी बांधे सब ही बैठे,                                         
               सब मन को ये खूब भाया ll

Friday, July 31, 2020

बिलासपुर से लक्ष्मण प्रसाद साहू की रचना- मुंशी प्रेमचंद

नाम -लक्ष्मण प्रसाद साहू 
जिला -बिलासपुर (छ.ग.)
विषय -मुंशी प्रेमचंद 
विधा -छंदमुक्त 

भारतभूमि उपवन के, अमोल चन्दन, 
प्रेमचंद जी सुरभित, साहित्य सुमन l
मानव मन की पीड़ा, भुलाते थकन, 
करते हैं आपको, शत -शत नमन ll

वाराणसी धाम, लमही ग्राम वरण, 
जनम लिये चुन, साधे मन तरण l
जागे दीन दुखी, बंधु रमत सघन, 
करते हैं आपको, शत -शत नमन ll

कुप्रथा ग्रसित था,  समाज भ्रामक, 
सुधारे बन कलम, सिपाही साधक l
ऊंच नीच भेद, मिटाते शब्द वचन, 
करते हैं आपको, शत शत नमन ll

सरल सुलभ आम, भाषा रसिक, 
सबके मनमीत , सहृदय पथिक l
हर दिल, मन छुए, स्निग्ध पवन, 
करते हैं आपको, शत शत नमन ll

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...