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Wednesday, July 1, 2020

राजनांदगांव से माधवी गणवीर की रचना- अलख हरि की माया

काव्य संसद
नाम - माधवी  गणवीर
राजनादगांव
विषय - *अलख हरी की माया  कही धूप तो कहीं छाया*

अलख हरि की माया कहीं धूप कहीं छाया,
आज वैभव आया तो अपना पराया सब है भाया।

कल हम लाचार थे अपनों के ही प्यासे थे,
तरस रहे थे प्यार को, पिता ने छोड़ा जब छाए छाया।

नहीं था कोई ठोर ठिकाना,तब दिया मौसी ने सहारा,
अभाव और तंगी ने वक्त की कीमत समझाया।

मेहनत का मोल पाया, जिंदगी ने साथ निभाया,
सुख, संपत्ति,समृद्धि अपार पाया।

आज वक्त के फेर ने कैसा भरमाया,
जिनके लिए कभी तरसते थे उन्होंने बढ़कर गले लगाया।

प्रभु की है यही माया, क्या क्या दिन दिखाया,
अपना पराया सब होता है,जब सुख सम्पदा आया।

अलख हरि की माया कहीं धूप कहीं छाया
आज वैभव है आया तो अपना पराया सब है भाया।

माधवी गणवीर
राजनादगांव

Friday, June 19, 2020

राजनांदगांव से माधवी गणवीर की रचना- वीर शहीद

माधवी गणवीर
राजनादगांव
     *वीर शहीद* 

उमड़ पड़ा है आज पूरा गांव, मोहल्ला, शहर, जब माटी में मिलने आया था,
मोटर कार में नहीं, अपने देश के तिरंगे में लिपटा आया था।
बच्चे,बूढ़े, जवान सबकी जुबा पर नाम, शहीद गणेश राम,
एक मां के लाल ने आज, एक मां के लिए किया विश्राम।
दूर-दूर तक गांव में लोगों का हुजूम समाते नहीं थे छाव में,
मां बहन पिता कलपते थे थमते नहीं थे  पाव जमी में।
मां का दुलारा, परिवार का प्यारा लहू से जिसने लिखी कहानी,
गर्व से दोराएगा भारत शहादत की उसकी यह निशानी।
मां का रो- रो बुरा हाल हुआ,
उसके आंगन का था बूटा,
पत्नी का श्रृंगार चूड़ी,बिंदी, काजल,कंगना छुटा।
थी सैनिको की पूरी फौज, इक्कीस तोपों की सलामी देते,
सीना गर्व से फूला पिता का,वीर पुत्र को सलामी देते।
चली साजो सज्जा से उसकी अंतिम यात्रा जब,
स्वयं मुख्यमंत्री कंधा देकर रो दिए, अंतिम विदा देते वक्त,
छूकर पैर मां के कहा,तेरा लाल अमर हुआ,
जन्म दिया इस पावन धाम में, पूरे देश अमर हुआ।
सब तरफ भारत मां के वीर का परचम लहरा रहा था आज,हर शीश झुके थे सजदे मे, नम आंखों  से सोचू,क्या....  याद रहेगा उसका बलिदान आज के बाद।

माधवी गणवीर
छत्तीसगढ़

Thursday, June 18, 2020

राजनांदगांव से माधवी गणवीर की रचना- हिन्द सेना

माधवी गणवीर
राजनादगांव
  विषय - *हिन्द सेना*

हिन्द सेना
वतन परस्ती पर कुर्बान हो, ऐसा हिन्द  देश हमारा,
सत्य,अहिंसा की ज्योत जलाता हिन्द देश हमारा।

वीरो की भूमि कहाती, गर्व हमारी हिन्द सेना,
जल,थल, वायु सबका अभिमान है हमारी सेना।

शहीदों की शौर्य गाथाओ का पग - पग बढ़ता सम्मान,
मां भारती के लाल कहाए, शूरवीर बने महान।

बलिदानों ने इतिहास रचा हे.. वीर तुम्हें नमन,
यशगान करता भारत,अमर शहीद तुम्हें नमन।

पाक इरादे थे हमारे, नापाक चीनियों का दमन हो,
विश्वास भू - धरा पर खंजर भोखे तुम्हारा पतन हो।
 
राष्ट्र का प्रतीक तिरंगा आज शहादत को नमन करें,
शूरवीर जांबाज सैनिकों को शत-  शत नमन करें।

*माधवी गणवीर*
    छत्तीसगढ़

Tuesday, June 16, 2020

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से माधवी गणवीर की रचना- दीवारों के कान

नाम - माधवी गणवीर
जिला - राजनादगांव
कविता
शीर्षक - दीवारों के भी कान होते है।

ना उदास ना निराश करो मन को, जिंदगी मिली है तो, जिंदादिली से जियो।
सब कहते हैं चांद सा मुखड़ा तेरा, ख्वाब बुना मैंने,सोचा सजते सवरते रहो।
मुंह की खानी पड़ती है अक्सर उन्हें,
अपने मुंह मियां मिट्ठू ना हमेशा  बने रहो।
हर वक्त बजता रहा,कानों में युद्ध का बिगुल,
जाने कब कुच कर जाना हो तैयारी रखो।'
'मुंह में राम बगल में छुरी' इनसे रहिए  सावधान,
'दीवारों के भी कान होते हैं', खुद को समझाते रहो।
तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर बनती है,
जिंदा रहना है तो तकदीर को आजमाते रहो।

माधवी गणवीर

Saturday, June 13, 2020

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से माधवी गणवीर की रचना- साथ

नाम - माधवी गणवीर
जिला - राजनादगांव
विधा - मुक्त छंद
शीर्षक - *तुम्हारा साथ*

तुम्हारा साथ,
महज साथ नहीं,
जीवन जीने का आभास है,
तुम्हारा साथ,
महज साथ नहीं,
आत्मविश्वास से भरा,
सफलता का नाद है।
तुम्हारा सानिध्य,
महज सानिध्य नहीं,
एक तेज,, एक ओज़ से पूर्ण
विरक्त मन की पूर्णता है।
तुम्हारा स्नेह,
महज स्नेह नहीं,
कामयाब जिंदगी का
 हसी मुकाम है।
तुम्हारी चौखट,
महज चौखट
वो जन्नत है,
जहा मै से हमारा का
 स्वाभिमान पूर्ण हुआ।
अब भला कोन है जो न दे
तुम्हे अपना मौन समर्पण।

माधवी गणवीर
राजनादगांव

Friday, June 12, 2020

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से माधवी गणवीर की रचना- नारी

नाम - माधवी गणवीर
जिला - राजनादगांव
शीर्षक - *नारी*


       नारी
     बहुत महान
   कहती दुनियां सारी
       पूजी जाती 
         वेदपुराण

        बचपन
      की गुड़ियां
    रीति नीति संस्कारो 
      पली ससुराल
        चली।

        लाज
      रखना सदा
बढ़ाना सम्मान लड़की
           है याद 
           रखना

         अपनी
        इसी सोच 
     लिए सहती  रही 
         उम्र तमाम 
           गुजारी

           किताबो 
            में पढ़ते
      पढेगी बढेगी रचेगी
         लड़की अपना 
            इतिहास
    
            पढकर
      बनेगी अफसर
   रूठीवादी समाज में
      कहलाती मगर
           अनपढ़

*माधवी गणवीर*
  राजनादगांव

Thursday, June 4, 2020

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से माधवी गणवीर की रचना- आत्मनिर्भर

नाम - माधवी गणवीर
जिला - राजनादगांव
शीर्षक - आत्मनिर्भर

जीना है गर जी भर,
तो रहो हमेशा आत्मनिर्भर,
खुद के पैर जमाए रखो,
ना हो दूसरों पर निर्भर।

देश हो या हो समाज,
कृषि हो या कौशल विकास,
 तकनीकी हो,या सूचना, 
विस्तार हर क्षेत्र में है खुला आकाश।

स्वर्णिम भारत का है आधार,
 विकसित हो भारत सरकार, 
संकल्प हमारा, लक्ष्य हमारा,
कहीं तो सपने लेगा आकार।

देश की मिट्टी मेरा अभिमान,
आत्म निर्भरता से राहें आसान,
असंभव को भी संभव कर दे, 
कर्तव्यनिष्ठता है हमारी शान।

देश की विकट परिस्थिति में,
क्यों ना शपथ ले हम आज, 
आत्मनिर्भर होकर करे 
हम राष्ट्रहित में करे सार्थक काज।

माधवी गणवीर
 राजनादगांव

Wednesday, May 27, 2020

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से माधवी गणवीर की रचना- पर्यावरण

नाम - माधवी गणवीर
जिला - राजनादगांव , 
           छत्तीसगढ़
विधा - कविता
शीर्षक -  *बिगड़ा पर्यावरण*

जंगल,झरने,पर्वत, पहाड़, प्रकृति के सुकुमार है,
पतन हो रहा तेजी से, मानव रूपी दानव ही गुनाहगार है।

जो मुक बने थे सदियों से,बोल पड़े हैं आज,
जंगल - जंगल,झाड़ी -झाड़ी कहां छुपे ये पहरेदार है।

रैन बसेरा लूट लिया, उन बेजुबानो की है आह,
प्रकृति के विनाश का, इंसान ही पहला दावेदार है।

जिस धरती मां के आंचल में तेरा यश गान हुआ
उसी वरण को बे आवरण करता इंसान क्यों बार-बार है।

लहूलुहान है धरती आज चीख - चीख कर कह रही,
हे मानव! अब तो डर,  कर रही  फिज़ा खबरदार है।
अब समय है ले शपथ, ये धरा की संपदा बचाएंगे,
घाव भरे हम धरती मां के, इस पर्यावरण के हम सच्चे पहरेदार हैं।

Tuesday, May 19, 2020

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से माधवी गणवीर की रचना- छु ले प्रखर

नाम - माधवी गणवीर
जिला - राजनादगांव
शीर्षक - छु ले प्रखर
कविता

ज्वाला जो धधक चुकी,
मन की धूल उफन चुकी,
राह के कांटे देख
अक्ष तु, न सिहर, न सिहर,
बढ़कर छू ले प्रखर, छू ले प्रखर।

तम भरा सारा आकाश,
आशा से जागे विश्वास,
दुख रे तु, दम न भर,
नहीं ठहरता कोई पहर, कोई पहर।

अब जागा है जुनून,
अब मिलेगा मुझे सुकून,
वक़्त न कभी ऐसा आया,
कदम न जाए जो ठहर,जो ठहर,
बढ़कर छू ले प्रखर, छु ले प्रखर।

माधवी गणवीर

Thursday, May 14, 2020

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से माधवी गणवीर की रचना- भूख

नाम - माधवी गणवीर
जिला - राजनादगांव
शीर्षक - *भूख*
 

ये भूख की ज्वाला भी क्या क्या नहीं कराती है,
अच्छे भले आदमी को हैवान बना देती हैं।
हर तरफ मची है जंग,दो वक्त के रोटी को
आदमी घर से बेघर हुए दो वक्त की रोटी को।
पेट की ज्वाला फूटे तो, नहीं होता मान अपमान,
बस दो निवाले की जुगत का ही होता सबको भान।
कोई कानून ऐसा क्यों नहीं बनता साहेब,
 उठे तो भूखे हो पर कोई भूखे ना सोने पाए साहेब।
कितने चमत्कारी बाबाओं ने धूल से फूल बना डाले,
पेट की ज्वाला मिटे ऎसे मंत्र क्यो नहीं बनते। 
शर्मसार हो रहा आईना, देख जिंदगी का सच,
कुत्ते और भूखे बच्चे एक ही पत्तल में झपटे तब।
चिराग कभी तो भूख की मजार पर जलाओ,
भूख के विरुद्ध कोई ठोस कदम तो उठाओ।
माधवी गणवीर

Monday, March 30, 2020

छत्तीसगढ़ से माधवी गणवीर की रचना - मां की कृपा

नाम - माधवी गणवीर
राज्य -  छत्तीसगढ़
शीर्षक - मां की कृपा

मां जगदंबा आओ मां भक्तों का उद्धार करो,
सुरसा रूपी कोरोना का धरा से संहार करो ।
मंदिर देवालय में मनोकामनाओं की जोत जलाएं,
आस्था की बाति, श्रद्धा की ज्योत जलाएं।
अष्ट भुजाओं वाली मां,संतान की विपदा हरो,
महामारी से मां हमरे दुख संताप हरो।
नहीं भक्त दूर मां से,घर-घर मां की मूरत है।
मंदिर के पट बंद सही मन में मां की सूरत है।
नवरात्र के नौ दिन हो, भक्ति भाव से पूजन,
मन,वचन, कर्म से मां उभारे सबके जीवन।
आदि स्वरूपा, कष्ट निवारणी, विश्वशांति का वरदान दो,
चंड मुंड की भांति करोना से सबको निजात दो।।
हम हैं मां तेरी संतान हुई जो भूल माफ करो
करोना की महामारी से ना दुनियां को साफ करो।
अबके जीवन दान मिले, तो पुण्य कर्म कर जाएंगे,
 ईष्या, हिंसा  से दूर रहकर मानव धर्म निभाएंगे।
लाखों सर झुके माता, सजदे में इस आशा से
कर अभिनंदन, मुफ्त को संक्रमण,  देश-दुनिया के पाश से।

माधवी गणवीर
डोंगरगांव
राजनादगांव

Friday, February 14, 2020

छत्तीसगढ़ से माधवी गणवीर की रचना- तलाश नहीं

माधवी गणवीर
राज्य - छत्तीसगढ़
गजल - तलाश नहीं

सुख का हर साज तो, मेरे पास नहीं,
पर मेरे साज की भी, तुझको आस नहीं।

पलकों के हिंडोले पर रक्खू चाहत तेरी,
ऐसी चाहत भी तुझको रास नहीं।

चमकेंगे जरूर एक दिन सितारे तुम्हारे भी,
वादों पर मेरे क्या तुमको विश्वास नहीं।
यादों का लिहाफ डाले तनहाई में अक्सर ,
ढूंढता वो तस्वीर,जो मेरे पास नहीं।

अब शाखो के सुर्ख चटकते फूल भी,
लगते क्यों मुझे वो, पलाश नहीं।

तमन्नाओं का जैसे कोई हिसाब नहीं,
अब जीवन में मुझे किसी की तलाश नहीं।


माधवी गणवीर

Thursday, February 6, 2020

छत्तीसगढ़ से माधवी गणवीर की रचना- माधुर्य बसन्त का

नाम - माधवी गणवीर
 राज्य - छत्तीसगढ़
माधुर्य बसन्त का

प्रफुल्लित से वन उपवन,
फूलो की बढ़ती गई चाहत,
नव यौवन का रूप धरकर,
बसन्त के आगमन की है आह्ट।
      नव पल्लव नव श्रृंगार कर
      प्रकृति का रूप है भाया
      धरा ने ओढ़ी धानी चुनर
      छोड़ पुरानी अपनी काया।
पुष्पो की महकी किलकारी
मुस्काई है लता वल्लरी 
आम्र  वृक्ष शिखाग्र पर
फुट चुकी है पुष्प मंजरी।
       कोयल ने तान सुरीला छेड़ा
       तितली ने किया मधुर       रसपान
       मन मयूर सा झूम उठे।   
       जब भ्रमरो ने गाया मधुगान।
इस बसन्त के माधुर्य में
झूम उठे मन मतवाला
भूल कर सकल जगत को
खो जाए तन मन सारा।
  
       माधवीं गणवीर

Wednesday, January 29, 2020

छत्तीसगढ़ से माधवी गणवीर जी की रचना- ऋतुराज

नाम - माधवी गणवीर
  राज्य -  छत्तीसगढ़
ऋतुराज बसंत

मन पुलकित, तन प्रफ्फुलित हो ऋतु बसंत आया है,
फैली महक चहूं दिशा में, ऋतुराज ने महकाया है।

कली कुसुम से महके उपवन, भौरा भी बैराया है,
प्रकृति ने फिर किया श्रृंगार, गीत मिलन के गाया है।

कंद और मकरंद की छटा बिखरी क्यारी - क्यारी,
नव पल्लव, नव पुष्पो ने धरा का मन  हरसाया है।

चमेली, चम्पा, गेंदा ने सौंदर्य अनुपम दिखाया,
अवनी और अम्बर में अपना परचम लहराया है।

योगी, रोगी,निरोगी, तपी  आरोग्य सुख साधे है,
कोयलिया ने तान छेड़ी, कली - कली मुसकाया है।

पहन के धानी चूनर गीत बसंत के गाती "माधवी",
ऋतुराज बसन्त के स्वागत में अबीर गुलाल उड़ाया है।
माधवी गणवीर

Wednesday, January 22, 2020

छत्तीसगढ़ से माधवी गणवीर की रचना- नेक इरादे

नाम - माधवी गणवीर
राज्य - छत्तीसगढ़
कविता - नेक इरादे


सत्य अहिंसा, धैर्य के
मार्ग से हटना नहीं,
वतन पर मर मिटने 
से कभी डरना नहीं।

नेकी बदी के मार्ग
 पर चलते चलते,
जीवन के उद्देश्य से
 कभी भटकना नहीं।

कठिन पथ की राह 
होती नहीं आसान,
संकल्पो से मुंह 
कभी मोड़ना नहीं।

नेकी कर और 
दरिया में डाल,
बेवजह, बेबुनियाद 
सोच कभी रखना नहीं।

सबका कर सम्मान
फिर कर अभिमान,
निरादर किसी का 
कभी करना नहीं।

देश की शान 
उस पे सब कुर्बान,
भाई चारे का
 कभी खोना नहीं।
माधवी गणवीर

Friday, January 10, 2020

छत्तीसगढ़ से माधवी गणवीर जी की रचना- लौट आते तुम एक बार

नाम - माधवी गणवीर
जिला - राजनांदगांव 
राज्य  - छत्तीसगढ़


लौट आते तुम एक बार,
जीने का मिल जाता मुझे सार,
गा उठता प्राण -प्राण,
खिल उठता उन्माद राग,
विषाद जाता पल में सिमट,
देखी है मैंने स्थिति विकट,
असुवन धोते पाँव पखार,
लौट आते गर तुम एक बार।

     सूखे अधर पर आती मुस्कान,
     सांसों में आ जाती फिर जान,
     रोम - रोम समर्पण होता,
     अधरों का भी समर्थन होता,
     लुटाता चिर परिचित मुस्कान,
     सारा विषाद धूल जाता इस बार,
      लौट आते गर तुम एक बार।
     
            माधवी गणवीर

Wednesday, December 25, 2019

छत्तीसगढ़ से माधवी गणवीर की ग़ज़ल

माधवी गणवीर
राजनांदगांव
छत्तीसगढ़
 गजल

वो मेरा था, मेरा है और मेरा ही रहेगा,
दिल को रस्मो रिवाजों से बगावत है और करेगा ।
दोस्त बनकर खंजर सा जख्म दिया जिसने,
उस दुश्मन से मोहब्बत है और रहेगा।
उसे पाने की तमन्ना तो न थी कभी।
पर उसे खोना ही किस्मत है और रहेगा।
सच को सच कहा तो बुरा हो गया,
तेरी नज़रों में यह हिमाकत है और रहेगा।
खता किसकी थी ये मत पूछ अब,
जुबां से मुकर जाना तेरी फितरत है और रहेगा।
जल ही जाते है परवाने अक्सर 
शमां की खातिर,
जलना जलना ही उसकी शहादत है और रहेगा।
है नदी के दो किनारों सा जीवन उनका भी,
दूर होकर भी दोनों में बेहद कुरबत है और रहेगा।


माधवी गणवीर

Thursday, December 19, 2019

छत्तीसगढ़ से माधवी गणवीर की रचना- नेह के दीप

नाम- माधवी गणवीर
राज्य- छत्तीसगढ़
कविता- नेह के दीप

न उदास हो, न किसी को उदास करो,
जिंदगी मिली है, तो जिंदादिली से रहो।
तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर बनती है ,
जिंदा रहना है तो तरकीबे आजमाते रहो।
राह में पत्थर हजार मिलेंगे,पर याद रखो,
न हारो न थको,बस अपना हुनर दिखाते रहो।
हर वक्त बजता रहे कानो में युद्ध का बिगुल,
जाने कब कूच कर जाना हो तैयारी रखों।
आँखों में ख्वाबो का महल कभी टूटने न दो,
नींद हो न हो, ख्वाबों को भरमाते रहो।
न जाने कब जिंदगी की शाम ढल जाए,
स्नेह,अपनापन के दीप तो जलाते रहो।
माधवी गणवीर

Monday, December 2, 2019

छत्तीसगढ़ से श्रीमती माधवी गणवीर की कविता- दूसरी निर्भया

नाम-माधवी गणवीर
राज्य-छत्तीसगढ़
कविता


दूसरी निर्भया

न ख़ौफ़ न भय कैसी ये दरिंदगी मची है,
अब कहा बहन बेटी यहां सुरक्षित बची है।
पापा की रानी,परी,गुड़ियाँ शहजादी थी,
आजादी के परवानो ने दी उसे ही जान से आजादी थी।
माँ के आंख का काजल जार-जार हो गया,
प्रशासन,फिर चीखती प्रियंका का कर्जदार हो गया।
निर्भय हो लूट रहे है अबलाओं की  आबरू,
अपने कलेजे के टुकडे की कैसे हिफाजत मैं करू।
जानवरो से भी बत्तर हो गई इनकी कुत्सित नियत,
बोटियां नोचने लगे बेटियो की वाह.. रे इंसानियत।
शासन प्रशासन कब तक भरेंगे अपनी झोलियां,
राजनीतिक कुर्सी हथियाने की कब तक चलेगी बोलियां।
अब तो हर माँ के चेहरे पे छाया भय का आतंक,
छाती पटती कहती है क्या.. कभी होगा  इसका अंत।
किरदारों में ही दिखते है अस्मत बचाने वाले लोग,
यहाँ तो कोने-कोने में छिपे है अस्मत लूटने वाले लोग।

माधवी गणवीर
व्याख्याता
जिला-राजनांदगांव

Monday, November 18, 2019

छत्तीसगढ़ से माधवी गणवीर की रचना- यही हूं मैं


नाम- माधवी गणवीर
राज्य- छत्तीसगढ़
कविता- यही हूं मैं


मन्दिर मस्जिद की तलाश में नही हूं मैं,
बस एक दिल हो ईमान का वही हूं मैं।
बेसुद न हो न मृग मरिचिका बन,
डायरी के चंद पन्नो में बसी हूं मैं।
मायूस हो के लौट गया वो दरख़्त- खा से,
उसे पता नही गुमी हुई वो, हसीं हूं मैं।
तलाश उसकी भी सही है जो गुमा  हो,
यादो के दरख़्त तो खोलो, यही हूं मैं।
बेखबर, बेअदब सा वो ढूढता  फिर" माधवी'
हर रंग, हर रूप हर जर्रे में कही न कही हूं मैं।
माधवी गणवीर

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...