Showing posts with label प्रिया गुप्ता. Show all posts
Showing posts with label प्रिया गुप्ता. Show all posts

Friday, June 5, 2020

छत्तीसगढ़ के दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- वृक्षों का महत्त्व

प्रिया गुप्ता
दुर्ग(छत्तीसगढ़) 
जीवन में वृक्षो का महत्व 

 बचपन से बुढ़ापा तक हमारेजीवन में वृक्षो का महत्व है |
जैसे फल, फूल, औषधि आदि, 
पेड़ का हर अंग हमारे लिए उपयोगी है |


    "जिस पलने में झूले बच्चा, 
    पलना भी लकड़ी का होता है 
    बुढापे का बन सहारा, 
    लाठी सदैव साथ रहता है " |


   बढता प्रदूषण, वनो की अंधाधुंध कटाई, औद्योगिकरण,आदि के कारण पर्यावरण सुरक्षित रखना हम सभी का उत्तरदायित्व है | ' हरित क्रांति ' 
  'श्वेत क्रांति ' के कारण हम विकास के पथ पर चल पड़े हैं |
 परंतु हमे निरंतर होने वाली वृक्षों की कटाई पर अंकुश लगाना होगा |

    "वृक्ष नित काट रहे हो, 
   भूमि बंजर हो जायेगी,
  प्राकृतिक धरोहर वृक्ष हमारी, 
    नाममात्र रह जायेगी "|

  भविष्य  सुरक्षित करने के लिए हम सभी को संकल्प करना होगा क्योकि वृक्ष है तो जीवन है, अत: हम सभी मिलकर वृक्ष लगाये,एवं  पर्यावरण सुरक्षित बनाये |
 एक नयी कदम नयी सोच के साथ आज पर्यावरण दिवस पर 'काव्य संसद ' समूह के संस्थापक श्री पुखराज यादव जी, एवं सह सहसंस्थापक सुन्दर लाल डडसेना जी के सराहनीय कार्य मे कदम से कदम मिलाये | |
  

 "वृक्ष लगाओ, जीवन बचाओ, 
   संदेश जन जन तक पहुंचाना है,
         मिलकर हम सभी को, 
     एक एक वृक्ष लगाना है "||

       प्रिया गुप्ता 
         भिलाई 
       छत्तीसगढ़ 


Wednesday, May 27, 2020

छत्तीसगढ़ के दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना

रचनाकार का नाम - श्रीमती प्रिया गुप्ता 
जिला - दुर्ग 
राज्य - छत्तीसगढ़ 
विधा - कविता 
शीर्षक - पेड़ लगाबो, पेड़ बचाबो 

 पेड़ लगाबो,
               पेड़ बचाबो 

नदिया,नरवा रोवत हे आज,  

 परदूसन दानव करत हे राज , 

 कचरा, झिल्ली नदिया म डारके, 

  मइनखे भविष्य ला अंधकार बनात हे |

 एक दिन ऐसे आही, 

        पैसा म मिलही पानी, 

  हे मइनखे संभल जा, 

     जल बिन नीरस हे जिनगानी |

        पेड़ पर आरी चलाबो त, 

       परयावरन संतुलन बिगड़ही, 

        भूंइहा होही परिया त, 

            अन्न कहां से होही |
   


     पेड़ मे मइनखे बस नही ,

  गाय गरुआ, अउ चिरई  
    के तको हे डेरा ,

   बर, पीपल ,आमा के तरी, 

       बीतथे मंझन के बेरा |


   परयावरन सुरक्षित रखबो, 

       करबो मिलके प्रन, 

   पेड़ लगाबो, पेड़ बचाबो ,

          मिलके जम्मो झन ||

      
           प्रिया गुप्ता 
            भिलाई 



Saturday, May 23, 2020

छत्तीसगढ़ के दुर्ग से श्रीमती प्रिया गुप्ता की रचना- जीवन

रचनाकार का नाम - श्रीमती प्रिया गुप्ता 
जिला - दुर्ग 
राज्य - छत्तीसगढ़ 
विधा - कविता 
शीर्षक - जीवन का महत्व 

     

   उनसे पूछो जीवन का महत्व, 
     जिनके पास है जिंदगी कम, 
  भूखे से पूछो रोटी का महत्व, 
     जिनके पास है अन्न भी कम |
 
    सागर से निकाले गर जल, 
       नही होगा उसमे जल कम, 
 गगरी से पूछो जल का महत्व, 
   जिसमे समाये जल भी कम |

 जीवन सारा गुजार दिया, 
        धन दौलत कमाने में, 
 धन है अपार पर परिवार नहीं, 
    उनसे पूछो अकेलेपन का गम |

    क्या खोया ,क्या पाया, 
     मुड़कर ना देखा जीवन में, 
    अरमानो को पूरा करता रहा, 
    जो कभी पूरा नही होगा जीवन में | 

  थककर लाचार हो गया, 
     मिला नही मुझे पल भर 
        मृगतृष्णा को ढूंढता रहा, 
  जीवन में जिंदगी भर ||
    

          प्रिया गुप्ता 
           भिलाई 
         छत्तीसगढ़

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...