Friday, October 16, 2020

कोरिया से बिजेन्द्र अहीर की रचना- तुम ही तो हो माँ

नाम - बिजेन्द्र अहीर
जिला- कोरिया, छत्तीसगढ़
विधा-   छन्द मुक्त कविता
शीर्षक- "तुम ही तो हो माँ"
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हमारी कला, हमारे ज्ञान में,
हमारे गर्व, हमारे अभिमान में।
हमारे हर एक कार्य अनुभव में, प्रतिबिम्ब तुम्हारा,
तुम ही तो हो माँ,अपनी प्रत्येक संतान में।


तन-मन के सुन्दर विन्यास में,
युगल नयन ज्योति- प्रकाश में।
मुखरित हो स्वयं, कर देती हो हमें प्रभावशील,
तुम ही तो हो माँ, हमारे आत्मविश्वास में।


हमारे सलीके में, हमारे ढंग में,
जीवन के एक-एक रंग में।
कभी इस रूप, कभी उस रूप,
तुम ही तो हो माँ, सदा हमारे संग में।


हमारे चिंतन में, हमारे संस्कार में,
दिनचर्या में और लोकाचार में।
हमारा अलग से कोई अस्तित्व कहाँ,
तुम ही तो हो माँ, हमारे सद्व्यवहार में।


रहती हो तुम दूर कहीं,नील-व्योम मध्य में,
रखा है फिर भी हमें, सदा अपने सानिध्य में।
आह निकलती है जब भी, तुम्हें पुकारते हैं,
तुम ही तो हो माँ, हमारे इष्ट-आराध्य में।

तुम ही तो हो माँ,  तुम ही तो हो माँ।।

                -बिजेन्द्र अहीर


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