Thursday, June 4, 2020
छत्तीसगढ़ के दुर्ग से सीमा अष्टमी साहू की रचना- भुइंया
Monday, June 1, 2020
छत्तीसगढ़ के दुर्ग से सीमा साहू की रचना-
Wednesday, May 27, 2020
छत्तीसगढ़ के दुर्ग से सीमा अष्टमी साहू की रचना- पर्यावरण
Tuesday, May 26, 2020
छत्तीसगढ़ के दुर्ग से सीमा अष्टमी साहू की रचना
Saturday, May 16, 2020
छत्तीसगढ़ के दुर्ग से सीमा अष्टमी साहू की रचना- तेरे नयना
Friday, May 15, 2020
छत्तीसगढ़ के दुर्ग से सीमा साहू की रचना- गीत
Wednesday, May 13, 2020
छत्तीसगढ़ से सीमा साहू की रचना- अर्थशास्त्र
Tuesday, May 5, 2020
छत्तीसगढ़ से सीमा अष्टमी साहू की लघुकथा
Monday, April 27, 2020
छत्तीसगढ़ से सीमा साहू की रचना- गौरैया चिड़ियां
Monday, April 13, 2020
छत्तीसगढ़ से सीमा साहू की रचना- महामारी
Friday, March 27, 2020
छत्तीसगढ़ से सीमा साहू की रचना- आ अब लौट चलें
Wednesday, January 29, 2020
छत्तीसगढ़ से सीमा साहू की रचना- सरस्वती
Friday, December 6, 2019
छत्तीसगढ़ से सीमा साहू की रचना- बेटी
Wednesday, November 27, 2019
छत्तीसगढ़ से सीमा साहू की रचना- वन्दे मातरम्
छत्तीसगढ़ भिलाई
शीर्षक- वन्दे मातरम्
अलग अलग प्रांत,धर्म,जाति है
हम सभी एक हैं वन्दे मातरम्।।
जब क्रांतिकारी सैनानियों देश
के रक्षक ,युवा पीढ़ी कहते हैं वन्दे मातरम्।।
इस देश के रोम रोम में देश प्रेम की भावना।
उस वंदना का सूर है,यह गीत वन्दे मातरम्।।
चैतन्य और सामर्थ्य का सार है वन्दे मातरम्।
गौरव ध्वजा फहरा रहा गीत वन्दे मातरम्।।
सुजल सुफल मलयज शीतल सस्य श्यामलये धरा
सम्बोधन है भारत मां के लिए वन्दे मातरम्।।
कुंकुम ,कलश,आम्रपल्लव, वंदना
है वन्दे मातरम्।।
हर भारतीय के दिल में समाहित है वन्दे मातरम्।
युगों युगों तक हम सभी भारतीय गाते रहेंगे
भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव, की तरह हम भी बन जाये
क्रांति के झंडा फहराया, ऊंचा रहे तिंरगा वन्दे मातरम्।।
आंतकवाद, भ्रष्टाचार , रिश्र्वत खोल, जातिभेद को मिटाकर
सभी मिलकर प्रेम का संविधान बनाये वन्दे मातरम्।।
देश की धरती, मां भारती को
के स्वपन को साकार करें वन्दे मातरम्।।
Wednesday, November 6, 2019
छत्तीसगढ़ से सीमा साहू की रचना- मोबाईल की बीमारी
छत्तीसगढ़
मो नं
शीर्षक-मोबाईल की बीमारी
सोने से पहले, उठने के बाद बस
रातों की नींद हराम दिन भर
उंगलियों से काम ,मां बाप
बच्चों से परेशान।।
नारी भी मोबाइल की प्यारी है
रंग बिरंगी साड़ी पहनकर ए मतवाली है, ए भी मोबाइल की
बीमारी से पीड़ित हैं।।
बेटियां के कया गुण गाए
वह भी हेयरस्टाइल की दिवानी
फेसबुक,टिक टाक में फेमस
दिन भर कमैंट की कतार
यही मोबाइल हैं उसके
जीवन का आधार
हे प्रभु !मेरा कर दो उद्दार
इन माहामारी रूपी मोबाइल से
बेटा भी कम नहीं हैं जनाब
दिन भर मोबाइल का चढ़ा है
उसके ऊपर चढ़ा है सैलाब
छत पर चढ़कर फोटो खिंचवाने
का महामारी रुपी मोबाइल का
पति देव को खाने -पीने का होश नहीं
बस दोस्तों के साथ हसते मुस्कराते हैं
पति देव कुछ पल परिवार के लिए
समय नहीं दे पाते हैं
हाय ये मोबाइल तू कलयुग में क्यों आईं ,महामारी मोबाइल।।
अब न रही रिस्तो में प्यार
बस टकरार अब क्या करें यार
लगता है जीवन बेकार ,अब
जीवन भर झेलों मोबाइल
की मार अब कौन करेगा साकार
रिस्तो को महामारी मोबाइल
को कौन थामें गा कौन बचाएगा
महामारी से?
Thursday, October 17, 2019
छत्तीसगढ़ से कवयित्री सीमा साहू की रचना- अजब छत्तीसगढ़ के गजब रूप
राज्य-छत्तीसगढ़
शीर्षक_अजब छत्तीसगढ़ के गजब रूप
मो नं
किसम किसम के नाम
फेर एक धाम से सबले बढ़िया
छत्तीसगढ़ हे नाम।।
सरी राज के मन हा ,खाते कमाये बर आथे
शिक्षा के धानी हरे हमर भेलई
इहीच हमर जिंदगानी हे।
छत्तीसगढ़ बोली , शिवनाथ
के पानी हे।
देख तो हमर छत्तीसगढ ला
करमा,ददरिया, पंथी ,सुआ
हम गाथन जी, पंडवानी, रामायण
गीता अव संस्कार के धानी हे।।
देख तो हमर छत्तीसगढ ला
पंजाब सही दिखथे जी।
जघा जघा म येहर सिंधी के
सिंध सही दिखथे जी।।
ओलकी कोलकी म अंध्रा,तमिल सही दिखथे
केरल कर्नाटक घलो हमर छत्तीसगढ दिखथे
हरियाणा, मारवाड़ संग ये फबे
हुब हुब दिखथे जी
छत्तीसगढ़ तो हावय भैया
जइसे सूरज के हे धाम।
गुजराती के सौराष्ट्र इहां,मराठा के
महाराष्ट्र
असमिया के आसाम इंहा , बंगाली के बंगाल।
उड़िया मन के उड़ीसा,इहेच गोरखा के नेपाल।
इंहेच बिहारी के बिहार हावे,
के उत्तरप्रदेश के चौपाल।।
छत्तीसगढ़ के भारत लहुटगे,
ये माटी ला परनाम।।
फेर एक......
छत्तीसगढ़ महतारी कहिथे,अपन
लोग लइका मन ला।
आनेच मन अव लानतेच,सगा सोधर मन ला।
त हमन काबर जावत हन भैया
अपन घर कुरिया ला।
छत्तीसगढ़ दाई कलपत हे
झन जा बेटा छोर के मोर
अंचराला।
काबर जाबे बेटा,इंहा हे सब के धाम।।
फेर एक धाम से सबले बढ़िया छत्तीसगढ़ हे नाम।।
जय श्री राम जय श्री राम
हरे हमर भैया,माता कौशल्या
के धाम।
छत्तीसगढ़ ला परनाम, छत्तीसगढ़ ला परनाम।।
Tuesday, October 8, 2019
छत्तीसगढ़ से सीमा साहू की रचना- रामचरित मानस
नाम -सीमा साहू
राज्य-छत्तीसगढ़
शीर्षक-रामचरित मानस
मो -9406210457
रामचरितमानस
यह शरीर अयोध्या हैं
तन में बसने वाले राम
को मेरा सादर प्रणाम
रा से -रामचरित मानस से जीवन सुंदर साकार बना ।
म से-माता सीता का हनुमान को दुलार मिला।
च -चरित्र हो सुंदर यह रामायण सिखाती हैं।
रि-रीत नियम से राम जी करते अहंकार का नाश।
त-तर जाता है पापी भी जिसने लिया है राम का नाम।
मा-मारा जाता है मैं कहने वाला अंहकारी रावण।
न-नष्ट करो मन से मैं रुपी रावण को।
स-समरसता हो परिवार में
बनें अयोध्या सा धाम।
बोलिए एकता के स्वर में
जय श्री राम जय श्री राम
तन हो राम,मन हो राम,आत्मा राम।
जय श्रीराम जय श्रीराम🙏
सीमा साहू सुभाष नगर दुर्ग/भिलाई
Monday, September 30, 2019
छत्तीसगढ़ से कवयित्री सीमा साहू की रचना- आंँखो में पावस सी
01.कवयित्री - सीमा साहू
02-राज्य-छत्तीसगढ़
03-शीर्षक-आंँखो में पावस सी
04-मोबाइल नंबर-
नारी जिंदगी !
आंँखों में पावस सी,
लगने लगी नारी जिंदगी।
पूर्णिमा में अमावस सी,
लगने लगी नारी जिंदगी।।
कभी धूप कभी छांँव,
कभी आंँधी तूफान रुपी
मन के गगन में घन सी,
लगने लगी नारी जिंदगी।
परिवार के दो पाटों के बीच
संकट के कांँटों के बीच,
जीवन उपवन में सुमन सी,
महकने लगी नारी जिंदगी।
श्याम मेघ की गर्जना
बिजली वर्षा की सर्जना
आषाढ़ के अभिनंदन में
मयूर मन सी,
मचलने लगी नारी जिंदगी।
रिमझिम बरसे नयनों में सावन
पीड़ा का पावस तड़पाये मन
प्रिय के लिए विरहन सी,
तड़पने लगी नारी जिंदगी।
भीग लो बरस रही
जिंदगी की बूंदें
मिल लो जाने कब
चले जाये मोक्ष में,
जीवन दर्शन में चिंतन सी
उतरने लगी नारी जिंदगी।
ढोंगी कुछ जोगी
लगते वासना के रोगी
उम्र में क्या बेटी क्या पोती
शोषण में बिलखती रोती
जीवन में चीरहरण सी,
ठगी ठगी सी लगती
नारी जिंदगी।।
✍️सीमा साहू
दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत
कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528 दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो काति...


