स्थान-खरसिया
जिला-रायगढ़
शीर्षक -"छत्तीसगढ़ के माटी"
(छत्तीसगढ़ी कविता)
कविता म छत्तीसगढ़ के माटी, बोली भाखा, तीज तिहार,संस्कृति, रहन-सहन , धार्मिक स्थान, नदिया,महापुरुष मन के बरनन करे गे हवय।
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छत्तीसगढ़ के माटी
महानदी के घाटी।
बोली-भाख़ा खांटी,
अंचरा सुआ के पांखी।
सुघर इंहा मेला मड़ई,
अ उ तीज तिहार हे।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी
जय जोहार, जय जोहार हे।।
इहां घन आमा अमरैया,
लीम बर पीपर के छइंहा।
चहकत सोन चिरैया,
मोर सुघर छइंहा भुइंया।
हरियर-हरियर रुख राई,
जंगल डोंगरी पहार हे।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी,
जय जोहार, जय जोहार हे।
संग आउ जहुं रिया,
नाचा करमा दादरिया।
खेती -खार नगरिया,
कुआं बाउ ली तरिया।
, भांठा डोली, धनहा
नदिया नरवा नार हे।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी,
जय जोहार जय जोहार हे।।
अरिसा खुरमी ठेठ री,
उंखरा चना मुर्रा के गठरी।
इं हा सुग्घर दोना पतरी,
गांव गली म हवय हटरी।
मनखे इं हा बड़ मयारू
मया पीरित अपार हे ।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी
जय जोहार जय जोहार हे।।
इं हा राहेर तिवरा धान,
लोहा कोइला के हवे खदान।
गरीब बनिहार किसान,
इंहा सबो मनखे के मान।।
इं हा के लोगन बड़ सिधवा
हंसमुख मिलनसार हे।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी
जय जोहार जय जोहार हे।।
इं हा मनखे धरम परायण,
गीत गोविंद भजन रामायण।
भुइयां हे पबरित पावन,
प्रकृति अब्बड़ सुहवान।।
धरम नगरी शिवरी, राजिम
रतन सिरपुर मल्हार हे।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी
जय जोहार, जयजोहार हे।।
करों मैं माटी के गुणगान,
वीर नारायण सोनाखान।
गुरु घासी संत महान,
हमर गौरव अ उ पहचान।
महानदी, अरपा पैरी, हसदेव
बोहावत निरमल धार हे।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी
जय जोहार जय जोहार हे।।
लिखैया-गुलाब सिंह कंवर "गुलाब"