०२. जिला/राज्य :- रायपुर (छत्तीसगढ़)
०३. शीर्षक :- खौफ़
०४. विधा :- मुक्तक
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*खौफ़*
लेते ही नाम इसका
स्टार्ट हो गया
कोरोना ना हुआ मुआ
*वोल्डेमाॅर्ट हो गया
जब खाना पकाती है
घर घरनी घबराती है
ना छौंक ही लगती है
ना दाल बघराती है
छींकों को रोक लेना
अब आर्ट हो गया
है खौफ़ सबपे छाया
कैसा कहर बरपाया
ना कोई घर पे आया
ना किसी ने बुलाया
पत्थर सा सख्त सबका
अब हार्ट हो गया
झुलसाते **बफारों से
नमक के गरारों से
मांगें सभी संरक्षण
अदरक बुझे काढ़ों से
गरम मसालेदार
डाइट चार्ट हो गया
है फिक्र अपनी सब को
भूले हैं पार्टी क्लब को
कुछ सूरमा हैं लेकिन
ना छोड़ते तलब को
उनका बदन रोगों का
शॉपिंग कार्ट हो गया
खीसे में सेनिटाइजर
घर पर बुलाए बार्बर
पहने हुए दस्ताने
और मास्क दिए मुंह पर
मोहल्ले का हर इक "पप्पू" स्मार्ट हो गया
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*वोल्डेमार्ट :- बच्चों की फिल्म सिरीज़ "हैरी पॉटर का दुर्दांत खलनायक, जिसके डर से लोग उसका नाम नहीं लेते ।
**बफारे - दवाई मिला कर ली जाने वाली भाप ।
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अतिशयोक्ति अलंकार
1) लेते ही नाम इसका
स्टार्ट हो गया
2)पत्थर सा सख्त सबका अब हार्ट हो गया
3)उनका बदन रोगों का
शॉपिंग कार्ट हो गया