Wednesday, May 13, 2020

छत्तीसगढ़ के कोरिया से बिजेन्द्र अहीर की ग़ज़ल


नाम- बिजेन्द्र अहीर
जिला- कोरिया, छत्तीसगढ़
विधा- ग़ज़ल
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मत पूछो क्या था, क्या मेरा जीवन हो गया, 
सच्चाई के रस्ते मैं, सबका दुश्मन हो गया ।

 घुटन न हो, तो क्या हो, इस दौरे जहां में,
 रिश्तों से बढ़कर यहां, धन हो गया ।

माफ करना,  दिल दुखाया है, जानबूझकर नहीं,
 यह वाकया कमबख्त, इत्तेफाकन हो गया ।

 फर्क क्या पढ़ना , जगजाहिर गर उसका गुनाह है,
 बाइज्जत बरी वह, कानूनन हो गया ।

 न दिल मिले, न उनके ख्यालात ही,
जाने किस शर्त पर,  गठबंधन हो गया ।

 टूट कर बिखर गया होता, गर कोई दूसरा होता,
 मेरा दिल मेरा जिगर है, ये दर्द जिसे सहन हो गया ।

 मैं बस चला, तुम भी जाओ अपने रस्ते,
 आज के लिए समाप्त, मेरा प्रवचन हो गया ।

बहुत खूबसूरत गुजरी, आज की ये महफिल,
 मैंने आप बीती सुनाई, आपका मनोरंजन हो गया ।।

                               बिजेन्द्र अहीर

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