जिला- कोरिया, छत्तीसगढ़
विधा- ग़ज़ल
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मत पूछो क्या था, क्या मेरा जीवन हो गया,
सच्चाई के रस्ते मैं, सबका दुश्मन हो गया ।
घुटन न हो, तो क्या हो, इस दौरे जहां में,
रिश्तों से बढ़कर यहां, धन हो गया ।
माफ करना, दिल दुखाया है, जानबूझकर नहीं,
यह वाकया कमबख्त, इत्तेफाकन हो गया ।
फर्क क्या पढ़ना , जगजाहिर गर उसका गुनाह है,
बाइज्जत बरी वह, कानूनन हो गया ।
न दिल मिले, न उनके ख्यालात ही,
जाने किस शर्त पर, गठबंधन हो गया ।
टूट कर बिखर गया होता, गर कोई दूसरा होता,
मेरा दिल मेरा जिगर है, ये दर्द जिसे सहन हो गया ।
मैं बस चला, तुम भी जाओ अपने रस्ते,
आज के लिए समाप्त, मेरा प्रवचन हो गया ।
बहुत खूबसूरत गुजरी, आज की ये महफिल,
मैंने आप बीती सुनाई, आपका मनोरंजन हो गया ।।
बिजेन्द्र अहीर
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