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Saturday, June 12, 2021

पति-पत्नी : सूर्य प्रकाश पाटिल

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा
विधा छंद मुक्त कविता
विषय श्रृंगार
शीर्षक पति पत्नी


           पति पत्नी
पत्नी की श्रृंगार पति है,
पति की श्रृंगार पत्नी।
दोनों एक दूजे बिन अधूरे,
यही प्रेम की पाती।।

पत्नी श्रृंगार करती हैं,
अपने पति को खुश रखने की खातिर।
कई प्रकार के पकवान खिलाती,
घर परिवार की खुशहाली की खातिर।।

पत्नी जब श्रृंगार करे तो,
खुश हो जाते पति।
सारे घर का ख्याल वह रखती,
अपने पतिव्रत धर्म की खातिर।

गृहस्थ रूपी वाहन के,
पति पत्नी हैं पहिए।
दोनों सामंजस्य से चलते तो,
सुखमय होता हैं जीवन।।

 सूर्य प्रकाश पाटिल

Friday, June 11, 2021

हम कविता क्यों लिखते हैं? : सूर्य प्रकाश पाटिल

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा
विषय हम कविता क्यों लिखते हैं?
विषय आलेख
दिनांक 11/06/21

हम कविता क्यों लिखते हैं?
                 मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, वह समाज में रहते हुए, समाज, परिवार एवम् देश के लिए कार्य करता है।
                सामाजिक प्राणी होने के कारण उसका समाज,राष्ट्र एवम् परिवार के प्रति विभिन्न उत्तरदायित्व का निर्वहन करना होता हैं।
              अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करते हुए एवम् समाज में,देश में घटित हो रही घटनाओं को देखकर उसको अपनी भावनाएं व्यक्त करने की इच्छा होती हैं। जो कविता के माध्यम से बाहर आती हैं।
                  कवि कई प्रकार की कविताएं लिखता है। किसी कवि की कविताएं देश के प्रति समर्पित होती हैं, तो किसी को समाज में घटित हो रही घटनाओं के प्रति।
             कोई कवि वीर रस प्रधान कविता लिखता है तो कोई श्रृंगार रस प्रधान कविता, किसी की कविता देश भक्ति से अोत प्रोत। हर कवि की अपनी एक विशेष अलग पहचान होती हैं।
             पर कवि को कोई भी सीमाएं बांध नहीं सकती। कवि की भावनाएं अनंत होती हैं, कवि अपनी कविताओं के माध्यम से अपनी भावनाएं लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करता है और लोगों को जागरूक करने का प्रयास करता है।

Thursday, June 10, 2021

कैफियत : सूर्य प्रकाश पाटिल

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा
विषय कैफियत
विधा आलेख
शीर्षक हाल चाल
दिनांक 10/06/21

            कैफियत
         पिछली वर्ष से सारा संसार कोरोना महामारी से जूझ रहा है, कई लोग अपने परिवार के लोगों से नहीं मिल पा रहे थे। ऐसे समय में लोग एक दूसरे की कैफियत जानने को व्याकुल रहते थे।
             कोरोना काल ऐसा समय रहा है कि कई परिवारों ने अपने परिजन को खोया फिर भी वे उनके पास नहीं जा पा रहे थे । ऐसे समय में दुर से ही सही हाल_चाल मोबाईल के माध्यम से लेकर उनको सहानुभूति देते रहे।
              कई परिवारों ने अपना मुखिया तो कई परिवार पूरे के पूरे खत्म हो गए , पर लॉक डाउन होने के कारण या वक्त के नजकता के कारण अपने के पास नहीं पहुंच पा रहे थे। ऐसे कठिन समय में लोग मोबाईल के माध्यम से अपने अपनों का हालचाल लिए और अपना हालचाल बताया।
                 अभी भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है तो हमें एक दूसरे से उचित दूरी रख कर मिले, बहुत ही आवश्यक हो होने पर ही घर से बाहर निकलना चाहिए और एक दूसरे का हाल चाल मोबाईल के माध्यम से लेते रहना चाहिए।

Wednesday, June 9, 2021

सूर्य प्रकाश पाटिल की रचना- अकिंचन

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा
विषय अकिंचन
विधा छंद मुक्त कविता
दिनांक 09/06/21

            अकिंचन 
हैं अकिंचन वे प्रभु
जिनके मन आपका वास नहीं।

हैं अकिंचन वे प्रभु,
जिसके मुख आपका नाम नहीं।

सब कहते मुझे अक़िंचन,
पर मन से में अकिंचन नहीं।

आप बसते हैं इसमें प्रभु,
तो हृदय से मै अकिंचन नहीं।

लोग कहते हैं दरिद्र,
और ठोकरें भी देते प्रभु।

पर आप के क़दमों तले,
मै दरिद्र हूं नहीं।

मन में बसते आप सदा,
मन भरा हैं आपसे।

मुझसे बड़ा भाग्यवान,
मुझे लगता कोई नहीं।
          सूर्य प्रकाश पाटिल

Monday, June 7, 2021

सूर्य प्रकाश पाटिल की रचना- तेजस

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा
विधा छंद मुक्त कविता
विषय तेजस
दिनांक 07/06/21

               तेजस
सूर्य सा प्रदिप्त हैं जो,
अग्नि सा ज्वलित है जो,
तेजस है वो ।

राम के धनुष सा,
कृष्ण के चक्र सा,
तेजस है वो।

शंकर के त्रिशूल सा,
हनुमान के गदा सा,
तेजस है वो।

बिजली की चपलता जिसमे,
ध्वनि की तुरन्तरता जिसमे,
तेजस है वो.....
तेजस है वो ....

सूर्य प्रकाश पाटिल

Thursday, June 3, 2021

सूर्य प्रकाश पाटिल कृत रेखाचित्र- अंधविश्वास

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा
विधा रेखचित्र
शीर्षक अंधविश्वास
दिनांक 03/06/21
             अंधविश्वास
     अंधविश्वास का तात्पर्य बिना किसी प्रामाणिकता के किसी बात पर विश्वास कर लेना , और उसका प्रचार प्रसार करना।
              वर्तमान समय में भी कोरोना वैक्सीन को लेकर अंधविश्वास फैलाया जा रहा है ना केवल छत्तीसगढ़ के गांवों में बल्कि पूरे भारत देश में।
          चूंकि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की अभी भी कमी है इस कारण इस बात का प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा हुआ। इसके उल्ट शहरी क्षेत्रों में वैक्सीन लगवाने वालों की लाइन लगी है और वैक्सीन कम पड़ रही हैं।
               चूंकि मै भी एक शिक्षक हूं मेरा भी वैक्सीनेशन में ड्यूटी लगा हमारे कार्य स्थल में , वहां के ग्राम पंचायत सरपंच की वैक्सीनेशन को लेकर उत्साह देखते ही बनता था। जब से टीम पहुंची तब से वे पूरे समय व्यवस्था में लगे रहे। लोगों को मोटर साइकिल से और मोबाईल के माध्यम से बुला बुला कर टीकाकरण करवाया। और टीकाकरण के महत्वपूर्ण कार्य को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।
                यही कारण है कि जहां दूसरे गांवों में टीकाकरण का विरोध हो रहा था वहीं हमारे ग्राम पंचायत में भरपूर सहयोग मिल रहा था। ग्राम पंचायत के युवा सरपंच ने टीम के सभी सदस्यों को प्रभावित किया। हमारे देश को इसी प्रकार के युवा और कर्तव्य निष्ठ लोगों की आवश्यकता है।

Wednesday, June 2, 2021

सूर्य प्रकाश पाटिल कृत लघुकथा - परामर्श

रचनाकार- सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा
विधा लघु कथा
शीर्षक परामर्श
दिनांक 02/06/21

             परामर्श
श्याम दो भाई और एक बहन में सबसे छोटा और सबका लाडला था। दोनों भाई अपनी दीदी के परामर्श के बिना कोई भी काम नहीं करते थे।
             चूंकि दीदी पढ़ लिखकर शादी योग्य हो गई थी और अच्छा रिश्ता आने के कारण उनका विवाह कर दिया गया।
              दीदी के विवाह उपरांत दोनों भाई को सही सलाह परामर्श देने वाला कोई नहीं दोनों अं रास्ते से भटकने लगे थे। इस कारण दीदी ने श्याम को अपने पास रख कर पढ़ाने का फैसला लिया। अब श्याम दीदी के घर रहने लगा परन्तु उसका पढ़ाई में बिल्कुल मन नहीं लगता था।
             इस कारण उसकी दीदी ने उसको किसी काम धंधे में लगाने का निर्णय लिया। श्याम के लिए दिदी के गांव में ही दुकान खोलकर दे दिया।
             चूंकि दोनों भाई काम करने लगे थे और उम्र भी हो रही थी इस कारण उनका भी विवाह कर दिया गया। अब दोनों भाई अपने गांव में ही अपना अपना काम देखने लगे।
             दोनों भाई को अलग अलग घर बनाकर पापा ने दे दिया। पहले से ही दोनों भाई में दूरी थी अब घर अलग होने से दूरी और भी बढ़ गई।
             शादी के बाद हर कोई अपने हिसाब से फैसले लेने लगता है उनके साथ भी यही हुआ।
         फिर अचानक कोरोना महामारी का काला साया सारे विश्व पर छा गया। छोटे कारोबारियों का धंधा मंदा हो गया। फिर भी श्याम अपने परिवार में खुश था, कि अचानक श्याम की तबीयत बिगड़ने लगी बुखार खासी से बुरा हाल था पर परिवार में किसी को कुछ भी खबर नहीं थी उन्होंने पास रह रहे मां पापा, भाई, और दीदी से भी सलाह लेना उचित नहीं समझे। तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ने पर घर वालो का सलाह लिया गया परन्तु तब तक देर हो चुकी थी कोरॉना ने श्याम के मन में अपनी पैठ जमा चुका था । अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां दो दिन बाद ही श्याम अपने भरे पूरे परिवार को छोड़ स्वर्ग सिधार गया।
          और घर वालों के मन में लाखों सवाल छोड़ गया कि यदि सही समय पर सही परामर्श ले लिया जाता तो शायद श्याम हमारे बीच होता...,...

Saturday, May 29, 2021

सूर्य प्रकाश पाटिल की रचना- बचपन

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा
विधा छंद मुक्त कविता
विषय बचपन
दिनांक 29/05/21
             "बचपन"
बचपन मत छिनों मेरा,
          बच्चा ही रहने दो।
इस बनावटी दुनिया में,
           सच्चा ही रहने दो।
अभी ठीक से बोलना चलना,
          सीखा नहीं था मैंने।
अभी ठीक से अपना बचपन,
           जिया नहीं था मैंने।
और लाद दिया मेरी पीठ पर,
        पांच दस किलो का वजन।
बचपन मत छीनों......
अभी स्कूल से आया ही था,
           अब जाना है टयूशन।
इस तरह से छीना जा रहा,
         मुझसे मेरा बचपन।
मुझसे है उम्मीदें भारी,
        ऑलराउंड चाहते हैं बनाना।
पढ़ना लिखना ही नहीं,
        खिलाड़ी डांसर भी चाहते हैं बनाना ।
अभी बचपन भी जिया नहीं मै,
        उम्मीदें हैं मुझसे पहाड़ जैसे भारी।
कैसे जियुं मै अपना बचपन,
            मट छीनों मुझसे मेरा बचपन..,..

Friday, April 16, 2021

सूर्य प्रकाश पाटिल कृत आलेख- जहाज़

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा
विधा आलेख
विषय जहाज़

          दृश्य रूप में देखा जाए तो जहाज़ दो प्रकार के होते हैं, पहला हवाई जहाज और दूसरा जल जहाज़। दोनों ही जहाजों का मुख्य कार्य विभिन्न मनुष्यों को भिन्न भिन्न हवाई अड्डों या बंदरगाह पर रुकते व छोड़ते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचती हैं।
            इसी प्रकार प्रत्येक मानव का जीवन या मानव शरीर भी एक जहाज़ की तरह है, जो जो मानव आत्मा को विभिन्न पड़ाव जैसे बालपन युवावस्था, वृद्धावस्था,सुख, दुःख से होते हुए मानव शरीर अपने गंतव्य अर्थात श्मशान भूमि तक पहुंच जाता है।
            मानव तन तो जल जाता है या दफन हो जाता है, परन्तु इस मानव तन रूपी जहाज़ का जो यात्री है आत्मा वह अपने कर्म अनुरूप अपनी सद्गति को प्राप्त होता हैं, या तो वह मोक्ष को प्राप्त कर ईश्वर को प्राप्त करता है या फिर से कोई नया शरीर प्राप्त कर जहाज़ रूपी शरीर से पुनः यात्रा आरंभ करता है।
             जल जहाज़ या हवाई जहाज में तो कई बार यात्रा किया जा सकता है परंतु मानव तन रूपी जहाज़ बहुत तपस्या के फलस्वरूप ही प्राप्त होता है। इसकरण हमें इस जहाज़ का सदुपयोग करते हुए सदमार्ग पर चलते हुए नेक व पुण्य कार्य करना चाहिए, तभी यह मानव तन रूपी जहाज़ आत्मा रूपी यात्री को सद्गति तक पहुंचा सकता है और मोक्ष को प्राप्त करता है......। 
             सूर्य प्रकाश पाटिल

Friday, November 20, 2020

बेमेतरा से सूर्य प्रकाश पाटिल की रचना- कश्ती और मस्ती

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा छत्तीसगढ़
विषय कागज की कश्ती
शीर्षक  कश्ती और मस्ती
विधा छंद मुक्त कविता

          कश्ती और मस्ती

बरसात का मौसम,
         अंगड़ाई लेता वो सावन ,
वो बचपन की मस्ती,
       वो कागज की कश्ती,
याद आती है आज,
        हर पल हर दम ....
बचपन में,,,
            बारिश में भीगना
छिपाकर चुपके से,
           कागज की कश्ती बनाना,
और चलाकर उसे गली में,
          मस्ती से झूमना,,
याद आता है आज,
          वो लम्हा था जो अपना।
काश,,, आज...
       उसी मस्ती में झूम पाते,
गलियों में मदमस्त,
         कागज की कश्ती चला पाते।
पर... आज मस्ती और कश्ती,
           दोनों ही खो गई ,
अपनी हस्ती बनाते बनाते,
        हस्ती बनी या नहीं मेरी,
मुझे नहीं है ये पता,
        पर हां....
हस्ती के मायाजाल में,
        मेरी वो कागज़ की कश्ती खो गई......
     सूर्य प्रकाश पाटिल

Thursday, November 19, 2020

बेमेतरा से सूर्य प्रकाश पाटिल की रचना- सफलता

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा छत्तीसगढ़
विषय सफलता
शीर्षक सफलता एक शुरुवात
विधा छंद मुक्त कविता

       सफलता एक शुरुवात
सफलता यूं ही नहीं मिलती,
           कठिन परिश्रम करनी पड़ती है।
सफलता अवश्य मिलती है,
           लक्ष्य निर्धारित करनी पड़ती है।
हार कर ही तो,
          जीत मिलती है यारों।
बिना असफलता के,
          सफलता भी फीकी लगती है।
जो बिना ठोकर के पहुंचे,
           सफलता के द्वार।
वो क्या जाने,
         सफलता ए स्वाद यारों।
विरासत में मिली पूंजी,
        ज्यादा दिन टिक नहीं पाती।
एड़ियां घिस घिस कर पहुंचे,
         जो सफलता के द्वार यारों।
वहीं जाने असली सफलता ए स्वाद यारों।
सफलता अंत नहीं एक शुरुवात है यारों,
आज के मानव जीवन में सफलता ,
बस अल्प विराम है यारों।
सफलता मिलती भी आज तो,
            चैन नहीं इंसा को।
आज के इंसान के लिए सफलता,
         जीवन पर्यंत पूर्ण नहीं होती......
     सूर्य प्रकाश पाटिल

Wednesday, November 18, 2020

बेमेतरा से सूर्य प्रकाश पाटिल कृत आलेख- चाय पानी

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा छत्तीसगढ़
विषय भ्रष्टाचार की राजधानी
शीर्षक चाय पानी
विधा आलेख


             चाय पानी
     हमारे देश में मेहमान का स्वागत कम से कम चाय पानी से किया जाता है। कहीं भी किसी के घर जाएं तो वहां से चाय पानी पिए बिना जाने नहीं दिया जाता। यह हमारे देश एवम् हर राज्य में परम्परा है। यह बिना मांगे मिल जाने वाली परम्परा है।
               परन्तु बिन मांगे मिल जाने वाली यह परम्परा कब और कैसे मांगने वाली परम्परा बन गई इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। क्योंकि हमारे देश की संस्कृति ने हमेशा देना सिखाया है मांगने की परम्परा भारतीय संस्कृति में नहीं रही है।
                    और आज हर जगह, हर ऑफिस में, स्कूल से लेकर अस्पताल तक, चपरासी से लेकर हाई कमान तक सभी जगह चाय पानी मांगी जाती है। चाय पानी के बिना आज के समय में कोई काम नहीं होता। 
                10 रुपए से शुरू यह चाय पानी हजारों, करोड़ों तक जाती है। आज के समय में चाय पानी देकर कोई कार्य कराया जा सकता है। आज के समय में जिसके पास पैसा है उसी के पास ताकत है और पैसे के बल पर वह अपनी ताकत बढ़ाता जाता है यही वजह है कि हमारे देश में अमीर और अमीर, और गरीब और गरीब होते जा रहे हैं।
                हमारे देश का कानून लचीला है यही कारण है कि चाय पानी की यह परम्परा सुरशा की मुहं की भांति दिनों दिन बढ़ती जा रही है। 
          देश की कानून व्यवस्था को मजबूत बना कर ही हमारे देश से चाय पानी रूपी भ्रष्टाचार को खत्म किया जा सकता है। भ्रष्टाचार की मुख्य जड़ यही चाय पानी है जब तक इस मांगे जाने वाले चाय पानी को खत्म नहीं किया जाता तब तक देश एवम् समाज का विकास नहीं किया जा सकता। इस कारण चाय पानी की परम्परा को जड़ से मिटाने की आवश्यकता है ताकि देश व समाज का विकास हो सके....

   सूर्य प्रकाश पाटिल

Tuesday, November 10, 2020

बेमेतरा से सूर्य प्रकाश पाटिल की रचना- चिलमीलिका

रचनाकार- सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला- बेमेतरा छत्तीसगढ़
विषय- चिलमीलिका
शीर्षक- चिलमिलीका एक खोज
विधा- छंद मुक्त कविता


       चिलमिलिका एक खोज
तुम बिन है जग सुना,
     तुम बिन नहीं आज गुजारा,
हर पल, हर वक्त, हर कोई,
    चाहता है साथ तुम्हारा,
ऐसी हो तुम चिलमिलीका,
      इस युग में ऐसी हो तुम,
तुम बिन कल्पना इस युग की अधूरी,
प्रभावशाली रचना हो इस युग की,
      प्रभावहीन है कलयुग तुम बिन,
कलयुग की अद्भुत, चमत्कारी ,खोज , है चिलमिलीका.....! 
   

        सूर्य प्रकाश पाटिल

Monday, November 9, 2020

बेमेतरा से सूर्य प्रकाश पाटिल की रचना- ज्ञान धन

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा छत्तीसगढ़
विषय ज्ञान
शीर्षक ज्ञान धन
विधा छंद मुक्त कविता

              ज्ञान धन
  ज्ञान धन है अपार जग में,
  पा लो, पा लो इसको तुम,
  ज्ञान धन है अनमोल जग में,
  ले लो, ले लो इसको तुम।
  एक समय ऐसा था जब,
  मिलती थी ज्ञान निःशुल्क भी,
 पर आज समय ऐसा है आया,
 मोल मानव ने इसका भी लगा दिया,
  ज्ञान का बाजार बना दिया।
 कोरोना काल ऐसा भी आया,
 सभी ज्ञान मंदिर बंद हो गए,
 पर ज्ञान का द्वार कहां होता है बंद
 कई नए रास्ते ज्ञान के खुल गए,
 ज्ञान मंदिर बंद हैं अभी पर,
 बच्चे घरों पर ऑनलाइन ज्ञान प्राप्त कर रहे,
 ज्ञान का प्रकाश है ऐसा,
 कोई इसको ना रोक सके,
ज्ञान धन है अनमोल जग में,
ले लो, ले लो इसको तुम.....
 
सूर्य प्रकाश पाटिल

Wednesday, November 4, 2020

बेमेतरा से सूर्य प्रकाश पाटिल कृत आलेख- मेरा स्कूल

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा छत्तीसगढ़
विषय पुराने पन्नें
शीर्षक मेरा पहला स्कूल
विधा आलेख

        मेरा पहला स्कूल
         हमारे पिताजी बी. एस. पी स्कूल में शिक्षक थे। हम सभी तीन भाई एक बहन हैं । मै सबसे छोटा हूं। हम सभी की प्रारम्भिक शिक्षा हमारे पिता जी के स्कूल से ही प्रारम्भ हुई।
                  बात उन दिनों की है जब मैं तीसरी में पढ़ता था। हमारा स्कूल सह शिक्षा वाला था। और हमें गुहा मैडम जी पढ़ाती थी। मै अपने प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को आज भी मन से याद करता हूं और मिलने की तमन्ना रखता हूं क्योंकि उन्होंने ने ही हमारी नीव मजबूत की और आज उन्हीं की बदौलत एक अच्छे मुकाम पर हैं।
                     हां तीसरी में एक दिन मै मैडम जी द्वारा दिया काम कर चित्र बना रहा था क्लास में क्या हो रहा हैं इस बात से अंजान, तभी क्लास में पिताजी का आगमन हुआ कब हुआ मुझे पता नहीं चला,मै अपने आप में मग्न था तभी मैडम ने मुझे बुलाया और पिताजी से कहा_पाटिल सर आपको बहू खोजने की जरूरत नहीं है आपकी बहू इसी क्लास में है और बधाई देते हुए जोर से हंस पड़ी।
            मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था मैं डर के मारे पसीना पसीना हो गया। मैडम ने कहा जाओ मुंह धो कर आ जाओ। मुंह धो कर आया तो पता चला हमारे क्लास की एक लड़की ने अपनी कापी में लिखा था_मेरी शादी सूर्य प्रकाश से होगी। और उसकी सहेली ने कापी मैडम को दिखा दिया था।
              उस समय हम नादान थे शादी, प्यार कुछ जानते ही नहीं थे। शायद ये उनकी नदानी ही थी। पर आज बचपन का वो मासूम चेहरा इन यादों के साथ सामने आ जाता है.......

Friday, October 23, 2020

बेमेतरा से सूर्य प्रकाश पाटिल की रचना- शीतलता

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा छत्तीसगढ़
विषय शीतलता
शीर्षक बोली की शीतलता
विधा छंद मुक्त कविता


        बोली की शीतलता
शीतलता शब्द ही,
             देती हैं अद्भूत सा एहसास।
वायु में शीतलता मिलकर,
             देती हैं प्राण वायु।
जल में मिलकर शीतलता,
           देती हैं नव जीवन।
मानव बोली की शीतलता,
          अपनत्व का एहसास कराती है।
ज्यों समाए शीतल वायु,
           प्राणियों के अंतस में।
ज्यों समाए शीतल नीर,
          प्राणियों के नस नस में।
त्यों शीतल बोली मानुष की,
         समा जाए हृदय में।
ज्यों शीतल वायु बिन,
           न रह सके प्राणी।
ज्यों शीतल जल बिन,
            न जी सके जन प्राणी।
त्यों संभव नहीं बिन शीतल बोली,
         सफल जीवन तार पाना...
         सूर्य प्रकाश पाटिल

Wednesday, October 21, 2020

सूर्य प्रकाश पाटिल कृत सृजन- भेदभाव

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा छत्तीसगढ़
विधा रेखचित्र
विषय परिश्रम
शीर्षक  भेदभाव

             भेदभाव
            मै एक मध्यम वर्गीय परिवार से हूं और अपने ही लोगों और अपने ही जैसे परिवार के लोगों को एक ही जैसी वस्तु के लिए अलग अलग जगह अलग अलग व्यवहार करते देखा है।
                       उदाहरण के रूप में मै एक सब्जी वाले को ले रहा हूं। पहले जब मै भिलाई में अपने निवास में रहने नया नया आया तो मै शाम को पास में सब्जी खरीदने गया । पास में ही चौक के पास बहुत सारी दुकानें हैं उसमे सब्जी की भी दुकान है वहां पहले से कुछ लोग थे वे सब्जी को दिखाकर बिना छांटे ये इतना दे दो ये इतना दे दो कितना हुआ पैसा दिए सब्जी लिए चले गए। ऐसा एक नहीं सभी कर रहे थे मैंने भी सब्जी लिया और घर आ गया।
               दूसरे दिन सुबह घर के पास आवाज सुनाई आई 'सब्जी भाजी ले लो ओ सब्जी भाजी ' मै भी बाहर निकला क्योंकि कल की दुकान में भाजी नहीं मिला था। मैंने देखा लोग अपने घर से ही सब्जी का दाम पूछ रहे थे और मोल भाव कर रहे थे और जो ले रहे थे वे झुका के मांग रहे थे।
               वह महिला घर से 10/15km दुर पैदल आती हैं अभी भी आती हैं अभी भी उससे वहीं व्यवहार होता है।
                   काम उस बड़े दुकान वाले का भी सब्जी बेचना है और इस महिला का काम भी। पर परिश्रम किसका ज्यादा हैं और परिश्रम का फायदा हम किसे ज्यादा दे रहे हैं। विचारणीय विषय है......
        सूर्य प्रकाश पाटिल

Tuesday, October 20, 2020

बेमेतरा से सूर्य प्रकाश पाटिल की रचना- भावना

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा छत्तीसगढ़
विषय  भावना
शीर्षक मन की भावना
विधा छंद मुक्त कविता


         मन की भावना
भावना मन में रखिए ऐसी,
            भला सभी का हो जाए।
मेरा मन भी तर जाए,
             और तेरा भी तर जाए।
शरीर है मन्दिर समान,
             भावना उसकी आरती।
अच्छी भावना रख लो मन में,
              फिर चिंता हैं किस बात की।
भावना जैसी रहती मन में,
              मानव वैसा ही कर्म कर जाता।
कर्म करे फल पावे वैसा,
               वेदों में यह ज्ञान बताया।
भावना मन में रखिए ऐसी,
             भला सभी का हो जाए।
     सूर्य प्रकाश पाटिल

Monday, October 19, 2020

बेमेतरा से सूर्य प्रकाश पाटिल की रचना- ओस

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा छत्तीसगढ़
विषय ओस की बूंद
शीर्षक ओस की बूंदें और बेटियां
विधा छंद मुक्त कविता
दिनांक 19/10/20
  ओस की बूंदें और बेटियां

बेटियों का जीवन हैं,
              ओस की बूंदों की तरह
शीतलता आंखों को देती,
             हृदय को सुकून सा एहसास।
महत्व सब जानते हैं,
               इन दोनों का।
मगर दर्जा ऊंचा देने से,
             सब डरते हैं।
बराबरी का महत्व,
             देने से सब पीछे हटते हैं
घास पर पड़ी,
           ओस की बूंद का महत्व
क्या है सब जानते हैं,
              पर जूते वाले खाली पैर चलना कहां चाहते हैं।
इस कारण... ओस की बूंदों का अस्तित्व,
              प्रकाश बदल देता हैं
ओस को भाप बनाकर,
                 बादलों में उड़ा देता है।
ठीक इसी प्रकार.......
बिटिया भी जन्म लेती हैं,
               कई आशाएं लेकर
बड़ी होती हैं वो,
                   कई सपने संजोकर
एक दिन कोई अंजान,
                 प्रकाश बनकर आता है
और बिटिया के पिछले अस्तित्व,
               को मिटा देता हैं।
बेटियों का जीवन हैं,
              ओस की बूंदों की तरह
शीतलता आंखों को देती,
          हृदय को सुकून सा एहसास.,.....
सूर्य प्रकाश पाटिल

Saturday, October 17, 2020

बेमेतरा से सूर्य प्रकाश पाटिल कृत आलेख- नवरात्र

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा छत्तीसगढ़
विषय नवरात्र
शीर्षक कुसमी का नवरात्र पर्व
विधा आलेख

     कुसमी का नवरात्र पर्व
     नवरात्र अर्थात् नौ विशेष दिन जब देवी माता की उपासना का विशेष महत्व होता है। इन नवरात्र का हमारे भारत वर्ष में विशेष महत्व है क्योंकि इन नव दिनों में देवी मां के नौ अलग अलग रूपों की उपासना की जाती है। भारत वर्ष में प्रत्येक राज्य, प्रत्येक शहर एवम् गांव में देवी माता की पूरी श्रद्धा भक्ति के साथ उपासना की जाती है।
             आज नवरात्र का पहला दिवस है, और हम लोग अपने ग्राम मुख्यालय कुसमी के नवरात्र पर्व दुर है इस बात की हमे बहुत ज्यादा कमी महसूस हो रही है।ग्राम कुसमी, जो कि तहसील बेरला जिला बेमेतरा छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा गांव है। जहां हमने अपने पिछले 13 वर्ष बिताए और इसी वर्ष 3 माह पूर्व अपने निजनिवास में आए हैं।
               13 वर्षों में प्रत्येक वर्ष हमारे घर के सभी लोगों को और शायद पूरे गांव, आस पास के गांव वालों को भी कुसमी के नवरात्र पर्व का बेसब्री से इंतजार रहता था,रहता है। जिले के सबसे बड़े गांव में सर्व मत से एक ही जगह बाजार चौक में देवी माता की मूर्ति की स्थापना की जाती है प्रति वर्ष। मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित किए जाते हैं एवम् पूरे नौ दिनों तक हर वर्ष प्रकांड विद्वान पंडितों द्वारा श्रीमद्भागवत गीता का ज्ञान चलता रहता है, जिसे सुनने दुर दुर से श्रोतां आते हैं।
                प्रतिदिन संध्या आरती का दृश्य देखते ही बनता है प्रत्येक घरों से कोई ना कोई आरती का थाल सजा कर आरती करने पहुंचता है। तत्पश्चात जस मंडलियों द्वारा प्रतिदिन माता के जस का गान किया जाता है। इसप्रकार नौ दिन किस प्रकार बीत जाता है पता ही नहीं चलता। नवरात्र में मन इस प्रकार रम जाता था कि मन करता था पूरे वर्ष भर इसी प्रकार पर्व रहे।
         दसवें दिन विजय दशमी का पर्व भी पूरे धूमधाम और विधि विधान पूर्वक मनाया जाता है।
           माता जी की विसर्जन यात्रा भी धूमधाम के साथ पूरे गांव में निकली जाती हैं जस मंडलियों जस गीत गाते चलते हैं और खेल जंवरा वाले विभिन्न वेश भूषा में खेल दिखाते चलते हैं।
            इस प्रकार कुसमी का नवरात्र पर्व हमारे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में है हमारा तन आज वहां नहीं हैं पर मन पूरी तरह से वहीं लगा हुआ है। कुसमी में बिताए हुए दिनों को हमारे घर का कोई सदस्य भुला नहीं सकता खास तौर पर नवरात्र पर्व को.......
     सूर्य प्रकाश पाटिल


दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...