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Thursday, May 14, 2020

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम से महेन्द्र देवांगन "माटी" की रचना- तुलसी चँउरा

रचनाकार- - महेन्द्र देवांगन "माटी"
जिला - कबीरधाम 
शीर्षक  -- तुलसी चँउरा 
विधा -- छंद मुक्त रचना 


मोर अँगना में हाबे, तुलसी के चँउरा।
तीरे तीर खेलत हे, लइका मन भँउरा।।
नहा धो के दाई ह, पानी चढ हाथे।
संझा बिहनिया रोज, दीया जलाथे।।
तुलसी के मंजरी के, परसाद पाथे।
ओकर किरपा ले, अब्बड़ सुख पाथे।।
तुलसी चँउरा में,  सालिक राम हाबे।
कर ले पूजा संगी, आशीरवाद पाबे।।
जुड़ खाँसी सरदी, सबला मिटाथे।
नियम पुरवक जेहा, पत्ती ल खाथे।।
तुलसी मइया के तो , महिमा हे भारी।
एकरे सेती घर में, पूजा करथे नर नारी ।।
जय जय जय तुलसी मइया, तोर महिमा गावँव।
फूल पान नरियर मँय, तोला चढावँव।।

*महेन्द्र देवांगन माटी* 
 *पंडरिया छत्तीसगढ़*

Tuesday, November 26, 2019

छत्तीसगढ़ से महेन्द्र देवांगन माटी की रचना- आओ नमन करें

कवि  - महेन्द्र देवांगन माटी
शीर्षक  -- आओ नमन करें
राज्य  - छत्तीसगढ़
मो - 8602407353
आओ नमन करें

नमन करें प्रभु राम चंद्र को, नमन करें हम सीता को ।
नमन करें हम रामायण को, उपनिषद और गीता को।।
नमन करें हम मातु पिता को, नमन करें गुरु चरणों को।
नमन करें हम ईष्ट देव को, नमन करें सब वर्णों को।।
पढ़ो वेद गीता रामायण,  आदर्शों को अपनाओ।
घर घर में संस्कार भरो सब, अच्छी बातें बतलाओ।।
सत्य मार्ग पर चलना सीखो, झूठ कभी मत अपनाओ।
भूले भटके राह जनों को , सही मार्ग तुम दिखलाओ।।
महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया कबीरधाम
छत्तीसगढ़

Monday, September 30, 2019

छग से महेन्द्र माटी की रचना - कलम की ताकत

कवि - महेन्द्र देवांगन माटी
शीर्षक  -- कलम की ताकत
राज्य  -- छत्तीसगढ़
संपर्क  -- 9993243141

*कलम की ताकत*

समझ कलम की ताकत को अब , क्या से क्या कर देती है ।
कभी शांति की वार्ता लिखती , कभी युद्ध कर देती है ।।

कभी किसी की प्राण बचाती , कभी प्राण ले लेती है ।
अपराधी को सीधा करती , फाँसी भी दे देती है ।।

घाव बने जो तलवारों से  ,  जल्दी ही भर जाता है ।
अगर कलम से लिखा गया तो , कभी नहीं मिट पाता है ।।
*महेन्द्र देवांगन माटी*  ✍
*पंडरिया  (कबीरधाम)*
     *छत्तीसगढ़*

Monday, September 23, 2019

छत्तीसगढ़ से महेन्द्र देवांगन माटी की रचना- मोहनी

कवि का नाम  -- महेन्द्र देवांगन माटी
शीर्षक  -- मोहनी
राज्य  -छत्तीसगढ़
संपर्क  - 8602407353

*मोहनी*

शीतल जल में बदन भिगाकर , मन में आग लगाती हो ।
नयनों से तुम बाण चलाकर , दिल घायल कर जाती हो ।।

काली काली जुल्फों को तुम,  नागिन सी लहराती हो ।
मधुर मधुर मुस्कान फेंककर,  कितनों को डस जाती हो ।।

पाँवों की पायल झनकाकर , दिल में शोर मचाती हो ।
हाथों की कंगन खनकाकर , सबको नाच नचाती हो ।।

कोयल सी मीठी बोली से , सम्मोहन कर जाती हो ।
क्या जादू है पास तुम्हारे  , दिल को बहुत लुभाती हो ।।

गोरे मुख पर काला तिल है , मोहनी रुप दिखाती हो ।
मैं तो सीधा सादा बंदा , सपने में क्यों आती हो ।।

*महेन्द्र देवांगन माटी* ✍
*पंडरिया छत्तीसगढ़*
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Thursday, September 12, 2019

पंडरिया छत्तीसगढ़ से कवि महेन्द्र देवांगन माटी की कविता सुरता

नाम  -- महेन्द्र देवांगन माटी
शीर्षक  -- सुरता
पता -- पंडरिया छत्तीसगढ़
संपर्क- - 8602407353

लइकापन के आथे सुरता । पहिरे राहन चिरहा कुरता ।।
गुल्ली डंडा अब्बड़ खेलन । भौंरा बाँटी सबझन लेवन ।।

रेस टीप अउ छू छूवउला । घर घुँदिया अउ चुरी पकउला ।।
खो खो फुगड़ी खेल कबड्डी । लड़ई झगरा मिट्ठी खड्डी ।।

आमा अमली तेंदू खावन । सरी मँझनिया घुमेल जावन ।।
बइला गाड़ी दँउरी फाँदन । उलान बाँटी अब्बड़ खावन ।।

संझा बेरा सब सकलावन । मिल के सबझन गाना गावन ।।
कथा कहानी बबा सुनाये । किसम किसम के बात बताये ।।

अब तो संगी सबो नँदागे ।  मोबाइल मा सबो फँदागे ।।
खुसरे हावय घर के कुरिया । बइठे सबझन धुरिहा धुरिहा ।।

*महेन्द्र देवांगन माटी* ✍
*पंडरिया छत्तीसगढ़*

Monday, September 9, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि महेन्द्र देवांगन माटी की प्रकाशित कृति- नशापान छोड़ो

कवि -- महेन्द्र देवांगन माटी
शीर्षक- - नशापान छोड़ो
संपर्क  -- 8602407353
राज्य  - छत्तीसगढ़

नशा नाश का जड़ है प्यारे , इसको मत अपनाओ ।
स्वस्थ अगर रहना चाहो तो , सादा भोजन खाओ ।।
इज्जत पैसे दोनों होते , एक साथ बर्बादी ।
रोज लड़ाई झगड़ा होते , बनो नहीं तुम आदी ।।
टूटे घर परिवार सभी से , रिश्ते नाते छोड़े ।
ऐसी आदत वालो से अब , काहे रिश्ता जोड़े ।।
खाने को लाले पड़ जाते , बच्चे भूखे सोते  ।
जीना मुश्किल हो जाता है  , कलप कलप कर रोते ।।
मद्यपान अब करना छोड़ो,  सादगी को अपनाओ ।
मिट जायेगा क्लेश कलह सब , घर में खुशियाँ लाओ ।।
*महेन्द्र देवांगन माटी* ✍
*पंडरिया छत्तीसगढ़*

Thursday, September 5, 2019

पंडरिया छत्तीसगढ़ से कवि महेन्द्र देवांगन माटी की कविता- नमन करें

नाम - महेन्द्र देवांगन माटी
पता - पंडरिया छत्तीसगढ़
शीर्षक  - नमन करें
मोबाइल  -- 8602407353
*नमन करें*

नमन करें हम मातु पिता को ,  श्रद्धा सुमन चढाते है ।
नमन करें हम गुरु चरणों को ,  हमको राह दिखाते हैं ।।1।।

नमन करें हम धरती अंबर ,  सूरज चाँद सितारों  को ।
नमन करें परिवार जनों को , सुख दुख के सब प्यारों को ।।2।।

नमन करें हम देवी देवत,  जग के पालन हारी को ।
नमन करें हम पशु पक्षी को , उड़ते सब नभचारी को ।।3।।

नमन करें हम अरुण वरुण को , सबके जीवन दाता हैं ।
नमन करें हम मातृभूमि को , जो हम सबकी माता है ।।4।।

नमन करें पर्वत पठार को ,  नदियाँ झरने घाटी को ।
नमन करें हम इस वसुधा के,  कण कण पावन माटी को ।।5।।

*महेन्द्र देवांगन माटी* ✍
*पंडरिया छत्तीसगढ़*

Sunday, September 1, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि महेन्द्र देवांगन "माटी" (शिक्षक) की कृति- माँ की ममता

नाम  - महेन्द्र देवांगन "माटी" (शिक्षक)
पता -- पंडरिया  (छत्तीसगढ़)
मो नं -- 8602407353
शीर्षक  -- माँ की ममता
                 (सार छंद)

माँ की ममता होती प्यारी  , कोई जान न पाये ।
हर संकट से हमें बचाती , उसकी सभी दुआएँ ।।1।।

पल पल नजरें रखती है वह , समझ नहीं हम पाते ।
टोंका टांकी करती है जब , हम क्यों गुस्सा जाते ।।2।।

भूखी प्यासी रहकर भी माँ , हमको दूध पिलाती ।
सभी जिद्द वह पूरी करती , राह नया दिखलाती ।।3।।

सर्दी गर्मी बरसातों में , हर पल हमें बचाती ।
बुरी नजर ना लगे लाल को , आँचल से ढँक जाती ।।4।।

बड़े हुए जब बच्चे देखो , सपने सारे तोड़े ।
भूल गए उपकारों को अब , माँ से मुँह को मोड़े ।।5।।

हुए गुलाम बहू का देखो , माता बोझा लागे ।
बेटा जो नालायक निकला , कर्तव्यों से भागे ।।6।।

सिसक रही है माँ की आत्मा , कोने में है रोती ।
किस कपूत को जाया है वह , आँसू से मुँह धोती ।।7।।

जो करते अनदेखा माँ को , कभी नहीं सुख पाते ।
घूमता है जब चक्र समय का , जीवन भर पछताते ।।8।।

माँ तो ममता की मूरत है  , कभी नहीं कुछ लेती ।
गिरकर देखो चरणों में तुम  , माफी सब कर देती ।।9।।

"माटी" करते सबसे विनती ,  माँ को ना तड़पाओ ।
रखो ह्दय में माँ को प्रेम से , घर को स्वर्ग बनाओ ।।10।।

महेन्द्र देवांगन माटी (शिक्षक)
पंडरिया  (कबीरधाम)
छत्तीसगढ़
8602407353

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...