जिला- कोरिया, छ.ग.
विषय- जीवन
विधा- दोहा
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यदि है जीतना हमको, इस जीवन की जंग।
इसके हर पल क्षण निमिष, आओ भरे उमंग।।
संचय करो अकूत धन, लाख बढ़ाओ कोष।
जीवन उसका ही सुखी, जिसके मन संतोष।।
पार उतरना है मनुज, जीवन जलधि अथाह।
सार यह है प्रथम बनो, आप कुशल मल्लाह।।
करिए उसके बाद फिर, सब सपना साकार।
हो जीवन प्रतिकूल जो, उसका हो प्रतिकार।।
जीवन बगिया के पुष्प, विविध और बहुरंग।
इनको चले सहेजने, हम अपनों के संग।।
-- बिजेन्द्र अहीर
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