Tuesday, May 5, 2020

छत्तीसगढ़ से बिजेन्द्र अहीर की रचना- आओ वतन की राह चलें

नाम- बिजेन्द्र अहीर
राज्य- छत्तीसगढ़, जिला- कोरिया
शीर्षक- "आओ वतन की राह चलें"
मो.-  7049391780
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दिल में लेकर उमंगें , उत्साह चलें,
आओ वतन की राह चलें।

एहसान बहुत हैं, इस मिट्टी के हम पर,
करने को इसकी ,हम परवाह चलें,
आओ वतन की राह चलें।

 हालात बिगड़ रहे ,शरहदों में, चौराहों में,
भारत माता ने भरी, देखो आह चलें,
आओ वतन की राह चलें।

साजिशें हो रहीं, मुल्क  को तोड़ने की,
इससे पहले, हो यह तबाह चलें,
आओ वतन की राह चलें।

वतन परस्त, जिये मरे जो सरजमीं के वास्ते,
उनके बडे़ भाग्य, दिल से सराह चलें,
आओ वतन की राह चलें।
  
पैगाम भेजा है ये, प्यारे वतन ने,
रस्मे सरफरोशी को,अब निबाह चलें,
आओ वतन की राह चलें।

हित में नहीं भारत के,ये मजहबी सियासत,
मानकर हिमालय की,यह सलाह चलें,
आओ वतन की राह चलें।

सफल न हो पायी है ,अभी आजादी अपने मकसद में,
अय अहले वतन ,देश हो रहा गुमराह चलें,
आओ वतन की राह चलें

साहिल तक पहुंचना है,लेकर देश की कश्ती,
ले हाथों में पतवार ,बनकर हम मल्लाह चलें,
आओ वतन की राह चलें।

                 बिजेन्द्र अहीर

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