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Wednesday, May 27, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से श्रीमती उर्मिला सिदार की रचना- धरती

 रचनाकार -श्रीमती उर्मिला सिदार
 जिले का नाम- रायगढ़
 विधा-कविता
 शीर्षक- धरती सजाएं
         🌷धरती सजाएँ🌷

 आओ भगिनी आओ बंधुओं,
 बारिश आने वाली है,
 बीजों से नर्सरी लगाएंँ,
 पौधा रोपण करनी है।
आओ भाई जी ,आओ बहन जी,
 धरती को सजाना है,
 प्रकृति की संतुलन बना रहे,
 हमें ऐसा मन बनाना है।
 रसायन खेती की छुट्टी कर,
 जैविक खेती अपनाना है,
 ह्रासित धरा की मिट्टी को,
 पुनःउपजाऊँ बनाना है।
 विषाक्त भोजन से मुक्ति पाकर,
 शुद्ध भोजन उगाना है,
 स्वच्छ वातावरण बना रहे,
 हमें ऐसा योजना बनाना है।
 वीरान तन्हाई धरा को हम,
 पुनः हरियाली बनाएंगे, 
पशु पक्षी खुश होकर के ,
हमें मीठी तान सुनाएंँगे।
कीट पतंग मण्डरायेगे,
 जब डालो मैं कलियां खिलेंगे,
 भीनी भीनी मिट्टी की खुशबू ,
जब बारिश से हमें मिलेंगे ।
 वसुंधरा स्वर्ग बन जाए ,
  ऐसी मंगल गीत गाएंगे ,
 सर्व शुभ हो जग में सभी का,
 हम ऐसी व्यवस्था बनाएंगे।
 संबंध हमारा बना रहे,
 समृद्धि में हम जी पाएंगे,
 मिलजुल कर हम मानव जाति,
 सुखद वसुंधरा सजाएंगे।



व्याख्या- कवित्री इस कविता में धरती की सुंदरता की मनोकामना  करते हुए कहते हैं की है भाई बहन आओ सब मिलकर बारिश आने वाली है हम नर्सरी लगाएंगे और इस धरती को सजाने के लिए पेड़ पौधे लगाएंगे । रसायन खेती को त्याग कर जैविक खेती को अपनाएंगे और विषाक्त भोजन के बदले में हम शुद्ध भोजन हो जाएंगे पर्यावरण में स्वच्छ वातावरण बना रहे ऐसी हम योजना बनाएंगे और इस वीरान धरती को हम पुनः हरियाली से सजाएंगे इस वातावरण से खुश होकर पशु पक्षी कीट पतंग फूलों पर मंडराएंगी और मिट्टी की भीनी भीनी खुशबू बारिश आने पर उड़ेंगे कहने का मतलब है की वसुंधरा में प्रकृति का वातावरण शुद्ध रहने दे सभी तरफ खुशहाली का वातावरण बना रहेगा लोग इसे देखकर मंगल गीत गाते हुए सर्व सुख की कामना करते हुए अपने संबंध को प्रकृति से बना रहे ऐसा कामना करते हुए मानव जाति में समृद्धि का भाव हर परिवार में बना रहे और सभी सभी निबंध मिलजुल कर अर्थात संपूर्ण मानव जाति मिलजुलकर सुखद वसुंधरा को सजाने की कामना करते हैं।

Friday, April 3, 2020

छत्तीसगढ़ से श्रीमती उर्मिला सिदार की कविता

श्रीमती उर्मिला सिदार
छत्तीसगढ़
कविता


मानव की नासमझी से देखो,
आया है वायरस करोना।
दुनिया में तांडव मचा रखा है,
मानव हताहत न होना।
करोना से डरना नहीं है,
मन में भरोसा रखना है।
मन में जब शंका हो जाये तो,
बेमौत मरना होता है।
 चार दिन की चांदनी करोना का,
फिर अंधेरी रात आयेगा।
ब्लॉक डाउन पालन करके देखो,
करोना  वायरस मात खायेगा।
समस्या की निरंतरता होती नहीं,
एक दिन जरूर समाधान आयेगा।
मानव साहस से डटे रहने से,
निश्चित करोना  से निजात पायेगा।


दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...