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Tuesday, April 6, 2021

सुन्दर लाल डडसेना "मधुर" की रचना- वीर सैनिक

कवि- सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
जिला-महासमुंद, छत्तीसगढ़
शीर्षक-वीर सैनिकों की शहादत

रो रही है धरती देखो,माटी रक्त से लाल है।
अत्याचारी नक्सली,बिछाया कैसा जाल है।
तुम्हारी वीरता पर नतमस्तक है पूरी दुनिया।
घटती हरबार ये घटना,इसी बात का मलाल है।1।
माटी के वीर सपूत तुमने अपना फर्ज निभाया है।
जान हथेली पर रखकर, अपना कर्ज चुकाया है।
माँ भारती के वीर पुत्र तुम भले ही शहीद हुए हो।
पर अपनी वीरता से माँ भारती का मान बढ़ाया है।2।
देश तुम्हारे रक्त के एक एक कण का हिसाब मांगेगा।
पथ से भटके रक्त पिपासुओं का हर एक सांस मांगेगा।
बलिदान तुम्हारे रक्त का देश कभी न भूल पायेगा।
सीना चीर के आसमाँ से तुम्हें रोशन कर जाएगा।3।
कब तक लहू से लथपथ होगी,बस्तर की घाटी बताओ।
नक्सल का नासूर सहेगा कब तक छ.ग.की माटी बताओ।
जान न किसी सिपाही की जाने पाए,ऐसा कदम उठाओ।
रक्षा कवच से वीर जवानों की हिम्मत की परिपाटी बनाओ।4।
माँ भारती के बाइस सैनिक,अमर शहीद हो गए।
आघात दुश्मनों के सहकर,वो नींद में फिर सो गए।
बस्तर घाटी में नक्सलियों ने,कैसा खूनी खेल खेला।
अपनी स्वार्थपूर्ति के खातिर,इतने क्रूर कैसे हो गए।5।
      *सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"*
    साहित्य साधना सभा छत्तीसगढ़

Friday, November 13, 2020

महासमुंद से सुन्दर लाल डडसेना "मधुर" की रचना- दीपावली

कवि- सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
जिला- महासमुन्द(छत्तीसगढ़)
विषय- तब होगी सच्ची दीपावली

कुछ फूलों के खिलने से।
दिल में प्रेम के पलने से।
तब सच्ची है ये दीपावली।
मन में दीयों के जलने से।1।

चिरागों के  यूँ  जलने पर।
यश सुख वैभव हो हर घर।
तब सच्ची है ये दीपावली।
जब रौनक हो हर गांव शहर।2।

मासूम बच्चों  के  चेहरे में।
खिलखिलाती बंद शेहरे में।
तब सच्ची है ये दीपावली।
खुश हो बचपन गर पहरे में।3।

जन जन की सेवा सम्मान करें।
गरीबों के चेहरे में मुस्कान भरें।
तब  होगी सच्ची ये दीपावली।
दुखियों के दुख हर खुश करें।4।

गर ना हो सुख भैभव व विलास।
पर हो आदमी से आदमी को आस।
तब होगी सच्ची ये दीपावली।
जब मन में हो पूरा विश्वास।5।

न सोने चांदी गहनों की सौगात हो।
न धन धान्य भैभव की बरसात हो।
तब होगी सच्ची ये दीपावली जब।
किसी के जीवन में न काली रात हो।6।

*सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"*

Thursday, November 12, 2020

महासमुंद से सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- धनतेरस

कवि- सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
जिला- महासमुन्द(छत्तीसगढ़)
शीर्षक- धनतेरस व भगवान धन्वंतरि

अमृत कलश के धारक,सागर मंथन से निकले।
सुख समृद्धि स्वास्थ्य के,देव आर्युवेद के विरले।
चार भुजा शंख चक्र,औषध अमृत कलश धारी।
विष्णु के अवतार हैं देव,करें कमल पर सवारी।
आयुर्वेद के जनक धन्वंतरि,हैं आरोग्य के देवता।
कार्तिक त्रयोदशी जन्म हुआ,कृपा करें धनदेवता।
पीतल कलश शुभ संकेत,देते हैं यश वैभव भंडार।
आर्युवेद की औषध खोज,किया जगत का उद्धार।
धनतेरस को यम देवता की पूजा कर 13 दीये जलाएं।
धन्वंतरि जी कृपा करेंगे,यश सुख समृद्धि स्वास्थ्य पाएं।

*सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"*

Monday, October 5, 2020

सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- संस्कार देती है बेटी

कवि- सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
जिला- महासमुन्द(छत्तीसगढ़)
विषय-  *संस्कार देती है बेटी*

कर्म में सावन सी,जीवन में मनभावन सी बेटी।
दिल की धड़कन,तुलसी है आँगन की बेटी।
जगकल्याणी ममतामयी धरती का श्रृंगार है बेटी।
मन का उल्लास उमंग,गंगा सी पावन है बेटी।
सेवा कर्म ही सर्वोपरि है,समझदार होती है बेटी।
काम जो झटपट निपटाए,पल में दुःख हर लेती।
सबकी चिन्ता उसकी रहती,मया दुलार देती है।
पीहर हो या ससुराल,हर जगह संस्कार देती है बेटी।

Tuesday, September 8, 2020

सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- गुरु

कवि- सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
जिला- महासमुन्द,( छ.ग.)
शीर्षक- गुरु की महिमा

समर्पण,त्याग,निष्ठा व कर्तव्यबोध की मूर्ति।
राष्ट्र के नौनिहाल का भविष्य की कृति।
सर्वश्रेष्ठ देने का निरंतर अनवरत प्रयास।
है वो महान सरलता व सत्य की प्रतिमूर्ति।1।
जो माता-पिता या संरक्षक तुल्य है।
जो देता हमेशा ज्ञान व जीवन मूल्य है।
शिक्षक कोई व्यवसाय या कर्तव्य नहीं।
वरन ये तो नैतिक दायित्व समतुल्य है।2।
कर देता गुरुवर निज जीवन अर्पण है।
त्याग उनका शिक्षा के लिए समर्पण है।
ज्ञान-विज्ञान का विलक्षण ओजस स्त्रोत।
शिक्षक देश,समाज,परिवेश का दर्पण है।

*सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"*

Monday, July 27, 2020

महासमुन्द से सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- कलाम

कवि- सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
जिला-महासमुन्द(छत्तीसगढ़)
शीर्षक-माँ भारती की संतान-कलाम

दिव्य राष्ट्र हिंदुस्तान के,थे सच्चे संत महान।
भारत के वीर पुत्र,माँ भारती के सच्चे संतान।
राष्ट्रभक्ति के जीते जी मिशाल, मिसाइलमैन कलाम।
अब्दुल कलाम जी थे भारत के गौरव अभिमान।1।
मेरी लेखनी कलाम का गुणगान लिख नहीं सकता।
उनके व्यक्तित्व सा किसी का व्यक्तित्व दिख नहीं सकता।
लौट आओ फिर से नव पीढ़ी नवयुवकों के ज्ञानकलश।
अब कोई मुझे आप सा प्रेरणादायी दिख नहीं सकता।2।
कौशल पुरुष कुशाग्र मृदुवाणी से मंत्रमुग्ध कर जाते थे।
हाजिरजवाबी,विज्ञान महारत भारत को विकास की राह दिखाते थे।
थे महामहिम अब्दुल कलाम,धन्य धरा भारत के संरक्षक।
दिव्यास्त्रों के पूज्यजनक जीवन जीने की कला सीखाते थे।3।
*सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"*

Thursday, June 18, 2020

महासमुन्द से सुन्दर लाल डडसेना "मधुर" की रचना- गद्दार चीन

सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
जिला-महासमुन्द(छत्तीसगढ़)
शीर्षक- गद्दार चीन
विधा-मुक्तक



गुरुर मत कर इतना तू,तेरी जमीं पर तुझे हम खाक कर देगें।
भारत भू की रक्षा के लिए,तुझे भूपटल से ही साफ कर देगें।
माना शांतिदूत,धर्मनिरपेक्ष,पंचशील सिद्धांतवादी हैं हम।
गर आ गए जिद पर अपनी,जलाकर तुझे राख कर देगें।1।
चीन तेरी गद्दारी से,हर जेहन में है बदले की आग।
कभी बेकार होने न पाए,उन वीरों का बलिदान व त्याग।
ठंडी न पड़ जाए कभी,जो लगी हुई है सीने में आग।
बहुत हुआ गद्दारी वतन से,सोया हिंदुस्तानी अब तू जाग।2।
मौत को देकर चुनौती वो,भीषण रण में  तिरंगा फहराते हैं।
अंतिम क्षण तक मुख से अपने,वंदे मातरम् गाते हैं।
घात लगाए बैठे हैं शत्रु,सरहद पर गोली  चलाते हैं।
माँ-बाप घर द्वार छोड़कर,भारत माता हेतु सीने में गोली खाते हैं।3।
पाक से भी नापाक चीनी इरादों की,कई मंजर दिखाई दे।
उठाएं बहिष्कार का रास्ता,चीन में बंजर ही बंजर दिखाई दे।
मुँहतोड़ जवाब दें उसको,घमंड चकनाचूर हो जाए।
जिधर भी सीना उठाये चीन,उसे खंजर ही खंजर दिखाई दे।4।

*सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"*

Thursday, June 11, 2020

छत्तीसगढ़ से सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- मेरे हमसफर

*मेरे हमसफर*
हमसफर मेरे हमसफ़र,साथ है तू हर  डगर।
जब से आई हो तुम,जिंदगी लगे अब बेहतर।
        राह में गर कटंक आए।
      जीवन दुःख से भर जाए।
   पथ में शूल ही शूल बिछ जाए।
   गर जीवन में राह नजर न आए।
चलना तुम साथ मेरे दामन थामकर।
हमसफर मेरे हमसफर..................1.
       हो राहों में गर अंधेरा घना।
       जीवन में हो अवरोध बना।
    गर मुश्किलें हो बहुत ही भारी।
  लड़ते लड़ते बीत जाए उम्र सारी।
हो सफर कैसा भी हो साथ देना तुम उम्र भर।
हमसफर मेरे हमसफर......................2.
तू हमसफर तू हमडगर,तू ही है मेरा हमराज।
तू मेरी अधूरी जिंदगी का,नजर आती है ख्वाब।
कैसे कह दूँ जिंदगी उदास,साथ है तेरा अहसास।
साथ है तू मेरे लगता है अब हर दिन ही खास।
साथ है तू हमदम मेरे,बदल रहा मेरा मुकद्दर।
हमसफर मेरे हमसफ़र..........................3.
*सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"*

Tuesday, June 2, 2020

छत्तीसगढ़ के महासमुन्द से सुन्दर लाल डडसेना "मधुर" की रचना- प्रेम

नाम-सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
जिला-महासमुन्द(छत्तीसगढ़)
विषय-प्रेम
शीर्षक- परिवार का प्यार

माँ के ममता,
उसके प्यार का,
कोई मोल नहीं।
पिता के दुलार,
उसके संस्कार का,
कोई तौल नहीं।
जब भाई भाई,
के लिए लड़ता है,
तो प्रेम झरता है।
जब भाई भाई,
से लड़ता है,
कटुता बढ़ता है।
बहन के राखी,
की डोरी से,
संसार बंधा है।
बहन के प्रेम में,
हर भाई आज,
किस बात पर ठना है।
पत्नी के मोह में,
प्रेम की परिभाषा,
ही बदल गया।
परिवार का प्यार,
क्षण में ही देखो
कैसे जल गया।


सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"

Friday, May 29, 2020

छत्तीसगढ़ से सुन्दर लाल डडसेना की रचना- एक थे योगी

नाम-सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
जिला-महासमुन्द,छत्तीसगढ़
शीर्षक- *एक थे जोगी*

एक हुएँ अटल,अमर अजीत जोगी,बड़े हैं जो योगी।
कर्मठ,गुणी,विद्वान,और जनप्रिय नेता,थे बड़े गुणवान।
29  अप्रैल  1946  में  जन्में , मारवाही  हुआ धाम।।
काशी प्रसाद जोगी पिता , कांति मनी माता का नाम।
सदा  विजयी  रहे , अजीत  प्रमोद  जोगी  शुभ नाम।। 
बने शिक्षक, आई.पी.एस.,सीधी,इंदौर,रायपुर कलेक्टर।
2000 में नव-छत्तीसगढ़ के बने पहले चीफ़ मिनिस्टर।।
महान  लेखक ,  चिंतक , विचारक , दलित  राजनेता।
'दृष्टिकोण' , 'सदी के मोड़ पर'के हैं जो कुशल रचयिता।।
जनता कांग्रेस(जोगी)अध्यक्ष का बंधा था सिर पे सेहरा।
चला गया 29 मई 2020 को, एक बड़ा दलित चेहरा।।

Friday, May 22, 2020

छत्तीसगढ़ के महासमुन्द से सुन्दर लाल डडसेना "मधुर" की रचना- खुल गई है मधुशाला

नाम- सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
जिला- महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक- खुल गई है मधुशाला
विधा-  मुक्तक

बिकने लगी मदिरा,खुल गई है मधुशाला।
लंबी लंबी कतारें,छलक उठी है प्याला।
भूखे प्यासे मदिरा के,दौड़ पड़े पीने वाला।
चालीस दिन शांति रही,धधक उठी अब ज्वाला।1।
जीडीपी बढ़ाने को शराब बेच रही है सरकार।
अर्थव्यवस्था पटरी पर होगी,करेंगे उनका आभार।
पर सब्र का बाँध टूटे,लॉकडाउन न हो जाये बेकार।
बंदिशें खुली हैं,न मच जाए कोरोना की हाहाकार।2।
कोरोना तूने कैसा कहर है ढाया,पूरा संसार घबराया।
मंदिर मस्जिद बंद पड़े हैं,40 दिन बाद मधुशाला खुलवाया।
राशन पानी फ्री में मिले,जीडीपी की आस में देखो।
तपती गर्मी में,महंगी शराब के लिए लोगों को कतार में लगवाया।3।
मंदिर मस्जिद वोट दिलाये,नोट दिलाये मधुशाला।
कोरोना से हाहाकार मची,भीड़ जमाये मधुशाला।
भर भर झोली ले जाते,चेहरे चमकाए एक दो प्याला।
सड़कें बाजारें बंद पड़ी हैं,खुल गई है मधुशाला।4।

सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"


व्याख्या- इस कविता में कोरोना काल में 40 दिन बाद शराब दुकान खुलने से मची हाहाकार को इंगित करते हुए यह कविता लिखी गयी है

Thursday, April 30, 2020

छत्तीसगढ़ से सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना

नाम-सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
राज्य-छत्तीसगढ़,जिला-महासमुन्द
शीर्षक- जन्मदिन की अशेष शुभकामनाएं

कोई नहीं आज तक वह पल भुला।
माता पिता रिश्तेदार खुशी से झूला।
अवतरण के इस शुभ दिन में याद कर।
उनके विश्वास,मीठी यादों को मत भुला।1।
पक्षियाँ कलरव से गाई होगीं मीठे गीत।
हर्षित हुआ होगा माता पिता व मीत।
किलकारी आज भी गूँजता होगा कानों में।
भूलो न उस पल को फैलाओ तुम प्रीत।2।
बहनों के प्यार से सुगंधित हो जीवन।
माता के दुलार से आनंदित हो जीवन।
हर खुशी मिलती रहे दुआ है रब से मेरी।
रिश्तों की डोरी से बंधकर प्रफुल्लित हो जीवन।3।
सूरज,चाँद,सितारे महफ़िल सजाएँ हजार।
मिलता रहे माँ की ममता,बहनों का प्यार।
जीवन के शुभ दिन का मेरी तरफ से।
खुशियाँ छाए देता हूँ शुभकामनाएं बारम्बार।4।
जीवन की सार्थकता को बनाना काम तुम्हारा है।
स्वस्थ,सुखमय जीवन,तृप्ति हो नाम तुम्हारा है।
ईश्वर से विनती मेरी,उत्कृष्ट हो जीवन डगर।
मिलती रहे उन्नति,प्रगति,शिखर ये सम्मान तुम्हारा है।5।


सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"

Monday, December 9, 2019

छत्तीसगढ़ से सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- आजकल के पति-पत्नी

कवि- सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
शीर्षक- आजकल के पति-पत्नी
राज्य- छत्तीसगढ़,जिला-महासमुंद
मोब.- 8103535652

आजकल के पुरुष क्या गजब ढा रहे हैं।
पत्नी को मायके छोड़ खुशियां मना रहे हैं।
पत्नी को भूतनी, डायन बुला रहे हैं।
और पड़ोसन को डार्लिंग बुला रहे हैं।
और तो और पत्नी मायके से फोन करे तो।
फोन काटने को बीमार होने का बहाना बने रहे हैं।
फिर पड़ोसन से घंटों घंटों तक बतिया रहे हैं।
पत्नी मायके से आये तो पेट खराब होने का बहाना बना रहे हैं।
बाथरूम में बैठ के घंटों बतिया रहे हैं।
अब तो पुरुष बहुत ही गजब ढा रहे हैं।
व्हाट्सएप्प,फेसबुक से घण्टों बतिया रहे हैं।
आजकल की महिलायें भी गजब ढा रहीं हैं।
पुरुषों को बंदर नाच नचवा रहीं हैं।
जो किचेन में बिताए आधी लाइफ है।
लेकिन वो तो करती बातों ही बातों में सर्जिकल स्ट्राइक है।
सास बहू के सीरियल देख,पति का सिर घुमाती है।
मायके की बुराई सुन ली तो,काली का रूप दिखाती है।
जब से व्हाट्सएप का जमाना आया है।
पत्नी ने अपनी अष्टभुजी रूप दिखाया है।
पति को मायके जाने के लिए यूँ मनाया है।
गर ना माने तो फिर घर को सिर में चढ़ाया है।
फोन में ये भी कम बिजी नहीं रहते हैं।
ससुराल की एक एक बात मायके में कहते हैं।
पति पत्नी तो एक सिक्के के दो पहलू हैं
एक चला दूसरा रुका तो जीवन कठिन है।
पति चुपचाप चले तो पत्नी दौड़ती मशीन है।
दोनों में सूझ बुझ तो जीवन बहुत हसीन है। 
ये तो हर घर की ही कहानी है।
मधुर ने जैसे देखा वो उसकी जुबानी है।

सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"

Saturday, December 7, 2019

छत्तीसगढ़ से सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- मैं बेटी हूँ

कवि- सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
शीर्षक- मैं बेटी हूँ
राज्य- छत्तीसगढ़,जिला-महासमुंद
मोब.- 810353565

मैं फूल से कोमल कली हूँ ।
घर रोशन करूँ मैं खुद जली हूँ।
मैं अपने पापा की लाडली परी हूँ।
मैं ज्योत की सी रंगीन लड़ी हूँ।
प्रेम,दया,विश्वास की मैं खान हूँ।
भाई के लिए गीत तो बहन का गान हूँ।
मैं माँ की मान,पिता का अभिमान हूँ।
मैं बेटी ही तो दो कुलों का सम्मान हूँ।
मैं सीता सी पवित्रता की द्रोणी हूँ।
मैं राधा सी प्रेम की उत्तम श्रेणी हूँ।


सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"

Monday, November 25, 2019

छत्तीसगढ़ से सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- मैं बदल रहा हूँ

कवि- सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
शीर्षक- मैं बदल रहा हूँ।
राज्य- छत्तीसगढ़,जिला-महासमुंद
मोब.- 8103535652
         9644035652

1.शायद मैं
बदल रहा हूँ।
तेरी कई हरकतों से
मैं जिन्दा जल रहा हूँ।
शायद मैं बदल रहा हूँ।
2.तुम मुझे
पूछती हो बारम्बार
मैं जवाबों को सुनकर।
अपने आप को टटोल रहा हूँ।
शायद मैं बदल रहा हूँ
3.तुम मुझसे
लड़ते झगड़ते हो।
तो ऐसा लगता है
कोई शीत युद्ध चला रहा हूँ।
शायद मैं बदल रहा हूँ।
4.तुम जब
शांत रहती हो तो
ऐसा लगता है मानो।
सन्नाटा में मैं जकड़ रहा हूँ।
शायद मैं ही बदल रहा हूँ।
5. तुम शायद
मेरे जीने के ढंग।
बदलना चाहती हो हरदम।
पर मैं मनमर्जी में चल रहा हूँ।
शायद अब मैं बदल रहा हूँ।
6. मेरे लिये
जो दिन रात न सोये।
उनका दिल न दुखे कभी।
मैं चिड़चिड़ा,गुस्सैल,फिक्रमंद हो रहा हूँ।
शायद मैं अब तो बदल रहा हूँ।
7. अपनी
कमजोरी या ताकत को
हथियार बना खामोश रहता हूँ।
पर न जाने मैं कैसे गल रहा हूँ।
अब तो मधुर मैं बदल रहा हूँ।
सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"

Monday, November 18, 2019

छत्तीसगढ़ से सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- मेरी मां


कवि- सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
शीर्षक-मेरी माँ
राज्य-छत्तीसगढ़,जिला-महासमुंद
मोब.-8103535652
       9644035652
मैं हूँ
जिसकी छाया
वो है
करुण काया।
दुनिया में
कितने ही
रिश्ते अनेक।
माँ तेरी ही
ममता है
दुनिया में नेक।
जो देती मुझको
अभय दान ।
है दुनिया में
मेरी माँ महान।
सम्मान ही
तेरा अरमान
है माँ।
खुश रखूं
मैं तुमको
अरमान है माँ।
दुनिया को
तुझ पर
अभिमान है माँ।
तू ज्योत
बन कर
रोशन करती जहां।
प्रेम त्याग
से अपने
कमल खिलाती वहाँ।
_सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"

Tuesday, October 29, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की कविता- किलकारी ये गूँज उठी है मेरे आँगन में


कवि- सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
राज्य- छत्तीसगढ़,जिला-महासमुंद
शीर्षक- किलकारी ये गूँज उठी है मेरे आँगन में


किलकारी ये गूँज उठी है मेरे आँगन में।
शौर्यता का रूप बनी है मेरे आँगन में।
वीरता का गीत बनी है मेरे आँगन में।
किलकारी ये...........
1. जो खाली पन था,हमारे जीवन में।
जो सूनापन था ,मेरे आँगन में।
अब चमकेगा सितारा,अब दमकेगा जो तारा।
मेरे सपनों को,अपनी उड़ान भरने वाली।
मेरे जीवन का जो है बनने वाली है सहारा।
-सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पोस्ट-पाटसेन्द्री
तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ.ग.)
मोब. ८१०३५३५६५२
        ९६४४०३५६५२
ईमेल- sldmadhur13@gmail.com
आज दिनाँक 30.10.2019 को सुबह 4 बजे मेरी बेटी मेरी लक्ष्मी के अवतरण पर लिखी कविता

Tuesday, October 15, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- सूर्य


कवि-सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
शीर्षक- सूर्य
विधा- वर्ण पिरामिड(रुद्र)
राज्य-छत्तीसगढ़,जिला-महासमुंद
मोब. ८१०३५३५६५२
        ९६४४०३५६५२
            हे
           सूर्य
          देवता
        तुम ही हो
       जग के हर्ता
      हे पालन कर्ता
    तुम्हारी छाया में तो
   संसार का कल्याण है
तुम जग  के  सौगात हो
तुम हो  तो  दिन-रात है
तुम दीन हीन के जज्बात है
तुम ऊर्जा के विपुल भंडार
  तुम  वातावरण  के सार
  तुम जग को जागते हो
    हर  सुबह  आते हो
    अंधेरा  मिटाते  हो
     चार दिशाओं का
       बोध  कराते
         बलशाली
          तुम्हारी
            जय
             हो
सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पोस्ट-पाटसेन्द्री
तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ.ग.)
मोब. ८१०३५३५६५२
       ९६४४०३५६५२
ईमेल-sldmadhur13@gmail.com

Monday, October 14, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- बेटी का ये कैसा सम्मान?



कवि- सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
शीर्षक-बेटी का ये कैसा सम्मान?
राज्य-छत्तीसगढ़,जिला-महासमुंद
मोब.- ८१०३५३५६५२
        ९६४४०३५६५२

जहाँ स्त्री है,वहाँ श्री का वास है।
जहाँ ममता,दया,प्रेम और विश्वास है।
आज बेटियों पर हो रहा अत्याचार है।
फैला कैसा समाज में ये दुराचार है।
बहु,बेटी,माँ बहन के सम्मान का कैसा इंकार है।
निज घर से प्यार,तो दूसरों को कैसा दुत्कार है।
नारी का सम्मान,नर का स्वाभिमान है।
नारी की पूजा,प्रभु ईश्वर का सम्मान है।
कब तक निर्भया,आशिफ़ा का मिटेगा मान सम्मान है।
बेटी है किसी की,ये अंजान क्यों इंसान है।
जड़ें हिलती हैं,गर्भ में ही बेटी का क्यों शमशान है।
भ्रूण परीक्षण,बेटे बेटी में अंतर,आखिर ये कैसा सम्मान है।
सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
ग्राम- बाराडोली(बालसमुंद),पोस्ट-पाटसेन्द्री
तह.-सराईपाली,जिला-महासमुंद(छ.ग.)
मोब. ८१०३५३५६५२
       ९६४४०३५६५२
ईमेल- sldmadhur13@gmail.com

Friday, October 11, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- फूल

कवि- सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
शीर्षक- *फूल*
राज्य-छत्तीसगढ़,जिला- महासमुंद
मोब.-८१०३५३५६५२
       ९६४४०३५६५२
                 फूल
             की कहानी
           बताऊँ मैं तुम्हें
        जब बीज हुआ दफन
       तो पौधा बन कर तैयार
      पौधे में कली फूल बना है
  फूल महक से सारा जहां सना है
    सुगंध छटा बिखेरे फूल खड़ी
     न अपना पराया सबसे लड़ी
         कली बहार फूल की
         बीज शोभा धूल की
              है ये कहानी
                फूल की
  *सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"*
ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पोस्ट-पाटसेन्द्री
तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ.ग.)
मोब.-८१०३५३५६५२
        ९६४४०३५६५२
ईमेल- sldmadhur13@gmail.com

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...