Tuesday, April 6, 2021
सुन्दर लाल डडसेना "मधुर" की रचना- वीर सैनिक
Friday, November 13, 2020
महासमुंद से सुन्दर लाल डडसेना "मधुर" की रचना- दीपावली
Thursday, November 12, 2020
महासमुंद से सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- धनतेरस
Monday, October 5, 2020
सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- संस्कार देती है बेटी
Tuesday, September 8, 2020
सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- गुरु
Monday, July 27, 2020
महासमुन्द से सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- कलाम
Thursday, June 18, 2020
महासमुन्द से सुन्दर लाल डडसेना "मधुर" की रचना- गद्दार चीन
Thursday, June 11, 2020
छत्तीसगढ़ से सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- मेरे हमसफर
Tuesday, June 2, 2020
छत्तीसगढ़ के महासमुन्द से सुन्दर लाल डडसेना "मधुर" की रचना- प्रेम
Friday, May 29, 2020
छत्तीसगढ़ से सुन्दर लाल डडसेना की रचना- एक थे योगी
Friday, May 22, 2020
छत्तीसगढ़ के महासमुन्द से सुन्दर लाल डडसेना "मधुर" की रचना- खुल गई है मधुशाला
Thursday, April 30, 2020
छत्तीसगढ़ से सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना
Monday, December 9, 2019
छत्तीसगढ़ से सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- आजकल के पति-पत्नी
Saturday, December 7, 2019
छत्तीसगढ़ से सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- मैं बेटी हूँ
Monday, November 25, 2019
छत्तीसगढ़ से सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- मैं बदल रहा हूँ
शीर्षक- मैं बदल रहा हूँ।
राज्य- छत्तीसगढ़,जिला-महासमुंद
मोब.- 8103535652
9644035652
बदल रहा हूँ।
तेरी कई हरकतों से
मैं जिन्दा जल रहा हूँ।
शायद मैं बदल रहा हूँ।
2.तुम मुझे
पूछती हो बारम्बार
मैं जवाबों को सुनकर।
अपने आप को टटोल रहा हूँ।
शायद मैं बदल रहा हूँ
3.तुम मुझसे
लड़ते झगड़ते हो।
तो ऐसा लगता है
कोई शीत युद्ध चला रहा हूँ।
शायद मैं बदल रहा हूँ।
4.तुम जब
शांत रहती हो तो
ऐसा लगता है मानो।
सन्नाटा में मैं जकड़ रहा हूँ।
शायद मैं ही बदल रहा हूँ।
5. तुम शायद
मेरे जीने के ढंग।
बदलना चाहती हो हरदम।
पर मैं मनमर्जी में चल रहा हूँ।
शायद अब मैं बदल रहा हूँ।
6. मेरे लिये
जो दिन रात न सोये।
उनका दिल न दुखे कभी।
मैं चिड़चिड़ा,गुस्सैल,फिक्रमंद हो रहा हूँ।
शायद मैं अब तो बदल रहा हूँ।
7. अपनी
कमजोरी या ताकत को
हथियार बना खामोश रहता हूँ।
पर न जाने मैं कैसे गल रहा हूँ।
अब तो मधुर मैं बदल रहा हूँ।
Monday, November 18, 2019
छत्तीसगढ़ से सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- मेरी मां
शीर्षक-मेरी माँ
राज्य-छत्तीसगढ़,जिला-महासमुंद
मोब.-8103535652
9644035652
मैं हूँ
जिसकी छाया
वो है
करुण काया।
दुनिया में
कितने ही
रिश्ते अनेक।
माँ तेरी ही
ममता है
दुनिया में नेक।
जो देती मुझको
अभय दान ।
है दुनिया में
मेरी माँ महान।
सम्मान ही
तेरा अरमान
है माँ।
खुश रखूं
मैं तुमको
अरमान है माँ।
दुनिया को
तुझ पर
अभिमान है माँ।
तू ज्योत
बन कर
रोशन करती जहां।
प्रेम त्याग
से अपने
कमल खिलाती वहाँ।
Tuesday, October 29, 2019
छत्तीसगढ़ से कवि सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की कविता- किलकारी ये गूँज उठी है मेरे आँगन में
राज्य- छत्तीसगढ़,जिला-महासमुंद
शीर्षक- किलकारी ये गूँज उठी है मेरे आँगन में
शौर्यता का रूप बनी है मेरे आँगन में।
वीरता का गीत बनी है मेरे आँगन में।
किलकारी ये...........
1. जो खाली पन था,हमारे जीवन में।
जो सूनापन था ,मेरे आँगन में।
अब चमकेगा सितारा,अब दमकेगा जो तारा।
मेरे सपनों को,अपनी उड़ान भरने वाली।
मेरे जीवन का जो है बनने वाली है सहारा।
ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पोस्ट-पाटसेन्द्री
तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ.ग.)
मोब. ८१०३५३५६५२
९६४४०३५६५२
ईमेल- sldmadhur13@gmail.com
Tuesday, October 15, 2019
छत्तीसगढ़ से कवि सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- सूर्य
शीर्षक- सूर्य
विधा- वर्ण पिरामिड(रुद्र)
राज्य-छत्तीसगढ़,जिला-महासमुंद
मोब. ८१०३५३५६५२
९६४४०३५६५२
हे
सूर्य
देवता
तुम ही हो
जग के हर्ता
हे पालन कर्ता
तुम्हारी छाया में तो
संसार का कल्याण है
तुम जग के सौगात हो
तुम हो तो दिन-रात है
तुम दीन हीन के जज्बात है
तुम ऊर्जा के विपुल भंडार
तुम वातावरण के सार
तुम जग को जागते हो
हर सुबह आते हो
अंधेरा मिटाते हो
चार दिशाओं का
बोध कराते
बलशाली
तुम्हारी
जय
हो
सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पोस्ट-पाटसेन्द्री
तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ.ग.)
मोब. ८१०३५३५६५२
९६४४०३५६५२
ईमेल-sldmadhur13@gmail.com
Monday, October 14, 2019
छत्तीसगढ़ से कवि सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- बेटी का ये कैसा सम्मान?
शीर्षक-बेटी का ये कैसा सम्मान?
राज्य-छत्तीसगढ़,जिला-महासमुंद
मोब.- ८१०३५३५६५२
९६४४०३५६५२
जहाँ ममता,दया,प्रेम और विश्वास है।
आज बेटियों पर हो रहा अत्याचार है।
फैला कैसा समाज में ये दुराचार है।
बहु,बेटी,माँ बहन के सम्मान का कैसा इंकार है।
निज घर से प्यार,तो दूसरों को कैसा दुत्कार है।
नारी का सम्मान,नर का स्वाभिमान है।
नारी की पूजा,प्रभु ईश्वर का सम्मान है।
कब तक निर्भया,आशिफ़ा का मिटेगा मान सम्मान है।
बेटी है किसी की,ये अंजान क्यों इंसान है।
जड़ें हिलती हैं,गर्भ में ही बेटी का क्यों शमशान है।
भ्रूण परीक्षण,बेटे बेटी में अंतर,आखिर ये कैसा सम्मान है।
ग्राम- बाराडोली(बालसमुंद),पोस्ट-पाटसेन्द्री
तह.-सराईपाली,जिला-महासमुंद(छ.ग.)
मोब. ८१०३५३५६५२
९६४४०३५६५२
ईमेल- sldmadhur13@gmail.com
Friday, October 11, 2019
छत्तीसगढ़ से कवि सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- फूल
कवि- सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
शीर्षक- *फूल*
राज्य-छत्तीसगढ़,जिला- महासमुंद
मोब.-८१०३५३५६५२
९६४४०३५६५२
फूल
की कहानी
बताऊँ मैं तुम्हें
जब बीज हुआ दफन
तो पौधा बन कर तैयार
पौधे में कली फूल बना है
फूल महक से सारा जहां सना है
सुगंध छटा बिखेरे फूल खड़ी
न अपना पराया सबसे लड़ी
कली बहार फूल की
बीज शोभा धूल की
है ये कहानी
फूल की
*सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"*
ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पोस्ट-पाटसेन्द्री
तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ.ग.)
मोब.-८१०३५३५६५२
९६४४०३५६५२
ईमेल- sldmadhur13@gmail.com
दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत
कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528 दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो काति...




