Showing posts with label राहुल कुमावत. Show all posts
Showing posts with label राहुल कुमावत. Show all posts

Sunday, November 1, 2020

राजस्थान से राहुल कुमावत की रचना- सबक जिंदगी के

नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर) राजस्थान 
शीर्षक - सबक जिंदगी के
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
किस्मत, वक्त, नफरत, प्यार
यहाँ सब कुछ बदलता है यार

मौका, धोखा, जीत और हार
कभी भी मिल जाए ये चार

दुनिया, दौलत, दिखावा, गुरूर
आज है पास तो कल सब दूर

चोरी, डाका, लूट और फरेब
इन सब से भली फटी हुई जेब

आदत, आफत, स्वार्थ, बीमारी
ये लग जाए तो सबसे भारी

°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
राहुल कुमावत

Monday, June 15, 2020

राजस्थान से राहुल कुमावत की रचना- घनघोर अंधेरा

नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर) राजस्थान 
शीर्षक - घनघोर अंधेरा 
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
घनघोर अंधेरा जब जीवन में 
कड़ी चुनौती लाएगा
तेरे भीतर का प्रकाश ही तुझको
नई राह दिखलायेगा
डरना ना अंधेरों से इक पल
कितनी भी भयंकर हो हलचल
आंधी में शमा को जला देना
जलती शमा के साथ तू जल
गर लपटों से मन झुलसे, तो
सूरज की और तू तक लेना
औरों को रोशन करना है, तो
आग भी थोड़ी चख लेना
ये आग तेरी तुझको इक दिन
सोने सा चमका देगी
संघर्षों के मैदान में तुझको
जीत का तमगा देगी
तेरे जीवन का तू ही कर्ता
ना सोच की ना कर पाएगा
संघर्ष बिना कोई जिया नहीं
गर हारा तो मर जाएगा
घनघोर अंधेरा जब जीवन में 
कड़ी चुनौती लाएगा
तेरे भीतर का प्रकाश ही तुझको
नई राह दिखलायेगा

Monday, June 8, 2020

राजस्थान से राहुल कुमावत की रचना- सरगम

नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर) राजस्थान 
शीर्षक - इज्जत हो जज्बात की ( सरगम )
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
"सा" से सारे मिलकर बदलें
"रे" से रेखा हाथ की
"ग" से गाना ऐसा गाओ
इज्जत हो जज्बात की

"म" से मानवता दिखलाओ
"प" से पाप को दूर भगाओ
"ध" से बहती धारा हो तुम
रोके ना हालात भी
गा से गाना ऐसा गाओ
इज्जत हो जज्बात की

"नि" से निर्बल अब ना हारे
"सा" से साहस तुम दिखलाओ
जैसे लय है, हर इक धुन में
जीवन में खुशियां भर जाओ

सात सुरों सा ये जीवन है
सरगम जिसकी अपना मन है
शब्दों का है अनोखा दर्पण
दिखता जिसमें जग पावन है

लिखदो सारे आज कहानी
सच्चे मन की बात की
गा से गाना ऐसा गाओ
इज्जत हो जज्बात की
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
राहुल कुमावत
कारीगर कलम का

Wednesday, May 27, 2020

राजस्थान से राहुल कुमावत की रचना- मजदूर

नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर) राजस्थान 
मोबाइल - 9982393078
शीर्षक - कहानी मजदूर की
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
गांव की मिट्टी छोड़कर
शहरों से रिश्ता जोड़कर
मजबूर चेहरा लेकर गया था
लौट आया रुमाल ओढ़कर

महामारी ने छीन ली रोजी - रोटी
जोरू चले साथ लिए बच्ची छोटी
सरकार पड़ी बेहोश दर्द क्या जाने
कभी आदमी उठाता सामान
कभी औरत ढोती
क्या फायदा साहब 
बार - बार हाथ जोड़कर
लौट आया अकेला ही
रुमाल ओढ़कर

जो सीखा वही काम आया 
मेहनत... मजदूरी
पैरों के तलवे पत्थर 
तय कर गए दूरी
मीलों लंबे रास्ते...
साईकिल और जख्मी पैर
लौट आए अपने गांव को
हाय कैसी मजबूरी
हर किसी ने देखा सफर में
पांव के छालों को फोड़कर
लौट आया अकेला ही
पैदल... रुमाल औढ़कर

कुछ लोग मिले सफर में, जो
मदद को आगे आए
देकर खाने के पैकेट
फोटो साथ खिंचवाए 
मीडिया वाले बाबूजी ने
पूछे कई सवाल
कैमरे में रिकॉर्ड किया
सबका बुरा हाल
गाड़ी वाले भी निकल गए
मुंह हमसे अपना मोड़कर
लौट आया पैदल ही
मीलों - मील 
मुंह पर रुमाल औढकर
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)

Tuesday, May 5, 2020

राजस्थान से राहुल कुमावत की रचना- महाकाल

नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर) राजस्थान 
मोबाइल - 9982393078
शीर्षक - "महाकाल"
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
सत्य का प्रमाण लो 
पहले खुद को जान लो
बेवजह ना जुर्म करके 
दूसरों की जान लो
पक्षपात,आतंकवाद
संतो पर छिड़ा विवाद
सत्य की खेती जहां
बिके वहीं झूठा खाद
बो के काटते जाने
कैसी ये फसल
सीखेगी इनसे क्या
आने वाली नसल
खुद को बड़ा कहते
बढ़ते ओरों को कुचल
अनपढ़ सीखाए राजनीति
कर - कर के नकल
नरसंहार, अत्याचार
क्रूरता, बलात्कार
चोरी और चुगली 
घूसखोरी, भ्रष्टाचार
इन सब से भी ना भरे
हैवानियत का मन
तो अपनों को ही दे रहे
अपने गलत विचार
चार शब्द सीख के
कहते हम पुजारी है
दुनिया को जो ठग रहे
वही असल जुआरी है
घूमकर मौत ने 
बता दिया सबको
लाचार सा घर में ही 
बिठा दिया सबको
अब बाहर निकलने से
इंसान भी कतराता है
होता है ऐसा ही... 
जब काल मंडराता है
सत्य के समक्ष जब भी
झूठ इतराता है
काल का ये रूप तब ही
महाकाल बन जाता है
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
कारीगर कलम का

Wednesday, April 29, 2020

राजस्थान से राहुल कुमावत की रचना- तुझमें भी मुझमें भी

नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर) राजस्थान 
मोबाइल - 9982393078
शीर्षक - तुझमें भी मुझमें भी
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
हौसलों में कसक मेरे भी है
लहू में ललक मेरे भी है
चाहे तुम करदो मुझको
भीड़ से जुदा
अकेले लड़ने की हिम्मत
मुझ में भी है
हौसलों में कसक...

खोकर जमाने को पाया है खुदको
दर्द ने जबसे रुलाया है मुझको
अपने वजूद से हर पल लड़ा है
मेरा खुदा भी मेरे साथ खड़ा है
जीने की तलब मुझ में भी है
हौसलों में कसक...

तुझमें भी दिल है, मुझमें भी दिल है
दिल का ठिकाना तो सबकी मंजिल है
बस इस जिस्म से ही तो पराये है सब
वरना तो सब में दिल एक ही शामिल है
और एक बराबर रूह है अपनी
जो तुझ में भी है, वो मुझ में भी है
हौसलों में कसक...
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
कारीगर कलम का

Monday, April 20, 2020

राजस्थान से राहुल कुमावत की रचना- ये ज़माना

नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर) राजस्थान 
मोबाइल - 9982393078
शीर्षक - ये ज़माना
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
मुहब्बत में इक दूजे को परखने का वक्त आ गया
ए यार ये जमाना भी बड़ा सख्त आ गया
घर की दीवारों पर नाम तुम्हारा लिख लेते हैं
फिर पढ़तें हैं ऐसे, जैसे तुम्हारा खत आ गया
मुहब्बत में इक दूजे को...

घर की चारदीवारी में, अब ख्वाब टटोलते है
भीड़ में खोई हुई दिल की किताब खोलतें हैं
आवाज़ों में कहां हो पाती थी खुद से बातें
अब शामों सहर कैद में दिल के अरमान बोलते हैं
सुना है दिल तेरी यादों की शौहरत पा गया
मुहब्बत में इक दूजे को...

लड़ाई - झगड़े, किस्से, कहानियां तेरे मेरे प्यार की
इस रूह से है जुड़ी हुई, अब दूर ना हो इक बार भी
तू अपने घर, मैं अपने घर, है घर में ही महफूज शहर
आ हम तुम दोनों ही सह लें, यादों की थोड़ी मार भी
ये दिल अब दूरियों की थोड़ी और मोहलत पा गया
मुहब्बत में इक दूजे को...
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
कारीगर कलम का

Monday, April 13, 2020

राजस्थान से राहुल कुमावत की रचना- मेरा ये दिल

नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर) राजस्थान 
मोबाइल - 9982393078
शीर्षक - मेरा ये दिल
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
मेरा ये दिल, अब तेरा हुआ
मुझको जो तूने, ऐसे छुआ
जैसे सूरज की पहली
किरण है उतरती
करने जमीं को सुर्ख गेरुआ
मेरा ये दिल...

राहों में तेरी,दिन ये गुजारूं
बाहों में रातों को,तारे उतारूं
तेरी महक से हो, एहसास मेरा
तू खुशबू है, और मैं हूं जैसे हवा
मेरा ये दिल...

मिट सी गई है, देखो दूरियां भी
अब दरमियां है बस, नजदीकियां ही
दूर तू मुझसे, होना ना इक पल
रहना तू, मुझमें हर पल रंवा
मेरा ये दिल...
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
कारीगर कलम का

Tuesday, April 7, 2020

राजस्थान से राहुल कुमावत की रचना- जिंदगी

नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर) राजस्थान
मोबाइल - 9982393078
शीर्षक - "जिंदगी" तुझे है आजमाना
******************************
खेल कर मुझसे दिल बहल जाये तो बताना
जिंदगी मुझे भी है, फिर तुझको आजमाना
तू थक जायेगी मुझको परेशान करते - करते
तुझे लाना होगा मेरे जैसा कोई नया  जमाना

हार कर बैठ जाऊँ,फितरत नहीं मेरी
तेरी साजिशों से ना लङ पाऊँ
ऐसी काबिलियत  नही मेरी
तेरे छोटे से दर्द से, पलट दूं अपने रास्ते
इतनी कमजोर तो
तबीयत नही मेरी
फिर मुझे गिराने का नया ढूंढ कोई बहाना
जिंदगी मुझे भी है, फिर तुझको आजमाना

रणभूमि में झूकता नहीं, साहस कभी वीर का
मैं खुद ही तो स्वामी हूँ, स्वयं की जागीर का
क्यों दूं भला मैं हक किसी को, मेरे निर्णय लेने का
ये स्वयं मेरा अधिकार है, मेरी जीत मेरी हार का
ये मेरी है हकीकत, और मेरा ही फसाना
जिंदगी मुझे भी है, फिर तुझको आजमाना
*******************************
नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
कारीगर कलम का

Tuesday, March 31, 2020

राजस्थान से राहुल कुमावत की रचना- कोरोना

नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर) राजस्थान
मोबाइल - 9982393078
शीर्षक - "कोरोना" (एक त्रासदी)
******************************
मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर में
आज लगा है ताला
अस्पतालों में है जूझ रहा 
इंसानों का रखवाला

 चीख रही है, आज मानवता
लगा रही है, आज गुहार
केसी ये महामारी फेली
नही कहीं, कोई उपचार

भारत,अमेरिका,इटली क्या
पूरा ही ये जहान
घर के भीतर, रो रहा
बाहर है शमशान

सब बैठे हैं, टी वी पर
देखो लगाए कान
बार - बार है देखते
अब कितनी गई जान

मानव को प्रकृति ने
दिया था, इक वरदान
जो भी चाहो, ले लो मुझसे
फल, सब्जी और धान

बदले में मानव ने अपनी
ताकत इसे दिखाई
न्यूक्लियर बॉम्ब और धुएं की
एक नई दुनिया बसाई

कुदरत को देकर, जहर का प्याला
खुद बन बैठा, मालामाल
आज धरती का कर्ज, चुका रहा है
आम आदमी, होके हलाल
*******************************
नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
कारीगर कलम का

Tuesday, March 24, 2020

राजस्थान से राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार) की रचना- कोरोना

नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर) राजस्थान
मोबाइल - 9982393078
शीर्षक - "कोरोना" व्यंजन वर्णमाला
******************************
क से कोरोना इस से डरो ना
ख से खांसो तो मुँह को ढ़को ना
ग से गहरा इसका पहरा
घ से घर में अब तुम रहो ना
च से चहरे पर मास्क लगाओ
छ से छींको तो रुमाल लगाओ
ज से जानलेवा इसका कहर है
झ से झुंड ना तुम बनाओ
ट से टीका इसका नहीं है
ठ से ठहरा ये अब तक नहीं है
ड से डरना इससे जरूरी
ढ से ढकना मुंह को सही है
त से त्वचा पर ये रहता है
थ से थोड़े से बढ़ता है
द से दस्तक इसकी भारी
ध से धोखा ये देता है
न से नमस्ते ही सही है
प से पीड़ित भी कई है
फ से फैला इसका वायरस
ब से बड़ी विकट घड़ी है
भ से भारत बंद है देखो
म से मकानों में सब जन है
य से युद्ध कोरोना से है
र से रक्षा ही जीवन है
ल से लक्षण दिखते ही तुम
व से वक़्त पर संभल जाओ
श से शंका अगर हो इसकी
ष से षड्यंत्र में फंसना नहीं 
स से समय पर फोन लगाओ
ह से हल निकलेगा कोई
क्ष से क्षणभर तकलीफ उठाओ
त्र से त्रासदी ना बन जाए
ज्ञ से ज्ञान अब तुम भी लगाओ
*******************************
नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
कारीगर कलम का

Monday, March 16, 2020

राजस्थान से राहुल कुमावत की रचना- कोरोना का कहर

नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर) राजस्थान
मोबाइल - 9982393078
शीर्षक - कोरोना का कहर
******************************
कोरोना के कहर का 
कैसा कत्लेआम
काल की करतूत का 
कलयुगी कोहराम

जन-जन जुटाए 
जानकारी जिसकी
पर कहीँ ना मिली 
दवाई इसकी

खबरें खलबली 
खौफ खतरनाक
छीकें तो ढकें 
रूमाल से नाक

असमंजस अफरातफरी 
आफत अभी अधुरी
बात करते वक्त रखें
एक मीटर की दूरी

चीन चकित 
चकाचौंध
चट चकराई
तन,बर्तन और 
घर-आंगन की
करते रहो सफाई

मौसम मायाजाल
महावारी मंडराई
देखो अब हर 
देश के ऊपर
कैसी आफत आई

ये कैसी...
आफत आई...
*******************************
नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
कारीगर कलम का

Wednesday, March 11, 2020

राजस्थान से राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार) की रचना- रंगों का मौसम

नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर) राजस्थान
मोबाइल - 9982393078
शीर्षक - रंगों का मौसम
******************************
खुशीयों का आलम छाया है
रंगों का मौसम आया है
मस्ती है भरी हवाओं में
हर चेहरा आज मुस्काया है

यारों की टोलियाँ बस्ती में
और थाप चंग की मस्ती में
हर गीत मन को भाया है
रंगों का मौसम आया है

कहीं गुलाल कहीं पिचकारी है
कहीं गूँज कहीं किलकारी है
हर आँगन खिलखिलाया है
रंगों का मौसम आया है
*******************************
नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
कारीगर कलम का

Monday, February 17, 2020

राजस्थान से राहुल कुमावत की रचना- कोशिश जारी है

नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर) राजस्थान
मोबाइल - 9982393078
शीर्षक - कोशिश जारी है
******************************

अंजाम-ऐ-मुकद्दर जो भी हो 
आगाज हुनर का जारी है... 
रंगों से सजी तस्वीर मैंने  
कागज़ पे कलम से उतारी है

किस्मत का खेल नहीं है,ये  
ख्वाबों की कारगुजारी है...
सदियों का प्यासा हूँ,मैंने 
सागर में रात गुजारी है

कुछ कदम चला फिर गिरा हूँ,मैं
फिर से उठने की बारी है...
उठकर जो चलना सीख लिया
फिर मंजिल की तैयारी है 

हूँ,ग़म में भी हँसकर ही जीया 
जूनून की हिस्सेदारी है...
जो दिल ने कहा बस वो ही किया 
हर हाल में कोशिश जारी है  

*******************************
नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)

Tuesday, February 11, 2020

राजस्थान से राहुल कुमावत की रचना- क़र्ज़

नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर) राजस्थान
मोबाइल - 9982393078
शीर्षक - क़र्ज़ (नज़्म)
*******************************
                       क़र्ज़

खड़ा था कुछ पल 
उसी रास्ते पर
जहां तुम मुझे
छोड़कर गये थे

रोया था हर पल 
तुम्हारे वास्ते,मगर..
कहाँ ये दिल 
तोड़कर गए थे

तुम लौटे थे वापस
दुनिया से चेहरा छुपाकर
मालूम है...
मैंने सुना है घर से नकाब 
ओढकर गए थे

पर तुमने जरा देर करदी
उस गली में,आने में 
मुझे बहोत वक़्त लगा
नया रास्ता बनाने में

कुछ तुम्हारी बातें थी
जो मेरे कानों में
गूंजती थी...
कुछ तुम्हारी यादें
जो मेरी आँखें 
मुंदती थी...

एक तुम्हारा अक्श था
जो मेरे जेहन में उतर
गया था...
और एक तुम्हारा झुमका 
जो तुम्हारे कान से उतर 
गया था

मैं छोड़ आया,सब कुछ
तुम्हारा...
उसी रास्ते के नुक्कड़ पर

मुझे पता था 
भूले भटके ही सही
इक रोज,तुम आओगे
और मुझपर उधार था,जो
तुम्हारा कर्ज 
तुम जरूर लेकर जाओगे
*******************************
नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
कारीगर कलम का

Monday, February 3, 2020

राजस्थान से राहुल कुमावत की रचना- जिन्दगी

नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर) राजस्थान
मोबाइल - 9982393078
शीर्षक - जिन्दगी 
*******************************
थोड़ा सा है किस्सा
थोड़ी सी कहानी
जिन्दगी है क्या ?
बस बहता सा पानी

तलाश है खुद की
खुद पे ही ख़तम
गर मानो तो खुदा
ना मानो तो वहम

दिखती सी हकीकत
टूटता सा भरम
कोशीशों की है रहमत
खुदा का करम

थोड़ा सा है बचपन
थोड़ी सी जवानी
जिन्दगी है क्या ?
बस बहता सा पानी
*******************************
नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
कारीगर कलम का

Monday, January 27, 2020

राजस्थान से राहुल कुमावत की रचना- अंतर्मन की गूँज

नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर) राजस्थान
शीर्षक - अंतर्मन की गूँज
*******************************
अंतर्मन की गूँज

अंत भले हो जाए पर जो
हार अंत तक ना माने
वही आदि वही अनंत है
जो अंतर्मन पहचाने

बाधाएँ लाख मिले बेशक 
बेशक बिछे हो अंगारे
हर मुश्किल से टकराकर जो
मुश्किल का हल पहचाने
वही आदि वही अनंत है
जो अंतर्मन पहचाने

गलती खुद से हो जाने पर
खुद की गलती स्वीकारे
गलती ओरों से होने पर 
वो उनको ना धुतकारे
खुद की तरहा जो ओरों को
अपना ही रूप माने
वही आदि वही अनंत है
जो अंतर्मन पहचाने

शत्रु का संहार करे
ना क्रोध से हाहाकार करे
वो लोहा ले जब शत्रु से
शत्रु भी हार स्वीकार करे
फिर क्षमा करके जो शत्रु को
मित्र सा अपना माने
वही आदि वही अनंत है
जो अंतर्मन पहचाने
*******************************
नाम - राहुल कुमावत 
कारीगर कलम का

Wednesday, January 22, 2020

राजस्थान से राहुल कुमावत की रचना- कहानी पेड़ की(Save Trees)

नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर) राजस्थान
मोबाइल - 9982393078
शीर्षक - कहानी पेड़ की(Save Trees)
*********************************
कहानी पेड़ की

आसमां की चादर तले
धरती ने ख्वाब सजाया था
औरों की खातिर जीने का
मतलब हमें बताया था
फिर मतलब की किसी दौड़ में
इंसान हुआ मशगूल
अपने पैरों पर मार कुल्हाड़ी
कर बैठा वो भूल
तुम पेड़ो को ही देख लो
वो बढ़ते है जो शान से
हमसे वो प्यार करतें है
ज्यादा अपनी जान से
प्राणों में वायु भरतें हैं
और छाँव सूकून की लाते हैं
हर ऋतुओं में तरहा-तरहा के
फल हमें खिलातें हैं
इतना सब कुछ देकर भी
वो हमसे कुछ ना चाहते हैं
और स्वार्थ पूर्ति के बाद बिचारे
झट से काटे जातें हैं
औरों की खातिर जीतें हैं
औरों से प्यार वो करतें है
फिर औरों की ही,खातिर...
हर बार वो जिन्दा मरतें हैं
इस कुर्बानी की दौड़ में 
कहीं हाल ना ऐसा हो जाए
प्रकृति से खिलवाड़ कर
इंसान बेहाल ना हो जाए
*******************************
नाम - राहुल कुमावत
कारीगर कलम का

Monday, January 13, 2020

राजस्थान से राहुल कुमावत की रचना- कहानी इंसान की..

नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर) राजस्थान
शीर्षक - कहानी इंसान की...
*******************************
               कहानी इंसान की

अपना किरदार अक्सर,ढूंढता रहता है
हर इंसान यहाँ अपनी,धुन में रहता है 
कभी रुके पानी सा,कभी नदी सा बहता है
कभी शांत सन्नाटे सा,कभी गुनगुनाता रहता है 
जीवन की उधेड़बुन में,सुई सा लगा रहता है
हर इंसान यहाँ अपनी,धुन में रहता है 

कभी आग सा गरम,कभी हीम सा शीतल
कभी कांच सा पारदर्शी,कभी सोना कभी पीतल 
कभी अनकही सी बात,कभी दिन कभी रात
कभी नयी-नयी सी बातें,कभी पुराने खयालात

कभी धुप में तपना,और रेगिस्तान में चलना
बाधाओं को पार कर,आगे निकलना 
कभी डर से डरना,और लक्ष्य से फिसलना 
अमृत पिकर भी जैसे,पड़ा हो विष निगलना 

कभी कल्पना का संसार,कभी पत्थर की दिवार
कभी सुख,कभी दुःख,कभी नफरत,कभी प्यार
कभी चमकदार रौशनी सा,कभी गहन अंधकार
कभी अनसुलझी पहेली,कभी सुलझे विचार 

एक सिक्के के दो पहलूओं सी,बनावट है जहान की
कुछ ऐसी ही अनोखी सी,कहानी है इंसान की

*******************************
नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
कारीगर कलम का

Monday, December 30, 2019

राजस्थान से राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार) की रचना- कान्हा की मुरली

नाम - राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर)
राजस्थान
शीर्षक - "कान्हा की मुरली"
**********************
       "कान्हा की मुरली"

कान्हा ने मुरलिया ऐसी बजाई
सुन गुजरिया दौड़ी आई
कृष्ण की धुन में ऐसी समाई
बीती सारी बात भुलाई

श्याम रंग में रंगी चुनरिया
बन गई देखो सब बावरिया
जल भर लाइ देखो गगरिया
मटकी फोड़ी क्यू सावरियां

मोहित छवि जहां से न्यारी
मन में समावे कृष्ण मुरारी
राधिका बनी श्याम की प्यारी
मीरा है हरी नाम  दुलारी

मोरछड़ी अति सुन्दर लागे
हीरे-मोती मुकुट पर साजे
कान में कुंडल,हाथ बाजुबंध
और पैर पैजनिया बाजे

राग-रागिनी साज सुनावे
बांस-बांसुरी अधर लगावे
गोपियाँ धुन हरी नाम की गावे
मोहन जब मुरली बजावे
***********************
नाम- राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
कारीगर कलम का

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...