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Friday, April 16, 2021

रीता चटर्जी की रचना- जहाज़

रचनाकार रीता चटर्जी
स्थान खोंगापानी
जिला कोरिया छत्तीसगढ़
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विषय जहाज
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शीर्षक हवाई जहाज

आसमान से बातें करता दूर दिगांतर में,
हौसले बुलंद कर उड़े वायु वेग से।

बचपन में कागज से बनाए कितने ही जहाज
देखने को दौड़ पड़ते जब कान में आते इसके आवाज।

पंखों की संतुलन से करते हवा से बातें
गति इसके अतुल्य  विविध रूपों में आते।

समुद्र,घाटी,पर्वत नदिया कोई न बाधा बनते
अपनी मंजिल पाने को राह बनाते जाते।


अपना स्थान सर्वोपरि बनाकर रखें हर हाल
गरज- तर्ज कर बातें कर पहुंचे गंतव्य स्थान।

देश विदेश में सैर कराते मन को मिलाते जहाज
बच्चे बूढ़े सभी  के ख्वाब में शामिल जहाज पर सवार।


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Wednesday, April 14, 2021

रीता चटर्जी की रचना- चेतिका

रचनाकार रीता चटर्जी
स्थान खोंगापानी कोरिया
छत्तीसगढ़
विषय  चेतिका
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परम शांति के खोज में
बीते हर पहर होकर बेचैन
मिले काया से मुक्ति
जब चेतिका में हो शयन।

जीवन की गाथा निराली
समझ न सका कोई
भीड़ में भी रहते अकेले
चेतिका देख रोए हरकोई

परम सत्य है ये सफर
कोई न चिर स्थाई
कर्म का समय यही है
फिर न होगी भरपाई।

जीवन मूल्य को समझ
न हो कोई पाप
चेतिका कब प्राप्त हो
मन में न रखो संताप।

सजे हैं पर अदृश्य है
है पर अंतिम संस्कार,
माया मोह से नाता तोड़
छोड़ना होगा संसार।
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Monday, April 12, 2021

रीता चटर्जी की रचना- गवेजा

रचनाकार रीता चटर्जी
स्थान खोंगापानी (कोरिया)
छत्तीसगढ़
विषय गवेजा
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मन के भावों को व्यक्त किया कीजिए
दो पल ही सही गवेजा कर लिया कीजिए।

अंतर्मण के दुविधा से उठते विचार अनगिनत
बातचीत कर अपने सवालों के हल ढूंढा कीजिए।

बेजुबान जानवर भी भाव व्यक्त को आतुर है
जुबां का इस्तेमाल सही वक्त पर कर लिया कीजिए।

आप के  पहल से शायद सुलझे उलझन कई
कोशिशों का दौर सदा जारी रखा कीजिए।

कितने ही किस्से टूट जाते अंजाम पाए बगैर
आप से उम्मीद है गर उम्मिदो पर खड़े उतरा कीजिए।

बड़े-  बड़े मसलें हल होते एक बातचीत से
अपने अहम को कभी- कभी दरकिनार कीजिए।

मन में भरकर जीना करते हैं उत्पन्न कई विकार
दिल खोलकर दर्द बांट और दवा बना कीजिए।

भीड़ में अकेलेपन का अहसास होता है अक्सर यहां
मत सोचिए अपना,पराया  कर वार्तालाप मन हल्का किया कीजिए।
बातचीत है उत्तम साधन दो देशों के मसलों को
जंग कोई हल नहीं मिल बैठ कर बातों से रास्ता निकाला कीजिए।

Thursday, April 8, 2021

रीता चटर्जी की रचना- चार

रचनाकार  रीता चटर्जी
स्थान खोंगापानी कोरिया
छत्तीसगढ़
विषय चार - चिरौंजी

चिरौंजी के फायदे अनेक
पकवानो की है शान,
जंगल में छाए घने
फल है गुणों के खान।

उबटन इसके है गुणकारी
करें चर्मरोग को दूर,
दवाई बनाते इसे पीसकर
है स्वाद से भरपूर।

पकवानो में सौंदर्यता बढ़ाए
बिन इसके लगते अधूरापन
छोटा नागपुर, मध्य प्रदेश में
है इसके विशाल वन।

आकार में है छोटा
पर है हजारों लाभ,
मन को भाए चिरौंजी
हर घर में करें राज।

Tuesday, April 6, 2021

रीता चटर्जी की रचना- बीजापुर

रचनाकार रीता चटर्जी
स्थान खोंगापानी
जिला कोरिया (छत्तीसगढ़)
दिनांक 6/4/2021
विषय  बीजापुर
शीर्षक  शहीद की पाती

 धरती की हरियाली को रक्तरंजित     
देख तुम  यूं डरना नहीं। 
हम जैसे वीरों की ये कहानी है,
तुम आंखों से आंसू बहाना नहीं।

मैं लाल हूं भारत मां का, मां को संकट में देखूं कैसे?
मां की आंचल में खेले सोए ,बिन गोंद चिरनींद सोए कैसे?

एक ही अभिलाषा बचपन से ही पलता रहा सीने पर,
लाख गोलियां दागू सीने पर , फिर भी एक जन्म कम है इस धरती पर।

कितना सुकून का पल था वह, तनिक न मैं घबराया,
मैं अकेला दुश्मन हजार, आंखों में बस तीरंगा लहराया।

मेरी एक हूंकार से माथे पर उनके पसीना छूट आया।
सांस की अंतिम यात्रा तक , मां मै रणभूमि में डटा रहा।

न कोई शिकवा न शिकायत बस ये आरज़ू लिए विदा हो रहा
देना इस धरती में बार -बार  जन्म एक जन्म में तेरा कर्ज न चुका पाया।

मेरे दोस्तों एक जिम्मेदारी तुम्हें आज सौंपना चाहता हूं
देश के लिए मर मिटने की जज्बा तुम सब में देखना चाहता हूं।


ये सिलसिला जारी रहे, कभी कदम पीछे खींचना नहीं
दिखाना है हर रग में खून देशभक्ति का है, अपना नही।

Saturday, April 3, 2021

रीता चटर्जी की रचना- इत्र

रचनाकार  रीता चटर्जी
स्थान खोंगापानी ,(कोरिया)
छत्तीसगढ़
दिनांक 3/4/2021
विषय     इत्र

जीवन की बगिया में महकना लाजमी है
खुद पीस कर भी सबको महकाना जरुरी है।
इत्र बन संसार में सुगंध की रस घोलिए
खुद अदृश्य होकर भी तन मन औरों का महकाईए।
इत्र इलाज है मन मस्तिष्क का
चैन देता है मन को
वातावरण में भीनी-भीनी खुशबू से सराबोर करता है सबको।
इत्र बन संसार में सेवा का संदेश दीजिए
खुद को मिटा कर जग को महकाने का पैगाम दीजिए।
कहानी इत्र की है सदियों पुरानी
पर सफर जारी है सदा,
रंग, रूप बदलते रहे पर गुण वहीं विद्यमान यथा।

Wednesday, March 31, 2021

रीता चटर्जी की रचना- सरहद

रचनाकार।  रीता चटर्जी
स्थान खोंगापानी कोरिया
छत्तीसगढ़
विषय  स‌रहदें

शब्दों की माला से तुझे सम्मान अर्पण करती हूं,
ऐऐ मेरे भारत के वीर अश्रुओं से लेखन करती हूं।
सरहदों पर डटे हुए हो बन देश का प्रहरी तुम
गोलियों की बौछार को सीने में सहने तैयार तुम।
ये सरहदें बना है जाने एक लकीर खींच कर
कुर्बानी के रक्त से ,न मिटा इसकी भूख आज तक।
इंसान को इंसान से जूदा करते ये सरहदें
मन की बंधनों को कभी न तोड़ सकते ये।
कितने ही दर्द सहकर भी सरहदों में तैनात वीर
क्यों समाधान नहीं हो सकता ये प्रश्र है किंचित।
न बने सरहदें भावी पीढ़ी पर है ये 
जिम्मेदारी,
खुले रहे दिलों के दरवाजे, रहे मिलना मिलाना बारी- बारी।

Saturday, March 27, 2021

रीता चटर्जी की रचना- नींद

रचनाकार  रीता चटर्जी
स्थान।  खोंगापानी
जिला कोरिया (छत्तीसगढ़)
विषय  नींद

नित्य क्रिया में जीवन की
नींद का भी है उच्च स्थान,
मिले स्फूर्ति मिटे थकान
शरीर को रखें ऊर्जावान।

समय से सोना समय पर जागना
है  कहावत पालनार्थ,
दौड़ भाग की इस घड़ी में
नहीं करते इसे चरितार्थ।

चिंता और तनाव से
आज है समाज आक्रांत,
न नींद न चैन रहा
मन बन गया अशांत।

गहरी नींद में भी जगकर
रहते थे  कभी  जग,
आज बिचलित होकर मन
करते उपाय  अनर्थ।

जीवनचर्या में हो सुधार
मन में रहे धीर,
नींद में भी जगे  रहे
रहे चित न अधीर।

सादर नमन

Thursday, March 25, 2021

रीता चटर्जी की रचना- एकलव्य

रचनाकार  रीता चटर्जी
स्थान खोंगापानी (कोरिया)
छत्तीसगढ़
विषय  एकलव्य

लक्ष्य हासिल करने में
होने पड़ेंगे एकाग्रत
एकलव्य को आदर्श बनाकर
धैर्य धर करे पथ प्रशस्त।

नजर रहे अगर लक्ष्य पर
बाधाओं से लड़ोगे तुम,
हार जीत की चिंता न हो
दृष्टि में रखो मंजिल तुम।

एकलव्य जैसे शिष्य बनो
गुरु हो देव तुल्य,
हार में भी तुम्हारी जीत होगी
जीवन होंगे अमूल्य।

मन में सदा संतोष धरो
न रहे अति अभिलाषा,
सीमित साधनों से तुष्ट रहो
जानो लक्ष्य की परिभाषा।

कर्म ऐसे हो तुम्हारे
युग - युग तक दिव्य हो
भीड़ में भी ये आवाज़ गूंजे
तुम आज के एकलव्य हो।

Tuesday, March 23, 2021

रीता चटर्जी जी की कृति

रचनाकार - रीता चटर्जी
स्थान -खोंगापानी ,कोरिया
छत्तीसगढ़
दिनांक 23/3/2022
विषय-  धरा
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धन-धान्य की परिपूर्ण से
धरा की छटा अनुपम
प्रकृति को गोद में लेकर
सहते हैं हर बोझ स्वंय।

कहीं हरियाली,कहीं  पर्वत
कहीं सरिता की कल-कल नाद
कहीं मैदान, कहीं घाटी,
घने वनों से श्रृंगारित आबाद।

मां के रुप में पूज्य है
न किसी से कोई शिकायत,
धरा की सहनशक्ति अतुल्य
धरे कपाल में करते नाज।

कण-कण मे है अनमोल रत्न
देने में सदा तत्पर,
न चीखती,न ही रोती
चाहे मानव चीरता बारम्बार।

वक्त अभी भी है सम्भालो
विनाश की इस लीला को,
धरती माता कहे पुकार
बचालो तीनों लोकों को।

Monday, March 22, 2021

रीता चटर्जी की रचना- संकल्प

रचनाकार  रीता चटर्जी
स्थान खोंगापानी कोरिया
छत्तीसगढ़
  
*संकल्प*
जीवन पथ पर कभी मिले
खुशियों का अनमोल सौगात,
पलक झपकते ही बन जाता है
दु:खों की घनी काली रात।
    हर तुफान से लड़ने का
    संकल्प हमें पर करना है,
    हो अनुकूल गर तो हमें
    शुक्रिया अदा करना है,
    प्रतिकुल हो तो भी प्रभु से
     धन्यवाद अवश्य कहना है।
बिन संकल्प कहां पूरन होते
पूजन के भी विधि - विधान
दृढ़ संकल्पित मन हो गर
पाये समस्याओं का समाधान।
         लक्ष्य हासिल कर पाने को
         संयम से  करें  अपन काम,
          संकल्प गर ध्यान धरो तो
            न लेना पड़ेगा अल्पविराम।
लक्ष्य पर निशाना साधे
करें संकट को पार,
विजय की प्राप्ति होगी
कर संकल्प हर हाल। 

Saturday, March 20, 2021

रीता चटर्जी की रचना- चंदन

रचनाकार  रीता चटर्जी
स्थान खोंगापानी  कोरिया
छत्तीसगढ़
विषय  चंदन

सुशोभित होते देवों के माथे
है शीतल पावन
होत सुगंधित रोम- रोम से
नाम है चंदन।

इसके पेड़ होते हैं
अति ही गुणकारी,
चर्मंरोग, हृदय रोग में
है अति लाभकारी।

रंग इसके होत है
लाल और सफेद,
चंदन टीका मंगलकारी
इसमें नहीं विभेद।

लिपट रहता संग इसके
सदा - सदा से भुजंग,
फिर भी पावन होते हैं
इसके हर एक अंग।

देता संदेश सदा हमें
करें सदा परोपकार,
स्वंय घीस कर भी करे सभी
जग हित के काम।

Friday, March 19, 2021

रीता चटर्जी की रचना- व्रीहि

रचनाकार  रीता चटर्जी
स्थान खोंगापानी 
जिला कोरिया (छत्तीसगढ़)
शीर्षक  व्रीहि
 जीवन के मुख्य आवश्यकता है व्रीहि
करते हैं इसके सम्मान हम,
धरती को शोभयामान है व्रीहि
करते हैं इसके पूजन हम।

बिन अनाज जीवन की कल्पना
न कर सकते हैं कोई,
धन धान्य से परिपूर्ण हो
ये ही कामना करते हर कोई।

धान है शान हमारी
करते किसान को सदा धन्यवाद,
कठीन परिश्रम कर खेतों में
करते हैं भूमि को आबाद।

अन्न जल की महिमा
है हमारे संस्कारों में,
इसके गाथा है लिखे
वेद और पुराण में।

रक्षा करना है हमें
कर जोड़ ये विनती है
बिन अनाज जीवन की
नहीं कोई प्रगति है ।

Thursday, March 18, 2021

रीता चटर्जी की रचना- बसाहट

रचनाकार  रीता चटर्जी
स्थान    खोंगापानी
जिला कोरिया (छत्तीसगढ़)
विषय   बसाहट

आदि काल की है खोज बसाहट
मानव को दे एक ठहराव,
घुमंतू होकर किये संघर्ष अविराम‌
बसाहट लाए जीवन में बदलाव।

जीने की कला में आए परिवर्तन
नविन प्रतिभाओं से हुए पहचान,
बसाहट से एक स्थायित्व मिला
मानव संग प्राकृतिक संसाधन।

पंछी भी खोजें   अपनी बसाहट
बनाये अपनी सुविधानुसार,
भांति-भांति के होते बसाहट
होते हैं नाना प्रकार।

सुख-दुख के साथी मिलते
होते समस्याओं का समाधान,
मिलजुल कर जीवन निर्वाह का
है ये उपाय साकार।

बसे दिल में औरों के
सार्थक हो जीवन की बसाहट,
जीत ले मन बांट दर्द को
रहे दिल में औरों के आहट।

Wednesday, March 17, 2021

रीता चटर्जी की रचना- फागुन

रचनाकार ‌ रीता चटर्जी
स्थान   खोंगापानी
जिला  कोरिया (छत्तीसगढ़)
विषय    फागुन

रंगों की छटा बिखेरी
आया फागुन मनोहर,
इंद्रधनुषी छटा से सजे
धरती और अम्बर।

चहक उठे मन बावरा
समीर में मधुरता घोले,
डाल - डाल और पात -पात में
काक,पीक है बोले।

मौसम में छाए नशा
वनपलाश ले हिलोरें
रंगों की बहार लिए
मस्त फागुन डोले।

रंगों से सराबोर होने
मन में जागे उमंग,
दुश्मन से भी गले लगने
की ये है पावन मौसम।

फागुन की बात निराली
मिलन की लाएं संदेश,
परदेश से आए पिया
भाए फागुन स्वदेश।।

Thursday, March 11, 2021

मोक्ष प्राप्ति लिखा गया है - रीता चटर्जी

रचनाकार - रीता चटर्जी
स्थान - खोंगापानी(कोरिया)
छत्तीसगढ़
विषय -  मोक्ष
शीर्षक - मोक्ष प्राप्ति

अज्ञानता के कारण ही
होते जन्म,मरण बारम्बार,
मोक्ष प्राप्त कर छूटे
त्यागे सकल मोहजाल।

अंतिम लक्ष्य है जीवन का
होते है मार्ग चार,
कर्म, सांख्य, ज्ञान, भक्ति
पथ को करें स्वीकार।

क्षणिक दुःख निवृत्ति से
मिलते मुक्ति के मार्ग
सदैव दु:खों से मुक्ति
आनंद से मिले मोक्ष मार्ग।

ढाई आखर प्रेम के
पथ पर चले निरंतर,
मोक्ष की प्राप्ति होगी
होगी भवसागर पार।

Wednesday, March 10, 2021

रीता चटर्जी की रचना- विनाह

रचनाकार रीता चटर्जी
स्थान खोंगापानी  कोरिया
जिला छत्तीसगढ़
विषय  विनाह
शीर्षक
 विनाह : आवश्यक
सुरक्षित रहे, स्वच्छ रहे
रहे प्रदुषण रहित जल,
ढक रखने की  व्यवस्था
विनह सहित  सफल।‌

अति उत्तम होता हैं
ढक रखने की सीख,
बिमारी से होती रक्षा
पाते  शुद्ध नीर।

वर्तमान में सूखी धरती
न कूप,न तालाब
विनाह का कहानी अब
बाचे सिर्फ किताब।

है हमारे परम कर्त्तव्य
करें जल संरक्षित,
रहे हरियाली प्रकृति में
कूप रहे विनाह सहित।

Tuesday, March 9, 2021

रीता चटर्जी की रचना- शिव

रचनाकार   रीता चटर्जी
स्थान    खोंगापानी
जिला कोरिया (छत्तीसगढ़)
विषय    शिव
शीर्षक 

न आदि न अंत
है अजन्मा अविनाशी देव,
स्वयंभू कहते हैं जिन्हें
वो है देवों के देव महादेव।

त्रिदेव में विनाशक की
भूमिका निभाते है जहां में,
संकेत देते हैं कि
होते विनाश हर उत्पत्ति के।

शक्ति के स्वरुप शिव
आदिदेव शुभकारी, कल्याणकारी
है दाता वह पापों का नाशक
देवों का देव शुभकारी।

अर्द्धनारीश्र्वर के रूप में
करते संसार को संचालित
स्त्री- पुरुष के शक्ति स्वरूप
है प्रकृति संतुलित।

जटाएं इनके हैं अंतरिक्ष का प्रतिक
चन्द्रमा मन के प्रतिक,
त्रिलोचन के तीन नेत्र
गुणों,कालों , लोकों के प्रतिक।

महामृत्युंजय मंत्र जाप से
हरते रोग,शोक,ताप
जगत के हैं पालनकर्ता
कृपा इनके अपरंपार।

Monday, March 8, 2021

रीता चटर्जी की रचना- निराकार

रचनाकार  रीता चटर्जी
स्थान    खोंगापानी
जिला कोरिया (छत्तीसगढ़)
विषय निराकार
शीर्षक  निराकार एक अनुभव

स्थूल और सुक्ष्म से परे
हमारे शरीर निराकार है,
होते है जब निर्विचार
पाते निराकार रूप है।
होकर साधना में लीन
त्यागे सांसारिक मोह को
आत्मा से परमात्मा का मिलन
अनुभव करते परम सुख को।
दिव्य होता मन मंदिर
होते दर्शन स्वरुप का
हर भाव से हो मुक्त
होते अभौतिक, अदृश्य, अमूर्त।
बिन साकार के निराकार का
अस्तित्व होते आधारहीन,
दोनों के मिलन से ही
ब्रह्माण्ड चले अंतहीन।

Thursday, March 4, 2021

रीता चटर्जी की रचना- ढलैत

रचनाकार  रीता चटर्जी
स्थान   खोंगापानी
जिला   कोरिया छत्तीसगढ़
विषय    ढलैत
शीर्षक

न किसी उपमा से सज्जित
न  किसी  शब्दों से सुशोभित
जीवन तुम्हारा ही  है सौगात
रक्षक हो तुम हमारे ढलैत।
  पग - पग में हो तुम पहरेदार
   प्रतिष्ठा के  न बनते हकदार,
   सेवा  है  परम धर्म तुम्हारा
   तुम पर करें गर्व संसार।
दे कुर्बानी निज प्राण की
सीमा में हो डटे हुए,
त्याग, बलिदान सीखते तुमसे
शत-शत नमन है तुम्हें।
  सुबह के सूरज जैसा
   है तेज तुम्हारे चेहरे पर,
   वक्त आने पर बन बादल
    बरसते हो धरती पर।
मान अर्पित,सम्मान अर्पित
तुम ही हो जीवन दाता
तुम से शुरू ,तुम पे ही अंत
हम सब की जीवन यात्रा।

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...