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Friday, January 31, 2020

स्वच्छ भारत अभियान-व्यापक अध्ययन / नलिनी बाजपेयी

निबन्ध -सृजन 
निबन्ध लेखिका-नलिनी
                   बाजपेयी
विषय-स्वच्छ भारत अभियान-व्यापक अध्ययन
राज्य-छत्तीसगढ़


"स्वच्छता है एक बड़ा अभियान,
आप भी दे अपना योगदान।"
प्रस्तावना- स्वच्छता  भारत सरकार द्वारा चलाया गया एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन है।जो पूर्णतः स्वच्छता पर आधारित है।जिसके तहत गलियों,सड़कों तथा अधो संरचना को साफ सूथरा और कूड़ा साफ रखना है।यह अभियान 2अक्टूबर 2014 से पूरे देश में लागू किया गया।कुछ प्रमुख लोगों को प्रमुख दायित्व दिया गया।विश्वस्तर पर लोगों ने 
इसकी सराहना भी की है 

गांधीजी का स्वप्न-देश को आजाद कराने में गांधी जी अहम भूमिका थी।स्वच्छ भारत उनके सपनों के भारत का एक हिस्सा था।वो अपने आसपास के लोगों को स्वच्छता बनाए रखने संबन्धी शिक्षा देने का काम करते रहे।गाँधी जी के सपनों को साकार करने हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान और 'एक कदम स्वच्छता की ओर' जैसे बातों ने धूम मचा दी है।

पृष्ठभूमि-स्वच्छता अभियान का आधिकारिक रूप से 1 अप्रैल1999से भारत सरकार ने व्यापक ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम का पुनर्गठन किया गया।उसके बाद में 1 अप्रैल 2012 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा "निर्मल भारत अभियान" चलाया गया।उसके बाद 24 सितम्बर 2014 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी से फिर से इस कार्यक्रम का पुनर्गठन किया गया,और महात्मा गांधी जी की 150 वीं वर्षगाँठ तक खुले में शौचमुक्त भारत बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।

प्रधानमंत्री का प्रयास-प्रधान मंत्री जी का स्वच्छता पर चलाया गया कार्यक्रम अत्यंत सराहनीय एवं प्रशंसनीय है।उन्होंने शौचालयों की जरूरत एवं महिलाओं की समस्याओं के बारे में खुलकर बताया।स्वंय झाड़ू लेकर सफाई अभियान में लग गए।इसी व्यवस्था के तहत कईं पत्र परिपत्र जारी किया गया -जैसे राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय, राष्ट्र व्यापी स्वच्छता अभियान,अस्वच्छ शौचालयों की पहचान, और उनको स्वच्छ शौचालयों में उनका रूपांतरण करना,आदि कार्य किया गया।लोगों को पुरस्कृत किया गया।
खड़गपुर के जैव  शौचालय को स्वच्छ भारत पुरुस्कार 2018 प्राप्त हुआ।झारखंड को सबसे ज्यादा स्वच्छ राज्य घोषित करना।
मध्यप्रदेश का इंदौर को दो बार स्वच्छ नगर का दर्जा मिला।
योजना के प्रकार-
       इस योजना को ग्रामीण एवं शहरी  योजनाओं में बांटा गया।
ग्रामीण योजना-इस योजना के द्वारा गांवों में स्वच्छता संबन्धी आदतों को बेहतर बनाना,स्वसुविधाओं की मांग करना जिससे जीवन स्तर बेहतर बनाया जा सके।सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में 1.96  लाख करोड़ की अनुमानित लागत के 1.2 करोड़ शौचालयों का निर्माण करके खुले में शौचमुक्त भारत बनाने के लिए  हर घर में शौचालय निर्माण,प्रौद्योगिकी का उपयोग कर कचरे को पूँजीरूप देते हुए जैव उर्वरक और ऊर्जा के रूप में परिणित करने का निर्णय लिया गया।

शहरी क्षेत्र-इस मिशन का उद्देश्य 1.04 करोड़ परिवारों को लक्ष्य बना कर2.5 लाख सामुदायिक शौचालय और प्रत्येक शहर में एक ठोस अपशिष्ट प्रबन्ध की सुविधा प्रदान की गई। आवासीय क्षेत्रों में व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों एवं सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करना।पर्यटनस्थलों,बाजारों, स्टेशनों,जैसे जगहों पर सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया जाएगा।यह पांच वर्षो की अवधि में 440 शहरों में लागू किया जाएगा।
आज की स्थिति-शासन द्वारा इतना करने के बाद भी आज भी जमीनी सच्चाई कुछ और कहती है।कई लोग दिखावे के लिए इसमें भाग लेते है।
      स्वच्छता बहुत अच्छी चीज है।इससे बीमारियों से बचत होगी।विश्व में देश की छवि अच्छी होगी।

 निष्कर्ष-अब समय आ गया है कि हम इस कार्यक्रम में तनमन धन से योगदान दे। ये हमारा नैतिक कर्तव्य है कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य किया जाय।समाज की सहभागिता बढ़ाई जाए।वैसे भी समाज के साथ स्कूल ,शिक्षकों ,और छात्रों के अलावा प्रत्येक स्तर पर इस पर प्रयास किया जा रहा है।देश भर के पंचायतों और उनकी समितियों को और बढ़ाया जाए।निश्चित रूप भारत स्वच्छ भारत बनेगा।स्वच्छता हमारी पहचान बनेगी।
  
     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर (छ. ग.)

स्वच्छ भारत अभियान: व्यापक अध्ययन/ कुन्दन पाटिल

नाम-कुन्दन पाटिल
विषय-"स्वच्छ भारत अभियान: व्यापक अध्ययन"
राज्य-मध्य प्रदेश (देवास)

मोदीजी जब से हिन्दुस्थान के प्रधान्मंत्री बने है उन्होने कई उत्कृष्ट कार्य किये है "स्वच्छ भारत मिशन" उनमे से एक है।
स्वच्छता का हमारे जीवन मे बडा महत्व है अक्शर हम देखते थे की कचरा आस पडोस मे फेकना इधर उधर लगा देना पहले आम बात थी जब आस पडोस मे झगड़े होते थे तो पता चलता था की कचरा मेरे अंगन मे मेरे घर के सामने फेकने से ही हो जाते थे जब मोदीजी ने झाडु उठाई लोगो मे जागर्ती आई ओर पुरा देश स्वच्छ भारत मिशन मे जुड गया सा लगने लगा मेने अकशर सर्वजनिक जगहो पर लोगो को देखा की वे कचरे को कचरा पेटी मे डालने को तत्पर दिखे ओर यह कहते भी सुना की जब मोदीजी झाडु लगा सकते है तो मे स्वच्छता का कुछ तो ध्यान रख ही सकता हु मोदीजी का स्वच्छता का संदेश आम जन के सर चड बोल रहा है।इस स्वच्छता मिशन से नगर नगर कचरा वाहन हो गये गिला कचरा अलग सुखा कचरा अलग होने लगा कचरै से खाद बनने लगी रोजगार बडा यानेकी आम के आम गुटलीयो के दाम की कहावत यहा चरिरार्थ होती है।गन्दगी का सबसे बढा कारन शौचालयो का ना होना था मोदीजी ने इस नब्ज को पकड़ा ओर अनुदान देकर बड़े पेमाने पर शौचालयो का निर्माण करवाया पहले गावो मे एक भी शौचालय नही हुवा करते थै जो आज हर दुसरे तिसरे घरो मे शौचालय हो गये है स्वच्छता स्पष्ट नजर आने लगी है नदिया तालाबो मे कचरा फेकना रोका जा रहा है जीससे नदिया तालाब स्वच्छ नजर आने लगे है।गाव गाव शहर शहर स्वच्छता की मिशाल नजर आ रही है।जीसका लोहा आज पुरी दुनिया मान रही है।
धिरे धिरे ही सही पर मेरा देश बदल रहा है स्वच्छता के प्रती गम्भीर नजर आ रहा है।आम जन स्वय स्वच्छता को अपना रहे है।घर आगन साफ स्वच्छ नजर आ रहे है बाजार मे सडको पर बगिचो मे स्च्छता दिख रही है।नदिया तालाब अब पहले से ज्यादा साफ स्वच्छ सुन्दर नजर आ रहे है।गाव गाव नगर नगर सरकारी अनुदान से हजारो हजार शौचावयो के निर्माण से वातावरण शुध्य हो रहा है गन्दगी बदबु से निजाद मिल रही है।मानो एक स्वच्छ सुन्दर मनोहारी भारत उदय हो रहा हो 
कुन्दन पाटिल देवास मध्य प्रदेश

स्वच्छ भारत अभियान : व्यापक अध्ययन/ संजय कुमार

*निबंध सृजन क्रमांक :- ०२*
_नाम :- संजय कुमार_
~राज्य :- छत्तीसगढ़~ 
~शीर्षक :- "स्वच्छ भारत~ ~अभियान : व्यापक अध्ययन "~

*********
वर्तमान में हम जिस परिवेश में रहते है , जिस परिवेश में निवास करते हैं ,
वहां हर व्यक्ति सुख पूर्वक जीवन व्यतीत करना चाहता है । किन्तु इतिहास साक्षी है कि चाहने मात्र से आज तक किसी को कुछ। नहीं मिला इसके लिए कर्म आवश्यक है ।
  सूखी रहने का एक प्रमुख कारण हो सकता है *स्वच्छता*,  जो व्यक्ति अपने आसपास स्वछता बनाए रखता है उसके दीर्घायु  होने के आसार अधिक होते है  ।
     ०२ अक्टूबर २०१४ को हमारे देश के वर्तमान प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी ने महात्मा गांधी के जन्मदिवस पर पूरे देश भर में स्वछता अभियान की शुरुआत की ।
  आधुनिक युग  प्रतियोगिता का दौर है , इस समय हर एक व्यक्ति अपने कार्य के प्रति इतने व्यस्त होते है कि अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देते हैं  । आज हम कई बीमारियों से घिरे हुए हैं जिसका प्रमुख कारण स्वछता नहीं रखना है ।
   वर्तमान में *कोरोना वायरस* पूरे विश्व भर में तेजी से फैल रहा है जिससे पीड़ित व्यक्ति भारत में भी मिले हैं , इनमें कहीं न कहीं अस्वछता ही जिम्मेदार है । हम इन सब चीजों को गौण समझते हैं और फिर कई बीमारियों से घिर जाते है ।
     महात्मा गांधी के स्वच्छ भारत के स्वप्न के लिए नहीं न सही किन्तु अपने और अपने परिवार के लिए स्वछता को अपनाए । 
  स्वछता का अर्थ केवल ये नहीं की हम सिर्फ अपने आंतरिक स्वछता और अपने घर को स्वच्छ रखे बल्कि ये है कि हम स्वयं तो इस अभियान में सम्मिलित हो साथ ही साथ लोगो को भी अधिक से अधिक जागरूक करे और स्वछता के लाभ से रूबरू कराएं।
      जो व्यक्ति तन से स्वस्थ रहता है वह मन से भी स्वस्थ रहता है , और वह किसी भी कार्य को पूरी ऊर्जा और विश्वास के साथ पूर्ण कर सकता है । स्वछता  नहीं रखने  से हमारा पर्यावरण दिनोदिन प्रदूषित होते जा रहा है। प्लास्टिक के उपयोग से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है । पॉलीथिन को खाकर कई जानवरो की मृत्यु हो गई है ।
हमें चाहिए की हम प्रधानमंत्री के साथ मिलकर स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाएं।
     जिस गंगा को भगीरथ ने धरती पर लाया था  , जिस गंगा को हम मां कहते है और सबसे पवित्र नदी जिस गंगा को मानते थे वह आज सबसे अधिक प्रदूषित नदियों में से एक है ।  स्वच्छ भारत अभियान को सरकार द्वारा देश की स्वच्छता के प्रतीक के रूप में शुरू किया गया है। स्वच्छ भारत का सपना महात्मा गाँधी जी ने देखा था। अपने सपने के संदर्भ में गाँधी ने कहा कि स्वच्छता स्वतंत्रता से ज्यादा जरूरी है और स्वच्छता ही स्वस्थ और शांतिपूर्ण जीवन का एक अनिवार्य भाग है। महात्मा गाँधी जी अपने समय में देश की गरीबी और गंदगी से अच्छी तरह अवगत थे इसीलिए उन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए बहुत से प्रयास किये लेकिन वो उसमें सफल न हो सके।
अगर आंकड़ों की बात की जाये तो बहुत ही कम लोग ऐसे हैं जिनके घरों में शौचालय हैं। इस अभियान को सफल बनाने के लिए सरकार ने सभी लोगों से निवेदन किया कि वे अपने आस-पास की और दूसरी जगहों की सफाई के लिए साल में केवल 100 घंटों के लिए अपना योगदान दे।
अगर हम स्वच्छ और सुंदर माहौल में न रहें तो हमें गंदगी से अनेक प्रकार की बिमारियों और परेशानियों का सामना करना पड़ता है जिसके लिए हम खुद जिम्मेदार होते हैं। हम सभी यही सोचते हैं कि अपने घर और आस-पास की सफाई रखें लेकिन सफाई करने के बाद कूड़े-कचरे को इधर-उधर फेंक देते हैं।

     स्वच्छ भारत अभियान एक राष्ट्रीय मुहिम है जो भारत सरकार द्वारा स्थापित की गयी है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत 4041 सांविधिक नगरों के सडक, पैदल मार्ग और अन्य कई स्थान आते हैं। यह एक बहुत ही बड़ा आंदोलन है जिसके तहत भारत को २०१९ तक पूरी तरह से स्वच्छ बनाना था किन्तु यह २०२० में भी जारी है।
भारत में स्वस्थ और सुखी जीवन के लिए महात्मा गाँधी जी के स्वच्छ भारत के सपने को आगे बढ़ाया गया है। 2 अक्टूबर, 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।
भारत सरकार द्वारा शहरी विकास, पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के तहत इस अभियान को ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लागू किया गया है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत सफाई व्यवस्था की समस्या का समाधान निकालना साथ में सभी को स्वच्छता की सुविधा के निर्माण द्वारा पूरे भारत में मल प्रबंधन करना 
     इस उद्देश्य की प्राप्ति तक भारत में स्वच्छता अभियान की कार्यवाई लगातार चलती रहनी चाहिए। भौतिक, मानसिक, सामाजिक और बौद्धिक कल्याण के लिए भारत के लोगों में इसका एहसास होना बहुत ही जरूरी है। भारत के प्रत्येक घर में शौचालय होना बहुत ही जरूरी है और खुले में शौच करने की प्रवृति को बंद किया जाना भी बहुत जरूरी है।
अस्वास्थ्यकर शौचालयों को पानी से बहने वाले शौचालयों में बदलने की जरूरत है। हाथ से की जाने वाली सफाई व्यवस्था को खत्म किया जाना चाहिए। नगर के कचरे का पुनर्चक्रण और दुबारा इस्तेमाल, सुरक्षित समापन, वैज्ञानिक तरीके से मल प्रबंधन को लागू करना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में वैश्विक जागरूकता का निर्माण करने के लिए और सामान्य लोगों को स्वास्थ्य से जोड़ने के लिए इसे चलाना बहुत जरूरी है।
इसमें काम करने वाले लोगों के द्वारा स्थानीय स्तर पर कचरे के निष्पादन का नियंत्रण करना और खाका तैयार करने में मदद करना जरूरी है। पूरे भारत में साफ-सफाई की सुविधा को विकसित करने के लिए निजी क्षेत्रों की हिस्सेदारी बढ़ाना जरूरी है। भारत को स्वच्छ और हरियाली युक्त बनाने के लिए यह बहुत आवश्यक है। ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए भी यह बहुत जरूरी है ।
      शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ भारत अभियान का लक्ष्य हर नगर में ठोस कचरा प्रबंधन सहित लगभग सभी 1.04 करोड़ घरों में शौचालय, 2.5 लाख सार्वजनिक शौचालय और 2.4 लाख सामुदायिक शौचालय उपलब्ध कराना है। सामुदायिक शौचालयों के निर्माण की योजना को रिहायशी इलाकों में किया गया है जहाँ पर व्यक्तिगत घरेलू शौचालय की उपलब्धता मुश्किल है।
इसी तरह से सार्वजनिक शौचालयों को बस अड्डों, रेलवे स्टेशन, बाजार आदि जगहों पर उपलब्धता कराया गया है। शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान को पांच वर्षों के अंदर पूरा करने की योजना है। शहरी क्षेत्रों में खुले में शौच की प्रवृति को जड़ से हटाना, अस्वास्थ्यकर शौचालयों को पानी से बहाने वाले शौचालयों में परिवर्तित करना, खुले हाथों से साफ-सफाई की प्रवृति को हटाना, लोगों की सोच में परिवर्तन लाना और ठोस कचरे का प्रबंधन करना आदि लक्ष्य रखे गए हैं।
           ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ बनाने के लिए इससे पहले भारतीय सरकार द्वारा निर्मल भारत अभियान की स्थापना की गई थी लेकिन अब इस समय इसका पुनर्गठन स्वच्छ भारत अभियान के रूप में किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों को खुले में शौच करने की मजबूरी से रोकना, इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए सरकार ने 11 करोड़, 11 लाख शौचालयों के निर्माण के लिए एक लाख करोड़ रुपए की राशी को खर्च करने की योजना बनाई है।
सरकार ने कचरे को जैविक खाद और इस्तेमाल करने लायक ऊर्जा में परिवर्तित करने की योजना भी बनाई है। इसमें ग्राम पंचायत, जिला परिषद, पंचायत समिति की बहुत अच्छी भागीदारी है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार करने के लिए इसे चलाया गया ।
    साफ-सफाई की जरूरी सुविधाओं को लगातार उपलब्ध कराने के लिए पंचायती राज संस्थान, समुदाय आदि को प्रेरित करते रहना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार साफ-सफाई और पारिस्थितिक सुरक्षा को प्रोत्साहित करना है।
स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय अभियान : स्वच्छ भारत अभियान केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा चलाया गया है और इसका उद्देश्य स्कूलों में भी स्वच्छता लाना है। इस अभियान के तहत 25 सितम्बर, 2014 से 31 अक्टूबर, 2014 तक केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय संगठन जहाँ कई सारे स्वच्छता क्रियाकलाप आयोजित किये गये हैं जैसे विद्यार्थियों द्वारा स्वच्छता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा, इससे संबंधित महात्मा गाँधी की शिक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य विज्ञान के विषय पर चर्चा, स्वच्छता क्रियाकलाप आदि।
इसके द्वारा स्कूल क्षेत्र में सफाई, महान व्यक्तियों के योगदान पर भाषण, निबंध लेखन प्रतियोगिता, कला, फिल्म, चर्चा, चित्रकारी, स्वास्थ्य और स्वच्छता पर नाटक मंचन किया जाता है। इसके अलावा सप्ताह में दो बार साफ-सफाई अभियान चलाया जाना जिसमें शिक्षक, विद्यार्थी और माता-पिता सभी हिस्सा लेने की योजना है।।


_*~Sanjay kumar sahu~*_

स्वच्छ भारत अभियान : व्यापक अध्ययन / परमानंद निषाद

_             *निबंध सृजन*
*क्रमांक-02*
*लेखक:- परमानंद निषाद*
*विषय-  "स्वच्छ भारत अभियान : व्यापक अध्ययन*

*प्रस्तावना:-*
 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन को राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में आरंभ किया। 2 अक्टूबर 2019 को भारत को पूरी तरह से स्वच्छ बनाने का लक्ष्य रखा गया। लेकिन दुख की बात यह है कि अभी भी भारत ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में भारत अभी तक नहीं बन पाया है,अपितु अस्वच्छ होते जा रहा है। स्वच्छ भारत अभियान भारत सरकार द्वारा चलाया गया महत्वपूर्ण अभियान है। माननीय श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने इंडिया गेट में राजपथ के प्रतिज्ञा समारोह बाहर से आये लगभग  50 हजार लोगों के बीच में संकल्प किया गया था कि 2 अक्टूबर 2019 को भारत पूरी तरफ से स्वच्छ भारत हो जिसके तहत स्वच्छ भारत अभियान चलाया गया। यह एक राष्ट्रीय स्वच्छता  अभियान है जिसके तहत गलियों को साफ-सुथरा व कूड़ा साफ करने का मुख्य उद्देश्य है महात्मा गांधी का सपना था कि भारत को स्वच्छ बनाना। यह अभियान गांधी जयंती के 2 अक्टूबर 2014 को आरंभ किया गया इसका मुख्य उद्देश्य भारत को स्वच्छ बनाना है। 
सरकार ने इसकी पहली शुरुआत 1986 में ग्रामीण स्वच्छता के रूप में शुरूआत किया था। जिसका उद्देश्य जीवन स्तर को सुधारना और महिलाओं की समस्याओं का निजात व प्रतिष्ठा प्रदान करना था। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों के लिए शौचालय निर्माण करना उसका उपयोग करने का वित्तीय उद्देश्य आंगनबाड़ी में शौचालय निर्माण, स्कूलों में शौचालय निर्माण,ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता कार्यक्रम चलाए गए। दिल्ली में गांधी जयंती 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी 145 वीं जयंती पर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री जी के द्वारा किया गया।

 *मुख्य उद्देश्य*

स्वच्छ भारत अभियान को स्वच्छ भारत मिशन भी कहा जाता है इसका मुख्य उद्देश्य भारत के आधिकारिक को बढ़ावा देना जिससे प्रत्येक ग्राम पंचायत ओडीएफ ग्राम पंचायत के प्रत्येक परिवार में शौचालय का निर्माण और इसका उपयोग किया जाए जिससे भारत खुले से शौच मुक्त हो जाये। प्रत्येक ग्राम आदर्श ग्राम हो और भारत पूरी तरह से स्वस्थ हो। गलियों, सड़कों को स्वच्छ रखो और प्लास्टिक, पॉलिथीन को हमेशा कूड़ेदान में ही फेंके। भारत को स्वच्छ बनाने के लिए आओ हम सब मिलकर संकल्प लें और भारत को स्वच्छ बनाएं।अधिसंरचना व पर्यावरण विभाग के तहत पौधे लगाना बहुत ही जरूरी है। जिससे हमे स्वच्छ ऑक्सीजन प्राप्त हो।
 *आओ मिलकर हम संकल्प लें,*
*भारत को स्वच्छ बनाने का,*
 *कूड़ा-कचरा कूड़ेदान में फेंको,*
 *स्वच्छता मिशन से भारत को नंबर वन बनाएं।।*

स्वच्छ भारत अभियान: व्यापक अध्ययन/ संदीप सिंधवाल

लेखक - संदीप सिंधवाल 
शीर्षक - स्वच्छ भारत अभियान: व्यापक अध्ययन
राज्य - रुद्रप्रयाग उत्तराखंड 


एक कदम स्वच्छता की ओर के नारे से स्वच्छ भारत अभियान को स्वच्छ भारत मिशन और स्वच्छता अभियान भी कहा जाता है। भारत सरकार द्वारा चलाई गई इस राष्ट्रीय स्तर के अभियान में शौचालयों का निर्माण, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता कार्यक्रमों को बढ़ावा देना, गलियों व सड़कों की सफाई, देश के बुनियादी ढांचे को बदलना आदि शामिल है। इस अभियान को आधिकारिक तौर पर राजघाट, नई दिल्ली में 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की 145 वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया था। इस अभियान को सफल बनाने के लिए उन्होंने देश के 11 महत्वपूर्ण एवं प्रभावी लोगों कोई इसका प्रचार प्रसार करने के लिए चुना गया था जिन्होंने इसे सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।
यह राजनीतिक आयामों से पृथक देश भक्ति से प्रेरित है। यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक कर्तव्य है और इस देश को स्वच्छ देश बनाने के लिए हर भारतीय नागरिक की भागीदारी की आवश्यकता है| इस अभियान को सफल बनाने के लिए विश्व स्तर पर लोगों ने पहल की है। शिक्षक और स्कूल के छात्र इसमें पूर्ण उत्साह और उल्लास के साथ शामिल हो रहे है और ‘स्वच्छ भारत अभियान’ को सफल बनाने का प्रयास किए गए जी अत्यंत ही सराहनीय रहे हैं।
सम्पूर्ण राष्ट्र को एक सूत्रधार में जोड़ते इस  अभियान को सफल बनाने के लिए स्वयं मोदी जी ने सड़कों पर साफ सफाई की थी। यथाशीघ्र ही उनकी इस मुहिम से प्रेरित होकर लोगों में साफ सफाई के प्रति नया उत्साह पैदा हो गया और लोगों ने साफ सफाई भी करना चालू कर दिया है। देश के हर प्रांत में सार्वजनिक शौचालयों को बस अड्डों, रेलवे स्टेशन, बाजार आदि जगहों पर उपलब्धता कराया गया जो कि अभी भी जारी है। शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान को पांच वर्षों के अंदर पूरा करने की योजना थी जो कि लगभग अपना लक्ष्य प्राप्त करती दिखी है और इसी लक्ष्य की प्राप्ति से ही अधिकांश लोग मोदी को फिर से प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते थे। शहरी क्षेत्रों में खुले में शौच की प्रवृति को जड़ से हटाना, अस्वास्थ्यकर शौचालयों को पानी से बहाने वाले शौचालयों में परिवर्तित करना, खुले हाथों से साफ-सफाई की प्रवृति को हटाना, लोगों की सोच में परिवर्तन लाना और ठोस कचरे का प्रबंधन करना आदि लक्ष्य बखूबी पार किए गए।
हालांकि इस अभियान का एक नकारात्मक पहलू ये भी रहा है कि लोग हाथ में झाड़ू लेती तस्वीरों को सोशल मीडिया पर अपलोड करते हैं और खूब वाहवाही बटोरी जाती है। स्वच्छता की इन तस्वीरों को फैलने के  इस क्रम में सबसे आगे नेता लोगरहे है। वहीं दूसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ताओं की तस्वीरे भी देखी जाती है जो कार्य के जमीनी स्तर से जुड़े रहते है।
ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ बनाने के लिए इससे पहले भारतीय सरकार द्वारा निर्मल भारत अभियान की स्थापना की गई थी लेकिन अब इस समय इसका पुनर्गठन स्वच्छ भारत अभियान के रूप में किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों को खुले में शौच करने की मजबूरी से रोकना, इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए सरकार ने 11 करोड़, 11 लाख शौचालयों के निर्माण के लिए एक लाख करोड़ रुपए की राशी को खर्च करने की योजना बनाई गई थी। सरकार ने कचरे को जैविक खाद और इस्तेमाल करने लायक ऊर्जा में परिवर्तित करने की योजना भी बनाई थी। इसमें ग्राम पंचायत, जिला परिषद, पंचायत समिति की बहुत अच्छी भागीदारी है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार करने के लिए इसे चलाया गया है।
संक्षिप्त रूप से कहना चाहूंगा कि इस अभियान की आवश्यकता क्यों पड़ी? देश भर में कोई भी ऐसा स्थान नहीं है जहां पर कूड़ा करकट नहीं फैला हो। हमारे भारत देश के हर शहर, हर गांव, हर एक मोहल्ला, हर एक गली कूड़े-करकट और गंदगी से भरी पड़ी है।हमारे देश के गाँवो में शौचालय नहीं होने के कारण के लोग आज भी खुले में शौच करने जाते थे जिसके कारण हर जगह गंदगी फैलती थी और यह गंदगी नई बीमारियों को आमंत्रण देती है। विशेषतः पर्यटक स्थलों पर फैले भारी कूड़ा करकट और गंदगी के कारण विदेश से लोग हमारे देश में आना कम ही पसंद करते थे, जिसके कारण हमारे देश को आर्थिक नुकसान होता है। इसी कचरे में बहुत ही खतरनाक रसायन के अवशेष भी होते हैं जिसके कारण हमारे साथ-साथ अन्य जीव जंतुओं को भी नुकसान होता है और साथ ही हमारी पृथ्वी भी प्रदूषित होती है। नगर निगम के कचरे का पुनर्चक्रण और दुबारा इस्तेमाल, सुरक्षित समापन, वैज्ञानिक तरीके से मल प्रबंधन को लागू करने की भी नितांत आवश्कता थी। विश्व भर में आधुनिकता की दौड़ में इसी अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में वैश्विक जागरुकता का निर्माण करने के लिये और सामान्य लोगों को स्वास्थ्य से जोड़ना जरूरी था। एक स्वच्छता ही सकारात्मक मानसिकता लती है।
अंत में, इस अभियान को सफल बनाने में नागरिकों का एवम् इससे जुड़ी संस्थाओं का अतुल्य योगदान रहा है। हमे इस अभियान को ऐसे ही सुचारू रूप से निरंतर जारी रखने की जरूरत है जिससे हर भारतवासी की यह एक आदत और एक फ़र्ज़ 
बन सके। 

संदीप सिंधवाल

Monday, December 30, 2019

निबंध नागरिकता (संशोधन )अधिनियम,2019/ नलिनी बाजपेयी

लेखिका  नलिनी बाजपेयी
राज्य -छत्तीसगढ़।         
निबन्ध सृजन क्रमांक-01   
आज का विषय-"नागरिकता (संशोधन )अधिनियम,2019''
रूपरेखा- 
      प्रस्तावना
     अधिनियम की संक्षिप्त जानकारी
     अधिनियम की भ्रांतियां
      लाभ
      हानि
      निष्कर्ष



प्रस्तावना-
    भारत देश का स्वर्णिम इतिहास हमेशा बताता है कि हम अतीत काल से ही शरणागतों की रक्षा करते रहे है।चाहे विभीषण हो,चाहे दलाईलामा।हमने हमेशा शोषित पीड़ित लोगों की रक्षा की है।हमारे देश में बंगला देश से आए शरणार्थी भी इसका ज्वंलत उदाहरण है।

अधिनियम की संक्षिप्त जानकारी-यह अधिनियम भारत की संसद द्वारा पारित ऐसा अधिनियम है जिसके तहत सन1955 का नागरिकता कानून को संशोधित करके यह व्यवस्था की गई है कि31 दिसम्बर सन 2014 के पहले पाकिस्तान, बंगला देश,अफगानिस्तान से भारत आए हिंदू, बौद्ध, सिक्ख,जैन पारसी,एवं ईसाइयों को धार्मिक प्रताडना के कारण भारत की नागरिकता प्रदान की जा सकेगी।
     पाकिस्तान, बंगलादेश,अफगानिस्तान, आदि मुस्लिम बहुल राष्ट्रों में गैर मुस्लिमों को उत्पीड़ित किया जाता है।उनको अपनी पूजा पद्धति एवं आस्था को लेकर प्रताड़ित होना पड़ता है और तक हार कर मौत को गले लगाना पड़ता है,धर्मांतरण करना पड़ता है ।यहीं कारण है कि उपरोक्त राष्ट्र कभी हिन्दू भूल हुआ करता था वहां हिन्दू नगण्य होते जा रहे है।कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की व्यथा किसी से नहीं छिपी हैं।उन्हें बेइज्जत किया गया।उनकी संपत्ति छीन ली गई।तरह-तरह की नारकीय यातनाएं दी गई।आज कश्मीर मुस्लिम बहुल प्रदेश बन गया।
        मुस्लिम राष्ट्रों से  सताए बहिष्कृत लोगों का भारत अतीत काल से शरण स्थली मन जाता है।"अतिथि देवीभवः''एवं "वसुधैव कुटुम्बकम''की भावना से भरा भारत देश इन आदर्शों के पालन के नाम से मिसाल के रूप में जाना जाता है।
       यह अधिनियम जुलाई 2016 को पहली बार प्रस्तुत किया गया था,समिति ने इसकी रिपोर्ट 1 जनवरी 19 को पेश की।इसे भारत के गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 9 दिसम्बर को प्रस्तुत किया गया और उसी दिन देर रात को लोकसभा में ध्वनि मत से पारित हो गया।10 दिसम्बर को इसका प्रथम द्वितीय एवं तृतीय पाठन किया गया।दूसरे दिन राज्य सभा में इसके पक्ष में 125 और विपक्ष में 99 मत पड़े।12 दिसम्बर को  राष्ट्रपति के पास अनुमति के लिए गया और उसी दिन राष्ट्रपति का हस्ताक्षर हो गया।

अधिनियम को लेकर भ्रांतियां-कुछ लोगों का कहना है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम देश हित में  है,वहीं पूर्वोत्तर राज्यों में जबरदस्त आंदोलन,हिंसा, तोड़फोड़,के साथ सार्वजनिक चीजों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।जबकि "हिंसा कभी समाधान नहीं हो सकता।
       नागरिकता संशोधन अधिनियम सी.ए.ए. जिसे 12 दिसंबर को कानून बनाया गया और एक राष्ट्र व्यापी नागरिक रजिस्टर एन. आर. जी.. बनाने के प्रस्तावों के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों की ही एक श्रृंखला है।इसके विरोध में असम,दिल्ली,मेघालय अरुणाचल ,त्रिपुरा आदि प्रदेशों में हिंशक आन्दोलन हो रहे हैं।अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी दिल्ली के जे एन यू ,जामिया यूनिवर्सिटी के साथ साथ पूरे देश में फैल गया है हालाकि प्रदर्शन करियों की चिन्तायें और विचार अलग अलग है।
    यहां लोकतंत्र है सरकार अपना काम कर रही है।विरोध लोगों का अधिकार है।विरोध को देखते हुए शीत कालीन सत्र में नागरिक संशोधन बिल को संसद में एक बार फिर से पेश किया जायेगा।लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों में जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ रहा है।राजनीतिक दलों के का आरोप है कि गृह मंत्री ने बैठक बुलाकर भरोसे में लेने की बात कही थी ,मगर ये सब कुछ नहीं हुआ।अतः कलाकार लेखक बुद्धिजीवी सभी अलग अलग ढंग से विरोध कर रहे हैं।
       
कुछ बनाने के प्रस्तावों के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों की ही एक श्रृंखला है।इसके विरोध में असम,दिल्ली,मेघालय अरुणाचल ,त्रिपुरा आदि प्रदेशों में हिंसक आन्दोलन हो रहे हैं।अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी दिल्ली के जे एन यू ,जामिया यूनिवर्सिटी के साथ साथ पूरे देश में फैल गया है हालाकि प्रदर्शन करियों की चिन्तायें औरआ विचार अलग अलग है।
    यहां लोकतंत्र है सरकार अपना काम कर रही है।विरोध लोगों का अधिकार है।विरोध को देखते हुए शीत कालीन सत्र में नागरिक संशोधन बिल को संसद में एक बार फिर से पेश किया जायेगा।लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों में जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ रहा है।राजनीतिक दलों के का आरोप है कि गृह मंत्री ने बैठक बुलाकर भरोसे में लेने की बात कही थी ,मगर ये सब कुछ नहीं हुआ।अतः कलाकार लेखक बुद्धिजीवी सभी अलग अलग ढंग से विरोध कर रहे हैं।
      इस अधिनियम के तहत अवैध विदेशों को पहचान कर वापस भेजना है जिसमें ज्यादातर मुसलमान हैं। 31 दिसंबर 2014 एन आर सी के जरिए जुलाई1948 के बाद भारत में प्रवेश करने वाले अवैध निवासियों को पहचान कर उन्हें देश से बाहर करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
 ।
अधिनियम की भ्रांतियां-
         पूर्वोत्तर राज्यों के स्वदेशी लोगों का एक वर्ग फरा हुआ है,उन्हें डर है कि बिल पास होने पर शरणार्थियों को नागरिकता मिल जाएगी और उनकी अपनी पहचान, संस्कृति, खतरे में पड़ जाएगी।उन्हें डर है कि जैसे कांग्रेस पार्टी ने बंगला देश के नागरिकों को सुरक्षा देने के नाम पर आई.एम.डी.टी.कानून थोपा  वैसे ही बी.जे. पी.अवैध बंगलादेशी लोगों की सुरक्षा के नाम पर नागरिकता संशोधन बिल लाएगी और असमिया अल्पसंख्यक हो जाएंगे।राजनीतिक धुर्वीकरण होगा।क्षेत्रीय मुद्दों की अहमियत खत्म हो जाएगी।इस अधिनियम में दस्तावेज नहीं होने पर भी नागरिकता दी जाएगी,हांलाकि यह प्रस्ताव राज्य सभा मे पारित ना हो सका।

लाभ--इस बिल से भौतिक लाभ तो नहीं के समान दिखता है क्योंकि जो भारतीय है उनके लिए ये है ही नहीं,मानसिक लाभ जरूर महसूस कर सकते है
        मानसिक लाभ के अंतर्गत हम मांगने वाले नहीं बल्कि देने वाले है।वतन के प्रति सम्मान की भावना बढ़ेगी।दूसरों को खुश देखकर मानसिक शान्ति मिलेगी।
         सरकार के अनुसार अप्रवासियों को सम्मान देना और नागरिकता प्रदान करना है,ना कि किसी विशेष समुदाय को हानि पहुँचाना है और न उनके प्रति हीन भावना प्रकट करना है।

हानि - -इस अधिनियम से सबसे ज्यादा जनसंख्या पर प्रभाव पड़ेगा क्योंकि हमारे देश की जनसंख्या पहले ही बढ़ी हुई है।अनावश्यक खर्च भी बढ़ेगा।नागरिक बनने के बाद कानूनी रूप से देश की हर चीजों का उपभोग करेंगे।सरकारी नौकरी में भाग लेंगे जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। तोड़-फोड़ और हिंसा से आम जनता वैसे भी प्रभावित हो रही है।

निष्कर्ष --कुल मिलाकर यह अधिनियम कुछ अच्छा तो कुछ दोष युक्त भी है।कुछ लोगों के द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है। इस अधिनियम में यहां रहने की 11 वर्ष की पाबंदी भी हटा कर 5 वर्ष कर दी गई है।
        अब तो शंका समाधान के लिए अधिनियम के समर्थन में रैलियां ,सभाएं हो रही है।लोगों को समझाया भी जा रहा है।आगे देखिए इसकी क्या परिणीति होती है।यह प्रश्न सबके दिमाग में है।

     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर ,कांकेर( छ .ग.)

निबंध- नागरिकता संशोधन अधिनियम ~ 2019/ रुपेश कुमार

नाम ~ रुपेश कुमार
राज्य ~ बिहार
शीर्षक ~ नागरिकता संशोधन अधिनियम ~ 2019
      
राष्ट्रवादी लेखकों की लेखनियां जिस आशंका को पिछले कई महीनो से आपके सामने साफ शब्दों मे लगातार स्पष्ट कर रहीं थी...वो CAA के विरोध मे सुनियोजित ढ़ंग से मुसलमानो द्वारा किये गये उत्पात,उपद्रव,हिंसा,आगजनी और तोड़फोड़ के बाद साबित भी हो गई कि इन सबके पीछे का असल कारण CAA नही बल्कि गजवाई सोच है....हम अलग कौम है वाली जेहादी वो मानसिकता है जो पांच साल के राष्ट्रवादी सरकार के नेतृत्व मे अपनी मजहबी क्षुधा के पूरा न हो पाने पर बौखला चुकी है....! मेन स्ट्रीम मीड़िया के अधिकांश चैनेल और अखबार तो फेंकी गई रोटी का कर्ज अदा करने के चक्कर मे अपना जमीर बेच कर मोमिनो की सुविधा के अनुसार न्यूज लिख रहे हैं या दिखा रहे हैं.....खैर अपनी संवैधानिक बाध्यताओं के कारण मोदी जी साफ कहेंगे नही,और कहना भी नही चाहिये........फिर भी उन्होने उपद्रवियों के कपड़ो यानी पहनावे को लेकर इशारा कर दिया था कि कौन लोग है जो ये हिंसा कर रहे हैं.....लेकिन सोशल मीडिया के रणबांकुरों ने भांड मीडिया के दलालों,वंशवादी नेताओं और देश को फूंक देने पर आतुर सक्रीय मजहबी ताकतों की साजिशों,षडयन्त्रो और कुचक्रों को तस्वीरों,वीडियों और आडियो क्लिपो के माध्यम से नंगा करके देश को बता दिया कि CAA के विरोध के बहाने मचाये गये उत्पात की यह साजिश न केवल बेहद सुनियोजित थी बल्कि इसके लिये देश के दूसरे हिस्सों से पत्थरबाजी,आगजनी और उपद्रव फैलाने मे दक्ष ....
अब जब एक एक करके पोल खुल रही है तो पता चल रहा है कि ये भड़ास CAA को लेकर तो कत्तई नही थी.....ये शक्ति प्रदर्शन था.... जिन्ना के उस अगस्त सन् 1946 के फाइनल एक्शन डे की...जब लाखों हिंदू हलाल कर दिये गये थे....उसी का एक प्रयोग किया गया था..
पोस्ट भले ही बड़ी हो जाय लेकिन देश के सनातनी समाज को जानना बेहद जरूरी है कि आजादी के पहले हो चुका कांग्रेस+कम्युनिस्ट+जेहादी गठबंधन ने आजादी के बाद से ही हिंदुत्व की अस्मिता और हिंदुओ के पराक्रमी इतिहास के साथ न केवल खिलवाड़ किया वरन् हिंदुत्व के संस्कारो और हिंदुत्व की विचारधारा मे जातिवादी संक्रमण फैला कर इतना विभाजित तथा भ्रमित कर दिया कि आज एक हिंदू के विरूद्ध कोई और नही हिंदू ही खड़ा होकर कां+कम्यु+जिहादी गठबंधन के षडयंत्रो की राह आसान कर देता है!!!
इतिहास मे बहुत पीछे न जाइये...पानीपत मे भी यही धोखा हुआ था,जब हिंदू ने हिंदू का साथ नही दिया था और जो मुस्लिम मराठों के साथ थे वो तो मजहब के नाम पर विश्वास तोड़ ही गये थे....कई हिंदू सेनापति भी स्वहित के स्वार्थ मे चोला बदल कर विरोधियों की मदद करने लगे थे..........आज भी कांग्रेसी+कम्युनिस्ट+जेहादी गठबंधन मे जितने मुस्लिम कट्टरपंथी हैं,उनसे कही अधिक हिंदू हैं...सोचिये कि ये कैसे हिंदू हैं ,जिनका हिंदुत्व उन स्वधर्मी हिंदुओ के संताप से पीड़ा और वेदना का अनुभव नही करता है जो केवल हिंदू होने के कारण इस्लामी मुल्कों मे दंड भुगतते रहे हैं...केवल सत्ता सुख की लालच मे रोहिंग्याओं और बांग्लादेशी घुसपैठियों का समर्थन फिर भी हिंदू समाज आजादी के बाद भी सहिष्णुता का घूंट पीकर चुप रहा....लेकिन लगभग आधी दुनिया जीतने वाले इस्लाम का ख्वाब पिछली कई सदियों से यहीं,इसी देश मे मात खा रहा है.....भारत को मुल्क ए  शरिया बनाने का उनका अभियान बार बार दम तोड़ दे रहा है....इसी पराजय की हताशा मे वो खीजे है...बेचैन हैं...इसी हताशा,खीज और बेचैनी के कारण वो रह रह कर उछल कूद मचा कर अपने अस्तित्व एवं अपनी ताकत का समग्र भारतीय समाज को एहसास कराने की कुचेष्ठा करते हैं...यही उनकी मदरसे जनित मजहबी शिक्षा है....!

निबंध- नागरिकता (संसोधन) अधिनियम 2019/ पवन गौतम बृजराही बमूलिया

राज्य-राजस्थान
लेखक-पवन गौतम बृजराही बमूलिया।
विषय-लेख(निबन्ध)
नागरिकता (संसोधन) अधिनियम 2019
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प्रस्तुत अधिनियम के अंतर्गत बांग्लादेश,पाकिस्तान,अफगानिस्तान में प्रताड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय  नागरिकता प्रदान करने से सम्बंधित है।
जिनमे हिंदू, जैन, सिक्ख,बोद्ध, फारसी व ईसाई है।
यह विधेयक करोड़ों लोगों को सम्मान के साथ जीने का अधिकार प्रदान करेगा।
अगर ऐसे अल्पसंख्यक के प्रवासी के विपरीत अवैध प्रवास के नागरिकता के बारे में कोई भी प्रकरण चल रहा है तो वह प्रकरण इस बिल के विशेष प्रावधान से वहीं समाप्त हो जाएगा।
उत्तर पूर्व के सभी राज्यो में जो प्रोटेक्शन दिया गया है ,उसी को आगे बढ़ाते हुए असम,मेघालय,मिजोरम,त्रिपुरा,
मणिपुर नोटिफाइड हो चुके है।
वर्तमान में इस बिल के विरोध में कई स्थान पर विरोध प्रदर्शन भी हो रहा है।
हमे पूरा विधेयक पूर्ण रूपेण पढ़ लिखकर सम्पूर्ण देश मे शांति बनाई रखने की कवायद करनी चाहिए।
क्योंकि हमारे  देश की यही विशेषता है जहाँ अनेकता में एकता है।
विश्व गुरू रह चुके भारत देश की सांस्कृतिक परम्परा सर्वधर्म समभाव व सर्वे भवन्तु सुखिन सर्वे सन्तु निरामया है।
अनादिकाल से आर्यावर्त भरतखण्ड व जम्बूद्वीप से जाने जाने वाला यह देश शरणास्थली के लिए सुविख्यात है।
इस देश की विरासत व धरोहर योग प्रेम व करूणा है जो चिरस्थायी रहे यही कामना है।

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पवन गौतम बमूलिया

निबंध- नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019/ कंचन प्रभा

नाम - कंचन प्रभा 
राज्य-दरभंगा ,बिहार 
शीर्षक- नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019
नागरिकता संशोधन अधिनियम आज देश मे एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है जिधर नजर दे बस इसी पर विचार व्यक्त किये जा रहे है देश मे जगह जगह दंगे हो रहे है बहुत ही मुश्किल समय गुजर रहा है। साधारणतः देखे तो भारत मे कभी कोई मुद्दा उठता है और उसके लिये प्रदर्शन शुरू होते है तो 50 प्रतिशत लोगों को उसका कुछ ज्ञान भी नही होता बस उनके आस पास के लोग सगे सम्बन्धी प्रदर्शन कर रहे है तो मुझे भी करना है लोग देश की सम्पत्ति को क्षतिग्रस्त कर रहे है तो मुझे भी करना है अरे हद हो गई। भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है यही तो भारत का दुर्भाग्य है। सबसे बड़ी गल्ती तभी हुई थी जब भारत और पाकिस्तान को अलग किया गया था तो भारत को धर्मनिरपेक्ष बना दिया गया पकिस्तान को क्यो नही बनाया गया। लोग यही सोचेंगे कि मैं पकिस्तान के विषय मे क्यों बोल रही हूँ पर क्यों ना बोलूं आखिर पकिस्तान तो भारत का ही हिस्सा है ना। यहाँ अभिव्यक्ति की आजादी के बहाने देश को कोई भी गाली दे दे कोई भी देश के खिलाफ कुछ भी बोल दे सब जायज है यही कारण है कि भारत की आज ये स्थिति है। कोई पकिस्तान को गाली दे कर तो दिखा दे वहाँ इसको किस प्रकार देखा जाएगा? 
खैर आज ये नागरिकता संशोधन अधिनियम पारित होना भारत केलिए सुर्य की नई किरण जैसी है जिसके प्रकाश मे बहुत से भारतीयों को जो देश के बाहर सताये जा रहे है उन्हे राहत मिलेगी। भारत के मुसलमानो को जिसने भी भरकाया है वो सत्ता केलिये अपनी रोटी सेकने का काम कर रहे हैं। इस अधिनियम से किसी भी धर्म को कोई भी क्षति नही होने वाली है । इसी बात को कुछ लोग नही समझ पा रहे हैं। हम जानते है कि परिवर्तन संसार का नियम है और परिवर्तन से कुछ अच्छा होता है तो इसे बदलना कोई गलत नही। अगर युगों से कोई बात गलत होती रही है तो चूँकि ये हमारे पूर्वजों द्वारा बनाई गई है तो बस ढ़ोते रहें उसे बदले ना। अगर संविधान मे कुछ संशोधन देश के नागरिकों के हित में हो रहा है तो इसमे किसी को दिक्कत क्यो हो रही है। इस संशोधन अधिनियम से किसी भी मुसलमान को क्यो घबराहट हो रही है क्या आज तक उन्हे भारत मे कभी सताया गया है? या क्या उनका धर्म परिवर्तन करवाया गया है? जबकि पकिस्तान मे हिंदुओ को बहुत सताया गया है उनके धर्म परिवर्तन करवाया गया है ।वहाँ के मंदिरों को तोड़ दिया गया है और उस स्थान को पेशाबखाना बना दिया गया है और भारत मे मुस्लिमो के त्योहारों ईद बकरीद या तजिया निकलने पर सड़क खाली करवा दिये जाते है तो भाईयों आप ही बताईये ये कहाँ का न्याय हुआ? अगर भारत के संविधान मे भारतीयो केलिये कुछ अच्छा करने हेतु संशोधन हो रहा है तो किसी को क्या दिक्कत? सायद दिक्कत उन्ही को है जो घुसपैठिया होंगे क्योंकि ये नागरिकता संशोधन अधिनियम के पारित होने से अगर किसी को नुकसान होने वाला है तो वो घुसपैठिया ही है।
       धन्यवाद

कंचन प्रभा
दरभंगा, बिहार 
30/12/19

निबंध -नागरिक संशोधन अधिनियम/ रागिनी शर्मा

रागिनी शर्मा
विषय :नागरिक संशोधन अधिनियम
प्रयागराज
उत्तर प्रदेश

CAB या  Citizenship Amendment BIL
नागरिकता संधोधन अधिनियम
बेशर्मी की सारी हदें लांघ दी गई , आइए जानें क्या है इस बिल में खास 
इसके लिए आपको जानना होगा क्या थी भारत विभाजन की वजह आप सभी को पता है कि भारत विभाजन के दौरान यह कहा गया था कि धार्मिक आधार पर देश का बटवारा किया गया और यह कहा गया कि मुस्लिमों के लिए एक नया राष्ट्र पाकिस्तान बनाया जा रहा है और भारत भारत अपना विशाल हृदय दिखाते हुए जो लोग देश नही छोड़ना चाहते उन्हें भी रहने देगा। 
तो उसी दिन से पाकिस्तान के सारे हिन्दू भारत के नागरिक हो गए थे।
1. 7 सितम्बर 1947 गांधी जी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि पाकिस्तान से आने वाले हिंदुओ और सिख धर्म के लोगों को नागरिकता देना उन्हें मताधिकार देना रोजगार देना भारत सरकार का दायित्व होगा
2. इस कानून में संसोधन के जरिये 1955 , 1986, 1992 ,2003 ,2005 में भी संसोधन करके 10 लाख लोगों को पहले भी नागरिकता दी गई है । 
3. देश का दुर्भाग्य ये रहा है कि जिसके लिए इस बिल की ज्यादा जरूरत है जो पाकिस्तान से और बांग्लादेश से आये शरणार्थियों को नागरिकता नही दी गयी । 
4.भारत सरकार द्वारा CAB 2019 में सिर्फ पाकिस्तान बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आये हुए नागरिकों को नागरिकता देने के लिए लेकर आयी है 
5.इसमें भारत में रहने वाले सात समुदायों में से छः हिन्दू,जैन,पारसी,सिख, ईसाई, बौद्ध  को एक समूह बना कर शामिल किया गया है।  जिन तीन देश के नागरिकों को इसमें शामिल किया गया है वे सभी इस्लामिक देश हैं अतः वहाँ उनका धार्मिक उत्पीड़न नही हो सकता है इसलिए सरकार ने इसमें मुस्लिमों को शामिल नही किया
बिल में इससे ज्यादा कुछ भी नहीं है।
बिल पर उठ रहे सभी सवालों के जवाब अमित शाह ने राज्यसभा और लोकसभा दोनो सदनों में दिया
सवाल और जवाब इस प्रकार है। 
आरोप - कानून असंवैधानिक है क्योंकि यह अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है । 
जवाब - इस क़ानून के अंर्तगत उन देशों के अल्पसंख्यकों को एक कैटेगरी में रखा गया है और इस तरह के कई कानून पहले भी बनाये गए हैं आरक्षण भी इसी तरह के कानून का उदाहरण है। 
आरोप -यह बिल मुस्लिमों के खिलाफ है
जवाब-इस बिल का विरोध करने वाले किसी भी शख्स को यह नही पता है कि इससे भारत के मुस्लिमों का क्या नुकसान होगा, यह बिल नागरिकता देने का कानून है नागरिकता लेने का नही इससे भारतीय मुस्लिमों को कोई दिक्कत नहीं है।, 
आरोप-मुस्लिमों को नागरिकता क्यों नहीं
जवाब-उन देशों के जो मुस्लिम भी नागरिकता लेना चाहते हैं उन्हें भी आवेदन का अधिकार है, वो भी आवेदन कर सकते हैं । अदनान सामी का उदाहरण देते हुए अमित शाह जी ने राज्यसभा में जवाब दिया
आरोप-रोहिंग्या को नागरिकता क्यों नहीं 
जवाब-रोहिंग्या भारत में सीधे नही आते हैं और म्यांमार में उन्होंने उपद्रव किया और बौद्ध मंदिरों में हमला किया और वहां ISIS जैसे ही गृह युद्ध किया जिसकी वजह से इन्हें कोई भी देश अपनी सुरक्षा को ताक पर रखकर शरण नही दे सकता है।
आरोप-इस बिल से पूर्वोत्तर के राज्यों में रोजगार की कमी का खतरा बढ़ेगा 
जवाब-पूर्वोत्तर के किसी भी राज्य में यह बिल लागू नहीं होता है
2014 में ममता बनर्जी जी ने इस तरह के बिल की मांग की थी और डॉक्टर मनमोहन सिंह जी ने असम में रह रहे शरणार्थियों का ज़िक्र करते हुए एक ऐसे ही कानून की माग की थी । कांग्रेस ने बटवारे के समय ही कहा था कि हम पाकिस्तान के हर हिंदू को अपने यहां नागरिकता और रोजगार देंगे  70 सालों से आजतक नही दिया ।
इस बिल से किसी को कोई भी समस्या नही है इसका विरोध करने वाले भी अच्छे से जानते हैं कि इस बिल से मुस्लिमों का कोई नुकसान नहीं है न तो भारत में रहने वालों का न तो यहाँ आकर बसने वालों का
 तो फिर ये आगजनी और तोड़फोड़ क्यों आखिर इतनी हिंसा किस बात की । 
ये सब हो रहा है अपने अस्तित्व को बचाने के लिए ,
क्योंकि सपा ,बसपा ,कांग्रेस, एनसीपी, को TMC और वामपंथी पार्टियों का साथ मिल गया और सभी को लग रहा है कि इससे सरकार के खिलाफ माहौल बनाया जा सकता है तो वहीं जिनको इस बिल के बारे में इस लाइन की "यह बिल मुस्लिमों के खिलाफ है" से ज्यादा कुछ भी नहीं पता है वो लोग बिल के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं। 
क्या यही है वो कांग्रेस जो गांधी जी के अहिंसा के सिद्धांतों पर चलती थी राहुल गांधी जी ने खुद को गाँधी बता कर हिंसात्मक राजनीति की शुरुआत की है। इन्होंने सिर्फ सावरकर का ही नहीं गाँधी जी का भी अपमान किया है
हमने सुना था देश को गांधी जी ने आजाद कराया था लेकिन दिल्ली के स्वतंत्रता सेनानी कल फिर दिखे मुझे हाथों में पेट्रोल बम और पत्थर के साथ पुलिस के खिलाफ अहिंसा वाला प्रदर्शन करते हुए तब पता चला, कि नही देश तो अभी भी गुलाम है। 
सोशल मीडिया पर मैंने सवालों की जगह आरोप लिखा है क्योंकि वास्तविकता ये है कि ये जो सवाल हैं ये सवाल कम और आरोप ज्यादा हैं
एक सवाल मेरा भी विपक्ष के लोगों से है क्या जो याचिका इन्होंने सुप्रीम कोर्ट में लगाई है अगर उसमें फैसला सरकार के पक्ष में आता है तो क्या ये पूरे देश के लोगों से माफी मांगेंगे क्या इन लोगों ने जितनी बसे जलाई उसकी भरपाई करेंगे। 
और छात्रों पर लाठीचार्ज पर मैं बस इतना ही कहूंगी की "साठे सठ्यम समाचरेत" उतड़न्त के साथ उतड़नता का ही ब्यवहार करना चाहिए। जिसकी रोजी रोटी इन्होंने फूक दी उसका हर्जाना कौन भरेगा ।
मैं आप सभी आम नागरिकों से अनुरोध करती हूँ कि कृपया इस बिल का पुरजोर समर्थन करें । क्योंकि आपकी चुप्पी आगजनी करने वालों का हौसला बढ़ा रही है। 
आप शेर हैं और जब एक शेर गर्जना करता है तो हजारों गीदड़ों की आवाजें विलुप्त हो जाती है।
जिनको बुरा लगे तो भइया हमें कन्हैया कुमार वाली नही बल्कि गांधी जी वाली आजादी पहले ही मिली हुई है।

निबंध- नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019/ संदीप सिंधवाल

नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019
भारत एक ऐसा देश जहां हिन्दू बहुसंख्यक होते हुए भी एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। हमारे राष्ट्र के नाम हिंदुस्तान से ही स्पष्ट है कि विश्व भर में कहीं भी प्रताणित हिन्दू को केवल भारत में ही शरण मिल सकती और नागरिकता मिल सकती है उनकी जिम्मेदारी कोई ईसाई या मुस्लिम देश हरगिज नहीं उठा पाएगा।
गौरतलब है कि बहुत सारे देश विशेष कर मल्सिम देशों में हिन्दू को घृणित नज़रों से देखा जाता रहा है इसी बदसुलूकी के चलते ही भारत सरकार को इस तरह के ठोस कदम उठाने की आवश्कता पड़ी। हमारी हिन्दू संस्कृति और धर्म को केवल ही भारत ही बचा सकता है नहीं तो निकट भविष्य में दुनिया भर में हिन्दुओं को जबरन धर्म परिवर्तन देखा जाएगा। 
भारत में सियासी बाजार का माहौल बहुत गरमाया हुआ है। इस अधिनियम को तोड मरोड़कर गलत ढंग से मुस्लिम लोगों के सामने पेश किया जा रहा है। कुछ अशिक्षित लोगों को विद्रोह में शामिल होते हुए देखा गया है जिन्हे वास्तव में ये तक पता नहीं है कि आखिर ये अधिनियम है क्या? बस आंखों पर गलतफहमी की पट्टी बांधे अंधेरे में हाथ पैर मारते हुए सरकारी सम्पत्ति को क्षति पहुंचने पर लगे हुए हैं। गलतफहमी की वजह से उन्हें इस बात का एहसास है नहीं की सरकारी संपति भी उनकी अपनी ही है। हजारों करोड़ों का नुक़सान करके देश की आर्थिक स्थिति कमजोर ही होगी। विश्व भर में इन दिनों मंदी का दौर है और भारत फिर भी अन्य देशों की अपेक्षा मजबूत स्थिति में है। इसी मजबूती को और और मजबूत करने की जरुरत है ना कि बनाए हुए को आग के हवाले। आंदोलन और जुलूस निकालना काफी हद तक सही है और कानून के दायरे में भी, पर इस तरह अराजकता का माहौल पैदा कर राष्ट्र की संपति को ध्वस्त कर हम पीछे और बहुत पीछे चले जाएंगे।
बिल स्पष्ट बहुमत के साथ संसद के दोनों सदनों में पारित हो चुका है तो इस बिल के पीछे अब इतना हंगामा खड़ा करके कुछ भी हासिल नहीं होगा सिवाय विपक्ष की राजनीति को और मजबूत करने का। और सच्चाई तो यही है कि इस घिनौनी राजनीति को मुस्लिमों या किसी और धर्म के लोगों से कुछ लेना देना है ही नहीं। वे तो बस इनका इस्तेमाल कर रहे हैं और मूर्ख लोगों को इस बात की भनक तक नहीं है। 
मै इस अधिनियम का हृदय से स्वागत करता हूं इससे लाखों भटक रहे हिन्दुओं को जीने की एक उम्मीद के साथ साथ भारतीय होने की पहचान मिलेगी।

संदीप सिंधवाल

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...