ज़िला - सुरजपुर
शीर्षक - आम
विधा- कविता
1. आम हूं मैं आम हूं
फलों का राजा आम हूं
आता मैं कई काम हूं
हवन में काष्ठ जलकर
पूजा संपन्न कराता हूं
कलश में पत्ते सजकर
देव पूजन कराता हूं
2. आम हूं मैं आम हूं
फलों का राजा आम हूं
बसंत ऋतु का स्वागत
अपने बौर से मैं करता हूं
कोयल भी कुकने लगता है
पूरे उपवन को महकाता हूं
3. आम हूं मैं आम हूं
फलों का राजा आम हूं
हर उम्र को लुभाता हूं
खट्टे मीठे स्वाद चखाता हूं
अचार, मुरब्बा,जेम बनकर
भोजन का स्वाद बढ़ाता हूं
4. आम हूं मैं आम हूं
फलों का राजा आम हूं
जेठ की तपन में छांव देता हूं
पसीने में हवा चला देता हूं
बाग में बच्चों को खेलते देख
मैं भी झूमने लग जाता हूं
5. आम हूं मैं आम हूं
फलों का राजा आम हूं
लंगड़ा, दशहरी अौर कलमी
कई रूपों में पाया जाता हूं
लाल, पीला और हरा रंग में
सबके मन को लुभाता हूं
6. आम हूं मैं आम हूं
फलों का राजा आम हूं
लोग मुझे पत्थर मारते हैं
फिर भी देता फल आम हूं
जब मेरा तना सूख जाता है
इमारती ,जलाऊ बन जाता हूं
7. आम हूं मैं आम हूं
फलों का राजा आम हूं
सबको देता एक संदेश हूं
भविष्य में आम बचाना है
खूब लगाना आम सभी
मिल पाएगा आम तभी