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Thursday, May 14, 2020

छत्तीसगढ़ के सुरजपुर से मनोज कुमार पाटनवार की रचना- आम

रचनाकार- मनोज कुमार पाटनवार
ज़िला - सुरजपुर
शीर्षक - आम
विधा- कविता

1.  आम हूं मैं आम हूं
 फलों का राजा आम हूं
 आता मैं कई काम हूं 
  हवन में काष्ठ जलकर 
पूजा संपन्न कराता हूं 
  कलश में पत्ते सजकर 
देव पूजन कराता हूं 

2.  आम हूं मैं आम हूं
फलों का राजा आम हूं
 बसंत ऋतु का स्वागत
 अपने बौर से मैं करता हूं
कोयल भी कुकने लगता है
 पूरे उपवन को महकाता हूं

3.  आम हूं मैं आम हूं
 फलों का राजा आम हूं 
हर उम्र को लुभाता हूं 
खट्टे मीठे स्वाद चखाता हूं 
 अचार, मुरब्बा,जेम बनकर
 भोजन का स्वाद बढ़ाता हूं 

4.  आम हूं मैं आम हूं
 फलों का राजा आम हूं
 जेठ की तपन में छांव देता हूं 
पसीने में हवा चला देता हूं 
बाग में बच्चों को खेलते देख 
मैं भी झूमने लग जाता हूं

5.  आम हूं मैं आम हूं
फलों का राजा आम हूं
लंगड़ा, दशहरी अौर कलमी
कई रूपों में पाया जाता हूं
लाल, पीला और हरा रंग में 
सबके मन को लुभाता हूं

6.  आम हूं मैं आम हूं 
फलों का राजा आम हूं
 लोग मुझे पत्थर मारते हैं 
फिर भी देता फल आम हूं
जब मेरा तना सूख जाता है
इमारती ,जलाऊ बन जाता हूं

7.  आम हूं मैं आम हूं 
फलों का राजा आम हूं
सबको देता एक संदेश हूं 
भविष्य में आम बचाना है
खूब लगाना आम सभी
मिल पाएगा आम तभी

Monday, May 4, 2020

छत्तीसगढ़ से मनोज कुमार पाटनवार की रचना

मनोज कुमार पाटनवार
बिटकुला,  सीपत
जिला - बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
मो नं 8305144305

             वह कौन

जितनी मुहब्बत करता हूं मैं उनसे ।
उससे भी अधिक प्यार करती है  मुझसे।।
मेरे हंसने से उसे सुकून मिलती है।
 मेरा आंसू देख ले तो, वह तड़प उठती है ।।
मेरे लिए वह  सब कुछ  करती है ।
कुछ ना कर सके तो दिन भर दुआ करती है।।
 मेरी खुशियां ही, उनकी  सपना होती है।
 जिसके पूरे होने पर,वह बहुत खुश होती है ।।
जब मेरा जीवन दुश्वार होती है ।
सब कुछ वार ,जीवन संवार देती है।।
जिसने मुझे दिए, जीवन के सारे संस्कार।
चुका ना पाऊंगा, मैं उनके यह उपकार।।
 उसके रहते, मेरे घर ही है जन्नत। 
वह खुश रहे, यही रब से मांगू मन्नत ।।
वह मेरी भूल पर, कर देती है क्षमा। 
 उसके रहने से, मेरे घर में है शमा।।
उसके पहले, जग से होऊं रुखसत।
 बस यही है मेरी, दिली हसरत ।।
दम निकले उन्हीं के कदमों तले ।
जब भी जन्म लूं, उन्हीं का दामन मिले।
नहीं उनसे, मुझे कोई शिकवा गिला।
वह हमेशा, मेरा हौसला बढ़ाते मिला।।
  *वह कौन* है बतलाता हूं ।
  पहेली से  पर्दा उठाता हूं ।।
उससे ही घर की, आन -बान और शान है ।
वह मेरा अभिमान है, वह ही मेरी जान है ।।
उससे ही  मेरी पहचान है ।
आप उससे नहीं अन्जान है।।
 वह कोई और नहीं...
 *वह मेरी मां है, मां है, मां है।।*

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...