जिला- कोरिया, छत्तीसगढ़
विधा- छंद मुक्त कविता
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बस यही किस्सा मेरी यही कहानी है।
अपनी फितरत में नहीं बेईमानी है ।
जरूरतमंदों की जरूरत बन जाना,
यह आदत अपनी बरसों पुरानी है।
बाहर नहीं आ पाता यह हुनर है मेरा
इन आंखों में वरना आप से अधिक पानी है ।
कोई बड़ी दुश्मनी और अदावत नहीं
उसके साथ मेरी जंग सिर्फ जुबानी है।
जरा इंतजार फिर पूरा हो जाएगा
मेरा ख्वाब जो बेहद आसमानी है।
ऊपर से वेश मैं जैसा भी बना लूं ।
मेरी रगों में खून हिंदुस्तानी है ।
माफ कर देना मुझको अपना जानकर,
मेरी जानिब से अगर गलत बयानी है।
- बिजेन्द्र अहीर
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