जिला- कोरिया, छत्तीसगढ़
विषय- बसन्त
विधा- गीत
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कलियांँ खिलने लगीं फूल महकने लगे
जब से आया बसंत, सब बहकने लगे
याद करके अपने प्रियतम को
अंग-अंग प्रियतमा के फड़कने लगे
जब से सर्दी गई, ऋतुराज आ गया
कलियों को छेड़ने का भंवरे को अंदाज आ गया
रात मस्ती भरी, दिन भी है खुशनुमा
सबको ललचा रही, कुदरत की सुषमा
दृश्य यह सारा नैनों से निहार कर
चेहरे मुरझाए भी यूं दमकने लगे
अमुवा के डाल पर, गा रही है कोयलिया
सज गई है सुहागन के जैसी बगिया
चल रही है पवन मंद-मंद हरसू
दे रहे हैं सदा, लाल-लाल टेसू
ऐसे आलम ऐसे मौसम में
सब के सब दिल जवां यूं दहकने लगे
-बिजेन्द्र अहीर
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