Showing posts with label शम्भु कश्यप 'दादा'. Show all posts
Showing posts with label शम्भु कश्यप 'दादा'. Show all posts

Tuesday, October 29, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि शंभु कश्यप 'दादा' की रचना- जय आदिवासी

नाम - शंभु कश्यप 'दादा'
पता - सुकमा
राज्य - छत्तीसगढ़
मो. - 9406377737
शीर्षक - जय आदिवासी


ए दादा ए नानो...
मेरी एक बात मानो
अंधकार से लड़ना है तो
शिक्षा का महत्व पहचानो
बच्चों को तूम खूब पढ़ाओ,
हाथों को मजबूत बनाओ।
अपने हक-अधिकार के लिए,
हाथों में अब कलम उठाओ।।
बाबा साहब के राह में
कलम उठा चल आदिवासी
मैं आदिवासी, तू आदिवासी
जय आदिवासी, जय आदिवासी।।
ए दादा ए नानो...
नेताओं की बात न मानो
हमें समझते वोट बैंक
राजनीति उनकी पहचानो।
शिक्षित सबको होना होगा
गुण्डाधूर के हे सन्तानो।
मिलके हमें बनाना है
आदिवासियों की नई पहचान,
एक हाथ में कलम हो अपने
दुजे में संविधान।
बाबा साहब की राह में
कदम बढ़ा चल आदिवासी
मैं आदिवासी, तू आदिवासी
जय आदिवासी, जय आदिवासी।।
ए दादा ए नानो..
ए दादा ए नानो,
हर बच्चे के हाथ में किताब हो
मन बे बस इतना ठानो।
बिरसामुण्डा के हे संतानो,
पढ़-लिखकर ये नन्हे दीपक
आदिवासियों का नाम करेंगे,
घर-परिवार और देश की
सेवा में वो काम करेंगे।
बाबा साहब के राह में
कदम मिलाकर चल आदिवासी
मैं आदिवासी, तू आदिवासी
जय आदिवासी, जय आदिवासी।।
शंभु कश्यप "दादा"
(सुकमा)

Friday, September 27, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि शंभु कश्यप 'दादा' की रचना मोचो बस्तरिन मांय

नाम - शंभु कश्यप 'दादा'
शीर्षक - मोचो बस्तरिन मांय
सम्पर्क - 9406377737
राज्य - छत्तीसगढ़

मोचो बस्तरिन मांय
आया दन्तेसरी चो छांय।
मोचो बस्तरिन मांय
आया दन्तेसरी चो छांय।।

पाचे सोऊन, झटके उठे
आया उठले कुकड़ा बासे,
बियाने बियाने बड़ाले तेबे
घर दूआर बले सूंदर आसे।।
घर लोग चो रांदनी काजे,
शीतने बले आया नहाये।
आमचो काजे तपलो-तपलो
आपुन बासी भात खाये।।
गोट बले कम पड़ेदे,
तुमके काय सांगेंदे काय,
मोचो बस्तरिन मांय.....

सौकार घरे बुता करली
तेबे तो चले उनचो दूकान।
एताय बोसून साग बिके
बोलेसे दखा जोड़ान-जोड़ान।।
घर लोग चो पेट पोसली
आपलो पेट के कोदान।
बेड़ा-बेड़ा चो बोलेसे धान
बोलेसे रान चो सरगी पान
धन-धन रे तुचो मांय, धन-धन रे तुचो मांय
मोचो बस्तरिन मांय.....

बांधुन पिला के पाटे
जाये कुली-बुता बाटे।
एक पाहर खाऊन
असन जीवना काटे।
कितलई तपलो खामे आया
कसन बूता करे।
बेमार पोड़ले बाबा,
आया नांगर धरे।।
बूता केबई अटके नाई
कितलो तपलो जरे।
आईग असन जर ने बले
नि करे कांय
मोचो बस्तरिन मांय....

गांव-गांव ने बुता करलिस
सांगेसे तुचो पांय चो चिना।
कसन-कसन बाटे रेंगलिस
सांगेसे लोहु पांय चो चिना।।
घर काजे कितलो तियाग
बलेसे पांय चो चिना।
कितलो दूक ने पोसलिस आया
बलेसे पांय चो चिना।।
तुचो लागि के चुकाक नि सकें
कितलई पड़ले तुचो पांय
मोचो बस्तरिन मांय
आया दन्तेसरी चो छांय।।

शंभु कश्यप 'दादा'
    (सुकमा)

Friday, September 20, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि शंभु कश्यप (दादा) की रचना- मेरा सुकमा

कवि - शंभु कश्यप (दादा)
शीर्षक - मेरा सुकमा
पता - सुकमा
राज्य - छत्तीसगढ़

सुकमा की सैर पर चलो मेरे संग
दण्डकारण्य भुमि का रहा अंग
चारों ओर घने वन, बहुत थे जानवर जंगली
सरल स्वभावी जंगलो के राजा थे भोले आदिवासी
जल-जंगल-जमीन सब आदिवासियों का था अपना
इनके अलावा न उनका कुछ था सपना
फिर आई रियासती काल
बारहवीं सदी का था साल
सुकमा चिंतलनार कोत्तागुड़म रेकापल्ली सारी
भीजी (भेज्जी) राज्य की थी जमींदारी
आज भी मिलेंगी खंडहर प्राचीन
फिर सुकमा आई बस्तर राज्य के अधीन
सुकमा जमींदारी बहुत पुरानी
इनकी भी रही बड़ी कहानी
जन्मभुमि थी इनकी वारंगल
आये थे पार कर नदी जंगल
कहा जाता बीच नदी में नाव था ठहरा
एक बालक की मांग कर रहा
बालक शबरी को कुर्बान
बचानी थी अन्यो की जान
मुनीपुत्ता तेलावर्ती था वो स्थान
शिवलिंग की टापू वो भोलेनाथ का धाम
नदी पार कर दंपति ने घर बनाया जगह डोंगरी
शिवलिंग स्थापित किये कहलाया महादेव डोंगरी
उस तरफ थे काफी जंगली जानवर
उन्होने फिर शबरी तट पर बनाया घर
उनको सुख मिला मन उनका रमा
वह सुख स्थल कहलाया सुकमा
इनकी आराध्य है चिटमिटीन माता
आज भी पुजारी पुजन में वारंगल की माई गाता
सुकमा जमींदारी के रामराज थे संस्थापक
बस्तर राज्य अधीन अंग्रेजी हुकुमत
रामराज ने उन्नीस सौ तीन में महल बनाया
इस घराने की रही विशेषता
रंगाराज नाम जिसका उसका पुत्र रामराज कहलाता
जमींदार कन्या का विवाह बस्तर नरेश से मना
दहेज में दिया कुकानार परगना
उन्नीस सौ आंठ में सुकमा- जगदलपुर सड़क बना
तब सुकमा में था एक शाला, एक थाना
सुकमा जमींदारी मे थे सवा सौ गांव
चलती थी तब बैलगाड़ी और नांव
आजादी की लड़ाई बस्तर क्रांति भुमकाल
कोण्टा से धनीराम, सुकमा से बोड़की-बोरी और दनिया ने उठाया भाल
गुण्डाधुर के संग बने अंग्रेजों के काल
सवा उन्नीसवी में भयावह बाढ थी आई
रामायण की शबरी से नदी  कहलाई
आजादी के बाद सुकमा जमींदारी बस्तर जिला में गया मिल
अंठानब्बे में दन्तेवाड़ा जिला में गया मिल
कोण्टा थी तहसील
फिर दो हजार बारह में बना सुकमा जिला
भारत की बगिया में जैसे एक फूल खिला
जो विकास की राह पर चल निकला
बढ़ता सुकमा, पढ़ता सुकमा
सुंदर सुकमा, बदलता सुकमा।।

शंभु कश्यप (दादा)
9406377737

Sunday, September 8, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि शंभु कश्यप "दादा" की रचना हल्बी आमचो जीवना

नाम - शंभु कश्यप "दादा"
शीर्षक - हल्बी आमचो जीवना
सम्पर्क - 9406377737
स्थान - सुकमा
राज्य - छत्तीसगढ़

-----हल्बी आमचो जीवना-----

घरे लिपतो बरन माटी..
आई चो बनालो सुंदर टाटी..
संगवारी मन संगे खेलते रलू
रंग-रंग चो बाटी..
मित मन संगे होऊन सोर..
छेर-छेरा नाचूँ खोर-खोर..
पिला बेरा आया चो साड़ी झूलना..
पेटे बांधुन मके आया
मुण्डा जाये धरून चोलना..
दादा चो दांदर बाबा चो झारी..
बहार-सड़ार बेड़ा चो पारी..
आजू-दीदी चो धंधा पकानी
मैं सोयें बाबा चो पेट पोटारी..
आजी मके दखा खुबे सुरता पड़ेसे..
भुलका नाई हल्बी जीवना के
पिला-झिला मन पांय पड़ेंसे..

शहर जीवना के नि धरंवा
कोनी डराले नि डरंवा..
हल्बी जीवना के धरून चलंवा
टोरटा भाजी संगे हरंवा..
कांदूल दार आऊर चेच..
कोलियारी भाजी मण्डिया पेज..
चापड़ा चटनी तेतर झोर
सुक्सी संगे भेण्डा छोर
एयी सबू के खाऊन आई सौ बरख जियेसे..
भुलका नाई हल्बी जीवना के
पिला-झिला मन पांय पड़ेंसे..

भात खांऊ दोना-पतरी खिलुन
सबु कुटुम रहुँ मिलुन-झिलुन..
रापा-गंयती टंगिया-कूश
आमचो तिहार नोवा-अमूस..
नि बोलूँ आमी गोट आगर
बियान उठले बैला-नांगर..
हांसा बोकड़ी कुकड़ी चियां
सुंदर आमचो पखना कुड़िया..
गांय-गांय ने बोसे हाट
सांगदे सबु खोर बाट..
मरनी हो नाहले बिया
गांवरिया के दखांऊ नाट..
मोचो जीवना हल्बी काजे
गोट बले कम पड़ेसे..
भुलका नाई हल्बी जीवना के
पिला-झिला मन पांय पड़ेंसे..

गांव गोसिन गंगादई तुय आया परदेसीन..
आमी तो आंव नर लोक तुय आया उपरपुरीन..
नड़ेर-सुपारी पाक-फल
डोंडामाल आऊर गंगाजल..
सबु करम चो तुचो खेला
तुचो काजे मण्डई-मेला..
दुय पाहर तुचो आया मैं सेवा करेंसे..
हल्बी जीवना बाढते जाओ
आया तुके पांय पड़ेंसे।..

शंभु कश्यप (दादा)
      सुकमा

Monday, September 2, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि शंभु कश्यप (दादा) की कृति चली गई

नाम - शंभु कश्यप (दादा)
शीर्षक - चली गई
राज्य - छत्तीसगढ़
सम्पर्क - 9406377737

वो महल किसी और का था
मेरा घर नहीं
जहाँ तुम सज कर चली गई...

मोहब्बत तो तुम्हारे लिए व्यापार था
सच्चा प्यार नहीं
जिधर ज्यादा माल उधर भग कर चली गई....

वो पैसा नहीं
पसीना था मेरा
जिसे तुम पैर धोकर चली गई...

पैसे की पट्टी से
तुम्हारी आंखे तो बंद थी
नाक तो नहीं
गोबर की जगह गू उठाकर चली गई..

मैने तो दिल-जान लुटाया था तुमपे
पुरी ईमानदारी से
फिर भी ठग कर चली गई...

वो मेरा दिल था दिल
कोई सुलभ-शौचालय नहीं
जो तुम हग कर चली गई....

शम्भु कश्यप (दादा)
सुकमा

Sunday, September 1, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि शंभु कश्यप (दादा) की कृति गुरू मेरे माथे का चन्दन

नाम - शंभु कश्यप (दादा)
शीर्षक - गुरू मेरे माथे का चन्दन
सम्पर्क - 9406377737
राज्य - छत्तीसगढ़

माता बनकर ममता दिया
पिता बनकर सत राह दिया
मित्र बनकर सलाह दिया
तुम्ही हो मेरे भगवन
करता हुँ शत् शत् अभिनन्दन
गुरू मेरे माथे का चन्दन।

सत्कर्मों का पाठ पढाया
अंधकार को दूर भगाया
सेवाभाव का अलख जगाया
धन्य हुआ अपना जीवन
करता हुँ शत् शत् अभिनन्दन
गुरू मेरे माथे का चन्दन।

गुरू का हाथ जब अपने सर
फिर कैसा भय और कैसा डर
दोस्त रूप में साथ खड़े
फिर क्या विपदा और क्या अड़चन
करता हुँ शत् शत् अभिनन्दन
गुरू मेरे माथे का चन्दन।

मंदिर-मस्जिद क्या जाँऊ
मैं तो गुरू के गीत गाँऊ
गुरू ने सारा संकट हरा
गुरू मेरे संकट मोचन
करता हुँ शत् शत् अभिनन्दन
गुरू मेरे माथे का चन्दन।

शंभु कश्यप (दादा)
सुकमा

Friday, August 30, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि शंभु कश्यप 'दादा' की रचना सुंदर सुकमा

नाम - *शंभु कश्यप 'दादा'*
शीर्षक - *सुंदर सुकमा*
सम्पर्क नं - *9406377737*
राज्य - *छत्तीसगढ़*
कविता -

*माँ रामारामिन की गोद*
*शबरी की ओट*
*बस्तर का हिस्सा*
*राम गमन पथ किस्सा*
*खुबसूरत वादियों का समा*
*अपना सुंदर सुकमा*
*अपना सुंदर सुकमा*

*हैं विविध जंगल-झाड़ी*
*छिंद-सल्फी महुआ ताड़ी*
*चार तेंदू सीताफल*
*लगते मीठे-मीठे फल*
*शबरी, मलगेर की कल-कल*
*लोग बड़े सीधे-साधे*
*गलती पर करें क्षमा*
*अपना सुंदर सुकमा*
*अपना सुंदर सुकमा*

*गोंड-मुरिया, दोरला, धुर्वा*
*मिलकर रहते संग-संग*
*सुकमा के तीन खण्ड*
*सुकमा-कोण्टा, छिंदगढ़ अंग*
*महादेव डोंगरी और तेलावर्ती*
*शिवरात्रि में जरूर घुमना*
*अपना सुंदर सुकमा*
*अपना सुंदर सुकमा*

*शांत वातावरण की घाटी*
*सम्पदाओं से परिपुर्ण*
*खुशहाली हरियाली माटी*
*आता जब कोई शहरी*
*डर जो मन में थी ठहरी*
*मिटता सारा भय*
*दिल सुकमा में रमा*
*अपना सुंदर सुकमा*
*अपना सुंदर सुकमा*

*गांवो की हरियाली शान*
*आदिवासियों की सादगी पहचान*
*तुंगल जलाशय, रंगाराज बाग*
*रामाराम मंडई, मोहरी का राग*
*प्यारा झरना दुरमा*
*एक बार तो घुमना*
*अपना सुंदर सुकमा*
*अपना सुंदर सुकमा*

*शम्भु कश्यप 'दादा'*
*सुकमा*

Thursday, August 29, 2019

कवि -शम्भु कश्यप 'दादा'

(कवि परिचय)

०१. नाम- शम्भु कश्यप 'दादा'
०२. पिता - श्री नारद कश्यप
०३. जन्मतिथि- 06-07-1991
०४. शिक्षा- एम. ए.(हिन्दी,इतिहास)
०५.व्यवसाय- सहायक शिक्षक
०६. साहित्य सेवा(विवरण)-
०७. प्राप्त सम्मान- (शिक्षा क्षेत्र) मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण शिक्षादूत पुरूस्कार (2018)
०८. लेखन की विधा - गीत, कविता, गजल
०९. साहित्य सेवा आपके लिए क्या है?- समाज की सेवा है
१०. पसंदिदा साहित्यकार- जयशंकर प्रसाद जी।
११. पता-
         ११.१ वर्तमान- बगीचापारा सुकमा, जिला-सुकमा (छ.ग.) 494111
         ११.२ स्थायी- बगीचापारा सुकमा, जिला-सुकमा (छ.ग.) 494111
            ईमेल.- shambhukashyap37@gmail.com

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...