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Tuesday, June 2, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से सुशीला साहू "विद्या" के प्रेम पर दोहे

*रचनाकार----सुशीला साहू "विद्या"*
*जिला-------रायगढ़ (छ.ग.)*
*विधा-----------दोहा छंद*
*विषय---------प्रेम*
*शीर्षक-------जीवन साथी*

प्रियतम पावन प्रेम हो,जीवन भर का साथ ।
जीवन के पथ में सदा,थामे रखना हाथ ।।

जनम जनम का साथ हो, तेरा मेरा प्यार ।
प्रेम भाव बंधन सदा,बहता अविरल धार । 

पल-पल पलकें है झुकी,अंतस में अहसास ।
कदम-कदम साथी चलें,कष्ट न आये पास ।।

रौनक भरते जिंदगी ,बगिया बने बहार ।
जीवन साथी साथ हो ,खुशियाँ मिले अपार ।।

सदा हमसफर संग में, जीवन है रंगीन ।
बनी रहूँ यूँ प्रेमिका ,भाव प्रीत में लीन ।।

दुख हो चाहे सुख यहाँ, जीवन बीते संग
साजन सजनी के बिना,जीवन है बेरंग ।।

इक-दूजे से सर्वदा,बनती है पहचान ।
साथ सदा परिवार हो,सारी उम्र सुजान ।।

व्याख्या:- एक प्रेमिका अपने शब्दों में कुछ इस तरह अपने जीवन साथी का जीवन भर साथ सलामत चाहती है और अपनी दिल बात व्यक्त करती है ।

सुशीला साहू "विद्या"

Monday, June 1, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से सुशीला साहू "विद्या" की रचना- मेरा देश

*रचनाकार----सुशीला साहू "विद्या"*
*जिला-------रायगढ़ (छ.ग.)*
*विधा---------कविता*
*शीर्षक-------मेरा देश मेरा हिन्दुस्तान*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~
*प्रान्त प्रान्त हो राष्ट्र निर्माण,*
*हो गाँव-गाँव की पहचान।*
*हम ऋषि मुनियों के संतान,* 
*मेरा देश मेरा हिन्दुस्तान।।*
जय हिन्द ! जय हिन्द ! जय हिन्द.....।
जय हिन्द गाएँ गुणगान ।

मातृभूमि की जीवन पथ प्यारा,
मत जाना इसको तुम भूल।
अच्छी अच्छी बातें मेरे भारत की,
अच्छे अच्छे हैं इसके रूल।।
कदम से कदम बढ़ाते जाना,
करना तुम देश पर कुर्बान ।
*प्रान्त प्रान्त हो राष्ट्र निर्माण,*
*गाँव-गाँव इसकी पहचान।*
*हम ऋषि मुनियों के संतान,* 
*मेरा देश मेरा हिन्दुस्तान ।।*
जय हिन्द ! जय हिन्द ! जय हिन्द...।
जय हिन्द गाएँ गुणगान ।

खेल-खेल में पढ़ना और लिखना,
आओ भारत की गाएँ गुणगान ।
माता पिता और गुरुजनों को,
मिलता है कितना सम्मान ।
हम सीखे हरदम आगे बढ़ना,
इसलिए विश्व में है महान ।
*प्रान्त प्रान्त हो राष्ट्र निर्माण,*
*गाँव-गाँव इसकी पहचान।*
*हम ऋषि मुनियों के संतान,* 
*मेरा देश मेरा हिन्दुस्तान।।*
जय हिन्द ! जय हिन्द ! जय हिन्द....।
जय हिन्द गाएँ गुणगान ।

गंगा यमुना की बहती धारा,
कल-कल करती ता ता धैया ।
कृष्णा कावेरी है पेय प्यारा,
निर्मल निर्झर ताल तलैया  ।
ऊँचे ऊँचे हिमालय की चोटी,
भारत की छटा अमूल्य जान ।
*प्रान्त प्रान्त हो राष्ट्र निर्माण,*
*गाँव-गाँव इसकी पहचान।*
*हम ऋषि मुनियों के संतान,* 
*मेरा देश मेरा हिन्दुस्तान।।*
जय हिन्द ! जय हिन्द ! जय हिन्द.....।
जय हिन्द गाएँ गुणगान ।

पंछी करते हैं कल करलव ,
मधुर संगीत छेड़े तान ।
धन धान्य से भरा है कोना,
राष्ट्र प्रेम आन बान शान ।
गाँव की मिट्टी से उपजे सोना,
 कठिन श्रम करते किसान ।
*प्रान्त प्रान्त हो राष्ट्र निर्माण,*
*गाँव-गाँव इसकी पहचान।*
*हम ऋषि मुनियों के संतान,* 
*मेरा देश मेरा हिन्दुस्तान।।*
जय हिन्द ! जय हिन्द ! जय हिन्द.....।
जय हिन्द गाएँ गुणगान ।

तन मन पावन अनुपन

Saturday, May 30, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से सुशीला साहू "विद्या" की रचना -मजदूर

*रचनाकार----सुशीला साहू "विद्या"*
*जिला-------रायगढ़ (छ.ग.)*
*मजदूर ही वो भगवान है*
*विधा-----------मुक्त छंद*

( सभी मजदूर भाईयों को समर्पित )
*बूँद बूँद खून पसीनों से सींचा,*
*वो मजदूर भगवान हैं।*

जिसके कंधों  पर  ये  बोझ बढ़ा ,
सर पे पगड़ी हाथों में है हथौड़ा ,
श्रमिक ताकतवर वो इसांन है । 
*बूँद बूँद खून पसीनों से सींचा,*
*वो मजदूर भगवान हैं।*

पत्थर ईंट चूनने कारखानों में जाना,
घास-फूस के महल पत्ते हैं बिछौना,
फिर भी मजदूर बड़े महान है ।
*बूँद बूँद खून पसीनों से सींचा,*
*वो मजदूर भगवान हैं।*

प्रकृति की सेवा में प्रतिपल तैयार,
अथक-परिश्रम से लाते धरा में बहार,
इसलिए ये ईश्वर के वरदान है।
*बूँद बूँद खून पसीनों से सींचा,*
*वो मजदूर भगवान हैं।*

रात दिन कड़ी मेहनत करके ,
इस जहाँ का तूने मान बढ़ाया,
तेरी सेवा भाव को नमन है।
*बूँद बूँद खून पसीनों से सींचा,*
*वो मजदूर भगवान हैं।*

घर में  बाई काम पे  नहीं आये ,
सड़क नाली अगर गंदा हो जाये,
हम सभी हो जाते परेशान है ।
*बूँद बूँद खून पसीनों से सींचा,*
*वो मजदूर भगवान हैं।*

सूट बूट और बंगला गाड़ी तो,
यह शान-ए-शौकत की चीज ,
मानव जीवन के संसाधन है ।
*बूँद बूँद खून पसीनों से सींचा,*
*वो मजदूर भगवान हैं।*

मालिक का फर्ज निभाना है मुझे,
बच्चों को पढ़ाना लिखाना है मुझे,
वो सबके दिलों का अरमान है।
*बूँद बूँद खून पसीनों से सींचा,*
*वो मजदूर भगवान हैं।*

*सुशीला साहू "विद्या"*
*रायगढ़ छ.ग.*

Wednesday, May 27, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से सुशीला साहू "विद्या" की रचना- पर्यावरण

*रचनाकार----सुशीला साहू "विद्या"*
*जिला-------रायगढ़ (छ.ग.)*
*विधा-------कविता*
*विषय-------पर्यावरण*
*शीर्षक------आओ हम सब पेड़ लगायें* 
       
धरती की हम शान बढ़ायें ,
   आओ हम सब पेड़ लगायें।
       हरियाली अब चहुँ ओर दिखे ,
           वृक्षों से हम श्रृंगार करायें ।।1।।

सतत करें हम सब निगरानी,
  हम सब मिलकर पेड़ बचायें ।
     संतान सम करें देखभाल,
        कोई नुकसान न पहुचायें।।2।।

बेटा बेटी के नाम पर सभी,
   आओ एक पेड़ लगायें।
      हरी-भरी हो धरा हमारी,
         ऐसा करके हम दिखलायें।।3।।

प्रकृति छटा हो अनुपम अवनी ,
   प्रदूषण अब जग से मिटायें।
      पर्यावरण की हो सफाई,
          ऐसा प्रयास करके करायें ।।4।।

वृक्षारोपण पुण्य है भारी,
    इसे बचाकर धर्म कमायें।
      भूषण होते धरा हरितिमा ,
          पृथा को हम इनसें सजायें ।।5।।

धरा खत्म सब हो जायेगी,
    इस पर जरा गौर फरमायें।
       धरती की शान बढ़ाये हम ,
          पेड़ से हम श्रृंगार करायें।।6।।

व्याख्या:- वर्तमान स्थिति को देखकर कविता के माध्यम से पेड़ पौधों की सुरक्षा करें अपने और अधिक से अधिक पेड़ लगाएँ।इसी संदर्भ में लोगों में जागरूकता लाने पर जोर दिया गया है।

Saturday, May 23, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से सुशीला साहू "विद्या" की रचना

*रचनाकार-----सुशीला साहू "विद्या"*
*जिला--------रायगढ़ (छ.ग.)
*विधा-------------राधेश्यामी छंद*
*मापनी-----------16 , 16*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~
*भीगी पलकें सुना रही है,*
             *एक अनकही मौन कहानी ।*
*काश प्यार की होती कीमत ,*
            *तनमन लगती रूत सुहानी ।।*

जीवन गाथा हो पल-पल की ,
              सुकुन भरी चाहत बाहों में।
साहस तो अब हो गये शुन्य ,
                 चलती कैसे इन राहों में ।
विरह व्यथा में जीवन कटती,
                 मीरा जैसी प्रेम दिवानी।
*भीगी पलकें सुना रही है,*
             *एक अनकही मौन कहानी ।*
*काश प्यार की होती कीमत ,*
            *तनमन लगती रूत सुहानी ।।*

साथ-साथ चलने की खाई,
                 कितने सारे कसमें वादें ।
जीवन में सदा नेह बरसे,
                 प्यार भरे हमारे इरादें ।
बयाँ करूँ कैसे इन सबको,
              प्रेम प्यार की होय निशानी ।
*भीगी पलकें सुना रही है,*
             *एक अनकही मौन कहानी ।*
*काश प्यार की होती कीमत ,*
            *तनमन लगती रूत सुहानी ।।*

अनजानी रिश्तों में बँधते,
                     होते सारे बंधन प्यारी ।
राही हम सब एक राह के,
                   प्रेम पंथ में दुनियाँ सारी ।
भरती आहें जीवन पथ में,
              करो नहीं अब तुम मनमानी ।
*भीगी पलकें सुना रही है,*
             *एक अनकही मौन कहानी ।*
*काश प्यार की होती कीमत ,*
            *तनमन लगती रूत सुहानी ।।*


दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...