*रचनाकार----सुशीला साहू "विद्या"*
*जिला-------रायगढ़ (छ.ग.)*
*विधा---------कविता*
*शीर्षक-------मेरा देश मेरा हिन्दुस्तान*
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*प्रान्त प्रान्त हो राष्ट्र निर्माण,*
*हो गाँव-गाँव की पहचान।*
*हम ऋषि मुनियों के संतान,*
*मेरा देश मेरा हिन्दुस्तान।।*
जय हिन्द ! जय हिन्द ! जय हिन्द.....।
जय हिन्द गाएँ गुणगान ।
मातृभूमि की जीवन पथ प्यारा,
मत जाना इसको तुम भूल।
अच्छी अच्छी बातें मेरे भारत की,
अच्छे अच्छे हैं इसके रूल।।
कदम से कदम बढ़ाते जाना,
करना तुम देश पर कुर्बान ।
*प्रान्त प्रान्त हो राष्ट्र निर्माण,*
*गाँव-गाँव इसकी पहचान।*
*हम ऋषि मुनियों के संतान,*
*मेरा देश मेरा हिन्दुस्तान ।।*
जय हिन्द ! जय हिन्द ! जय हिन्द...।
जय हिन्द गाएँ गुणगान ।
खेल-खेल में पढ़ना और लिखना,
आओ भारत की गाएँ गुणगान ।
माता पिता और गुरुजनों को,
मिलता है कितना सम्मान ।
हम सीखे हरदम आगे बढ़ना,
इसलिए विश्व में है महान ।
*प्रान्त प्रान्त हो राष्ट्र निर्माण,*
*गाँव-गाँव इसकी पहचान।*
*हम ऋषि मुनियों के संतान,*
*मेरा देश मेरा हिन्दुस्तान।।*
जय हिन्द ! जय हिन्द ! जय हिन्द....।
जय हिन्द गाएँ गुणगान ।
गंगा यमुना की बहती धारा,
कल-कल करती ता ता धैया ।
कृष्णा कावेरी है पेय प्यारा,
निर्मल निर्झर ताल तलैया ।
ऊँचे ऊँचे हिमालय की चोटी,
भारत की छटा अमूल्य जान ।
*प्रान्त प्रान्त हो राष्ट्र निर्माण,*
*गाँव-गाँव इसकी पहचान।*
*हम ऋषि मुनियों के संतान,*
*मेरा देश मेरा हिन्दुस्तान।।*
जय हिन्द ! जय हिन्द ! जय हिन्द.....।
जय हिन्द गाएँ गुणगान ।
पंछी करते हैं कल करलव ,
मधुर संगीत छेड़े तान ।
धन धान्य से भरा है कोना,
राष्ट्र प्रेम आन बान शान ।
गाँव की मिट्टी से उपजे सोना,
कठिन श्रम करते किसान ।
*प्रान्त प्रान्त हो राष्ट्र निर्माण,*
*गाँव-गाँव इसकी पहचान।*
*हम ऋषि मुनियों के संतान,*
*मेरा देश मेरा हिन्दुस्तान।।*
जय हिन्द ! जय हिन्द ! जय हिन्द.....।
जय हिन्द गाएँ गुणगान ।
तन मन पावन अनुपन