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Friday, May 21, 2021

सावित्री यादव "सावि " की रचना- माँ

विषय  - माँ 
रचनाकार  -सावित्री  यादव  "सावि "
बिलासपुर  छ. ग़. 

शीर्षक  - माँ 

माँ 

माँ तो बस माँ  है। 
ना अच्छी  ना  बुरी । 
अपने बच्चों के लिए है पूरी। 

भगवान की छाया  है । 
माँ  ही हर रिश्ते  की माया  है। 
माँ  तो बस माँ  है। 

हर  दर्द  की दवा  है। 
जन्म हमें दिया  है। 
नवसृजन  का  आधार है। 
पहला  उसका प्यार  है। 

वो है तो आँचल है। 
स्नेह और मोह  है। 
ममता,  दुलार  है। 
वो पूरा  संसार  है। 

आँसू जो  आने ना दे, 
बस  वो माँ  है। 
जहाँन से अकेले  लड़ ले, 
हाँ  वो केवल माँ  है। 

कुछ भी कर जाये बच्चों के लिए, 
हाँ वो  माँ  है। 
माँ तो बस माँ  है। 

सावित्री  यादव " सावि "
बिलासपुर  छ. ग़.

Thursday, May 20, 2021

सावित्री यादव "सावि " की रचना- शिव

दिन -गुरुवार 
रचनाकार  - सावित्री  यादव  "सावि "
बिलासपुर  छ. ग़. 


शीर्षक -शिव और शक्ति


 शिव और शक्ति, अनोखी होती है इनकी भक्ति। 
शिव शक्ति के बिन अधूरे  और शक्ति शिव बिन अधूरी। 

जिसने कैलाश  पर डाला डेरा जहाँ  लगते भक्त फेरा जिसकी आराधना करे तो,  दिन फिर जाते है  वो भोलेनाथ कहलाते  है। 

ऐसे शिवशंकर  जिसने पीया जहर। 
ज़ब भी क़ोई भक्त पुकारे करते उनका उद्धार। 

भोलेनाथ  है एकदम भोले  देते सब बिन बोले। 
उनकी कृपा जिन पर हो जाती वो होते किस्मत  वाले। 

गले रहते जिनके विषधर  और हाथो मे  त्रिशूल। 
पल भर मे हर लेते है जो  भक्तो के शूल। 

ऐसे अन्तर्यामी महादेव को कोटि कोटि प्रणाम। 
भजले  मन  ॐ नमः शिवाय  सुबह  शाम। 

रचनाकार  -सावित्री यादव "सावि "
          

Friday, April 9, 2021

सावित्री यादव "सावि " की रचना- तुम सुर की देवी


रचनाकार  -सावित्री यादव  "सावि "
बिलासपुर  छ. ग़.  
शीर्षक -तुम सुर की देवी 

तुम सुर की देवी  । 
तुम ज्ञान  की देवी । 
तुमसे सुर, ताल  और लय। 
तुझसे है पूरी दुनियाँ संगीतमय। 

तुमने कोयल को  मीठी बोली दी। 
तुमने नदियों  को  कल -कल  दी। 
हर गीत तुझसे  है संगीत  तुझसे। 
जीवन का हर छाँव और धूप  तुझसे। 

बसंत ऋतु के  आगमन की आहट  तुम। 
फूलो और कलियों की सरसराहट  तुम। 
सरसो की बालियों मे तुम, खेतो की फसलों मे तुम। 
हर चेहरे की मुस्कान की वजह  हो तुम। 

हे देवी आंसुओ  की रुदन भी तुझसे। 
और खुशियाो  के गीत भी  तुझसे। 
हर खुशियाँ और गम  भी है तुझसे। 
जीत और हार की खुशबु  भी तुझसे। 

मंगल गीत भी तुझसे। 
विरह की शिकायते भी तुझसे। 
तुम सुर की देवी सारा संगीत तुझसे। 
वीणा के तार से निकली हर तान की सारी लहरे। 
जो सारे जीव जगत मे है वो  सब भी तुझसे। 


रचनाकार-  सावित्री यादव  "सावि "
बिलासपुर  छ. ग़. 

Saturday, March 27, 2021

सावित्री यादव "सावि " की रचना- नींद

विषय -नींद 
रचनाकार  -सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर  छ. ग़. 
शीर्षक -नींद तो नींद है 

नींद चैन की  या दर्द की नींद, 
ये नींद तो नींद  है। 
कभी बहुत दर्द मे भी आ जाती है । 
तो कभी खुशियाँ मे भी नहीं आती है। 
 ये नींद तो नींद  है। 
 
कभी झपकी  तो कभी जम्हाई , 
लेने पर भी नहीं आती  नींद  है। 
तो कभी कभी खड़े खड़े ही आ जाती है। 
तो कभी नींद की गोली खानी  पड़ती  है। 
ये नींद  तो  नींद  है। 

कभी पूरी रात गुजर जाती है। 
नींद. नहीं आती है। 
तो किसी को  नींद है पर घर नहीं, 
नर्म बिस्तर  नहीं  है। 
ये नींद  तो नींद  है। 

कभी थकान बताती  है। 
कभी रुलाती है । 
तो कभी आकर चली जाती है । 
पर पूरी तरह साथ नहीं देती, 
चिंता  मे ही डाल देती है। 
ये  नींद  तो नींद है। 

अच्छे  स्वस्थ के लिए है। 
अच्छी नींद  का आना है। 
अच्छे  मन के लिए  भी जरुरी है। 
 नींद, सबको  आये अच्छी नींद, 
जिससे  सबका  स्वस्थ अच्छा  रहे। 
यही कामना है। 
ये नींद तो नींद  है। 

रचनाकार  -सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर  छ . ग़.

Saturday, March 20, 2021

सावित्री यादव "सावि" की रचना- चंदन

विषय  चंदन 
रचनाकार  -सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर  छ. ग़. 


शीर्षक -चन्दन  जैसा हो गुण 

चंदन जैसा  हो गुण , 
जिससे  महके  घर आँगन। 
जिस पर लिपटा रहता, 
विषधर  पर ना लेता  उसका  गुण। 

अपनी विचार आहार सदा ही, 
सात्विक  रखना जिससे  मिले 
मान  - सम्मान। 
परिवार मे व्यवहार  ऐसा की, 
शीतल हो सबका  मन। 

भगवांन के माथे पर लगकर, 
जीवन सफल हो जाता है चिता 
की लकड़ी सजकर। 
अंतिम सत्य का कराता  भान, 
ऐसा होता चंदन  का गुण। 

सुंदरता के उपाय का, 
कारक बन जाता है। 
बढ़ाता  हमेशा सुंदरता की  शान, 
चंदन  लगकर बढ़ाता  माथे का मान। 

चरित्र  ऐसा हो चन्दन  के, 
जैसे खुशबु  बिखरे चारो ओर, 
जिससे खुशियाँ  बरसे दिन और रैन। 
चंदन  जैसा  हो गुण। 

रचनाकार-  सावित्री  यादव  "सावि "
बिलासपुर  छ.  ग़. 

Friday, March 19, 2021

सावित्री यादव "सावि" की रचना- व्रीहि

विषय -व्रीहि 
रचनाकार -सावित्री यादव  "सावि "
बिलासपुर  छ. ग़. 

शीर्षक -अन्न का सम्मान 

कैसे उतारू  तेरा उपकार, 
हे जीवन  पोषक अन्न। 
सबसे बड़ा है तुम्हारा, 
जीवन मे मान। 

सदा करो कहते है बड़े , 
अन्न  का सम्मान। 
तुझसे ही मिलता बल 
जिससे होते बलिष्ट, 
भारत के वीर जवान। 

ईश्वर  देते जीवन और 
करते अन्न उस जीवन, 
का पोषण। 
लक्ष्मी जी कृपा से, 
बरसता  अन्न और धन। 

ऊर्जा जिससे मिलती हमको, 
अन्न ही है वो आहार। 
जिसे खाकर मानव, 
होता है बलवान। 

करो सदा सम्मान, 
व्यर्थ  ना करो एक भी। 
अन्न  का दाना जो, 
हमें देता जीवन दान। 

कुदरत  का उपहार ये प्यारा, 
किस्मत  से मिले। 
ये अन्न  धन। 
सारी सृष्टि  की यह  
एक अमूल्य  खजाना, 
बचाना  हमको है  अन्न। 

क़ोई ना भूखा रहे ऐसा हो, 
सब पर ईश्वर  का ध्यान। 
अन्न  के एक -एक कण , 
का  जन करे सम्मान। 

रचनाकार -सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर  छ. ग़.

Thursday, March 18, 2021

सावित्री यादव "सावि" की रचना- बसाहट

विषय -बसाहट 
रचनाकार -सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ.ग़. 


शीर्षक -बसाहट और अंदाजा 

किसी कस्बे, गाँव, शहर की बसाहट देखकर पता चलता है। 
कितने  ख्वाब है आँखों मे ये  बातो से पता चलता है। 

देखे है  किस्से  जहाँ  मे लोगो की जुबाँ  से पता चलता  है। 
हकीकत  की जमी पर देखो ऊपर से अंदजा  पता चलता है। 

लोगो की भी दिल की सुनो कभी चेहरे से दर्द  छिप जाता है। 
हर मुस्कान खुँशी  नहीं होती कभी आंसू झलक जाता  है। 

यूँ  ना समाज से मुख मोड़  मुसाफिर  समाज  का हाल बसाहट  से पता चलता है। 
लोगो के घरो मे जलते दीये  सेउस घर की रौनक  का पता चलता है। 

अपना  भी खुशी का ख्याल रखना पड़ता  है। 
नहीं तो लोग भूल जाते है की दर्द  दुसरो को भी होता है। 

जिंदगी तुझसे क्या मांगू, मेरी मुराद की कीमत तो मेरी दुआओं  से पता चलता है। 
खेल जैसी रही जिंदगी,  अब लगता है खेलना जरुरी था ये जीत  की ख़ुशी  से पता चलता है। 

रचनाकार -  सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर  छ. ग़. 

Wednesday, March 17, 2021

सावित्री यादव "सावि " की रचना- फागुन

विषय -फागुन 
रचनाकार -सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग. 
शीर्षक -फागुन आया 

फागुन आया पिया के संग रंगने का मौसम आया । 
लो पिया फिर रंग लो हमको  हमारे प्रीत का पल आया।

पलाश  के फूलों ने खिलकर ये संदेशा  फैलाया। 
आया राधे कृष्ण के जैसे रंग मे रंगने का दिन आया। 

आम के बौर  लद  गये पेड़ो  पर फागुन का ये दिन आया। 
हम भी खेले अपनों संग होली ऐसा ये मौसम  समझाया। 

होली का  त्यौहार  अनोखा   रंग  बिरंगा  आया। 
गुलाल,  पिचकारी और रंग ने सबके मन को हर्षया। 

लो साजन रंग लो हमको अपने रंग मे  फागुन आया। 
खुशियों की सौगात  अपने संग फागुन लाया। 

रचनाकार -सावित्री  यादव  "सावि "
बिलासपुर छ. ग. 

Wednesday, March 10, 2021

सावित्री यादव "सावि" की रचना- विनाह

विषय -विनाह 
रचनाकार सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर  छ. ग. 



शीर्षक -धर्म  और संस्कृति विनाह सी है 

ना कुछ दिखता है सामने पर एक रुकावट सी है। 
जिंदगी जी रहे है लेकिन माथे पर थकावट सी है। 

सोचते है उस पर निकल पड़े आगे जो दूर सी  है। 
छोटी सोच रोक देती है जो लोगो की भीड़ सी है। 

बेपरवाह  हो चले तो क्या धर्म तो सी  है। 
जो सही रास्ते पर चलाये ये एक कर्म   सी है। 

चलते चलते जी लेना है  पूरी जिंदगी जो एक फूल सी है। 
यहाँ  से ले  जाना कर्म ही है सब लेकर जायेंगे ये भूल सी है। 

बुरे कर्मो को करने से रोकना सुविचार  ये सतकर्म सी है। 
धर्म और संस्कृति बचाते मानव मूल्यों को जो विनाह सी है। 

रचनाकार -सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग. 

Tuesday, March 9, 2021

सावित्री यादव "सावि" की रचना - शिव और शक्ति

दिनांक  9-3-21
विषय -शिव 
रचनाकार -सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग. 
मो.न.-7566685373

शीर्षक -शिव और शक्ति


 शिव और शक्ति, अनोखी होती है इनकी भक्ति। 
शिव शक्ति के बिन अधूरे  और शक्ति शिव बिन अधूरी। 

जिसने कैलाश  पर डाला डेरा जहाँ  लगते भक्त फेरा जिसकी आराधना करे तो,  दिन फिर जाते है  वो भोलेनाथ कहलाते  है। 

ऐसे शिवशंकर  जिसने पीया जहर। 
ज़ब भी क़ोई भक्त पुकारे करते उनका उद्धार। 

भोलेनाथ  है एकदम भोले  देते सब बिन बोले। 
उनकी कृपा जिन पर हो जाती वो होते किस्मत  वाले। 

गले रहते जिनके विषधर  और हाथो मे  त्रिशूल। 
पल भर मे हर लेते है जो  भक्तो के शूल। 

ऐसे अन्तर्यामी महादेव को कोटि कोटि प्रणाम। 
भजले  मन  ॐ नमः शिवाय  सुबह  शाम। 

रचनाकार  -सावित्री यादव "सावि "
          बिलासपुर  छ. ग. 
        

Tuesday, March 2, 2021

सावित्री यादव "सावि " की रचना- पलाश

रचनाकार  -सावित्री  यादव  "सावि "
बिलासपुर-  छ. ग. 
विषय  -पलाश 
विधा -कविता 


शीर्षक  -पलाश के खिलने  के दिन 

पलाश  के खिलने के दिन आये। 
होली के रंग मे रंगने  के दिन आये। 

फागुन ऐसा  जो पुरे वातावरण  मे  खुशियाँ  लाये। 
 विरह मे जले  प्रेयसी  को प्रीतम से मिलाये। 

आम बौरा गये कलियाँ  खिल गईं। 
बसंत  ऋतु  के बाद फागुन ऐसी खुशियाँ  लाई। 

खेतो मे सुनहरी  कलियाँ  खिली  गेंहूँ  की बालियों  मे। 
हर  तरफ खुशियों  के रंग है हवाओ मे। 

मौसम  है फागुन  का राधा  और कृष्ण  के प्रेम के मास का। 
अलग अलग रंगों  का एक मे  मिलने का। 

पलाश के फूलों  से जंगल  शोभित  हो गये । 
सूरज के किरणों से ये जलते तारे जैसे  छा  गये। 

पलाश ने खिलकर वन की शोभा  बढ़ा  दी। 
रंगों का ये अच्छा  संयोजन  ये खिलकर समझा गईं। 

पलाश के खिलने के दिन आये। 
होली के रंग  मे रंगने  के दिन आये। 



Thursday, February 4, 2021

सावित्री यादव "सावि " की रचना- विरहण का दर्द

विषय -विरहिणी  
रचनाकार -सावित्री यादव  "सावि "
बिलासपुर  छ. ग.
शीर्षक -विरहण  का दर्द 

दर्द  को पीते हुये जीना होता है। 
अपने आंसुओ  को छिपाना  होता है। 
विरह की आग ऐसी जिसमे तन -मन दोनों जला होता है। 
ऐसा ही दर्द के साथ रहना होता  है। 

साजन तो जाते ही भूले। 
ये  मन उसको कैसे छोड़े। 
बाँवरी हो जाती हूँ । 
ज़ब याद पिया  की आती है व्याकुल  होता है। 
मन  ज़ब याद उसकी सताती  है। 

साथ हँसे  उन लम्हो  को  दिलमे  बसा  लेते  है। 
रोये कभी अकेले मे उसे छिपा लेते है। 
जुदाई का दर्द ही ऐसा होता है। 
जो पल पल मार जाता है। 


किसी को भी विरह का दर्द ना हो। 
ऐसा मन कहता है। 
विरह का दर्द  तो केवल विरहन ही जानती है। 
जो पिया  की याद  मे तङप जाती है। 
दर्द  जो ऐसा  होता  है। 
जो बहुत  रुलाता है। 

रचनाकार  - सावित्री  यादव  "सावि "
बिलासपुर  छ. ग. 

Wednesday, February 3, 2021

बिलासपुर से सावित्री यादव "सावि" की रचना- इम्तिहान


 विधा -कविता 
 विषय -इम्तिहान 
 रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
 बिलासपुर छ. ग. 
 
 


शीर्षक - इम्तिहान जिंदगी के 

कभी होता ये सपने के। 
कभी लेता  ये  अपने के। 
ये इम्तिहान  ही है जो। 
सबक देता जिंदगी के। 

कभी सोचते ये पाठशाला  के। 
और होते है ये  जिंदगी के। 
हर पल कुछ सीखा  जाती है ये । 
जीवन के पल पल मे इम्तिहान  लेती है। 


जीना मुश्किल कर देती है। 
रंग नया  भर देती है। 
ये  सिखाती जीवन के फलसफे। 
ये ऐसा पाठ पढ़ाती  है। 
ये  कड़वे  सत्य है जीवन के। 

सागर होता है सपनो का। 
लहरे इनकी परीक्षा। 
हलात ऐसे  होते  है । 
सच्चे  झूठे  सपनो  के। 

कभी होते अपने अपनों से दूर । 
कभी होते ये  बहुत मजबूर। 
ये जीवन बढ़ा अजीब है। 
होते पल पल नसीब के। 
सारे फैसले बिना क़ोई गणित  के। 

ये  इम्तिहान  है जिंदगी  के। 
ये इम्तिहान है  जिंदगी के। 

रचनाकार _सावित्री  यादव "सावि "
बिलासपुर  छ. ग. 

Saturday, January 30, 2021

सावित्री यादव "सावि " की रचना- बसंत

विषय -बसंत 
विधा _आलेख 
रचनाकार -सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर  छ. ग. 


शीर्षक- बसंत ऋतुओ  का राजा 

बसंत ऋतू के आने से आम  मे मौर लग  गए।  
जिसे देखकर मन झूम  उठा सारा मौसम  ऐसा लग  रहा  है  जैसे  इनके  आने का ही इंतजार था 
सारा वातावरण  हरियाली चादर ओढ़े  बैठा  हो जैसे लगता है। सारे फूल  खिल उठे हो और कलिंया  मुस्कुरा  उठी हो 
हल्की धूप मन को भाई रही है 
इसी ऋतू  मे ज्ञान की देवी सरस्वती  माँ  की पूजा का दिन बंसत पंचमी  इस ऋतु  के महत्व  को और बढ़ा  देती है  
बसंत  पंचमी  को सारे  लोग बड़े  हर्ष  उल्लास  के साथ मनाते है। 
इस समय ना ज्यादा धूप होती है ना  ज्यादा सर्दी   होती है । गेंहूँ  की बाली सुनहरी  ऐसे लग रहा है  जैसे हरे रंग मे सुनहरा मोती  लगा हो। यह  समय मन को आन्दित  करने वाला मौसम होता है
इसलिये  इस बसंत ऋतु  को ऋतुओ  का राजा कहा  जाता है |

रचनाकार  -सावित्री  यादव "सावि "
बिलासपुर  छ. ग. 

Friday, January 29, 2021

सावित्री यादव "सावि " कृत आलेख- भूख

विषय -भूख  
विधा -आलेख 
रचनाकार  _सावित्री यादव " सावि "
    बिलासपुर  छ. ग.

शीर्षक _भूख एक तङप 

ज़ब किसी भी जीव को ऊर्जा की अवश्यकता होती  है  तब भूख का एहसास  होता है   वही भूख है सृष्टि  के प्रत्येक  जीव को  ईश्वर  ने  ऐसे ही बनाया की वो अपना पेट भरे कुछ कार्य  करे और इस तरह हर जीव को जीने के लिए जिन्दा रहने के लिए भोजन की आवश्यकता  हुई
ऐ तो जीने की भूख हुई  मानव जीवन के जीवन  मे अनेक सपने  को पूरा  करने की भूख  होती  है। 
किसी को घर की पढ़ाई  की, नौकरी की समाज सुधार की तो जीवन को सुखमय बनाने की,  इस तरह इन सभी भूखो मे सबसे प्रथम  हम पेट की भूख को ही रखते है। 
ऐ ऐसी है भूख है जिसके कारण कितना भी अच्छा  उसूलो  वाला इंसान हो बुरा से बुरा कार्य करने को भी तैयार  हो जाता है |
इसलिए सभी को अन्न  का सम्मान  कर उनका जितना जरूरत  हो उतना ही उपभोग  करे। 
इसलिए  समाज के हर नागरिक का ऐ कर्तव्य  है की वो भोजन का अपमान  ना करे और जितना हो सके भूखो को भोजन करवाए और उनको अच्छा जीवन जीने हेतु प्रेरित करे। 

रचनाकार  _ सावित्री यादव "सावि "
       बिलासपुर  छ. ग. 
      

Thursday, January 7, 2021

बिलासपुर से सावित्री यादव "सावि" की रचना- अश्क

विषय-अश्क
रचनाकर -सावित्री यादव "सावि"
बिलासपुर छ.ग.
विधा -कविता

शीर्षक-अश्क भी बोलते हैं |

अश्को  से ही किस्सा बंया होता हैं |
दुख और दर्द का हिस्सा बंया होता हैं |
कभी ये खुशी के कहलाते  हैं |
कभी ये दर्द के बन जाते हैं |

दिल के दर्द का हाल ये बंया करते हैं |
जब कभी आशा की किरण मिलती हैं |
जब कभी उम्मीद नई जागती हैं |
हाँ उस पल भी ये झलक जाती हैं |


अश्को का भी अलग - अलग रंग होता हैं |
किसी के हिस्से में कम तो किसी के हिस्से में ज्यादा होता हैं 
पर हाँ अश्को का आंखों से बहना भी कयामत लाता हैं |
कभी झलकते हैं आंखों से तो कभी आंखों में ही |
समंदर समा लेते हैं|

बच्चे के अश्क माँ को भी रुला देते हैं |
भक्त के अश्क ईश्वर को भी झुका देते हैं |
प्रेमिका के अश्क प्रीतम को तोड़ जाता हैं |
और किसी भी इंसान के आंसू इंसानियत जगा देती हैं |

अश्को से ही किस्सा बंया होता हैं |
दुख और दर्द का हिस्सा बंया होता हैं |

 रचनाकर- सावित्री यादव "सावि"
             बिलासपुर छ.ग.
            

Tuesday, January 5, 2021

बिलासपुर से सावित्री यादव"सावि" की रचना- लगाव

विषय -राब्ता
रचनाकर- सावित्री यादव"सावि"
              बिलासपुर छ.ग.
          

शीर्षक-लगाव से ही रिश्ते
            
लगाव कभी देता घाव कभी बनता मलहम |
कभी होते अजनबी कभी बनते हमदम |

ये लगाव ही सब कुछ करवाता हैं |
अपनो को अपना होने का अहसास करवाता हैं |

दो रिश्तों में खास होता हैं लगाव |
दिलो से दिलो का करता हैं मिलाव |

लगाव ऐसा अहसास हैं  ये हैं तो अपने भी पास है |
जँहा लगाव नही वँहा ना रिश्ते ना नाते बस गैर हो जाते हैं |

सब रिश्तों की डोर बंधी हैं अपनेपन से |
बिना प्यार ना घर ना परिवार  ना ही ये संसार |

पूरी प्रकृति सिखाती हैं लगाव का ये भाव बदल, धरती अंबर |
सबके बीच बाँधा ईश्वर ने अपना एक सुनियोजित संसार |

लगाव से ही होता हैं रिश्तों में प्यार |
चाहे हो टकरार फिर भी रहता हैं प्यार |

लगाव ही रिश्तों का आधार हैं |
जिससे मिलकर बना ये संसार हैं |

रचनाकर- सावित्री यादव"सावि"
               बिलासपुर छ.ग.
           

Monday, January 4, 2021

बिलासपुर से सावित्री यादव "सावि" की रचना- पगडंडी

दिनांक-4-1-21
विषय -पगडंडी
रचनाकर- सावित्री यादव "सावि"
बिलासपुर छ.ग.


शीर्षक - गांव की पगडंडियाँ

जाने कितने किस्से कहानी सुनते सुनाते |
बनते बनाते गुजरे हैं बचपन में सारे लोग पगडंडियों से |

कभी चक्के चलते कभी रुमाल उड़ाते |
कभी किसी संगी साथी को दौड़ाते |
तो कभी इठलाते झुलते चलते हैं इन पगडंडियों से |

कभी सखींयो ने इन पर चलते हुए प्रीतम की बाते की हैं तो  कभी अपने दिल का हाल |
हर बात की गवाह होती हैं ये  पगडंडियाँ |
कंही लेजाती पीहर तो कभी ससुराल |
ऐसे मुलाकात होती  हैं सबकी गांव की पगडण्डियों से |

कभी गिरते गिरते बचना तो कभी -कभी गिरकर भी हँसना |
अब रह गयी यादों में बातो में  पर बहुत ही प्यारे दिन थे |
 खेत की मेंड़ की पगडंडियाँ अपनो से अपनो की बातो से भारी होती थी पगडंडियाँ |
 

कभी खेत के बीच के वो बनाया गया छोटा छोटा रास्ता जो| फसल लगने पर गायब भी हो जाता था |
जल्दी  पहुँचने की होड़ की वो भागम भाग |
जाने कितने किस्से कहानीसुनते सुनाते |
बनते बनाते गुजरे हैबचपनमें सारे लोग पगडंडियो से |

रचनाकर -सावित्री यादव"सावि"
          बिलासपुर छ.ग.
        

Friday, January 1, 2021

बिलासपुर से सावित्री यादव"सावि" की रचना- नई सुबह

विषय-नई सुबह 2021
रचनाकार सावित्री यादव"सावि"
बिलासपुर छ.ग.


शीर्षक नई सुबह नई उम्मीद


नई सुबह नई उम्मीद लेकर आई है |
रोतीअँखियों को फिर हँसाने आई हैं |
देखो एक साल फिर एक नई खुशी ले आई हैं |
सबके चेहरे पे मुस्कान रहे |
कोई किसी से न दूर रहे |
अपनो का साथ रहे |
प्यार की बात रहे |

सूरज की किरणे लेकर प्यार के रंग लाई |
गम से  भरा एक मुश्किल साल गया |
अब खुशियो की बारिश हो |
सबकी यही गुजारिश हैं रब से अब तो ,
हर लम्हा केवल खुशी हो हँसी हो |
नई सुबह नई उम्मीद लेकर आई हैं |
रोतीअँखियों को फिर हँसानेआई हैं |


भूल के सारे गीले शिकवे मिलकर येजीवन जीना हैं |
ईश्वर की सत्ता का सम्मान करना है |
प्रकृति की कदर करनी हैं उसका भी मान रखना  हैं |
ईश्वर ने नई सुबह के साथ जीवन वरदान दिया है |
सबके आंखों में एक नया सपना लाई हैं |
नई सुबह नई उम्मीद लेकर आई हैं |
रोती अँखियों को फिर हँसाने आई है |

सब सुखी रहे सब मुस्कुराते रहे |
यही सन्देशा लाई हैं |
प्यारी सी सुबह सबको प्यार से जीवन देने आई हैं |
नई सुबह नई उम्मीद लेकर आई हैं |
रोती आँखियो को फिर हँसाने आई हैं |

रचनाकर -सावित्री यादव"सावि"
           बिलासपुर छ.ग.
         

Saturday, December 26, 2020

बिलासपुर से सावित्री यादव "सावि" की रचना- वर्ष २०२०

विषय-मेरे लिए 2020 के मायने
रचनाकर-सावित्री यादव"सावि"
बिलासपुर छ.ग.


शीर्षक-2020 का साल हकीकत बता गया

ईश्वर की ही सत्ता एक मात्र सत्य हैं |
ये समझ गया |
2020 का साल हकीकत बता गया |

समय का न इंतजार करो ये बता गया |
सब ईश्वर के हाथ हैं ये दिखा गया |

मेरी कलम को एक दिशा दे गया |
साहित्य के पावन मंच में मुझे जोड़  गया |

दुख -सुख में हिम्मत न हारना ये सीखा गया |
धैर्य ही सब कुछ देता हैं ये कह गया |

अपने परिवार को अहमियत देना जरूरी हो गया |
स्वास्थ और जीवन महत्वपूर्ण हो गया |

 मानव को  उसकी हद बता गया |
मेरी सत्ता मेरी मर्जी ये कर गया

ईश्वर अपनी उपस्थिति  दिखा गए |
2020 का ये साल हकीकत बता गया |

 रचनाकर -सावित्री यादव "सावि"
 बिलासपुर छ.ग.

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