जिला-महासमुंद
विषय-व्यवहार
शीर्षक- विनयशील मानव
★★★
सरल सहज व्यवहार सदा ही,
जीवन को महकाता है।
विनयशील मानव के आगे,
ईश्वर भी झुक जाता है।।
जिसके मन में रहे समर्पण,
निपुण रहे व्यवहारों में।
मन को छोटा नहीं करे जो,
गुरूजन के सत्कारों में।।
द्वेष कपट छलदंभ स्वार्थ को,
रखता दूर विचारों से।
स्वागत करता सब मित्रों का,
निज मन के मनुहारों से।।
धन बल पद पाकर भी जिसका,
हृदय नहीं इठलाता है।
विनयशील मानव के आगे,
ईश्वर भी झुक जाता है।।
सरल सहज व्यवहार सदा ही,
जीवन को महकाता है।
प्रेमचन्द साव "प्रेम",बसना