Friday, April 16, 2021

बिजेन्द्र अहीर की रचना- जहाज़

नाम- बिजेन्द्र अहीर
जिला- कोरिया,छ.ग.
विषय- जहाज
विधा- दोहा
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कर्म  तेरी  नाव पथिक, कर्म  तेरा  जहाज।
जो हो जाना पार यदि, कर ले अच्छे काज।।

कर्म के इस जहाज पर, जो भी होत सवार।
ज्ञान कौशल सत्य सदा, मिल बनते पतवार।।

जीवन जलधि अपार में, देता तन मन झोंक।
उसका  ही  सुधरे यहाँ, लोक और परलोक।।

भव  सागर  गहरा  बड़ा, उतना  ही  विस्तार।
मनुज करे जो छल कपट, वह अटका मझधार।।

जो  भी  खेवे  नाव  यह, लहरों  के  विपरीत।
होती थकन अवश्य पर, फिर भी उसकी जीत।।

उसका  ही  जहाज  बड़ा, वह  ही  खेवनहार।।
भगवन नाम सुमिरन कर, थाह ले सिंधु अपार।।
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