जिला- जशपुर नगर छत्तीसगढ़
विधा- कविता
शीर्षक- तलाश है
जो गुजर गया हे नजर न कर,
मुझे आज की ही तलाश है ।
जिसे ढूंढती रही दर बदर,
मुझे बस उसी की तलाश है ।।
मिलते नहीं हैं ये रास्ते,
मुझे मंजिलों की तलाश है ।
सूना सा है ये राह क्यूं "सरस"
मुझे काफिलों की तलाश है ।।
ये छाया है यूं अंधेरा क्यूं ,
मुझे रोशनी की तलाश है ।।
आता नहीं कुछ भी नज़र,
मुझे आइनें की तलाश है ।।
पतझड़ में है खामोशियाँ,
मुझे महफिलों की तलाश है ।
फूलों में हैं काटें यहाँ,
मुझे गुलशनों की तलाश है ।।
बोझल है क्यूं ये जिंदगी,
कुछ याद भी आता नहीं ।
जीवन में हैं हजार गम "सरस"
मुझे इक खुशी की तलाश है ।।
व्याख्या- इस कविता के माध्यम से यह बताना चाहती हूं कि जीवन एक तलाश है। सब कुछ खोकर और सब पाकर भी हमारी तलाश रहती है कुछ पाने की यही इस कविता का सार है।
श्रीमति सरस्वती चौहान
जशपुर नगर छत्तीसगढ़