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Saturday, May 16, 2020

छत्तीसगढ़ के जशपुर से सरस्वती चौहान की रचना- तलाश है

रचनाकार का नाम- श्रीमति सरस्वती चौहान
जिला- जशपुर नगर छत्तीसगढ़
विधा- कविता
शीर्षक- तलाश है

जो गुजर गया हे नजर न कर,
मुझे आज की ही तलाश है ।
जिसे ढूंढती रही दर बदर,
मुझे बस उसी की तलाश है ।।

मिलते नहीं हैं ये रास्ते,
मुझे मंजिलों की तलाश है ।
सूना सा है ये राह क्यूं "सरस"
मुझे काफिलों की तलाश है ।।

ये छाया है यूं अंधेरा क्यूं ,
मुझे रोशनी की तलाश है ।।
आता नहीं कुछ भी नज़र,
मुझे आइनें की तलाश है ।।

पतझड़ में है खामोशियाँ,
मुझे महफिलों की तलाश है ।
फूलों में हैं काटें यहाँ,
मुझे गुलशनों की तलाश है ।।

बोझल है क्यूं ये जिंदगी,
कुछ याद भी आता नहीं ।
जीवन में हैं हजार गम "सरस"
मुझे इक खुशी की तलाश है ।।


व्याख्या- इस कविता के माध्यम से यह बताना चाहती हूं कि जीवन एक तलाश है। सब कुछ खोकर और सब पाकर भी हमारी तलाश रहती है कुछ पाने की  यही इस कविता का सार है।

श्रीमति सरस्वती चौहान
जशपुर नगर छत्तीसगढ़

Wednesday, May 13, 2020

छत्तीसगढ़ के जशपुर नगर से सरस्वती चौहान के दोहे

श्रीमति सरस्वती चौहान
जिला- जशपुर नगर(छत्तीसगढ़)
शीर्षक- श्री राम दोहावली
मात्रा- 13,11
विधा-छंद

1.चैत मास के शुक्ल मा, जन्म अयोध्या धाम ।
पुरषोत्तम श्री राम के, निशदिन जपलव नाम ।।

2.राम राज सब घर रहै, मया भाव बगराव ।
लोभ-मोह ला त्याग दव, घर ला सरग बनाव ।।

3.वर माला धर जानकी, आवै धीरे धीर।
सुमरयँ मन मा राम ला, बोहावत हे नीर।।

4. राम नाम ला जाप लौ, मिट जाही सब पाप ।।
रोग शोक छूटे सबो,कट जाही संताप ।।

5.सिया राम हिरदे बसै, जय जय श्री हनुमान ।
संकट मोचन दुख हरौ, दया करव भगवान ।।

6.ये दुनिया मा कौन हे, काखर मिलही साथ ।
दुख के साथी राम हें, राम जी देहीं हाँथ ।।

7.ये दुनिया हे जान लौ, राम बिना बेकार ।
दया मया मन मा रहै, जिनगी के हे सार ।।

8. पाप पुण्य करके सबो, जावँय गंगा धोय ।
मन ला जी धोंवय नही, माफ कहाँ से होय ।।

9.धर्म काम अउ मोक्ष ला, रघुवर ले सब पाय ।
काम क्रोध भय लोभ ले, मन ला मुक्त कराय ।।

10. दया मया के बंधना, छूटय झन लव जान ।
बड़खा छोटे के इहाँ, राखव सब जन मान ।।


Monday, April 20, 2020

छत्तीसगढ़ से सरस्वती चौहान की रचना- कोरोना को है हराना

नाम-श्रीमति सरस्वती चौहान
राज्य-छत्तीसगढ़
कविता का शीर्षक-कोरोना को है हराना

सर्दी खाँसी सांस में दिक्कत
तो हो सकता हे कोरोना ।
मास्क लगाना हाँथों को धोना
साफ हो घर का कोना कोना ।।

                     मंदिरा मांस न सेवन करना
                     अब तो त्यागो मांसाहार ।
                     दूर से सबको करो नमन
                     बदलो अपना व्यवहार ।।

भीड़ भाड़ से दूर रहो 
न किसी से हाँथ मिलाना ।
छींको तो रूमाल रखो
सबक ये सबको याद दिलाना ।।
    
                       अगर आ रहा ज्वर शीघ्र ही
                       स्वास्थ की जांच कराना ।
                       मिलकर लो संकल्प भारत में
                       "कोरोना" को है हराना ।।

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...