Saturday, September 19, 2020

बिजेन्द्र अहीर की रचना- सड़क

नाम- बिजेन्द्र अहीर
पता- कोरिया, छत्तीसगढ़
विधा- छन्द मुक्त कविता
विषय- सडक़
शीर्षक- गाथा सडक़ की
*************************
 हे पथिक!मैं सड़क हूं, कुरूप और कुरंग ।
 समझना जो हो मुझे ,चलो मेरे संग       ।। 

 कैसी मेरी संरचना? कैसी मेरी बनावट?
 मिट्टी पत्थर डामर की, है मुझमें मिलावट ।।

 स्वभाव नितांत मेरा ,निश्चल, निष्पक्ष,निस्वार्थ ।
 एक कर्तव्य एक धर्म, परमार्थ, परमार्थ, परमार्थ ।।

 कहीं छोटी सी, कहीं अति विस्तार में हूं ।
 निश्चित ही महत्वपूर्ण, इस बड़े संसार में हूं ।।

 जुड़ता मुझसे शहर-शहर, जुड़ता गांव- गांव ।
 चलता कोई लेकर सवारी, कोई अपने पांव ।।

 गंतव्य तक जाने का, मैं ही सुलभ माध्यम ।
 हो मानव मात्र या, वस्तु भारी भरकम     ।।

 सरल और संभव होता, मुझसे आवागमन ।
 चाहो तो इस कार्य निमित्त, कर लो मुझको नमन ।।

 अच्छे स्वास्थ्य में अपने, सबको आनंद दायक हूं ।
 अन्यथा जग विदित है, कितनी कष्ट कारक हूं   ।।

 नित्य प्रति रखना, मेरा रखरखाव ।
 दे सकती हूं वरना, तुमको गहरे घाव ।।

 मुझ पर चलने के हैं, कुछ एक नियम ।
मानता न जब कोई, आ जाते हैं यम  ।।

इतिहास के पन्नों पर, मान-सम्मान मेरा भी है ।
 जी हां! जगतोत्थान में, अल्प योगदान मेरा भी है ।।

                     -बिजेन्द्र अहीर

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...