जिला -कोरिया,छ.ग.
विधा- ग़ज़ल
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उसका ही भाग्य उदय होता ।
जिसके मन दृढ़ निश्चय होता ।
संवेदना पास उसके ही ।
वक्ष जिसके सहृदय होता ।।
जो कुछ बात न हो भारत में ।
फिर क्यों मुकुट हिमालय होता
विधान यह शाश्वत व सनातन ।
प्रथम सृष्टि बाद प्रलय होता ।।
पी ले जो लोक निमित्त गरल ।
जग में वही मृत्युंजय होता ।।
ढूंढना छोड़ो हर ऋतु इसे ।
मधुमास मध्य किसलय होता ।।
हो छोटा बड़ा या जैसा भी ।
दिव्य धाम सा निज निलय होता।।
सब ही में है उसकी कमान ।
कुछ भी यहां न असमय होता ।।
-- बिजेन्द्र अहीर
ग्राम - करजी, कोरिया
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