Saturday, May 29, 2021

बिजेन्द्र अहीर की ग़ज़ल

कवि - बिजेन्द्र अहीर
जिला -कोरिया,छ.ग.
  विधा- ग़ज़ल
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 उसका  ही भाग्य उदय होता ।
 जिसके मन दृढ़ निश्चय होता ।

  संवेदना   पास   उसके   ही ।
  वक्ष  जिसके  सहृदय  होता ।।

 जो कुछ  बात न हो भारत में ।
 फिर क्यों मुकुट हिमालय होता

 विधान यह शाश्वत व सनातन ।
  प्रथम  सृष्टि  बाद प्रलय होता ।।

  पी ले जो लोक निमित्त गरल ।
  जग  में  वही  मृत्युंजय होता ।।

  ढूंढना  छोड़ो  हर   ऋतु  इसे ।
  मधुमास मध्य किसलय होता ।।

  हो  छोटा  बड़ा  या  जैसा भी ।
 दिव्य धाम सा निज निलय होता।।

  सब  ही  में  है  उसकी  कमान ।
  कुछ  भी  यहां न असमय होता ।।

             -- बिजेन्द्र अहीर
                ग्राम - करजी, कोरिया

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