Showing posts with label स्वपन बोस. Show all posts
Showing posts with label स्वपन बोस. Show all posts

Saturday, January 23, 2021

स्वपन बोस की रचना- सुभाष चंद्र बोस

कविता 
नेताजी सुभाष चन्द्र  बोस 

आज जन्म दिन  एक वीर का आओ  उसे नमन करते हैं ।

            जीसके हुंकार से थर्र थर्र कांपे दुश्मन उसका जन्म दिवस मनाते हैं ।

      जीसने इतिहास को भुला उसका जीवन मर जाया करते हैं ।

       आओ अपने इस पीढ़ी को भी सुभाषचन्द्र बोस की देशभक्ति और वीरता की इतिहास बताते हैं 

         सुभाष भारत माता की सच्चा सपूत था जीसने आजाद हिंद फौज बनाकर अंग्रेजों के छक्के छुडा़ये थे ।

           सुभाष ने ही अंदमान में  सबसे पहले तिरंगा लहराये थे ।

        वह श्लोगन तुम मूझे ख़ून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा ,,

        सच लोगों  को जगा जाते हैं ।
         कहां हो सुभाष तुम ,तुम याद बहुत आते हो ।


स्वपन बोस ,,बेगाना,,
 जुगानी केम्प कोण्डागांव छत्तीसगढ़

Saturday, August 22, 2020

छत्तीसगढ़ से स्वपन बोस की रचना- जय गणेश

नाम श्री स्वपन बोस 
पता जुगानी केम्प छत्तीसगढ़
शीर्षक जय गणेश ।

विधा कविता 

 जय गणेश जय गणेश ।
  फिर गूंजा है ।
            मूसा पर सवार होकर ।
             सारे दुःख हरने को गणपति बप्पा आया है ।
पर इस साल बीमारी ने डराया है 
             मंदिर भी बंद पड़े हैं ।
              भगवान कहां हो तुम 
आ गये गणपति देवा ।
अब हर दुःख दूर हो जायेगा ।
           भारत है पुण्य भूमि ।
मुसिबत कब तक रूलायेगा ।
           जय गणेश जय फिर गूंजा है ।
        आप दूष्टो को दंड देने वाले 
         दीन दुखियों के दुःख हरने 
          वाले ।
सबके मन में  गणेशोत्सव में खुशियां छाया है ।
 
          जय गणेश जय गणेश फिर गूंजा है ।

Saturday, July 11, 2020

कोण्डागांव से स्वपन बोस की रचना- जनसंख्या और विकास

नाम श्री स्वपन बोस 
पता जुगानी केम्प छत्तीसगढ़ कोण्डागांव 
 विधा कविता 
शीर्षक  जनसंख्या और विकास ।

        बढ़ी जब  जनसंख्या तो  आवश्यकता  भी बढ़ी है ।

                  इसलिए तो मानव ने आवश्यकता पुरा करने के लिए नये नये मशीन गढ़ी है ।

               औधोगिक युग जब आया जगत में ।
                 वेरोजगारी भी लाया साथ में ।
              भौतिकता की इस दौड़ में लोग गरीब होने लगें हैं ।
चीजें तो बहुत है पर खुशी नहीं मीलती अपना नसीब खोने लगे हैं 

                 दुनिया की जनसंख्या सात अरब पार हो गया ।
          चमगादड़ खाकर जब फैलीं चीन से करोना वायरस मानवता जार जार हो गया ।
               दो हजार बीस दुनिया पर बड़ा कहर ढाया है ।
मानव जनसंख्या पर आई है मुसिबत हर जन डरा हुआ है ।

              नहीं मील सकती कहीं राहत दो हजार बीस दुनिया लाकडाउन हो चुका है ।
   
           स्कूल कालेज बंद पड़े हैं शिक्षा व्यवस्था चरमराई है ।
            देख इंसान की हालात ।
              मानवता भी घबराई है 
लगता है भगवान ने यह ठाना है ।
सत्य को बचाने के खातिर बना रहा है एक नया जमाना है ।

Monday, July 6, 2020

कोण्डागांव से स्वपन बोस की रचना- सावन

नाम श्री स्वपन बोस
पता जुगानी केम्प कोण्डागांव छत्तीसगढ़ 
विधा कविता 
शीर्षक पहला सावन 

  पहला सावन आया झूम के ।
   मेघ काली छाने लगी है ।

                  रिमझिम बुंदे मन को भाने लगीं है ।
आसमां भी छुप गया बादल के आड़ में खुश हैं दिल आज सावन
 के बहार में ।

            देखो चारों हरियाली छाने
            लगीं है मन को महकाने 
             लगीं है ।
सावन में मन बहुत जलता है ।
 प्रियतम पास हो तों जीवन सम्भलता है ।

            लगता है इस सावन प्रेम में  कुछ कर जाऊं ।
जो है अपने उसे कहीं से ढुंड लाउं 

            हर बूंद कुछ कहती हैं ।
             जन्म से मेरे नयन है प्यासे जैसे आंसू बनकर सावन में बहती है ।

Tuesday, June 23, 2020

कोण्डागांव से स्वपन बोस की रचना- रथ यात्रा

नाम श्री स्वपन बोस
पता जुगानी केम्प 
शीर्षक रथ यात्रा

    भगवान जगन्नाथ की माया निराली है ।
           जब निकलते  हैं कृष्ण बलराम सुभद्रा रथ में बैठकर 
जग के लोग रथ की डोर खिंचकर
मौसी केघर तक ले जाते हैं ।
          किये जो जीवन में अपने पाप सारा रथ खिंचकर धो जाते हैं  ।

             आज रथ  यात्रा का पर्व बड़ा महान् है ।
विश्व में रथ यात्रा का विशेष पहचान है ।
       अध्यात्मिक यात्रा में रथ यात्रा सत्य को पाने की एक प्रतिक है ।
           संसार की सारे दुःख को जीवन भर हम खिंचते है ।
कभी हंसते हैं कभी रोते हैं ।

          महाप्रभु की रथयात्रा में जो शामिल हो जाता है ।
धन्य है उसका जीवन अपने अंतर 
 में प्रभु को पा लेता  है ।
              पुरी धाम की रथयात्रा अनोखी है जिसने देखी महाप्रभु की माया उसने कहीं यह कहानी है ।
         जो पुरी जगन्नाथ धाम का महाप्रसाद खा लेते हैं ।
यह जीवन धन्य हो जाता है ।
वह मृत्यु लोक पार कर प्रभु धाम
 चलें जाते हैं ।

Wednesday, May 13, 2020

छत्तीसगढ़ से स्वपन बोस की रचना

नाम श्री स्वपन बोस
पता जुगानी केम्प छत्तीसगढ़ 
मो9340433481
 कोरोना के बाद भारत ।

     कोरोना के बाद भारत आत्म निर्भर बनेगा ।

        हर समान भारत खुद बनायेगा ।

       होगी चारों ओर खुशहाली ,भारत फिर से सोने की चिड़िया कहलायेगा ।

       भारत विश्व का प्यारा देश ,बन चुका है ।

हिन्दुस्तान मेरा न्यारा देश बन चुका है ।

   एटम बम से मानवता नहीं बचती ,आपसी प्यार और भाईचारा ही , मानवता है ।

 हर मुश्किल के घड़ी में , विश्व को नया पाठ पढ़ाया है , गीता  के देश
भारत ने हमेशा विश्व शांति को ही अपनाया है 

           भारत कोरोना से जीतकर नया भारत बनायेगा ।

         सारे जहां से हिंदुस्तान है अच्छा ,
मंगल शंदेश दे जायेगा ।

Saturday, May 2, 2020

छत्तीसगढ़ से स्वपन बोस की रचना

श्री स्वपन बोस
राज्य छत्तीसगढ़
शीर्षक मजदूर वर्ग ।

         मजदूर से ही तो यह बड़े बड़े इमारतें बने हैं  ।
          मजदूर आज मुसीबत पर खड़े हैं ।

        सर परिवार की जबावदरी ,बंद हो रहे ।
काम धाम से मील नहीं
पा रहे दिहाड़ी ।

            देश को बनाने वाला घर तक आने को तरसता है ।
              क्यो की अपनों को देखने के लिए मजदूर का दिल
भी धड़कता है ।

           देश को भी बचाना है ,कौन अपना घर छोड़ बहार जाता है 

         ये तो पेट की भुख है सहाब ,हर इन्सान को यह वह दौडा़ता है ।

        प्रकृति के संकट के आगे किसका बस चलता है ।

          मजदूर तो पशीने
            से सिंच कर देश बनाता है ।
 कहीं गगन चुम्बी महल तो कहीं , बड़े पुल तैयार
करता है ।

    पर भगवान की मर्जी
     के आगे किसका बस चलता है ।

      देखो विश्व में ऐसा समय आया है ।
अपना घर ही प्यारा है यह समझाया है ।

Wednesday, April 8, 2020

छत्तीसगढ़ से स्वपन बोस की रचना- मौसम

नाम श्री स्वपन बोस
पता जुगानी केम्प छत्तीसगढ़ कोण्डागांव
मो 9340433481
शीर्षक मौसम

 मौसम बदल रहा है ।
  विश्व के सामने ,
अब प्रकृति का संकेत
 समझना होगा ।

अंधी भौतिक दौड़ 
 छोड़ प्रकृति को ,
बचाना पड़ेगा ।

हो रही छत विक्षत 
ओजन परत को बचाना
पड़ेगा ।

प्लास्टीक ,की उपयोगिता को कम
करना पड़ेगा ।

बड़ रही ग्लोबलवार्मिंग
को भी ,कम करना पड़ेगा ।

जंगल से ही ,मौसम का
चक्र ,सही बना रहता है,
यह बात भी समझना
पड़ेगा ।

हम इन्सान ,सब कर सकते हैं ,यह बात सच
नहीं भगवान से भी डरना पड़ेगा ।

हमने तो बहुत खोज
किये , भौतिक सुख सुविधाओं में जीये 
अब विकास का नया
पैमाना बनाना पड़ेगा ।

समय रहते न चेते 
वन काटकर शहर बसाते रहे ,खादश्रृखंला
न बनाये रखें तो , प्रकृति
का कोप सहना पड़ेगा ।

संतुलन मौसम ही जीवन है ,जीवन
की खुशहाली के लिए
हर मनुष्य को ,एक पेड़
लगाना पड़ेगा ।

Sunday, March 29, 2020

छत्तीसगढ़ से स्वपन बोस की रचना- डर

श्री स्वपन बोस
पता- जुगानी केम्प छत्तीसगढ़ 
मो- ९३४०४३३४८१
विधा- कविता 
शीर्षक-  डर 


छोटे से बच्चे को देखो
आग को भी पकड़ना
चाहता है ।

बच्चें में कोई डर नहीं होती , इसलिए तो खुलकर जी पाता है ।

जीवन मीला है साठ सत्तर का मरने से क्या
डरना है ।

ध्यान से देखो सब ,झूठ
है जीसे तुमने माना है ।

मन तो मान्यता पर चलता है ,मन का कहां
कोई ठीकाना है ।

डर है कि खो न जाए
सुंदर काया गौर से देखो 
ये हैं ,पंच तत्वों की माया

डर है कि खो न जाए रिश्ते नाते अरे जरा सोच
पगले ,सब अपने होते
हुए भी  हम अकेले ही जातें  ।

डर है कि ,मेरा प्यार मुझसे न रूठ जाये
डर से किसी न अब 
तक कहा प्यार को
जान पाये ।

जो दिखता है प्यार जैसा
सब मृगतृष्णा ,का झूठा
ठीकाना है ।

तोड़ दो सब बंधन तुम्हें
बहुत दूर जाना है ,
सोने का पिंजरा है जगत
आगे सुंदर ठीकाना है ।

Tuesday, March 24, 2020

शीर्षक- कोरोना / लेख by स्वपन बोस


     करोना वायरस
आज पुरा विश्व एक कोरोना कोविड 19 वायरस से ,आंतकित है ,और हो भी क्यों न चीन के वुहान शहर से फैला यह वायरस काल बनकर , हजारों लोगों को मार रहा है , लेकिन अब तक के रिपोर्ट में मरने वालों , में छोटे बच्चे ,और कम इम्युन सिस्टम के लोग ,जो बुढ़े है ,बताया जा रहा है 
इससे यह पता चलता है कि , हमें अगर इस वायरस को हराना है तो 
हमारा इम्युनिटी पॉवर ठीक होना , है जो एन्टी बाडी तैयार कर करोना के वायरस से लड़ पाये । तो हमारा पहला हथियार 
हुआ , इम्युनिटी को बढ़ाना 
और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है
कि ,हम बार हाथ धोये , सेनेटाइजर का इस्तमाल करें 
क्यो की हाथ ही इस वायरस का फैलना का ,मुख्य केरियर है ।
एक बात सच है , वर्तमान में इस बीमारी को कोई ,मच्छर या अन्य
जीव वाहक नहीं बन रहे हैं ,बिंडम्बना यह है कि यह वायरस मनुष्य ही फ़ैला रहा है 
कहने का मतलब अब हमें मनुष्य ता का परिचय देते हुए ,घर में चार दीवारों अपने आप को कोरेन्टीयर
करना होगा ,बंद करना होगा ,क्यो
कि ,हम जीतना , सामाजिक दूरी
बनायेंगे ,उतना बीमारी से बच पायेंगे ।आज हम कुछ नहीं करके
बहुत कुछ कर सकते ,देश और समाज का भला कर सकते हैं ।
यह समस्या , बड़ी , कोई बात नहीं ,जो भी बुद्धी जीवी है जैसे 
लेखक ,शिक्षक ,वकिल ,सभी ज्ञानी जनों ,को देश की खातिर बंद का ,पालन करते हुए , इन्टरनेट के सहारे से लोगों को जागरूक अधिक से अधिक करना होगा , हमें एक सिपाही कि तरह ,होना होगा ,क्यो की एक जागा हुआ ही , दूसरे को जगा सकता है ।
इटली जो स्वस्थ सेवा में दुसरे नम्बर पर है , फिर वह की हालात
ठीक नहीं है , लेकिन भारत , के प्रथम दिन का कर्फ्यू ,यह संकेत दे
गया की कश्मीर से कन्याकुमारी तक, कच्छ से असम तक हम एक हैं , हमने शंखनाद कर दिया है ।कम संसाधन से भी हम इस वायरस को हराना है ,यही बात भारत को , पुरे विश्व से अलग करता , है आज पुरा विश्व भारत की तारीफ कर रहा है ,यही सोच 
और एकता , से हमें शासन प्रशासन की बातों को मानकर चलेंगे ,तो ही हमें इस करोना नामक वायरस से कम हानी होगी
और जैसे ,चीन करोना को लगभग मात देकर नयी सुबह में है ,हम भी ,बहुत जल्दी करोना को हरायेगे ,बस सचेत और ध्यान
से हमें ,एक एक कदम बढ़ाने होंगे 
 स्वछता ,बनाये रखने है ।
साथ ही ,अगर हमें लगें की कोई
वायरस का संगधीद है , उसे आइसोलेशन में ,स्वय ही चोदह दिन के लिए जाना चाहिए ।

     अब समय आ गया कुछ नहीं
       करने का ।

                     देश बचाने के लिए ,घर में ही चुपचाप बैठे रहने का ।


       स्वपन बोस
       छत्तीसगढ़
        मो 9340433481

Thursday, March 5, 2020

छत्तीसगढ़ से स्वपन बोस की रचना- कल नहीं होता

नाम श्री स्वपन बोस
पता जुगानी केम्प छत्तीसगढ़ 
मोबाइल ९३४०४३३४८१
शीर्षक- कल नहीं होता

   कल नहीं होता पर
    हम हर पल ,कल पर जीते हैं ।

 जीते जी  जी नहीं सकते हम , इसलिए
हर पल मरते हैं ।

योजना हर पल हम भविष्य की ही बनाते
है ,जब आतीं हैं मौत,
तब बहुत पछताते हैं ।

मीली थी जिंदगी प्रेम
करने को ,कल कर लेंगे
मोहब्बत ,यह सोच जीवन गंवा जातें हैं ।।

Tuesday, February 11, 2020

छत्तीसगढ़ से स्वपन बोस की रचना- कर्ज

नाम श्री स्वपन बोस
पता जुगानी केम्प छत्तीसगढ़ 
 शीर्षक कर्ज 
मोबाइल 9340433481

   सांसों का चलना 
    यह अनमोल जीवन का  मीलना ।
            एक कर्ज है ।
माता पिता का कर्ज हम चुका नहीं ,सकते पर उनके ,प्यार के बदले प्यार देना यह ,हर इन्सान का फ़र्ज़ है ।
             देश ने हमें पाला है ,कर्ज हमने देश का भी खाया है ।
              जब जब आई देश पर मुशीबत वीरों ने
अपना खून बहाया है ।
          कर्ज है सुंदर पर्यावरण का ,जीसने हमें  सुन्दर प्राकृतिक   दिया है । 
         पर दुःख है मानव अपने स्वार्थ के लिए ,जंगल काटकर
पत्थरों का शहर बसाया है ।
      अब हर कर्ज चुकाना होगा ।
 लेकर माता पिता का
आशिर्वाद ,एक पेड़
लगाना होगा ।

Thursday, February 6, 2020

छत्तीसगढ़ से स्वपन बोस की रचना- अक्सर

नाम श्री स्वपन बोस
पता जुगानी केम्प छत्तीसगढ़
मोबाइल 9340433481
शीर्षक अक्सर

अक्सर जिंदगी का खेल
      निराला होता है ।
कोई यह हंसता है ।
कोई यह रोता है ।
      पाने को सब पाले,
       मगर भीड़ में भी ,
अकेला हीं होता है ।
संसार के ,सागर में देखो
 सुख दुःख का नांव खेता है ।
             लहर बहुत है
तूफान भी बड़ी है।
हर पल जिन्दगी एक सवाल लेकर खड़ी है ।
              अक्सर जिंदगी का हर सवाल ,
बदल जाता है ,
यह कौन है अपना कौन
पराया समझ नहीं आता है ।
                  एक दिन ऐसा आता है ।
जोड़ा था जो भी ,
              सब छोड़ अकेला ही ,चला जाता है ।

Monday, January 27, 2020

छत्तीसगढ़ से स्वपन बोस की रचना- एक भारत

नाम श्री स्वपन बोस 
पता जुगानी केम्प छत्तीसगढ़
मो ९३४०४३३४८१
शीर्षक  एक भारत

      कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक है ।
            कच्छ से असम तक भारत एक है ।
              गणतंत्र एक हमारा संविधान हमारा एक है ।
            भारत में मां सबको पनाह देती है ।
 जात पात का भेद नहीं
             किसी लाल को जब दर्द होती है ,
             मां भारती बहुत रोती है ।
              यह हर कोई भारत मां की संतान हैं।
               खून सबका लाल होता है ,यही सबसे बड़ी पहचान है ।
                संविधान से सबको न्याय मीले ।
ख़ुश  हो हर भारतीय ।
            अमन चैन का फूल खिले ।।

Wednesday, January 22, 2020

छत्तीसगढ़ से स्वपन बोस की रचना- पेंशन

नाम श्री स्वपन बोस
पता जुगानी केम्प छत्तीसगढ़ 
मोबाइल ९३४०४३३४८१
शीर्षक पेंशन ।
विधा कविता 


पुरानी पेंशन है बंद भारत के कर्मचारी परेशान हैं ।
                फिर से लागू हो पुरानी पेंशन सरकार से ये ही आहृवान है ।
               मंहगाई का दौर है , कुछ नहीं बच पाता ,बुढा़पा आते आते
     
            मध्यम वर्ग से बना भारत ,यह वर्ग हमेशा संघर्ष करता है ।
          उच्च और निम्न की फ़िक्र नहीं ,मध्यम वर्ग हमेशा दो चक्की के पाटों में पिसता है ।
            ‌‌ नई पेंशन नीति अनोखा है ।
           नहीं मीलती , जीवन गुजारने के लिए धन ,यह कोरा धोखा है

Thursday, January 9, 2020

छत्तीसगढ़ से स्वपन बोस की रचना- आशा

नाम श्री स्वपन बोस
पता जुगानी केम्प छत्तीसगढ़
मोबाइल 9340433481
शीर्षक आशाये 

          आशाये ।

आशा जीवन को आगे बढ़ाती है ।
कभी हंसाती ,कभी रुलाती है ।

                      पाने की चाह मन में लिये , यूं ही चलता जाता हूं ।
मृग मारिचा है ,सारा संसार ,हर पल धोखा ,खाता हूं ।

                    ‌सोचा था कल आज ख़ुश हो जाउंगा ,जब आज मेरे पास है , फिर कल की आशाये
दिल में लिये चलता हूं ।

              जीवन बीत जाती है 
                 अधुरी ,आशाये रह जाती है ।

               है छोटी सी आशा की हंस लूं ,पर जीन्दगी बड़ी रुलाती है ।

                   पल में सब देकर , फिर पल में छीन ,लेती है ।

                   लालच में फंसकर मक्खी गुड़ में जैसे रोता है ।
मनुष्य ,जगत आशा के जाल में फंसकर खुद को भुल जाता है ।

Tuesday, December 31, 2019

छत्तीसगढ़ से स्वपन बोस की रचना- शरणार्थी

नाम श्री स्वपन बोस
पता जुगानी केम्प छत्तीसगढ़
शीर्षक- शरणार्थी


            शरणार्थी
एक लकीर का भेद देखो अपने
बिछड़ जाते हैं ।
                 देश टूट जाता है इन्सान शरणार्थी कहलाते हैं ।
सूर्य नहीं करता  भेद ,सबको तपन देता  है ।

      देखो भगवान के जगत में कोई ,भेद नहीं होता है ।

      न जाने ईन्सान को क्या हो गया ,अलग अलग देश बनाता है 

              नहीं जानती नदीया कौन अपना पराया  बहते हुए सबकी प्यास बुझती है ।

   हवा नहीं करती भेदभाव शरणार्थी हो या कोई जीव सबको सांसें देती है ।

 विज्ञान के इस युग में ,सब एक हैं।सात महाद्वीप में  बसें देश सब शांति के लिए नेक है ।

             मनुष्य ही है जो मानवता का प्रतीक है ।
रहे सब मिल जुलकर ये ही मनुष्यता का सिख है ।

       दो दिन की जिन्दगी में ,
        भगवान ने सुन्दर मानव बनाया , है ।
               हो खुशहाल सारी दुनिया , मनुष्य ने परिवार ,समाज
और देश बनाया ।

      शांति के लिए बस प्रेम चाहिए
      प्रेम सब कुछ होता है ।
       फिर क्या हो गया मनुष्य को शांति के लिए न जाने  क्यों लड़ता      
         है ।

          सराय है यह सारा जगत बस यह पल दो पल के लिए ठहरना है ।

       साठ सत्तर साल के लिए यह रहना है । शरणार्थी बनकर ईश्वर के दर एक दिन सबको चले जाना है ।

Tuesday, December 17, 2019

छत्तीसगढ़ से स्वपन बोस की रचना- शरीर और मन

नाम श्री स्वपन बोस
मोबाइल 9340433481
 शीर्षक - शरीर और मन


      
खेल जीवन का शरीर और मन से ही होता है ।
                इसलिए जीवन में हर पल तनाव रहता है ।

    शरीर की इच्छा सब कुछ खाकर ,अपना रुप छोड़ ,जाना होता है ।
             न मिले जगत में मान-सम्मान तो मन बड़ा रोता है ।

           मन का किया शरीर ही ढोता है ,शरीर और मन की कारनामे देख ।

                  आत्मा बहुत बैचेन होता है ।
             दिवस कर्म से थक हार कर शरीर सो जाता है ।

              मन की महिमा अपरंपार है , सपनों में भी जागता रहता है ।

                 मन अगर सध जाये तो ,नया जीवन मिल जाता है ।

                  पत्थर में भी है भगवान इंसान उसे देख लेता है।

               मिला है मिट्टी से यह शरीर एक दिन मिट्टी में मिल जाता है ।

              जिंदा नहीं होता ,वह मन और शरीर जो भगवान के
नियम विरुद्ध कर्म करता है ।

                 जो मन शरीर से उपर उठकर कर्म करता है ,जिंदा वही 
रहता है ।बाकी सब मिट जाता है 

             शरीर की बीमारी तो दर्द देती है ।
             मन की बीमारी तो बहुत बड़ी है ।जीते जी जीवन ले लेती है ।

      पर मन की आदत ऐसे होती है ,टिकता नहीं किसी एक जगह पर ,हर पल भटकता रहता है ।

         शरीर चलता मन से ।
           मन के अधीन सारा जहान है ।

             जो जीत जाये मन को 
               संसार में उसकी अलग पहचान है ।

          मन को जीत कर , कोई बुद्ध , कोई कृष्ण ,और राम हो जाते हैं ।

                मन और शरीर की कामनाओं में फंसकर । संसारी हर पल रोते है ।

Monday, November 25, 2019

छत्तीसगढ़ से स्वपन बोस की रचना- मोहमाया

कवि स्वपन बोस
शिर्षक मोहमाया
पता जुगानी छत्तीसगढ़
मोबाइल 9340433481

        पकड़ सको तो पकड़ लो मुझे ,मैं तो तुझमें ही छुपा हूं ।
पकड़ रखा जीसे तुमने वह तो
झुठी मोह-माया है ।
                    मैं जब छोड़ जाता हूं तुझे तेरे अपने तुझे जला देते है
एक मुट्ठी राख बन जाता है तू ,
            गंगा में तुझे बहा देते है ।
ये दुनिया एक मेला है मैं साथ हूं।
तेरे तू नहीं अकेला है ।
देख गौर से यह कौन तेरा अपना है , मुश्किल में पास नहीं कोई तेरे
जगत दिवा सपना‌ है ।
    ये जो सुंदर तेरी काया है ।
     मिट्टी से बनी माया है ।
       बुढा़पा जब आता है ।
     तू बहुत घबराता है ।
                पांच दरवाजे वाले घर में मैं रहता हूं ।
जो दरवाजे पर रह जाये उसके पकड़ में नहीं आता हूं ।
          दरवाजे के बहार मोह-माया की सुन्दर दुनिया दिखती है
यह प्यार नहीं किसी से मतलब से
दुनिया चलती है ।
             मोह और बंधन होता नहीं हम बना लेते हैं ।
भगवान तो हर पल खड़े हैं हमारे पास पर , इच्छाओं के आंखों से ।
       देख नहीं पाते हैं ।
   
      ‌

Monday, November 11, 2019

छत्तीसगढ़ से स्वपन बोस की रचना- श्री राम

नाम श्री स्वपन बोस
शिर्षक श्री राम
पता जुगानी केम्प छत्तीसगढ़
मोबाइल 9340433481


राम ही तो मेरा जीवनधार है
                  राम बीन जींदगी जी
नहीं सकता संसार का कोई नहीं आधार है ।
राम नाम से पत्थर भी तर जाते हैं
जो रहें राम से दूर , सोने की दुनिया भी उसे बचा नहीं पाते हैं ।
                       लाख जोड़ लें तू
धन ,पद माया , साथ कुछ न जाना है ।
             राम नाम की धन जीसे मिल जाए , सुंदर उसका ठिकाना है ।
              छोटे से इस जीवन में
                बस अंहकार को ही जो बढा़या ।
अंत समय राम न मिलते सोच सोच बहुत पछताया ।
             साथ अगर सब छोड़ भी दे अब क्या आता जाता है ।
जीसके दिल में  राम बसा है , वही सदा मुस्कुराता है ।
                   राम नाम भज ले बन्दे जीवन सफल हो जाएगा
राम को अपनाले जीवन में ,
                 हर दुःख खो जायेगा ,
अयोध्या है राम की नगरी
राम दर्शन को जाना है ।
                      जीवन के सारे दुःख दर्द राम नाम ले लेकर मीटाना है ।

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...