सोनपुर, (ओड़िशा )
शीर्षक - खत लिखते हैं
विधा - गजल
,// खत लिखते हैं//
आपसे कुछ खफा आपकी चाहत लिखते हैं ।
दीद की हसरत ले दिल में, आपको ये खत लिखते हैं ।
जुदाई के दर्द से सिसकती दिल की,
तड़प और खौफ भरी शिकायत लिखते हैं ।
समझते हैं छुट्टियां मुकम्मल ना हुई होगी ,
मगर साल भर से ज्यादा हो गया, ना लौटे और ना खत लिखते हैं ।
फिर फक्र होता है,, ये सोच कर,
के वतन के रखवाले की मोहब्बत लिखते हैं ।
हम समझते है उन वीरों की सांसो से ही तो तिरंगा लहराता है,
जो अपने खून के हर कतरे से,जय हिंद को आयत लिखते हैं ।
फक्र है और फिक्र भी दूर सही पर सलामत रहें
आप को खोने के खयाल भर को हम कयामत लिखते हैं ¡
बच्चे तो मसरूफ हैं, पढ़ लिख कर फौजी जो बनना है ।
आप ही की परछाई है तिरंगे की हिफाजत को इबादत लिखते हैं ।
जाबाज, दिलेर जो कहे दुनिया आपको
हम तो सिर्फ और सिर्फ खुदा की इनायत लिखते हैं ।
गुमशुदा हैं आप, यकीनन एक रोज लौटेंगे
जाने फिर क्यों ये दुनिया वाले इस वाकिया को सहादत लिखते हैं ।