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Saturday, May 29, 2021

रोजी दंडसेना की रचना- खत

नाम- कुमारी रोजी दंडसेना
 सोनपुर, (ओड़िशा )
 शीर्षक - खत लिखते हैं
 विधा - गजल

 ,// खत लिखते हैं//
 आपसे कुछ खफा आपकी चाहत लिखते हैं । 
 दीद की हसरत ले दिल में, आपको ये खत लिखते हैं । 

 जुदाई के दर्द से सिसकती दिल की,
 तड़प और खौफ भरी  शिकायत लिखते हैं । 

 समझते हैं छुट्टियां मुकम्मल ना हुई होगी ,
 मगर साल भर से ज्यादा हो गया, ना लौटे  और ना खत लिखते हैं । 

 फिर फक्र होता है,, ये सोच कर,
 के वतन के रखवाले की मोहब्बत लिखते हैं । 

 हम समझते है उन वीरों की सांसो से ही तो तिरंगा लहराता है,
 जो अपने खून के   हर कतरे से,जय हिंद को आयत लिखते हैं । 

 फक्र है  और फिक्र भी  दूर सही पर सलामत रहें 
 आप को खोने के   खयाल भर को  हम कयामत  लिखते हैं ¡

 बच्चे तो मसरूफ हैं, पढ़ लिख कर फौजी जो बनना है । 
 आप ही की परछाई है  तिरंगे की हिफाजत को इबादत लिखते हैं । 

 जाबाज, दिलेर जो कहे दुनिया आपको
 हम तो सिर्फ और सिर्फ खुदा की इनायत लिखते हैं । 

 गुमशुदा हैं आप, यकीनन एक रोज  लौटेंगे
 जाने फिर क्यों ये दुनिया वाले इस वाकिया  को  सहादत  लिखते हैं ।

Friday, May 21, 2021

रोजी दंडसेना की रचना- माँ

नाम- कुमारी रोजी दंडसेना
 जिला- सोनपुर  ओड़िशा 
 विधा- कविता 
 शीर्षक= मैं और मेरी मां

// मैं और मेरी मां //

 मैं देखती हूं खुशी को
 अपनी मां की आंखों में ।
 जब मुझे खुश होता देख
 वो विभोर हो उठती ।
 कभी छलक उठते नैन,
 कभी, टपक पड़ते मोती।
 पलकें करती है जब, उन मोतियों का श्रृंगार,
 
 नीली आंखें कर देती है,  उनके  खुशियों का इजहार।

 मैं देखती हूं खुशी को
 अपनी मां की होठों  पे  ।
 जब अपनी पीर भुला 
 वो मेरे साथ खिलखिला उठती है ।
 जब अपने सैकड़ों दुख दर्द को 
 मेरी एक मुस्कान पे वार देती है।
 जब मुझे हंसता देख वो आईने सी
 मेरा अक्स बन जाती है ।
 जब खुद को परे रख मेरी खुशिया
 उनके जीवन का लक्ष्य बन जाती है ।

Saturday, March 20, 2021

रोजी दंडसेना की रचना- चंदन

कवियत्री का नाम - कु रोजी दंडसेना
 जिला - सोनपुर, ( ओडिशा  )
 शीर्षक - चंदन
 विधा -कविता

 औषधि प्रसाधन आदि
 चंदन के है गुण
 हजार
 सिर माथे सुशोभित होय
 प्रभु का है अनन्य श्रृंगार ।

 चंदन की शीतलता अनूप
 श्रेष्ठ इसका गुणवत्ता
 भुजंग के संग रहकर भी
 बनाए रखा  जो निज सत्ता ।
 
 संसार का हर वर्ग हर जाति
 इसकी लोहा को  माने हैं ।
 आस्तिक हो चाहे हो
 नास्तिक 
 चंदन का गुन पहचाने हैं ।

 तपन के ताप से हो बचना
 या बढ़ानी हो औषधि  का  प्रभाव
 चंदन के सरिस ना कोई
 शीतल सरल स्वभाव ।

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...