*काव्य संसद*
जिला - राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)
*विषय - रक्षाबन्धन*
*विधा - कुण्डलिया छंद*(अनुप्रास अलंकार)*
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रोली अक्षत से सजा , दीप जलाती थाल ।
बहना करती आरती, तिलक लगाती भाल।।
तिलक लगाती भाल , बाँधती भ्राता राखी ।
ले बहना उपहार , झूमती सारी साखी ।।
वचन सुरक्षा लेत , देखती बहना भोली ।
सुंदर लगते भ्रात , माथ में अक्षत रोली।।
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नाता बहना भ्रात का , जाने है संसार ।
कोमल रेशम डोर ही , रिश्ते का आधार ।।
रिश्ते का आधार , भावना जग से न्यारा ।
अनुपम लगता साथ,जहाँ में कितना प्यारा।।
भ्रात बहन का प्यार ,हिया में खुशियाँ लाता।
दुख में सुख का भान, संग हो ऐसा नाता ।।
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*प्रवीण कुमार ठाकुर*
*पतोरा , छुरिया , राजनांदगांव , छत्तीसगढ़*
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