स्थान -मनेंद्रगढ
जिला -कोरिया
शीर्षक -गवेजा
बात-चीत का दौर कम हो चला है
इसलिए लोगो में फासला हो गया है।
एक समय था जब
पेड़ के नीचे चबूतरों
पर बैठकर
लोग आपस में गवेजा
कर लिया करते थे
अपने जिंदगी के उलझनों
को वहीं सुलझा लिया करते थे।
हर किसी को एक दूसरे
के बारे में पता होता था
खुशी हो या गम सब आपस
में बांट लिया करते थे।
घर के दरवाजे पर बनी
थोड़ी ऊंची चौखट पर भी
औरतों का झुंड हुआ करता था
और गवेजा करते करते
खाना भी बन जाया करता था
बच्चों को भी शाम का
इंतजार हुआ करता था
अपने दोस्तो के साथ
आज कौन सा खेल खेलेंगे
इस बात का ज़िक्र हुआ करता था।
गवेज़ा का वह दौर चलो
फिर से शुरू करते हैं
आने वाली पीढ़ियों को भी
गवेजा का लाभ सिखाते हैं
न होगा उनमें अकेलापन
न होगी जीवन के प्रति निराशा
आत्मविश्वास बढ़ेगा उनका
दूर होगी आत्मघात की अभिलाषा।।