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Saturday, June 12, 2021

श्रृंगार : गिरधारी लाल चौहान

रचनाकार -गिरधारी लाल चौहान
स्थान--नवापाराखुर्द /सक्ती
जिला ---जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा ---कविता
विषय -श्रृगार पर आधारित
शीर्षक-देख रही श्रृंगार

आइना देख श्रृंगार मुस्कुराने लगी है ।
पूछ रही किसके लिए खुद बताने लगी है।
मन भी जानती है बात सत्य मानती है
उनके नाम से हीअब इतराने लगी है ।

कुछ तो और नहीं बचा मन ने मन से पूछा।
डाली निगाह बार बार मन गई सकुंचा।
प्यास बुझी मन की निराश गई तन की ।
सब कुछ अब मुझे बहुत बहुत भाने लगी है
 
माथ पर गई नजर देखा उनका बिन्दी ।
कान को मैं छुई पाई उनका ही झुमका ।
बालों में उनका गजरा नैनों में कजरा ।
तेरा कुछ भी नहीं कह चिढ़ाने लगी है ।

श्रृंगार से मुझे  इतनी ज्यादा स्नेह क्यों ।
श्रृंगार बिना मैं क्यों नहीं थी  सकती ।
आदत क्यो नही मेरी बन रही सोच रही ।
मुझे भी श्रृंगार सब त्यागने की पड़ी है ।

Friday, June 11, 2021

हम कविता क्यों लिखते हैं: गिरधारी लाल चौहान

लेखक--गिरधारी लाल चौहान
स्थान-नवापारा खुर्द/ सक्ती
जिला ---जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा --आलेख/ निबंध
विषय-हम कविता क्यों लिखते हैध
हम कविता क्यों लिखते हैं ?यह बहुत ही विस्तृत प्रश्न है इसका एक ही उत्तर नहीं हो सकता ।जो कविता लिखते हैं अपने लिखने  का कारण स्वयं ही दे पाएंगे किसी एक के द्वारा दिया गया उत्तर सार्वभौम नहीं माना जा सकता । कविता लिखने का जो उद्देश्य है सबका अलग-अलग है
मान लीजिए कोई अपनी मानसिक शांति और सुख के लिए लिखता है । कोई कविता लिखकर धनोपार्जन करना चाहता है । कोई आस-पास में व्याप्त समस्याओं को दूर करने के लिए प्रथम प्रयास किया गया और उसकी काफी प्रशंसा की गई तब से कविता लिखना दिनचर्या में शामिल हो गया और तबसे कविता लिख रहा है ।आदमी अपने आपको अमर बनाने के लिए कविता लिखता है । लिखने वाला सोचता है कि मैं तो यहां से चला जाऊंगा उस समय मेरी कविता कम से कम यहां रहेगी और मैं लोगों के जुबान या मन में अनेक वर्षों तक जीवित रहूंगा ।कई कवियों की तरह जीवन जीना चाहते हैं और लिखते हैं इसलिए भी कविता लिखते हैं ।
हर एक की कविता लिखने के पीछे उद्देश्य जरुऊ होता है और वही कारण होता है जिसके लिए कविता लिखता है ।

Thursday, June 10, 2021

कैफियत : गिरधारी लाल चौहान

लेखक --गिरधारी लाल चौहान
स्थान ----नवापारा खुर्द/. सक्ती
जिला ---जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा-आलेख /निबंध
विषय-कैफियत
शीर्षक---भूल चुका हूं

दस साल पहले की घटना आदमी को कहां याद रहता है  । धीरे -धीरे मानस पटल से दूर चला जाता है । कोई याद दिलाए तब कुछ प्रतिशत ही याद आता है यहां पर आदमी का निर्णय हां -हां के अतिरिक्त कुछ नहीं रहता । कहने वाला व्यक्ति कहता है हम यहां गए थे ये ये खाए थे यहां पर काफी देर तक बैठे थे । ये व्यक्ति उस समय व्यक्ति नहीं लड़का था
कुछ याद रहता है कुछ याद करने का प्रयास करता है । कुछ का जवाब हां के अलावा कुछ नहीं रहता ।लिखी हुई बातों में या लिखित दस्तावेज में कोई अन्तर नहीं पड़ता । ज्यों के त्यों सारी घटनाएं उसमें लिखित रहती है ।उन बातों को पढ़कर आदमी सारी घटनाओं को बता सकता है । अगला आदमी उसमें यकीन कर लेता है । बिना जोड़े तोड़ मरोड़
किए बताना संभव नहीं है।जब किसी बात की सारे विवरणों को बताना होता है तब यहां मुश्किल होती है हम दुखद या सुखद घटनाओं को भी भूल जाया रहते हैं ।उस समय हमको कहना पड़ता है मैं भूल गया हूं मुझे ठीक ठीक याद नहीं आ रहा है सोचने का प्रयास करता है जब याद नहीं आता तब अपना जवाब सब भूल गया हूं कहकर  अपना जवाब रख देता है ।

Wednesday, June 9, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- अकिंचन

नाम--गिरधारी लाल चौहान
स्थान-नवापाराखुर्द सक्ती
जिला जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़
विधा---कविता
विषय-अकिंचन
शीर्षक----कोई बात नहीं  मैं अकिंचन हूं 

कोई बात नहीं, मैं अकिंचन हूं ।
मेरे स्वामी तो सबसे बड़े धनवान ।
मेरे पास भले ,धन का अभाव है ।
मेरे स्वामी तो सबसे बड़े गुणवान ।

जब चाहूं उनसे,मिल जाता है धन ।
उनके कारण से मेरा, है सुखमय जीवन ।
अकिंचन का मुझको,आभास ही नहीं ।
खुश हूं मैं जहां में होकर अकिंचन ।

सोच रहा हूं सब मेरे जैसे हो अकिंचन ।
फिर रटना पड़ेगा नहीं  चाहिए धन धन ।
अकिंचन के पास सदा होते  हैं भगवान ।
उनके साथ रहने का उनका रहता है मन ।

अकिंचन हर जन्म मुझे बनाना भगवन ।
सुदामा कृष्ण की तरह हो हमारा मिलन ।
करुं इसके लिए मैं  प्रार्थना और निवेदन ।
भाया है मेरे मन को रहना अब अकिंचन ।

Tuesday, June 8, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- व्यवहार

नाम--गिरधारी लाल चौहान
स्थान ---नवापारा खुर्द /सक्ती
जिला--- जांजगीर-चांपा/छत्तीसगढ़
विधा---कविता
विषय ---व्यवहार
शीर्षक- व्यवहार शील मानव

मानव को व्यवहार शील,  हरपल होना ही चाहिए ।
व्यवहार वह दौलत  जिसे,कभी न खोना चाहिए ।

अगर है सद्व्यवहार तो, समझिए दुनियां मुट्ठी में ।
व्यवहार है तो राम आ सकते, टूटी फूटी झोपड़ी में ।
व्यवहार हमारा पीतल नहीं  चमकते सोना चाहिए ।

व्यवहार को दुनियां देखती है, व्यवहार की होती पूजा ।
व्यवहार आदरणीय  भी सम्माननीय और न होती दूजा।
व्यवहार याद रखें जाते हैं अच्छा व्यवहार बोना चाहिए ।

व्यहार आदमी से अलग और व्यवहार याद रखते है ।
आदमी चला जाता जहां से व्यवहार को सहेजते हैं ।
आदमी को कभी नहीं उसका व्यवहार ढोना चाहिए ।

Wednesday, June 2, 2021

गिरधारी लाल चौहान कृत लघुकथा- परामर्श

नाम--गिरधारी लाल चौहान
स्थान -नवापारा खुर्द /सक्ती
जिला-- जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा-- लघुकथा
विषय-- परामर्श
शीर्षक  ---नेक सलाह नेक इंसान

        आज के समय में अच्छी सलाह की उम्मीद रखना या नहीं रखना ये व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है । अगर हम रखेंगे तो पूर्व पृष्ठभूमि हमारी जो कह रही है उसी के अनुसार हम अपने कार्य करेंगे । हम जिस व्यक्ति की सलाह को सफलता की पूंजी मानते हैं और उनके सलाह के अनुसार हम हर कार्य कर रहे हैं और सफल भी हो रहें हैं  तो वह सलाह देने वाला पत्नी भी हो सकता है बच्चे भी सकते हैं माता पिता भी हो सकते हैं ।
            मेरे आदत में शामिल हो गया है कोई भी कार्य बिना
किसी को पूछे करता ही नहीं ।जब विवाह नहीं हुआ था तो अपने यार दोस्तों के सामने अपनी समस्या रख देता था और
उसी के अनुसार अपना कार्य भी होता था अच्छे दोस्त जो होते हैं कभी गलत सलाह देते ही नहीं ये मेरा मानना है और गलत आदमी से मेरी मित्रता भी नहीं है ।
       जब विवाह हो गया तब यह कार्य अपनी पत्नी से पूछकर करता हूं । और कदम दर कदम मेरे कार्य हो रहे
जीवन के अनेक कार्य है सलाह मशविरा ले लेने से पूर्ण होने में रुकावट नहीं लगता । और सम्पन्न हो जाता है चाहे कोई भी व्यक्ति हो जिसकी सलाह मानकर कोई कार्य कर रहे हो सफल भी हो रहे हो । मेरे नजर में वह व्यक्ति नेक इंसान नेक सलाह की श्रेणी में आता है ।

Monday, May 31, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- प्रहरी

नाम--गिरधारी लाल चौहान
स्थान---नवापाराखुर्द/सक्ती
जिला----जांजगीर चाम्पा/ छत्तीसगढ़
विधा---आलेख कविता ग़ज़ल
विषय---प्रहरी
शीर्षक---जागते रहो

जागते रहो प्रहरी ने, अभी-अभी कहा है ।
आज तो कुछ बात है,कल तक   चुप रहा है ।

प्रहरी को मालूम हो जाता ।
होनी अनहोनी  हर घटना ।
बहुत ही आवश्यक हर तरफ ।
प्रहरी का होना और रहना ।
भविष्य वाणी प्रहरी का, आंशिक ही झूठ रहा  है।

प्रहरी बनना हर पल ।
जोखीम भरा रहता है ।
प्रहरी मालिक दोनों से पूछा ।
दोनों यही कहते है ।
प्रहरी के अभाव में, हर जगह लूट रहा है ।

प्रहरी खुद जागता है । है
औरों को भी जगाता है ।
धन जन सुरक्षा के दायित्व ।
को वह निभाता है ।
सामने हरदम ईमानदारी का वह सबूत रखा है ।

प्रहरी बने हम हिमालय सा ।
अपने देश के हित में ।
सजगता से दें पहरा ।
पड़े कदम न अहित में ।
प्रहरी के दम पर सुरक्षित हर युग रहा है ।

Saturday, May 29, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- कलम की बात

नाम --गिरधारी लाल चौहान
स्थान- नवापारा खुर्द/ सक्ती
जिला -जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विषय -कविता/ ग़ज़ल /आलेख मुक्त
शीर्षक ----कलम की बात करें

कलम में अगर धार है, तो समझो तलवार है ।
सच बयां न कर सके,तो वह कलम बेकार है ।

कलम की अपार शक्ति को 
दिखाने की जरुरत है ।
कलम की होती भक्ति जो
चमकाने की जरुरत है ।
दुखों को न मिटा सके,वह कलम बेकार है ।

नेताओं के भाषण अगर
कलम से उतर रहे ।
छाई है जो समस्या अगर
उससे न गुजर रहे ।
वो कलमकार नहीं, सिर्फ एक चाटुकार है ।

कलमकार क्यों कभी 
नेता नहीं बनते ?
बन भी गये तो क्यों
इस धरातल में नहीं जमते ।
कलम ही तो दुनियां का, श्रेष्ठ पहरेदार है ।

आज की दशाओं पर
कलमकारों को लिखना चाहिए ।
जो लिख दिए लोगों के लिए
कहीं भी तो दिखना चाहिए ।
अगर लिख रहे हैं तो,बदलता क्यों नहीं संसार है ।

Wednesday, May 26, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- दिवास्वप्न

नाम---- गिरधारी लाल चौहान
स्थान ---नवापारा खुर्द/ सक्ती
जिला--- जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा---कविता /आलेख/ ग़ज़ल
विषय---- दिवास्वप्न

देख रहा निज को,मन के दरपन में  ।
दिख रहा कैसे बचपन, कैसे यवन में ।

उसे भूलाना कैसे होगा
हम चाहेंगे जैसे होगा ।
और दूसरा क्यों चाहेंगे ।
जरुरी नहीं वैसे होगा ।
बदल जाता है मन ,मिलन और बिछड़न में ।

कुछ बदले कुछ बदला नहीं ।
आज नहीं तो अगला नहीं ।
भविष्य की क्या आशाएं ।
यह कदम पहला नहीं ।
हेर फेर करते नहीं,हम अपने वचन में ।

दर्पण अगर टूट जाए ।
उसके जगह नया आए ।
कुछ तो नया चेहरा मिलेगा ।
नया चेहरा मन को भाए ।
होते रहते परिवर्तन, सबके ही जीवन में ।

पुराने दर्पण पास नहीं ।
नये की बात दूर ।
सौ वर्ष हो गए चेहरा देखे ।
सोचे मन कब देखूं भरपूर ।
होते रहता हर पल, चित और चिंतन में ।

Tuesday, May 25, 2021

मानसून पर गिरधारी लाल चौहान के दोहे

नाम-गिरधारी लाल चौहान
स्थान--नवापारा खुर्द सक्ती
जिला --जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़
विधा-- दोहा मात्रिक छंद
विषय--मानसून
शीर्षक-मानसून

मानसून आती नहीं,समय पर की बार ।
खेती करते जानते, उसका यह व्यवहार ।

मानसून के जाल में, पड़कर रोते लोग ।
खेती वाले कोसते, देते बादल दोष  ।

मानसून दिन भर रही, बरसी टपटप बूंद ।
ज्यादा बरसी ही नहीं, छाये बादल झुण्ड ।

मानसून के राह में, बना कौन दीवार ।
आने वाली लौट ली, आते आते द्वार ।

Monday, May 24, 2021

गिरधारी लाल चौहान के दोहे- जीवन

नाम -गिरधारी लाल चौहान
स्थान--- नवापारा खुर्द /सक्ति
 जिला ---जांजगीर-चांपा/छत्तीसगढ़
विधा--- दोहा
विषय--- जीवन
शीर्षक---- जीवन के आसपास

जीवन जिसकी आयु का,,मान रहे सौ साल ।
आगे पीछे भी चले, मानक जाता टाल ।।

जीवन रखिए हौसला, इससे बनते काम ।
डरना बुजदिल लोग का, पीछे उनका नाम ।। 

जीवन जीना सीखिए, फिर जाने संसार ।
जो खुद को ही जानले, मिलता तब ही पार ।।

जीवन सुख दुख बांधिए, दोनों की दरकार ।
दोनों समीप राखिए, जीवन का आधार ।।

Saturday, May 22, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- प्रवाह

नाम ---गिरधारी लाल चौहान
स्थान ---नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा---कविता/ आलेख /ग़ज़ल
विषय ----प्रवाह
शीर्षक ----नदी का प्रवाह

नदी का प्रवाह, बहुत ज्यादा तेज है ।
 पार नहीं जा सकता, इसका खेद है ।
पानी में तैरने की,आदत नहीं अपना ।
पार तभी जाऊंगा,दिख जाता रेत है ।

नाव का लेकर सहारा, जाते कई किनारा ।
इस ओर मन कभी, जाएगा   नहीं हमारा
बादल सारे छंट जाए , बरसना रुक जाए ।
भागा नहीं जा रहा, अपना जो देश है ।

समय बहुत पास मेरे,सोच भी दूर का  ।
वर्षों से आता जाता  हूं आज की छोड़ो ।
राह में बाधाएं हैं वह भी मिट जाएगा ।
जिसे पहुंचाना है, सुरक्षित संदेश है ।

नदी की उफनती धार,  देख रहे वर्षों बाद है ।
लग रहा दोनों किनारों का हो रहा संवाद है ।
ये स्नेह है ,या कुछ न कहने का मन मुटाव ।
सुनने वाले के मन में उपज रहा अति ठेस है ।

नदी को हम कहें, कैसे अपनी बात ।
उस पार हमें जाना है आ जाएगी रात ।
किसी की उसने कभी भी सुनी कहां है ।
भले ही किसी के उपर कितना कलेश है ।

Friday, May 21, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- माँ

नाम--- गिरधारी लाल चौहान
नवापारा खुर्द --सक्ती
 जिला--- जांजगीर-चांपा/छत्तीसगढ़
विधा---कविता मुक्त
विषय-- मां
शीर्षक--मां स्वयं महाकाव्य
   
मां पर कुछ लिखूं, महाकाव्य बन जाए।
जिसे व्यक्ति सात जन्म ,भी पढ़ न पाए ।

मां की ममता जग में, है गंगा की धार ।
जिसकी छाया में, होता मानव भव पार ।
मां हर दशा में हरपल, कृपा दृष्टि बरसाए ।

मां की आंचल के तले,सौ सौ जन्म का सुख ।
बिना सेवा भाव  मिले,छू न पाये कोई दुख ।
मां की ममता जग में, भगवान से बड़ा कहाए ।

मां गुरु होती प्रथम , जीवन की हर सीढ़ी पर ।
रहे साथ न रहे होती,नजर अपनी पीढ़ी पर ।
 भक्ति शक्ति सर्वदातृ,जग में मां कहलाए ।

मां अनंत मा की कृपा अनंत,वेद पुराण जिसे गाते ।
जो कलम मां के चरणों में,वही चारो पदारथ पाते ।
आओ मां के चरणों में हम सब शीश झुकाएं ।

Thursday, May 20, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- मैं किसान

नाम ---गिरधारी लाल चौहान
स्थान --नवापारा खुर्द सक्ति
जिला-- जांजगीर-चांपा
विधा---कविता
मुक्त -शीर्षक ---छत्तीसगढ़ के मैं किसान

            छत्तीसगढ़ के मैं किसान
छत्तीसगढ़ के मैं किसान,बतावंव  अपन पहिचान ।
दुनियां एही रुप म  जाने, छत्तीसगढ़ी मोर जुबान ।

     दस हाथ के धोती मोर,पूरा बांही के कुरता ।
    पोरीस भरके धरंव लाठी,पांव म सुग्घर जूता ।
    मुड़ म सुग्घर पागा बंधाये,मुंह बीरो पान दबाये ।
    नांगर जांगर के चलइया, घर म वेद अउ पुरान ।

दाई ददा के कहा मानों,देव धामी कस मैंहर जानों ।
ओंकर कहना ल मैं गुनों,परके कहा कभु नई सुनों ।
रांपा कुदारी संग मितानी,चीखला माटी मोर कहानी ।
सुख सुमत के रस्ता रेंगव,मोर कोठी पाबे भरे  धान ।

घर म मोर गोरस लागे, घी म मोर कंवरा  आगे ।
चार झन ल दे खावंव,दया धरम के गुन गांवव ।
मोर बिना न न्याय पंचेती,ककरो बेटा के रहे बेटी ।
रोज बिहनियां चुरे अंगारक,सुत उठके करों दान ।

मोर पाछू दुनियां के कारज,यज्ञ रहे के अउ लागत ।
मोर बइहां छइहां सबों जुड़ात,कोन आगत निरागत ।
कोला बारी घर तमंजल,आस परोस मोर छाये मंगल ।
सब संग मोर उठना बैठना, छोटे बड़े सबों मितान ।

गांव जगाये के सपना मोर, पढ़े लिखे म ज्यादा जोर ।
सड़क बिजली पानी पाये , अस्पताल के उड़त शोर ।
गांव म शिविर जागरुकता,जिनगी सबके एक रुपता ।
जागत सोवत मन देखे,नवा सोच अउ नवा उड़ान ।

Tuesday, April 20, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- ठिहार

नाम ----गिरधारी लाल चौहान
स्थान ---नवापारा खुर्द/ सक्ति 
जिला ----जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा--    कविता
विषय  ---ठिहार
शीर्षक---- मैं ठिहार अब 

मैं ठिहार अब बन तो गया हूं।
  आज के मामले में नया हूं ।

लोग मुझको नहीं जानते हैं ।
मैं अभी तक नया ही नया हूं ।

चार दिन की नजारे सुहानी ।
 बन गई मैं यहीं रह गया हूं ।

   लोग तो आजमाते रहे हैं ।
आजमालो मुझे कह दिया हूं ।

  जो चली राग है वो पुरानी ।
  राग गाया नहीं वो नया हूं ।

Friday, April 16, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- जहाज़

नाम --गिरधारी लाल चौहान
स्थान ---नवापारा खुर्द/ सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा---आलेख /कविता/ ग़ज़ल
विषय ----जहाज
शीर्षक ----जहाज बनाले

राम नाम खुद का ,जहाज बनाले ।
भवसागर पार जाने का ,काज बनाले ।

इसी के सहारे दुनियां पार उतरे ।
चाहे रहे सुख या  चाहे रहे दुख रे ।
माया धन न काम का किनार बनाले ।

चार दिन  का जीवन, चार दिन की कहानी ।
इतना है मानव  समझ , अब तेरी जिंदगानी ।
उसके बाद जाना ही जाना  वो आधार बनाले ।

ए काया मिट्टी की ,मोह करना छोड़ दे ।
कबीर जैसे लोगों की ,चादर को ओढ़ले ।
देर करेगा पछतायेगा  ,तू  विचार बनाले ।

ए  तेरा सबेरा है ,सांझ को आना है ।
ए नहीं ठिकाना तेरा, वो तेरा ठिकाना है ।
भटक मत अंधेरा में,चल उजियार बनाले ।

Wednesday, April 14, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना-चेतिका

नाम ----गिरधारी लाल चौहान
स्थान ----नवापारा खुर्द/ सक्ति
जिला ----जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा---आलेख /कविता /ग़ज़ल
विषय ---चेतिका
शीर्षक--चेतिका से भय नहीं

जीने वाला चेतिका देखकर सहम जाता है ।
मरने वाला चेतिका देखकर खुशी मनाता है ।

हमें मालूम है एक दिन हमें है जाना ।
दुनियां की  बनाई बातों से क्या घबराना ।
जाएंगे फिर आएंगे यही तो  नाता है ।

लोग चेतिका बना नष्ट करते  तन को ।
अंतिम बिदाई देते जाने वाले जीवन को ।
मैं फिर आऊंगा धरा पर कह वह जाता है ।

जीवन जिसका जितना  उतना जीया कहते ।
जब तक जीवन है इस धरा पर  लोग रहते ।
उसकी मर्जी यहां चले वही लाता ले जाता है ।

चेतिका संसार का सत्य जिसमें सबको लेटना है ।
सबका देख सकते हम खुद का नहीं देखना है ।
यही पर धन धर्म कर्म सब कुछ छूट जाता है ।

यह समय होता है सिर्फ सिर्फ पछतावे का ।
कोई कुछ नहीं कर सकता उसके दावे का ।
चेतिका से क्या भयभीत होना वह हमें लाता है ।

मांगने से चेतिका किसी ने धरा पर पाया नहीं ।
चेतिका को मन में किसी ने  कभी बसाया नहीं ।
एक निश्चित समय में वह अपना रंग जमाता है ।

Wednesday, April 7, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- संगम

नाम --गिरधारी लाल चौहान
स्थान --नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला--- जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा---आलेख कविता ग़ज़ल
विषय  ----संगम
शीर्षक ----संगम का इंतजार

संगम  का सबको  रहता है इंतजार ।
होता है संगम बदल जाता है संसार ।

चाहे मेघ हो या धरा,नदी हो या ताल ।
संगम अनोखा लाता है यहां उपहार ।

आग जलती है उसे पानी तो चाहिए ।
पेड़ सूखती है उसे पानी तो चाहिए ।
अगर नहीं मिलेगा हो जाएगा खाक ।

भक्त खोजता फिरता अपने भगवान को ।
मिलते पूरा करता है अपने अरमान को ।
राम शबरी को मिले जागी उनका भाग ।

बाग  खिल उठती है खिलाती है बहार ।
भौरें गीत गाते हैं हो फूलों से नैना चार ।
संगम से ही मिलता है ऐसा ही  हर ताज ।

नदियों का जहां संगम पावन बनाते हैं ।
दर्शन स्नान के लिए प्रसिद्द हो जातें हैं ।
गंगा यमुना त्रिवेणी कहला रही है आज ।

गुणों का संगम जीवन महान बनाता है ।
गुणों की खान गौतम महावीर बनाता है ।
हर मानव का जिससे बन रहा है काज ।

धर्म अर्थ काम मोक्ष का जीवन में संगम चाहिए ।
अगर नहीं है साथियों तो जरुर इसको बनाइए ।
इनके बिना इस जीवन में आता नहीं है नाज ।

Saturday, April 3, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- इत्र

नाम --गिरधारी लाल चौहान
स्थान --नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला --जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा ---आलेख /कविता/ग़ज़ल
विषय ---इत्र
शीर्षक   ---जीवन जिनका इत्र

जीवन जिनका इत्र है,पूजता उन्हें संसार ।
अगर नहीं है तो बनालो,उसकी है दरकार ।

इत्र एक महकने वाली ।
जो तन को महकाती है ।
कुछ पल ही यह रहती ।
फिर शांत हो जाती है ।

तन को महकाने से ।
न ज्ञान मिलता न पेट भरता ।
अजीब है मानव लेकिन ।
इत्र का उपयोग जरुर करता ।

उसको मालूम है इत्र से ।
कुछ हुआ है न होगा ।
फिर भी खाये जा रहा ।
धोखा ,धोखा ,धोखा ।

जितना धोखा खायेगा।
उसकी कोई सीमा नहीं ।
इत्र लगाने वालों की ।
कही कोई प्रतिमा नहीं ।

विलासिता की यह वस्तु ।
निर्धन के लिए दुर्लभ ।
जीवन में एकाद बार ही ।
ऐसा होता सुलभ ।

मैं तो हर लोगों से कहूंगा ।
इत्र के बजाय धूल बनो ।
किसी के पैर में सनो  ।
इसके लिए गुणी सज्जन चुनो ।

पैर से सने रहोगे ।
धूप छाया जल मिलेगा ।
आने वाला जीवन उज्जवल मिलेगा ।
हो जायेगी नइया पार ।

इत्र वस्त्र महका सकता है ।
मन को बहका सकता है ।
शक्ति दिला नहीं सक्ती ।
भक्ति दिला नहीं सकती ।

लोग लगाए खूब लगाएं ।
कुछ न कुछ तो लगाना होगा ।
इत्र की दो बूंद से ।
कभी न जमाना होगा ।

मेरा मित्र  इत्र लगाता है ।
मेरे पास बन ठनकर आता है ।
और मुझको भी समझाता है  ।
हरदम इसका गीत गाता है ।

विवाद उससे मैं करता नहीं ।
क्यों कि वह मित्र हैं ।
उसे अहम हो गया है ।
उसके पास इत्र है ।

इत्र का इस युग में ।
प्रशंसा तो नहीं करुंगा ।
उपयोग करने वाले करते रहे ।
उनका दीवार नहीं बनूंगा ।

इत्र के अध्याय का प्रथम पाठ था ।
इसमें पाठ ही पाठ था ।
मैंने पाठ पढ़ लिया ।
और इति श्री भी कर लिया ।

Wednesday, March 31, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- सरहद

नाम गिरधारी लाल चौहान
स्थान नवापारा खुर्द सक्ति
जिला जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़
विधा ---आलेख/ कविता/ग़ज़ल
विषय----सरहदें
शीर्षक--- सरहद जीवन आधार

सरहद बनाया गया है, लोगों की रक्षा के लिए ।
जीते मरते इसके पीछे, निर्माण हमने है किए ।

गुण-दोष बाद में आते हैं ।
पहले निर्माण होता है ।
हमने भी वही किया ।
जो संभव पहले होता है ।
आवश्यकता इसकी महसूस हुई,इसको हमने गढ़ दिए

इसको बनाकर पछताना ।
बुजदिली का काम है ।
लाखों लोग सुरक्षित इससे ।
हर किसी को आराम है।
जो हमको चाहिए था,शरहद ने हमको दिए ।

इसकी रक्षा करने वालों की
,जब जाती है जानें ।
वही पर टूट जाता है,
मन के सभी अरमाने ।
हालात देखकर कह सकते हैं, इसके बिना हम कैसे जिएं ।

फूट की बात करना अलग है, 
लड़ाई झगड़ा भी अलग है ।
घर घर लड़ते वह भी अलग है, 
समाज की जरुरत अलग है ।
सरहद वह आधार है,जो जीवन को सर्व सुख दिए ।  

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...