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Friday, October 16, 2020

कोरिया से तारा पांडेय"मुक्तांशा" की रचना- माँ

तारा पांडेय"मुक्तांशा"
बैकुंठपुर, जिला_कोरिया,छत्तीसगढ़
विषय_मां
शीर्षक_आपकी मां
विधा_कविता (मुक्तक)


ओ मेरे प्यारे बच्चे,
नन्हें नन्हें दुलारे बच्चे
मैं कितना प्यार, दुलार
आपसे करती हूं।
पर, शिकायत
मुझे खुद से है कि
गुस्सा भी हद से ज्यादा
आप पर मैं करती हूं
सब लाड प्यार, न जाने
कहां खो जाता है?
जब आपकी मां को
गुस्सा आ जाता है
नहीं सकोच करती
हांथ छोड़ने में, दंड भरपूर
दिया करती है,
कभी डांट, फटकार
कभी कानों को ऐंठन
जोरों की देती है
पर सच कहूं आपकी मां
आपसे बहुत प्यार करती है
नहीं चाहती वह कि
कल गैरों के बीच हंसी का पात्र बनो
बेवजह, किसी झगड़े का
सरताज बनो
इसलिए तो रोका करती है
एक मां अपने बच्चे को
गलत करते हुए
माना कि बदमाशियां हैं
और थोड़ी शरारत भी
जायज है आपकी
मेरे लाल, आपकी मां को
बड़ी फिक्र है आपकी
नहीं चाहती मां कि
मेरे अलावा कोई और आपको
कुछ कहे, गर ऐसा हो
तो भला मां कैसे सहे?
सभी अच्छी बातों को सीख
समझ उतारो व्यवहार में
संस्कारों को भूलो नहीं
अति लाड दुलार में
असीम सुख की प्राप्ति
और निश्चिंतता होती है
मातृत्व की छांव में
सोने के बाद भी करती है
मां मालिश, बच्चों के पांव में
पहले मारती हूं फिर
बहुत पछताती हूं, प्यार से
सिर को सहलाती हूं
कैसे कहूं मेरे बच्चों
मैं आपसे कितना प्यार करती हूं?
भले ही डांटती हूं पर
बच्चों पर ही  जान छिड़कती हूं
मेरे बच्चों, मैं आपसे
बहुत बहुत बहुत प्यार करती हूं
बस यही समझाना चाहती हैं..
आपकी "मां"
        तारा पांडेय"मुक्तांशा"


Wednesday, August 5, 2020

कोरिया से तारा पांडेय"मुक्तांशा" की रचना- अयोध्या धाम

तारा पांडेय"मुक्तांशा"
बैकुंठपुर,जिला_कोरिया
छत्तीसगढ।
शीर्षक_अपने अयोध्या धाम


कब से नयन थे तरशे
ओ प्रभू श्री राम
अब स्वप्न पूरा होगा
जब आएंगे,आप
आओ पधारो, श्रीराम
अपने अयोध्या धाम।

महीने बीते, बरस भी बीते
मंदिर के निर्माण को लेकर
जाने कैसे दिन हैं बीते
अपने ही जन्मभूमी पे 
आने में  कैसे, लम्बे क्षण हैं बीते
कैसे कहें प्रभू,भक्तों का
कैसे जीवन है बीते
अब जाकर मिले हृदय को आराम
आओ पधारो, श्रीराम
अपने अयोध्या धाम।

पहले पहल गुरुकुल जाना
तत्पश्चात,वनवास बिताना
ओ मेरी भगवान
पुनः वीयोग सहे श्रीराम
त्यागा सीता मां को
कैसे पूर्ण रहें सिय बिन राम
पुत्र मिलाप से अश्रु छलके
खुशियों के पल थे महके
अब आ मिलेंगे पुनः सियाराम
पर विचारों के द्वंद्व में
स्वयं को सिद्ध करते करते
माता चली मुक्तिधाम
प्रार्थना है,वंदना है,निवेदन
इतनी कि अब ना कोई
परीक्षा होगी,अब केवल
आप सभी के आने की प्रतीक्षा होगी
सुनो मेरे भगवान
आओ पधारो,श्रीराम
अपने अयोध्या धाम।

मन में उमंगें,हिलोर मारें
गूंजें चहुं ओर,श्रीराम के नारे
कैसे कोई कुछ और बिचारे
अन्तर्मन बस तुम्हें ही पुकारे
सुन लो पुकार मेरे राम
आओ पधारो,श्रीराम
अपने अयोध्या धाम।
    
    तारा पांडेय "मुक्तांशा"

Friday, July 24, 2020

कोरिया से तारा पांडेय"मुक्तांशा" की रचना- संस्कार

तारा पांडेय"मुक्तांशा"
बैकुंठपुर,जिला_कोरिया
छत्तीसगढ़।
शीर्षक_संस्कार पे प्रहार

समय कह रहा है
सुनो ,दौड़ रहे हो ना
आधुनिकता की दौड़ में
शामिल हो रहे हो
फैशन के होड़ में
भुला कर अपनी संस्कृति
अपना सम्मान
कर रहे हो पश्चमिकरण
का गुणगान
चाहे भाषा हो या व्यवहार
सबमें लिए इनको उतार
पहनावा भी इन्हीं के भाते
अपने सारे अंग दिखाते
न करो ऐसे तुम स्वयं पे अत्याचार
भूलकर अपना अस्तित्व
न करो अपने संस्कार पे प्रहार....
     तारा पांडेय"मुक्तांशा"

Thursday, July 23, 2020

कोरिया से तारा पांडेय"मुक्तांशा" की रचना:- सफर

तारा पांडेय"मुक्तांशा"
बैकुंठपुर, जिला_कोरिया
छत्तीसगढ़।
शीर्षक__सफर

जीवन के सफर में
मेरे हमदम,
कई मोड़ आने वाले हैं
कुछ खुशियों के पल
देंगें ,तो कुछ बेहद
रुलाने वाले हैं
कुछ दिल को दुखाने
वाले हैं तो कुछ
घाव मिटाने वाले हैं
संग मिलकर साथ
करेंगे सामना हम
जो भी क्षण आने वाले हैं
प्रेम और विश्वास का
हम जोत जलाने वाले हैं
छंट जाएंगे सारे बादल काले
मौसम सुहाने आने वाले हैं
मिट जाएगा कुहरा अंधेरा भी
नया सहर भी आने वाले हैं
जीवन के सफर में
मेरे हमदम,
कई मोड़ आने वाले हैं।

  तारा पांडेय"मुक्तांशा"

Monday, July 6, 2020

कोरिया से तारा पांडेय"मुक्तांशा" की रचना- सावन

तारा पांडेय"मुक्तांशा"
बैकुंठपुर,जिला _कोरिया छत्तीसगढ।
शीर्षक_सावन की सौगात

सावन की सौगात

बड़े दिनों के बाद
मिली सावन की सौगात
कब से सावन सूखा था
बस तरस तरस के रहता था
लो बन गई बात
आ गई बरसात
बड़े दिनों के बाद
मिली सावन की सौगात।

छाई फिर से देखो
धरा पर हरियाली छाई
देखो किसानों के मुख पे
खुशियां मुसकाई
संग झुमों सब मिलकर
चाहे हो न हो मुलाकात
बड़े दिनों के बाद
मिली सावन की सौगात।

शिव जी की महिमा
शिव जी का महीना
श्रावण सोमवार
लाया व्रत और त्यौहार
सभी जीवों पर प्रसन्न हैं
होते सभी के भोलेनाथ
बड़े दिनों के बाद
मिली सावन की सौगात।
    तारा पांडेय"मुक्तांशा"

Thursday, June 18, 2020

आ. तारा पांडेय"मुक्तांशा" की जन्मदिवस विशेषांक सृजन- आपको धन्यवाद

तारा पांडेय"मुक्तांशा"
बैकुंठपुर, जिला _कोरिया छत्तीसगढ़।
शीर्षक_ "आपको धन्यवाद"

सर्वप्रथम ईश्वर तुल्य
माता पिता को नमन
जिन्होंने दिया मुझे जन्म
संस्कार दिये जो
साथ रहेंगे आजन्म
कैसे समर्पित करूं
मां,बाबूजी आपको धन्यवाद।

ईश्वर आपको
कोटि कोटि प्रणाम
आपने दिलाया मुझे
इतना सुंदर जहान
प्रकृति की हरियाली जहां
और है मिलता
अपनों का प्यार
किए बिना ,वाद विवाद
हे!ईश्वर आपको धन्यवाद।


सर से भले ही आश्रय
छीना बाबुल का
शायद इतना ही था
साथ उनका
पर कमी को पूरा किया
बड़े भाइयों का लाड दुलार
पिता तुल्य पालन किये
न आने दिया मन में अवसाद
हे !ईश्वर आपको धन्यवाद ।

वैवाहिक जीवन में भी
सुखद परिवार की छाया
दो बच्चों की मां बनी
वात्सल्य खूब लुटाया
ममता के आंचल में मैंने
मातृत्व सुख भी पाया
मानो स्वयं सींच रहे हों
परिवार रूपी पौधे पे, आप
अपनेपन का खाद
हे !ईश्वर आपको धन्यवाद।

हर परिस्थिति में खुद
को सम्हाल पाऊं
हर प्रस्थिति में ठीक स्वयं
को ढाल पाऊं
ऐसा आपने मुझे बनाया
मित्र भी दिए जो
बिखेरते हैं इत्र तो कभी
आइना मुझे दिखाया
गुरु भी मिले मुझे समय पर
आपने था कमान सम्हाला
सहकर्मी भी अपनों जैसे
नहीं मन में उनके कोई विषाद
हे! ईश्वर आपको धन्यवाद।

बस यही प्रार्थना है
इस जन्म दिवस पर
कि आपका आशीर्वाद यूं ही
बना रहे,
न रखूं किसी से उम्मीदें
न अपेक्षाओं का भार हो
मेरे मन में सदैव ही
सबके लिए सदभाव हो
भूल कर भी न सोंचू
कभी किसी के लिए बुरा
इतनी मनोकामना ही
करना मेरा पूरा
बाकी तो निभा ही रही
मैं तन्मयता से रस्मों रिवाज
हे! ईश्वर आपको धन्यवाद।
    
      तारा पांडेय"मुक्तांशा"

Tuesday, June 9, 2020

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से तारा पांडेय"मुक्तांशा" द्वारा सृजनित आलेख- गौरीशंकर मंदिर, देवगढ़

तारा पांडेय"मुक्तांशा"
बैकुंठपुर,जिला _कोरिया
छत्तीसगढ़।

आलेख
      गौरीशंकर मन्दिर, देवगढ़।

मनोकामना पूर्ण करो, गंदगी भी दूर करो..   ।
सरगुजा जिले के जिला मुख्यालय अंबिकापुर से 40 किमी की दूरी पर स्थित है 'देवगढ़ मंदिर'। इस मंदिर को गौरीशंकर मंदिर और अर्द्धनारीश्वर मंदिर के रूप में भी जाना जाता है।
देवगढ़ मंदिर, रेणुका नदी के पास अवस्थित हैं। शिवरात्रि के अवसर पर यहां भव्य मेला का आयोजन होता है। दूर दूर से भक्तगण शिवरात्रि में भगवान शिव को जल अर्पित करने एक दिन पहले ही पहुंच जाते हैं और वहीं रात्रि जागरण करते हुए भजन कीर्तन करते हैं तथा भोर में रेणुका नदी में डुबकी लगाकर वहीं के पवित्र जल से शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं।
देवगढ़ मंदिर में सावन मास में महामृत्युंजय जप के साथ यज्ञ अनुष्ठान भी होता है और सावन में ही बोलबम का नारा लगाते, भगवा वस्त्र धारण किए भक्त गण बारिश की बौछार में, खाली पैर कांधे पे कांवर उठाए दूर दूर से चले आते हैं।
ऐसा माना जाता है कि यहां भगवान शिव सबकी प्रार्थना सुनते हैं। यहां शिव जी के साथ मां भगवती भी विराजमान हैं शिवलिंग के मध्य में उनका चेहरा देखते ही बनता है सच बहुत ही अलौकिक है यह गौरीशंकर मंदिर।
सांस्कृतिक धरोहर होने के बाद यहां का और भी विकास कार्य कराया गया है जैसे मंदिर के आस पास बहुत सारे छोटे छोटे मन्दिर बनवाए गए हैं, पानी की व्यवस्था की गई है, भक्तगणों के रुकने की व्यवस्था हेतु विश्राम गृह भी बनकर तैयार है।
यहां पूजा हेतु पुजारी जी भी निवास करते हैं और मंदिर की देख रेख भी वही करते हैं।
जब यहां मेला का आयोजन होता है तब यहां देवगढ़ ट्रस्ट कमेटी की देखरेख में आयोजन होता है।

 इस समय होने वाले प्रदूषण से मन अत्यधिक व्यथित होता है केवल वायु ही नहीं, ध्वनि और जल प्रदूषण से वहां के लोग और जानवर बहुत ही परेशान हो जाते हैं क्योंकि वहां जो भीड़ इकठ्ठी होती है,खा पीकर डिस्पोजल और बचा खाना वैसे फेंक देते हैं जिसके कारण कई बार, कई मवेशियों को अधिक खाने की वजह से अपने जान से हाथ धोना पड़ा, कई मवेशी प्लास्टिक, डिस्पोजल खाकर काल के ग्रास बन गए।
बहुत दुख होता है ये जानकर कि शिक्षित लोग भी यहां दूर दूर से श्रद्धा के साथ दर्शन के लिए आते हैं अपनी मनोकामना पूर्ण करने लेकिन दूषित कर जाते हैं यहां का वातावरण।



"देवगढ़ की हरियाली,
 खिले हैं कनेर के फूल
आइए जरूर पार करके
रिहंद का पूल
दर्शन करके भोले बाबा के
बुरे कर्म सारे जाइए भूल
उतारिए सत्कर्म व्यवहार में
व्यर्थ ही फंसे हैं जंजाल में
आइए देवगढ़ धाम
मन को मिलेगा आराम
स्वच्छता का रखते ख्याल
फैला है, गंदगी का
रूप विकराल...."
        तारा पांडेय"मुक्तांशा"

Monday, June 8, 2020

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से तारा पांडेय"मुक्तांशा" की रचना- हाइकु

तारा पांडेय"मुक्तांशा"
बैकुंठपुर, जिला _कोरिया छत्तीसगढ़।
विधा_हाइकु

छत्तीसगढ
सुन महतारी वो
जय जोहार।

पसरत है
कोरोना महामारी
सुन गोहार।

परेशान हैं
लइका सियान
दे उपचार।

अड़बड़ हैं
मजबूर हमर
दाई, मज़दूर।

डगर मा
कोरोंटाइन बसे
घर ले दूर।

आंधी तूफान
मा उड़गे, हमर
छानी, मचान।

देवी, देवता
के सुमिरन होत
सांझ बिहान।

वंदन दाई
कर कल्यान दाई
तोर दुहाई।

तारा पांडेय"मुक्तांशा"

Tuesday, June 2, 2020

छत्तीसगढ़ के कोरिया से तारा पांडेय"मुक्तांशा" की रचना- जीवन साथी

तारा पांडेय"मुक्तांशा"
बैकुंठपुर, जिला _कोरिया
छत्तीसगढ़।
शीर्षक_'मेरे जीवन साथी'

प्रियतम मेरे, तुमसे ही प्रीत
तुमसे ही जग की रीत
अमर रहेगा प्रेम
हमारा, घड़ी चाहे
जाएगी बीत
प्रियतम मेरे, तुमसे ही प्रीत।

मेरे साथी, मेरे हमदम
तुमसे ही, जीवन के रंग
चाहे खुशियां या हो गम
संग संग रहेंगे जनम जनम
मेरे साथी ,मेरे हमदम।

मेरे हमकदम, मेरे हमराज
तुमसे ही कल, तुमसे ही आज
मिले तुम मुझे, मेरा सौभाग्य
सात जन्मों का, निभाना साथ
मेरे हमकदम, मेरे हमराज।

बुझे ना कभी, विश्वास की बाती
सुनो पहने हो वर्दी, खाकी
इतना ही कहना है बाकी
साथ निभाना, जीवन साथी।

   तारा पांडेय"मुक्तांशा"

Thursday, May 28, 2020

छत्तीसगढ़ के कोरिया से तारा पांडेय"मुक्तांशा" की रचना- चरित्र

तारा पांडेय"मुक्तांशा"
बैकुंठपुर,जिला _कोरिया
छत्तीसगढ़।
शीर्षक_आओ अपने बच्चों को, चरित्र गढ़ना सिखाएं।

आओ अपने बच्चों को, चरित्र गढ़ना सिखाएं ।


आज के युवा पीढ़ी
चढ़ रहे, बस फैशन की सीढ़ी
बच्चे से लेकर किशोर सभी
मोबाइल पर रहते हैं बिजी
क्योंकि यदि मोबाइल न हो तो
बच्चे खाना नहीं खाएंगे
किशोर भी नाराज हो जाएंगे
जब टिक टोक नहीं बनाएंगे
बाकी तो पता ही है जो बड़े हैं
ओ फेसबुक, व्हाट्सअप में रमे हैं
केवल पुरुष वर्ग ही नहीं
महिलाओं के भी यह पसंदिता
औजार है।
बाकी श्रृंगार भूल भी जाएं पर
मोबाइल के बिना, संवरना
शायद बेकार है।
हर घर का यही हाल है
मैं नहीं कहती कि मेरा घर
भी इससे अछूता है
मोबाइल नामक लत की
यहां तो होती पूजा है
करती हूं उम्मीद कि क्यों न
हकीकत में जिया जाए
मोबाइल से परे भी है दुनिया
क्यों  न उसे देखा जाए
नैतिक मूल्यों को बच्चों के
व्यवहार में उतारा जाए
संस्कारवान बनाने का
क्यूं न संकल्प लिया जाए?
सबसे पहले अपनी संस्कृति का
सम्मान कराना सिखाएं
पश्चिमी सभ्यता का यूं
आंख मूंद अनुसरण करना
छुड़ाएं,
अपने पर्यावरण का रक्षण
करना सिखाएं
एक पौधा लगाने और उसकी
देखभाल करना सिखाएं
भाई चारे की भावना को जीना सिखाएं
नारी जाति का सम्मान करना सिखाएं
जीव जंतओं पर भी
दया करना सिखाएं
आओ सब मिल अपने बच्चों को
उन्नत चरित्र गढ़ना सिखाएं

तारा पांडेय"मुक्तांशा"

Wednesday, May 27, 2020

छत्तीसगढ़ के कोरिया से तारा पांडेय"मुक्तांशा" की रचना- पर्यावरण

तारा पांडेय"मुक्तांशा"
बैकुंठपुर, जिला कोरिया छत्तीसगढ़।
विषय_पर्यावरण
शीर्षक_आओ लें संकल्प महान
 

कब से हैं हम,
जानते हुए अनजान
क्यूं नहीं समझ पाते
भाषा बेजुबान?
भगवान ने बनाया
हमे इंसान, करने को
और जीवों का कल्याण
पर मनुज नहीं समझ पाया
अपने कर्तव्यों को
भूल बैठा अपने दायित्वों को
करता चला स्वयं
प्रकृति का संहार
जीवों को आहार बनाया
बड़े चाव से उनको खाया
काटे उसने वन और उपवन
खूब किया प्रकृति का दोहन
कारखानों से शहर बसाया
प्रदूषण उसने खूब फैलाया
चाहे हो जल, वायु या ध्वनि
नहीं की किसी में भी कमी
सभी को बहुत प्रदूषित किया
इतना ही नहीं उसने मानवता
मानवता को भी शर्मसार किया
नहीं छोड़े कोई कुकर्म
अपराधों में व्यापार किया
रिश्ते नाते भूल,
 संस्कारों को धूल चटाया
करता ज्ञान की बातें पर
पर नहीं उसको तनिक भी ज्ञान
जिस धरती पे रहना उसको
करता उसी को लहूलुहान
कट जाएंगे जो वृक्ष सारे
पर्यावरण कैसे अस्तित्व सम्हाले
सूखने लगे नदी, नाले
अगली पीढ़ी को छोड़ें
किसके हवाले?
प्रकृति तो संतुलन खुद करेगी
शायद कोरोना महामारी से
ही इंसाफ करेगी
आ गया समय अब
चलो अपनी सुध लें जान
बहुत गलतियां हुई हमसे
अब माफी लें मांग
हरित धरा फिर से, लहलहाएगी
वन्य जीवों का बसेरा भी बसेगा
अब ना कोई पेड़ कटेगा
खेतों पर हल चलेगा
अब सभी अपने जिम्मेदारी
जल्द ही लेंगे पहचान
आओ लें संकल्प महान।
        
तारा पांडेय"मुक्तांशा"

Tuesday, May 5, 2020

छत्तीसगढ़ से तारा पांडेय"मुक्तांशा" की रचना- मजदूर

तारा पांडेय"मुक्तांशा"
कोरिया, छत्तीसगढ़
शीर्षक_मैं मजदूर हूं

मैं मजदूर हूं 

थकता नहीं मैं
न कभी हारता
परिस्थितियां चाहे जैसी भी हो
कभी भी नहीं, मन को मारता
स्वयं में मैं गुरूर हूं
हां मैं मजदूर हूं।


मेहनत का मैं पर्याय
हो न्याय या अन्याय
नहीं डगमगाते, कदम ये मेरे
चाहे शाम हो या सवेरे
कर्म करता जरूर हूं
हां मैं मजदूर हूं।

लॉकडाउन में अभी
बहुत ही बेबस और लाचार हूं
फंस गया हूं कहीं
अभी तो बस बेकार हूं
काम से तो कोशों दूर हूं
हां मैं मजदूर हूं।
 
      तारा पांडेय"मुक्तांशा"

Monday, April 20, 2020

छत्तीसगढ़ से तारा पांडेय"मुक्तांशा" की रचना

तारा पांडेय"मुक्तांशा"
कोरिया, छत्तीसगढ़
'अभी तो विजय का समय आ रहा है'


 अभी तो विजय का समय आ रहा है...
        
उठो कर्मवीरों, अभी तो जगो तुम
थको न, बैठो न, न हारो अभी तुम
करना है तुम्ही को, 'कोरोना 'को गुम
फिजा भी गीत, जीत का गा रहा है
अभी तो विजय का समय आ रहा है..

छाया है कूहरा घनेरा, ये माना
समुज्ज्वल सवेरा भी आ रहा है
उम्मीदें बड़ी हैं, हे योद्धा वीरों
अदम्य साहस का परिचय दो तुम
अभी तो विजय का समय आ रहा है...

हैं बाधाएं अविरल, करो मन को अविचल
कर्तव्य पथ पर,  हौसला बढ़ा चल चलता चल
बिना लड़खड़ाए, अभी तो लड़ो तुम
हर कोई परिचय बस तुम्हारा दे रहा है
अभी तो विजय का समय आ रहा है...

भारत मां के वीर सपूतों, तुमको नमन
तुमने बख़ूबी है फर्ज निभाया
मां के दूध का कर्ज़ चुकाया
कहना है सबका, जीतो जंग ए कोरोना
देखो देखो कोरोना, हार रहा है
अभी तो विजय का समय आ रहा है...

Wednesday, April 15, 2020

छत्तीसगढ़ से तारा पांडेय"मुक्तांशा" की रचना- कोरोना

नाम_तारा पांडेय"मुक्तांशा"
राज्य_छत्तीसगढ़
शीर्षक_कैसा ये कोरोना का शोर है?


कैसा ये कोरोना का शोर है?

कैसा ये कोरोना का शोर है?
हाहाकार मच रहा, चहुं ओर है
इस भयंकर, वैश्विक महामारी से
बच नहीं रहा कोई छोर है
न जाने कैसे सम्हलेंगे हालात
किनके हांथों में उसकी डोर है?
छोटा है  पर इतना आक्रामक
कि चल न पा रहा किसी का जोर है
खोज में लगे हैं,, क्या इसका तोड़ है
घर में रह कर तोड़ना है कड़ी
जो कोरोनावायरस का बेजोड़ है
घर बैठे हराएंगे, जनता चाहे बोर है
कैसा ये कोरोना का शोर है?

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...