जिला -दुर्ग (छ ग )
विषय - हे गुलाब !
विधा - छंदमुक्त
गुलाब रंग बिरंगे सुघर लख ,
हर तन मन को करे प्रफुल्लित l
छाया उपवन, हर घर सुलभ,
वातावरण में घुला, मिला हुआ,
तेरी बातें , मस्त मस्त, मन मस्त l
नही तनिक संदेह इसमें अब,
हर जर्रा तेरी खुशबू से आपूरित l
सारे जहाँ में फल फूल रहें,
कारीगरी दुनिया की अजब गजब,
मोहब्बत का पैगाम देता प्रखर l
संशय की कोई बात नही ,
धरा में एक सौगात है गुलाब l
पास में इसके तनिक जाकर देखो ,
छवि सहज़ मन भाये महज,
हे गुलाब ! तेरा रूप सलोना मनहरण l
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