Wednesday, February 10, 2021

लक्ष्मण प्रसाद साहू की रचना- हे गुलाब

नाम -लक्ष्मण प्रसाद साहू
जिला -दुर्ग (छ ग )
विषय - हे गुलाब !
विधा - छंदमुक्त 

गुलाब रंग बिरंगे  सुघर लख , 
हर तन मन को करे प्रफुल्लित l
छाया उपवन, हर घर सुलभ, 
  वातावरण में घुला, मिला हुआ, 
तेरी बातें , मस्त मस्त, मन मस्त  l

नही तनिक संदेह इसमें अब,
 हर जर्रा तेरी खुशबू से आपूरित l
सारे जहाँ में फल फूल रहें, 
कारीगरी दुनिया की अजब गजब, 
मोहब्बत का पैगाम देता प्रखर  l

संशय  की कोई बात नही ,
 धरा में एक सौगात है गुलाब l
 पास में इसके तनिक जाकर देखो , 
छवि सहज़ मन भाये  महज, 
हे गुलाब ! तेरा रूप सलोना मनहरण  l

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