जिला -दुर्ग (छ ग )
विधा - आलेख
विषय -भूख
सृष्टि क्रम में मानव जीवन के उद्भव के पश्चात् उसके अस्तित्व को बनाये रखने के लिये उसके ही विभिन्न अंगों की सुरक्षा अन्तर्निहित उदर से सम्बंधित है l उदर पोषण जितना अच्छे से होगा मन मष्तिष्क सभी चलायमान होंगे l आज पूरे संसार को हम दृष्टिगत करें तो एक बात साफ है कि अच्छे बुरे समस्त कार्यों के पीछे कहीं न कहीं पेट का ही हाथ है l यदि किसी के पास बहुत ज्यादा है, अघाया हुआ है तो और भूखा है तो दोनों ही स्थितियों में सभी एक विचित्र स्थिति को जन्म देते हैं. अतिशय अवस्था दोनो ही घटनाओं की एक असमंजस की चेष्टा को जन्म देती है l भूख ने ही समस्त खा सकने वाली वस्तुओं का अविष्कार किया है क्योंकि वस्तु स्थिति के अनुसार, बदलते परिप्रेक्ष्य में हम सभी खाद्यान्न की व्यवस्था करते हैं l भूख को मिटाने के साथ अन्न का उपयोग दूसरों के भूख को मिटाने का कार्य किया जाना चाहिए l भूख अनेक प्रकार की होती है l पेट के अलावा अनेक प्रकार के भूख हो सकते हैं जिनका प्रभाव हम समाजिक जीवन में देख सकते हैं l शारीरिक भूख के अलावा समाज में अनेक प्रकार के भूख हैं जिसके कारण विभिन्न उच्च कोटि और साथ ही साथ निम्न कोटि कि घटनाएं होती हैं l भूख किसी भी वस्तु चाहे वह सुख, भोग, पद, सम्मान, चाह की हो एक सीमा तक ठीक है l सामान्य से विकृत होने पर इसकी कोई अच्छी स्थिति नही होती l
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