जिला -बिलासपुर (छ.ग. )
शीर्षक -अधूरी ख्वाहिशें
विधा -छंदमुक्त
मानव की रचना अद्भुत समन्वय,
ख़ुद ही मीलों बिना रुके चलना है l
मन की अपनी नित कथा व्यथा है,
अधूरी ख्वाहिश को पूरा करना है ll
वैसे तो सब कुछ होता ही जाता है,
हर मन दिल अपना कुछ रखता है l
संस्कारों के तारों में सुलझे सक्षम,
अधूरी ख्वाहिश को पूरा करना है ll
सब के निज रास्ते बुलाते अनवरत,
पाने चलते राही आगे नत मस्तक l
तनिक सी आहट विस्मित करता,
अधूरी ख्वाहिश को पूरा करना है ll
बस एक सपना सबका सुन्दर मान,
मानवता पल्लवित पुष्पित हो सदा l
सब सुख दुख के सहभागी बनेंगे,
अधूरी ख्वाहिश को पूरा करना है ll
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