जिला -दुर्ग
शीर्षक - कानन
विधा- गीत (16, 16)
होता प्रतीक ये जीवन का,
देख अति सुन्दर री कानन l
निहारे राह आगंतुक का,
कब हो जाये किसका आवन ll
मिटाकर दुखो को भरे प्राण,
सुवासित अस्तित्व कर भावन l
सुप्त मन को झकझोरे सदा,
ह्रदय पीड़ा ले करे पावन ll
जाते सब यहाँ मत अब उदास ,
अंतस तम को, मन बंध साधन l
पीछे छिपी शुचि अवधारणा,
महके जैसे जगती आँगन ll
निज मलीनता का करो अंत,
ध्यायें सुपथ हम भगायें रावन l
मिलकर करें वरण हम इसका ,
समाज, राष्ट्र हो मन भावन ll
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