जिला -बिलासपुर (छ.ग. )
विधा -छंद मुक्त
विषय -लक्ष्य (विभावना अलंकार पुट )
सुन बंधु एक बात कहूँ, मैं तुम वो संतान सभी l
माया लक्ष्य या रचना, उसने की संधान अभी ll
काया बन छाया हैं सुन्दर,
मूढ़ मति ये नही बुझते l
लक्ष्य उनका हम बने खेल,
एक दूजे से हम जूझते ll
खोल दिया पट आवरण, भूल भुलैया में सब भटके l
रूप सदा अलग अलग, लक्ष्य पाने जी अटके ll
बच्चे सबके गृह के लक्ष्य,
उनकी घन असीम छाया l
टकटकी बांधे सब ही बैठे,
सब मन को ये खूब भाया ll
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