सुभाष नगर दुर्ग
भिलाई
हे मां सरस्वती
अर्थ ,अंलकार,रस, वाणी से
शब्द,दोहा, चौपाई,सोरठा से
अन्तस की वेदना व्यथित को
भाव और भक्ति से भर दे मां
अबोध बालक हूं मैं की मैं
मां को पहचान सकूं
संस्कार और कर्म से
सद्वविचारो से मेरा कोष
भरा रहे मेरी मां सुख दुख
के दो किनारों में रहकर
प्रेम का वात्सल्य भर दे मां
झंकृत जब वीणा करें मेरी
चेतना की तरंग स्वयंम जागृत हो
लय स्वंयम परिभाषित हो मेरी मां
स्पर्श कर सकूं लय युक्त अक्षर को
देश के लिए कलम मेरी चलती रहे
मेरे शब्द से न किसी सज्जन को
हो दर्द बस संत, सिपाही, शक्ती
और भक्ती मेरे मयूर मन में बसंत पंचमी की तरह इंद्रधनुषी रंग भर दे मां लयपूर्ण कृति की जिज्ञासा
मेरे तन,मन,धन, सर्व अर्पण कर दूं मां ज्ञान का दीप धर लूं मां
हंस वाहिनी मेरी मां,मेरी प्यारी मां
मेरी प्यारी मां २🙏🦚 सीमा
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