Wednesday, May 27, 2020

छत्तीसगढ़ के दुर्ग से सीमा अष्टमी साहू की रचना- पर्यावरण

सीमा अष्टमी साहू
सुभाष नगर दुर्ग छत्तीसगढ़
पर्यावरण


वनस्पतियाँ  निज हित करती
प्रफुल्लित पल्लवित होता मन।
सूरज संग प्राणवायु देती हैं
अन्तस तन-मन पावन होता।
    विविध विधा के पुष्प बिखरकर
चहुं ओर खुशबू बिखरती है।
सुमन सुरभि संग-संग तितली
 पुष्प को  चुम्बन देती हैं।
अन्न पोषित करती , राष्ट्र को उर्जा
से भरती
जन-जन की पालनकारी अन्नकुमारी।
    जीव जंतु का रक्षंण करते,गौरी भी पोषित होती
दुग्ध प्रदान हमें करती हैं।
धृत से करते हम यज्ञ-हवन
कल्याण होता हैं,प्राणी मन।
 वनस्पति से औषधि मिलता
स्वस्थ होता है तन-मन जन।
कोरोना से हम रक्षा कर पाते।
पंताजलि  हमें सिखाता है जंग।।
स्वस्थ भारत अभियान,देती हैं
हमें ज्ञान।
सर्वदा मौन रहकर,रसोई का करो काम।
हाथ- मुंह,धोकर करों भजन-भोजन।
 तन से प्राण निकल जाने पर
वनस्पति ही उसे जलाती हैं।
कल्पवृक्ष हैं यह वनस्पति
मन प्राणों में समा जाती हैं।
पर्यावरण प्रकृति से हम जीवन
जीतें वृक्ष लगाए अनेको बार।
मोक्ष मार्ग की दिशा बताती 
सभी के लिए है अनुपम उपहार
आइए  बंसत का करें ,हम स्वागत
ज्ञान -विज्ञान, संस्कार से, व्यवहार से
जन्मदिन में पेड़ लगाके, संरक्षण करें
जल संरक्षण करके, जीवन को खुशियों से भरें
देश की उन्नति के लिए,कृषक के लिए।
इतिहास रचे स्वच्छता अभियान के सिपाही बनकर
देश के लिए कुछ करें ,जय जवान जय किसान ।
✍️सीमा साहू स्वच्छता की सिपाही🙏

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