Wednesday, November 27, 2019

छत्तीसगढ़ से सीमा साहू की रचना- वन्दे मातरम्

सीमा साहू
छत्तीसगढ़ भिलाई
शीर्षक- वन्दे मातरम्

मां भारती का यश गान है,यह गीत वन्दे मातरम।
अलग अलग प्रांत,धर्म,जाति है
हम सभी एक हैं वन्दे मातरम्।।
जब क्रांतिकारी सैनानियों देश
के रक्षक ,युवा पीढ़ी कहते हैं वन्दे मातरम्।।
इस देश के रोम रोम में देश प्रेम की भावना।
उस वंदना का सूर है,यह गीत वन्दे मातरम्।।
चैतन्य और सामर्थ्य का सार है वन्दे मातरम्।
गौरव ध्वजा फहरा रहा गीत वन्दे मातरम्।।
सुजल सुफल मलयज शीतल सस्य श्यामलये धरा
सम्बोधन है भारत मां के लिए वन्दे मातरम्।।
कुंकुम ,कलश,आम्रपल्लव, वंदना
है वन्दे मातरम्।।
हर भारतीय के दिल में समाहित है वन्दे मातरम्।
युगों युगों तक हम सभी भारतीय गाते रहेंगे
भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव, की तरह हम भी बन जाये
क्रांति के  झंडा फहराया, ऊंचा रहे तिंरगा वन्दे मातरम्।।
आंतकवाद, भ्रष्टाचार , रिश्र्वत खोल, जातिभेद को मिटाकर
सभी मिलकर प्रेम का संविधान बनाये वन्दे मातरम्।।
देश की धरती, मां भारती को
के स्वपन को साकार करें वन्दे मातरम्।।
सीमा साहू दुर्ग भिलाई

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