जिला-दुर्ग छत्तीसगढ़
शीर्षक-हैं अकेले आज क्यूं-------(गीत)
१- भीड़ में वो क्यूं अकेले और अलग से आज हैं-२
जो हमारी जिंदगी के गीत की आवाज है- 2
जिन से जुड़ी बचपन की सुबह, और रंगी शाम हैं------
मां-पिता और दादा-दादी, नाना-नानी नाम हैं।
२- हमको हंसता खेलता बस देखने के वास्ते-२
रोए हम तो,हम को खुशियां-बाटने के वास्ते-२
राजा कभी रंक बने, इनके निराले काम हैं----
मां पिता -------------------।
३- मंदिरों की घंटियां बजती हैं,कयूं ये कया पता?
और कया होती है,तीरथ यात्रा ये क्या पता?
अब तक इन्होंने पाला हमको,अब ये अपना काम हैं.......
मां-पिता, और दादा-दादी, नाना-नानी नाम हैं।
सीमा अष्टमी साहू
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