सुभाष नगर दुर्ग
छत्तीसगढ़
आ अब लौट चलें ----
एक सूचना दर्ज है, नोटिस बोर्ड पर
वह सूचना है बड़ी विस्फोटक
जिसने मेरी चेतना को झकझोर कर रख दिया
मां पिता संत महात्मा कह कर थक गए
बच्चों संस्कारी बनो, घर में रहो ,मांस मत खाओ
बहार का खाना मत खाओ
अपने ही देश की रक्षा करों, जितनी चादर उतना पांव फैलाओ
क्यों दौड़ रहे हो भौतिक सुख के लिए
बेटे अपने अध्यात्मिक ज्ञान को धिरे धिरे बढ़ाओ
देश में शांति, वात्सल्य,प्रेम, भाईचारा आयेगा
क्यों आदमी , आदमी को पहचान नहीं रहा है
आज प्रकृति अपना रुप दिखा रहा है
सहम सा गया है, आदमी आज मां के बनाये हुए रोटी याद आ रही है
मां अपने बच्चे को वात्सल्य प्रेम लुटा रही है
देश में भाई चारा का भाव दिख रहा है
अपने घर में परिवार में बैठकर गीता रामायण पढ़ रहा है आदमी
छलक रहा है माता-पिता के आंसू
सारे परिवार को एक साथ देखकर, संस्कार भारती भारत में लौट आया है
आज मानव अपना मूल्यांकन, अपने परिवार के घोंसले में बैठ कर कर रहा है
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