Monday, April 27, 2020

छत्तीसगढ़ से सीमा साहू की रचना- गौरैया चिड़ियां

सीमा साहू 
छत्तीसगढ़ 
रचना -गौरैया चिड़ियां


चिड़ियों की चहचहाहट से दिन की शुरुआत
मेरी छत में चिड़ियां रानी आती है
दाना चुनती है, पानी पीकर उड़  जाती है,
मेरे घर में हर साल घोंसला बनाती है, मैंने भी उसके हिस्से का घर छोड़ दिया है।
कभी  जाम के पेड़ में चढ़ती है, कभी तार में झुला झुलती है,
अपने घोंसले बनाने के लिए,रात दिन मेंहनत करती हैं।
चिड़िया रानी ने तीन चूजों को जन्म दिया है 
एक बेटा और दो बेटी को
तीनों  बच्चों को लेकर छत में आती हैं, अपने साथियों के साथ
पूरा चिड़ियों का समाज चहकता है
मेरे बगिचें में, मैं रोज देखती हूं इन्हे निहारती हूं दूर से
तीनों बच्चों को लेकर आती है गौरैया
उनमें से एक बेटा है,दो बेटियां 
सपरिवार दाना चुनते हैं, लेकिन मैं देखती हूं , चिड़िया रानी का बेटा
बहुत आलसी है, चिड़िया की दो बेटी बहुत चंचल 
वे दोनो बहनें चावल चोंच से खाती हैं, फुर्र से उड़ती है,कभी गमला के नीचे छांव में कभी जाम के पेड़ में , कभी लटकते हुए तार
में झुला झुलती है, कभी पड़ोसी के मीठा नीम के पेड़ में फल का रस पीती है।
लेकिन बेटा चुजा दिनभर मां के पास रहता है, मां दाना खिलाती है
खाता है, पानी पीता है गमले के पास रहता हैं
दोनों बहनें घुम के आ जाती है, चूं जा बहनें के साथ खेलने की कोशिश करता है , बहनें चोंच से मारकर भगाती है
चूंजा चिड़िया पुनः मां के पास आता है,इस बार वह अपने चोंच से दाना चुनता है
फिर से अपनी दोनों बहन के पास जाता हैं।
दोनों बहनें खुशियां से चहकती है, और आसमान की ओर देखती है
और चहक उठता है,उनका परिवार और चिंव चिंव करते उड़ते हैं आसमां की ओर स्वतंत्र रूप से  न कोई शोर है आज  बहुत खुश हैं चिड़िया उड़ान भरने के लिए,


सीमा

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