स्थान खोंगापानी कोरिया
छत्तीसगढ़
विषय चेतिका
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परम शांति के खोज में
बीते हर पहर होकर बेचैन
मिले काया से मुक्ति
जब चेतिका में हो शयन।
जीवन की गाथा निराली
समझ न सका कोई
भीड़ में भी रहते अकेले
चेतिका देख रोए हरकोई
परम सत्य है ये सफर
कोई न चिर स्थाई
कर्म का समय यही है
फिर न होगी भरपाई।
जीवन मूल्य को समझ
न हो कोई पाप
चेतिका कब प्राप्त हो
मन में न रखो संताप।
सजे हैं पर अदृश्य है
है पर अंतिम संस्कार,
माया मोह से नाता तोड़
छोड़ना होगा संसार।
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