रचनाकार - रीता चटर्जी
स्थान - खोंगापानी(कोरिया)
छत्तीसगढ़
विषय - मोक्ष
शीर्षक - मोक्ष प्राप्ति
अज्ञानता के कारण ही
होते जन्म,मरण बारम्बार,
मोक्ष प्राप्त कर छूटे
त्यागे सकल मोहजाल।
अंतिम लक्ष्य है जीवन का
होते है मार्ग चार,
कर्म, सांख्य, ज्ञान, भक्ति
पथ को करें स्वीकार।
क्षणिक दुःख निवृत्ति से
मिलते मुक्ति के मार्ग
सदैव दु:खों से मुक्ति
आनंद से मिले मोक्ष मार्ग।
ढाई आखर प्रेम के
पथ पर चले निरंतर,
मोक्ष की प्राप्ति होगी
होगी भवसागर पार।
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