Wednesday, March 31, 2021

रीता चटर्जी की रचना- सरहद

रचनाकार।  रीता चटर्जी
स्थान खोंगापानी कोरिया
छत्तीसगढ़
विषय  स‌रहदें

शब्दों की माला से तुझे सम्मान अर्पण करती हूं,
ऐऐ मेरे भारत के वीर अश्रुओं से लेखन करती हूं।
सरहदों पर डटे हुए हो बन देश का प्रहरी तुम
गोलियों की बौछार को सीने में सहने तैयार तुम।
ये सरहदें बना है जाने एक लकीर खींच कर
कुर्बानी के रक्त से ,न मिटा इसकी भूख आज तक।
इंसान को इंसान से जूदा करते ये सरहदें
मन की बंधनों को कभी न तोड़ सकते ये।
कितने ही दर्द सहकर भी सरहदों में तैनात वीर
क्यों समाधान नहीं हो सकता ये प्रश्र है किंचित।
न बने सरहदें भावी पीढ़ी पर है ये 
जिम्मेदारी,
खुले रहे दिलों के दरवाजे, रहे मिलना मिलाना बारी- बारी।

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