Saturday, April 3, 2021

रीता चटर्जी की रचना- इत्र

रचनाकार  रीता चटर्जी
स्थान खोंगापानी ,(कोरिया)
छत्तीसगढ़
दिनांक 3/4/2021
विषय     इत्र

जीवन की बगिया में महकना लाजमी है
खुद पीस कर भी सबको महकाना जरुरी है।
इत्र बन संसार में सुगंध की रस घोलिए
खुद अदृश्य होकर भी तन मन औरों का महकाईए।
इत्र इलाज है मन मस्तिष्क का
चैन देता है मन को
वातावरण में भीनी-भीनी खुशबू से सराबोर करता है सबको।
इत्र बन संसार में सेवा का संदेश दीजिए
खुद को मिटा कर जग को महकाने का पैगाम दीजिए।
कहानी इत्र की है सदियों पुरानी
पर सफर जारी है सदा,
रंग, रूप बदलते रहे पर गुण वहीं विद्यमान यथा।

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